Transcript of Awaken Your Soul Power & Journey Towards Spirituality । Soul Family & Karmic Cycle । Kamlesh D Patel
Video Transcript:
[संगीत] आपको क्या लगता है कि यह सब हमारा प्रारब्ध ही होता है कि हम किस गुरु से टकराएंगे किससे दीक्षित होंगे किस आध्यात्मिक मार्ग किस विचारधारा से जुड़ेंगे क्या हम कभी जुड़ भी पाएंगे यस एंड नो हाउ और नो हां इसलिए कि कई चीजें ऐसी होती है यदि हम इंटरफेयर नहीं होंगे तो हमारे पूर्व कर्म के आधारित ही होएगा तो यह प्राण आहुति क्या है क्या यह कोई एक तकनीक है या किसी गुरु ने इजाद की है क्या है यह यान का मतलब है वाहन या व्हीकल वाहन जो मुझे अल्टीमेट विस्तम तक ले जा सके उस प्रोसेस को या उस व्हीकल को ध्यान कहते हैं और किसी भी व्हीकल को आगे पहुंचाने के लिए ऊर्जा चाहिए और वो ऊर्जा है प्राणाहुति राजू आजकल एक शब्द बहुत वायरल हो रहा है सोलमेट और आपके सोल कनेक्शंस आपके सोल फैमिली ये शब्द आजकल बहुत वायरल है लुकिंग फॉर सोलमेट आजकल ह्यूमन बीइंग की इतनी कैपेसिटी नहीं है कि वो पहचान लेवे यदि पहचान भी लेवे तो स्वार्थ के कारण पहचानेंगे वो उनको लिखेंगे मैसेज भेजेंगे यू आर माय सोलमेट बट इट इज ओनली टू ट्रैप [संगीत] नमस्कार भारत स्वागत है आप सभी का स्पीकिंग श्री के सबसे खास शो कनेक्ट विद अंतःकरण में आप सोच रहे होंगे ईला जी कहां चली गई थी कहां गया था यह शो तो देखिए यह शो ना यह जो कनेक्ट विद अंतःकरण है यह खास शो उन खास लोगों के लिए है जिनसे हम असली आध्यात्मिकता को समझते हैं जिनसे हम लाइफ के वो लेसंस लेते हैं जो बहुत जरूरी है खास करके इस दौर में जब इतना केओस मचा हुआ है इतने तरीके का ज्ञान सोशल मीडिया पे वायरल हो रहा है हर दिन हर क्षण तो ऐसे में हमने सोचा कि क्यों ना अंतःकरण के जरिए कुछ गुरुओं को फिर से आपसे जोड़ा जाए ताकि आप तक बिल्कुल ऑथेंटिक ज्ञान पहुंचा जाए तो आज जिस विषय पर हमने बात करी है वो ध्यान से शुरू हुई है हमारे इस पॉडकास्ट की जर्नी और सोल जर्नी सोल मेट्स और फिर वापस ध्यान कैसे जीवन में आएगा यहां पे खत्म हुआ है देखिए मैं इसको बहुत रोचक पॉडकास्ट से ज्यादा कहूंगी कि बहुत एनलाइटनिंग पॉडकास्ट है और मैं आप सभी को दावा भी कर सकती हूं कि अगर आपने पूरी शिद्दत के साथ पूरी अपनी मेहनत के साथ और बिना किसी अपनी अवेयरनेस को इधर उधर उधर लगाए हुए यह पूरा पॉडकास्ट सुन लिया ना तो कुछ तो बदलेगा यहां क्योंकि हमने माइंडफुलनेस की भी बात करी है हमने हार्टफुलनेस की भी बात कर दी है और हार्टफुलनेस कहां से शुरू होती है यहीं से शुरू होती है ना हमने उस शक्तिपात जिसको प्राण आहुति के नाम से हमारे यह गुरु बताते हैं उसके बारे में भी बात करी है जो आपका जीवन बदल सकती है तो ये प्राण आहुति क्या है कैसे आपके लाइफ में शामिल हो सकती है क्या कुछ बदलेगा आपके जीवन में आज के पडकास्ट में आज के अंतःकरण में हम यही जानने की कोशिश कर रहे हैं मेरे जो आज के मेहमान हैं वह किसी परिचय का मोहताज नहीं है वर्ल्ड लेवल पे उनकी मेडिटेशन को सब लोग जानते हैं मैं बात कर रही हूं रनाउंड स्पिरिचुअल मास्टर दाजी का जी हां प्यार से उनको लोग दाजी कहते हैं उनका नाम है कमलेश डी पटेल दाजी आपका बहुत-बहुत स्वागत है कनेक्ट विद अंतःकरण में नमस्कार इला जी थैंक यू फॉर हैविंग मी आते हैं दाजी आज पहली बार स्पीकिंग ट्री की जनता ना सिर्फ आपसे जुड़ेगी बल्कि मैं दावे के साथ कह सकती हूं कि बहुत कुछ सीख कर जाएगी