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Transcript of What is Silica Modulus / Silica Ratio ? (In Hindi)

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हेलो दोस्तों नमस्कार आई एम जेके क्वालिटी कंट्रोल फार्मूला सीरीज में आज हम जानेंगे सिलका मॉडलर्स के बारे में इसके पहले वाले वीडियो में हमने देखा एओआई के बारे में उसके बेनिफिट के बारे में देखिए सीमेंट इंडस्ट्री में जो क्वालिटी पैरामीटर्स है वो डेली बेसिस पे आप देखते होंगे आली बेसिस पे सिक्स आवर बेसिस पे हमेशा उसकी एनालिसिस होती रहती है रामस का जिससे कि हमको कंसिस्ट बेसिस पे हमको प्रोडक्ट गुड क्वालिटी का मिले उसमें रिजेक्शन कम हो इसलिए कुछ पैरामीटर होते हैं देखते होंगे कि आप हमेशा उसको एनालिसिस किया जाता उसको चेक किया जाता है तो जैसे हो गया लाइम सशन फैक्टर जैसे हो गया सिलका मॉडल जैसे अलुना मॉडल जैसे परसेंटेज ऑफ लिक्विड कितना हो रहा है सिस्टम में तो इन सभी का आली बेसिस पे चेकिंग चलता रहता है तो इन सभी का मतलब क्या होता है और इसकी वैल्यू का लिमिटिंग रेंज प्रिफरेबल रेंज कितना होना चाहिए इन सभी के बारे में आज हम जानेंगे तो आज सिलका मॉड्यूस देखिए सिलका मॉड्यूस सिंपल सी बात है सिलका मॉडल इट इज रेशियो ऑफ सिलिकॉन ऑक्साइड डिवाइडेड बाय अलमोना ऑक्साइड प्लस fe203 आयरन ऑक्साइड इन दोनों का रेशियो होता है कि मतलब हमारा जो रमिक्स में सिलका ऑक्साइड और एलमिना और आयरन ऑक्साइड इसका एक रेशियो निर्धारण किया गया कि इससे ज्यादा नहीं हो होना चाहिए सिल्का की वैल्यू ऐसा नहीं कि बहुत ज्यादा हो जाए तो वो कोटिंग में दिक्कत करेगा आयरन और एलमिना का क्वांटिटी ऐसा नहीं है कि बहुत ही कम हो जाए या बहुत ही ज्यादा हो जाए तो ऐसा लिक्विड फ्यूज में प्रॉब्लम क्रिएट करेगा तो इन सभी को एक निश्चित अनुपात इन निश्चित रेशियो में रखा जाता है जैसे कि बर्निंग प्रॉपर तरीके से हो पाए जो बर्निंग टेंपरेचर है वो प्रॉपर तरीके से मीट हो जो किल्न के इनसाइड में कोटिंग फॉर्मेशन हो रहा है वो कोटिंग फॉर्म कंसिस्टेंट बेसिस पे एक ही रहे ऐसा तो नहीं उसमें रिंग फॉर्मेशन हो गया या कोटिंग बहुत ही थिक हो गया तो उस कंडीशन में क्या है कि बहुत सारे प्रॉब्लम क्रिएट होते हैं या आप देखते होंगे आपके किल्न में कभी-कभी कोटिंग फॉर्मेशन ही नहीं हो रहा है तो सीधा रिफ्रैक्ट्री डैमेज होने का चांसेस बढ़ जाता है इसलिए कुछ पैरामीटर्स हैं जिनका एक रेंज फिक्स कर दिया गया इस रेंज में कि यहां पर कोटिंग फॉर्मेशन होगा जो लिक्विड फेस इनडायरेक्टली भी बताता है सिल्का मॉडल अस तो सिल्का मॉडल अस इन इन चीजों पे ज्यादा फोकस करता है और बेटर रिजल्ट देता है तो इसमें क्या है कि मान लीजिए कि जो वैल्यू होता है ए2 का नॉर्मली आप देखते होंगे कि 22.5 के रेंज में होता है 23 से 24 इसी के रेंज में रहता है अलमोना ऑक्साइड की वैल्यू है मान लीजिए 6.2 पर है और आयरन ऑक्साइड की वैल्यू है 3.4 पर तो आप जनरली देखते होंगे कि जो सिल्का मॉड्यूस है वो 2.34 पर तक रहता है अ जो का ये इतना मेंटेन किया जाता है इट इज द रिलेशन बिटवीन सॉलिड एंड लिक्विड एंड व्हिच फेवर देयर डिफ्यूजन एंड देयर फोर विल रिड्यूस द टेंपरेचर ऑफ द बर्निंग तो जब भी सॉलिड और लिक्विड का रिएक्शन होगा वो तभी होगा जब रॉ मटेरियल में आयरन होगा फ्लक्सिंग एजेंट आयरन होगा और प्लस एलमिना होगा तो ये एज ए फ्लक्सिंग एजेंट हो गया अब उसका रिएक्शन किससे उस रेशियो में दिया जा रहा है कि उसका भी प्रॉपर तरीके से बॉन्डिंग हो पाए सिलिकॉन ऑक्साइड के साथ में प्रॉपर तरीके से जो बर्निंग टेंपरेचर है वो रिड्यूस हो पाए ऐसा नहीं कि बर्निंग टेंपरेचर ही चला जाए 1600 डिग्री सेल्सियस 1700 डिग्री सेल्सियस तो वो भी कम होना चाहिए तो इसमें सहायक रहता है सिल्का मॉड्यूस है इनडायरेक्टली डायरेक्टली नहीं बोलेंगे इनडायरेक्टली ए भी लिक्विड फेज के परसेंटेज का मेजरमेंट होता है अगर सिल्का मॉड्यूस की वैल्यू एप्रोक्सीमेटली 2 के एप्रोक्सीमेटली है तो देखिए नॉर्मली क्या होता है जो प्रिफरेबल रेंज होता है सिल्का मॉड्यूस का वो 2.5 के एप्रोक्सीमेटली होता है तो मतलब अभी क्या सिलका मॉड्यूस हमारा टू हो रहा है मतलब कम हो रहा है इसका मतलब कि जो आयरन और एलमिना ऑक्साइड की वैल्यू है वो ज्यादा हो रहा है ए2 के रेशियो के हिसाब से अगर हमारा जो प्रिफरेबल रेंज है कि इतना ही आयरन ऑक्साइड होना चाहिए इतना ही अलमोना ऑक्साइड होना चाहिए मान लीजिए कि अलमोना ऑक्साइड है 6.2 पर है आयरन ऑक्साइड है 3.4 पर है तो कहीं ना कहीं इसकी जो वैल्यू है अलमोना और आरन ऑक्साइड की वो ज्यादा है रेकमेंडेड वैल्यू से ज्यादा है तो हमारा जो सिल्का मॉडल है वो कम आ रहा है तो कम आ रहा है मतलब हमारा जो र मिक्स में अलमोना और आयरन की वैल्यू ज्यादा है अगर वो ज्यादा है तो एज ए फ्लक्सिंग ए ज्यादा है जो हमारा बर्निंग टेंपरेचर है वो कम मिलेगा जो बर्निंग है वो प्रॉपर तरीके से होगी जो हमारा क्लिंकराइजेशन स्मूथस है वो इज होगा लेकिन कोटिंग फॉर्मेशन ज्यादा होगा थिक कोटिंग मिलेगा आप देखेंगे कि कोटिंग करीब 500 एएम 600 एए तक जा रहा है तो इसलिए हमको उसको प्रिफरेबल रेंज में लेके जाना रहता है सिल्का मॉड्यूस को वही अगर सिल्का मॉड्यूस मान के चलते हैं कि एप्रोक्सीमेटली थ्री जा रहा है हमारा जो रेंज है वो करीब-करीब 2.4 से लेकर 2.5 तक है अगर वही थ्री जा रहा है इसका मतलब है है कि हमारे रॉक मिक्स में जो अलमोना ऑक्साइड है और आयरन ऑक्साइड की वैल्यू कम है रिकमेंडेशन से अगर आयरन और अलमोना का वैल्यू कम आएगा उस पर्टिकुलर जोन में उस पर्टिकुलर टाइम इसका मतलब है जो कोटिंग फॉर्मेशन है वो उतना मिलेगा नहीं जो लिक्विड फेस है उतना नहीं मिलेगा जो बर्निंग में इजनेस है वो उतना नहीं रहेगा सिंपल लॉजिक है अगर कोटिंग फॉर्मेशन नहीं होगा तो सिंपल सी बात है सीधा जो बर्नर का हीट है वो सीधा टकराएगा किससे रिफ्रैक्ट ब्रिक्स से