जो आज के हमारे विषय हैं वो मैंने रखे भी इसीलिए हैं कि सिर्फ नॉलेज या एंटरटेनमेंट के लिए पडकास्ट को लोग ना सुने उनकी लाइफ में कुछ बदलाव आना चाहिए क्योंकि अगर बदलाव नहीं आ रहा है तो कंटेंट तो हर जगह मौजूद है हर जगह जाकर आप सुन सकते हैं और मैं दावे के साथ कह सकती हूं दाजी कि आज हमारी बातें सुनने के बाद आपकी बातें सुनने के बाद बदलाव तो जरूर आएगा चाहे वो भले ही 100 में से एक के जीवन में आए सबसे पहले दाजी मैं आपकी जर्नी के बारे में जानना चाहती हूं कैसे शुरू हुई है ये आध्यात्मिक जर्नी और ये मेडिटेशन की जर्नी ध्यान की जर्नी कब शुरू हुई तो कोई बता नहीं सकता है लेकिन जस्ट जैसे अपना बान है जब से परसेप्शन हुआ है ख्याल है कि बचपन से शुरू हो गया था और जब नौ या 10 साल का था तब मैंने इस राम कृष्ण परमहंस की जो गोस्पल है वो देख के टोटल ट्रांसफॉर्मेशन आ गया अपने अंदर और उसके बाद तो गाड़ी रुकी ही नहीं हमेशा एक तरह की बेचैनी रहती है हृदय में कि जीवन क्या है मकसद क्या है कहां जाना है कैसे प्राप्त करना है लेकिन जितना भी पढ़ो और ज्यादा फ्रस्ट्रेशन होता है बिकॉज़ कोई रास्ता नहीं दिखे कई लोग बोले ध्यान करो लेकिन कैसे ध्यान करें वो कोई बताया नहीं बुक्स में भी नहीं लिखा है मैंने स्वामी विवेकानंद जी की बुक सब पढ़ डाली वहां लिखा नहीं वो ध्यान करते थे लेकिन कैसे करते थे बताया नहीं गीता भी पढ़ी श्री कृष्ण भगवान कहते हैं स्थित प्रज्ञा हालत पैदा करो कैसे पैदा कैसे करो बुद्ध भगवान भी कहते हैं ये हालत पर पहुंच जाओ निर्वाण कैसे करोगे महावीर भी कहते हैं कैवल्य स्टेज सब कबीर साहब भी कहते हैं इट्स लाइक अ रेन ड्रॉप्स बरसात की बूंद जैसे समुंदर में गिरती है समुद्र बन जाता है अच्छी हालत उन्होंने बताई लेकिन कैसे करेंगे तो अपने आप में ध्यान में बैठ जाता था अपनी कॉलेज में पता नहीं चलता लेकिन जस्ट बैठा रहता और एक बार तो मैंने निर्णय कर घर छोड़ के चला जाऊंगा छोड़ भी दिया लेकिन मेरी सन्यास यात्रा बहुत लंबी नहीं रही थी नर्मदा किनारे हमारा घर था तो वहां पर तो बहुत लोग अगोरी बाबा शिव भक्त बहुत आते रहते थे तो उनसे मुलाकात हो गई घर छोड़ दिया मैंने सुबह किसी को बताया नहीं मंदिर जाकर बैठा और एक बुजुर्ग थे उन्होंने शाम को मुझे बुलाया बेटे क्या चाहते हो मैंने बोला आप मेरे गुरु बन जाइए मैं आपकी सेवा करूंगा तो इतने बुजुर्ग की आंखों में आंसू आ गए कि बेटे मैंने तो बड़ी भूल कर दी है अब मैं घर वापस नहीं जा सकता कोई मुझे पहचानेगा भी नहीं यह सब लोग मेरे लिए भीख मांगते हैं जहां मौका मिल गया सो जाते हैं अभी मेरा जीवन एकदम बेकार का हो गया ईश्वर प्राप्ति की तो बात ही छोड़ो शांति भी नहीं मिलती है तू अभी भी मौका है घर चला जाके तेरे को तेरा गुरु ढूंढ लेगा मैंने बोला ठीक है साहब तो घर वापस उसी 12 घंटा से ज्यादा सन्यास नहीं रहा लेकिन ताज्जुब की बात है कि जब मैं हॉस्टल चला फार्मेसी कॉलेज अहमदाबाद में तो वही मंथ जून 1976 मेरा दोस्त बोलता है कि कमलेश देख तू कैसे ध्यान करता है कि आई सी यू ऑलवेज रेस्टलेस बेचैनी में आकर यू आर नेवर सेटल्ड बोला क्या करें यार आता ही नहीं है कोई सिखाया तो ठीक है चलो आई विल टेक यू टू वन लेडी प्रशिक्षक वो आपको ट्रांस में ले जाएगी आपका सवा रिवर्स कर देगी मैंने बोला चलते हैं संडे था चल दिए हमने तो उन्होंने दो-तीन प्रश्न पूछे क्यों ध्यान करना चाहते हो आई वांट टू बिकम लाइक स्वामी विवेकानंद