तो ब्रिक्स से रेडिएशन होगा रेडिएशन होगा तो डिस्टर्ब करेगा जो क्लन का आउटलेट सेड का टेंपरेचर बढ़ेगा य कई सारे फैक्टर्स क्रिएट होंगे क्लन का रिफ्रैक्ट्री लाइनिंग भी डैमेज होगा और वहां पर कोटिंग नहीं मिलेगा तो इसलिए हमेशा सिल्का मॉडलर्स को एक प्रिफरेबल रेंज में रखा जाता है तो यह फोटोग्राफ में आप देख सकते हैं कि कितना थिकनेस का इनसाइड में कोटिंग फॉर्मेशन होता है बड़े-बड़े कोटिंग फॉर्मेशन क्रिएट हो जाते हैं फिर आप देखते होंगे कि आपके प्लांट में उस समय प्लांट शटडाउन में होता है शटडाउन में जाएगा प्लांट का स्टॉपेज होगा स्टॉपेज होगा फिर जहां कोटिंग फॉर्मेशन हुआ उस कोटिंग का हमेशा एनालिसिस किया जाएगा कि उसका सिलका मॉड्यूस कितना है लमना मॉडल अस कितना है उस पर्टिकुलर जोन में तो पता चलेगा कि हमारा जो यहां इस पर्टिकुलर जोनन में सिल्का मॉडल अस की वैल्यू तो एप्रोक्सीमेटली टू जा रहा है कम हो रहा है कोटिंग ज्यादा है एल का मॉड्यूस ज्यादा है मतलब कोटिंग नहीं है तो इन सभी का एनालिसिस जो होता है वो पर्टिकुलर जोन में तब किया जाता है तो सिलका मॉड्यूस दिस इज रेशियो ऑफ सिलिकॉन ऑक्साइड डिवाइडेड बाय al2 o3 + fe2 o3 मतलब s डिवा बा ए ऐसे शॉर्ट फॉर्म बोलते हैं s डिवा बा a + f इसका शॉर्ट फॉर्म है तो इसका जो लिमिटिंग रेंज है वह एप्रोक्सीमेटली जो रमिक्स में है 2 से 2.5 रहता है जो क्लिंकर में है 1.9 से लेकर 3.2 रहता है वही जो प्रिफरेबल रेंज है रमिक्स में वह 2.0 से लेकर 2.2 रहता है वही जो क्लिंकर में है 2 से लेक 2.4 रहता है जो इसका टिपिकल रेंज है 2.1 से 2.7 रहेगा अब देखिए क्या है कि मेन यह इंपॉर्टेंट पैरामीटर है कि हमारा जो सिलका मॉड्यूस है अगर वह हाई है हाई है एट द सेंस 2.5 2.4 एक एवरेज होगा इतना होना चाहिए अगर वो 2.7 है 2.8 है 2.9 है तो उससे क्या-क्या इफेक्ट होने वाले हैं उससे क्या है कि हमारे हार्ड बर्निंग होगा सिंपल सी बात है कि वहां पर वहां पर जो एलमुनियम ऑक्साइड की वैल्यू है और आरएन ऑक्साइड की वैल्यू है वो थोड़ा सा रेकमेंडेड वैल्यू से कम है तो कम रहेगा तो सिंपल सी बात है लिक्विड फेज क्रिएट नहीं होगा फ्लक्सिंग एजेंट का काम उतना रिड्यूस होगा तो हमको हाई फल कंजमेटिंग है वहां पर डिफिकल्ट कोटिंग रहेगी कोटिंग का फॉर्मेशन नहीं होगा कोटिंग का फॉर्मेशन नहीं होगा तो रेडिएशन होगा और जो किल लाइनिंग है वो डैमेज होगा और इससे क्या है कि c2s और c3s की वैल्यू भी ड्रेस्ट किली रिड्यूस होगी सिंपल ज लिक्विड फेज मतलब जो हमारा बर्निंग टेंपरेचर है वो बढ़ेगा तो c2s और जो सी 3स की वैल्यू है वो घटेगा जो रेडिएशन है सेल का वो हाई हो जाएगा और कॉज अं साउंडनेस ऑफ सीमेंट और सीमेंट में देखेंगे कि जब सीमेंट बना तो उसमें एक एक रेंज होता कि इससे ज्यादा एक्सपेंशन नहीं होना चाहिए तो यहां पर एक्सपेंशन होगा तो वो सीमेंट आफ्टर यूज वो क्रैकिंग फॉर्मेशन उसमें होने का चांसेस बढ़ जाते हैं और इसमें हाई फ्री लाइम भी रहेगा जो फ्री लाइम की वैल्यू है 1.5 पर से ज्यादा नहीं होना चाहिए तो आप देखेंगे इसमें फीलम की वैल्यू 1.8 1.9 तक जाता है और रिजल्ट इन लो सेटिंग एंड हार्ड निंग ऑफ द सीमेंट अगर वही जो सिलिका मॉड्यूस की वैल्यू कम है मतलब 2.1 2 है 2.3 की रेंज में है कम साइड में जाएगा तो वह लिक्विड फेस को इंक्रीज करेगा इसका मतलब है एलमिना और आयरन ऑक्साइड की वैल्यू रिकमेंडेबल ऑफ द क्लिंकर ंड फॉर्मेशन ऑफ द कोटिंग कोटिंग थिक बनेगा उस कंडीशन में अगर सिलका मडल वैल्यू की कम है अ विटर ग्राउन मेट्री एंड लेस डस्ट जो फ्री लाइम है उसकी वैल्यू घटेगी 1.5 होना चाहिए यहां पर आप देखेंगे 8.9 तक जो फ्री लाइम की वैल्यू मिलेगा और कलर की एफिशिएंसी नो डाउट बढ़ेगा लेकिन क्लिंकर में जो बड़े-बड़े न्यूडल्स फॉर्मेशन क्रिएट होने के चांसेस बढ़ जाएंगे बड़े-बड़े बोल्ड्स बढ़ेंगे एक गोल्डन रूल है कि अगर मान लीजिए हमारा ऑन एन एवरेज स्टैंडर्ड जो डेविएशन है ज्यादा नहीं है लेस दन पॉइंट 03 ही है सिल्का मॉड्यूस के केस में लेकिन आप पर्टिकुलर टाइम पे आप देखते हैं कि जो सिल्का मॉड्यूस की वैल्यू है अगर वो पॉव भी इंक्रीज करता है नॉर्मली आपका प्लांट में 2.3 जा रहा है और सडन आप देखेंगे किसी दिन हमारा जो सिल्का मॉड्यूस की वैल्यू है वो 2.4 हो गया मतलब व इंक्रीज किया तो उस समय आप देखेंगे जो हीट कंजमेट 18 किलो कैलोरी पर केजी आपके लिंकर बढ़ जाएगा और जो फीड रेट है वह भी 2 टू 3 पर आपका बढ़ जाएगा तो यह सिंपल सा जस्ट समझने के लिए कि % जो वेरिएशन है सिल्का मॉड्यूस का कितना ज्यादा इंपैक्ट देता है आशा करते हैं आज आपको अच्छी खासी जानकारी हासिल हुई होगी नेक्स्ट वीडियो में हम जानेंगे अलमोना मॉडल लेस के बारे में वीडियो देखने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद हेलो दोस्तों नमस्कार आई एम जेके देखिए एक चीज मैं आपको बताना चाह रहा हूं अगर आपको अपने प्रोफ ल लाइफ में आगे बढ़ना है तो आपके पास में एक कोच होना बहुत ही जरूरी है जो आपको हर क्षेत्र में बता पाए आपके प्रोफेशनल लाइफ के बारे में बता पाए प्लांट के रिलायबिलिटी के बारे में बता पाए प्लांट के ऑपरेशन मेंटेनेंस के बारे में बता पाए अगर आप मैनेजर बनना चाह रहे हैं तो उसके लिए क्या स्किल होना जरूरी है उसके बारे में पता चल पाए लीडरशिप हायर पोस्ट प जाना चाह रहे हैं तो उसके बारे में अच्छी खासी जानकारी आपको कहां मिलेगा इसलिए आपके पास में एक कोच होना बहुत ही जरूरी है इसलिए सीमेंट पीडीएम ऐप एक ऐसा प्लेटफार्म है जहां पर आपको इंडस्ट्रियल नॉलेज प्रोफेशनल नॉलेज सॉफ्ट स्किल प्लांट ऑपरेशन मेंटेनेंस के बारे में अच्छी खासी जानकारी मिलेगी वो भी प्रैक्टिकल और थ्योर किस बात का तुरंत आप सीमेंट पीडीएम ऐप डाउनलोड कीजिए और अपने प्रोफेशनल लाइफ को इनलाइट मेंट कीजिए बहुत-बहुत धन्यवाद

What is Silica Modulus / Silica Ratio ? (In Hindi)

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