क्या करोगे मैंने बोला अब सब जगह जाऊंगा पूरे देश में प्रतिक्रमण करूंगा तो सन्यास लेना चाहोगे मैं बोला हां जी तो उन्होंने सीधा फाड़ दिया मुझे कि सन्यास जीवन बहुत आध्यात्मिकता के लिए ठीक नहीं है कि तो मैं कंफ्यूज रहा तो बोले देखो भगवान कुछ बेवकूफ नहीं था कि दो सेक्स बनाए एक की जरूरत होती तो दो क्यों बनाते बोला ना ठीक है बात समझ में आती है उसका पपस है फैमिली लाइफ एज अ पर्पस अपने सब अवतार पुरुष की फैमिली थी जितने भी वैदिक काल के ऋषि मुनि हो गए हैं उन सब की फैमिली थी वो समझ में आया और बताया चलो ध्यान करते हैं प्राणाहुति के साथ तो उन्होंने बैठा दिया हृदय पे ख्याल रखो कि अपने हृदय में ईश्वरीय प्रकाश मौजूद है उस पे अपना ख्याल रखो तो जैसे उन्होंने कहा शुरू करो इतने में तो मैं पहुंच गया एकदम फिनिश्ड आई वास जैप्ट आई वास एज इफ बीइंग एंगल्फ बाय सम एनर्जी एक तरह की शक्ति जैसे पूरा शरीर को उठा के किसी कहां ले जाती है मेरे एकदम डिोल्व हो गया पता ही नहीं चला कहां था और जैसे जैसे टवर्ड्स एंड आना शुरू हुआ तब ऐसा लगा कि एक किसी का हाथ हवा में मैं देख रहा हूं गोल्डन ग्लो चेहरा तो नहीं दिखाई दिया लेकिन परसेप्शन हुआ कि ये रामकृष्ण परमहंस का हाथ है और उन्होंने बताया कि यही आपके गुरु हैं और धीरे धीरे धीरे धीरे मेरी अवेयरनेस वापस आने लगी और फिर से एक दूसरा झटका लगा और देन आई वास गॉन अगेन बाद में व्हेन इट वास 30 मिनट्स वर ओवर तो बहन जी ने मिले टैप किया टैप किया और वापस किया वो वो खुद रोने लगे ऐसे कि आपके संस्कार कितने अच्छे हैं कि मुझे भी बड़ी अनुभूति हुई है आज कल मैं आपको हम मुझसे भी अच्छे एक दूसरे प्रशिक्षक उनके पास आप सिंग लेना मैंने बोला ठीक उन्होंने एड्रेस दिया तो ऐसे शुरुआत हो गई मेरी एक लेडी थी शी वाज़ ए हाउस वाइफ शी इज़ नो मोर नाउ अनफॉर्चूनेटली शी पुट मी ऑन दिस ट्रैक बाद में जब वेकेशन हुआ तब हमारे वो बोले कि गुरुजी के पास मिल के आओ तो शाहजहांपुर आया मैं फर्स्ट टाइम आउट ऑफ गुजरात और वो भी यूपी यूपी हां एंड विद विदाउट रिजर्वेशन रोड टिकट बहुत दूर है शाहजापुर तो गुजरात से है हम सो बाद में वहां मिले तो वहां से बाद में पक्का हो गया अपना बंद जर्नी हां दिस इज हाउ इट स्टार्टेड से उस समय मैं फार्मेसी में पढ़ता था एज अ स्टूडेंट तो उस समय एक तरह की महक भी थी और जोश भी था युवानी का तो मेरे सब दोस्त ध्यान करने लग गए और हमारी एक गैंग बन गई मेडिटेड गैंग कई लोग मजाक करते थे लेकिन बहुत लोग को पसंद हो गए लोग एंड उसी वजह से सब प्रोफेसर्स एंड आवर डीन एंड प्रिंसिपल्स दे सेड ओके वाओ वो भी शुरू किए दाजी कभी आपको ऐसा लगा जैसे अभी आपने जो अपना अनुभव बताया कि एकदम से आप ट्रांस में चले गए और उसके बाद एक गोल्डन हाथ आया और आपको लगा कि वो रामकृष्ण परमहंस हैं तो आपको लगा कि वो एक ट्रिगर था यह तो आप बहुत जन्मों से कैरी कर रहे हैं सिर्फ जो आपकी टीचर थी वो जिन्होंने पहली बार आपको इंट्रोड्यूस कराया उस मेडिटेशन की प्रोसेस से वो सिर्फ एक ट्रिगर था अंदर तो आपके अंदर वो जो सोल है वो जो आत्मा है वो तो ये संस्कार बहुत टाइम से कैरी करती है बिकॉज़ यूजुअली हर मेडिटेशन करने वाले व्यक्ति के साथ ये एक्सपीरियंस नहीं होता है लाखों में कोई एक विरला होता है जिसके साथ ये होता है लेकिन ये प्राणाहुति की वजह से हो जाएगा सबको सबको हो जाएगा गारंटेड तो ये प्राण आहुति क्या है क्या यह कोई एक तकनीक है या किसी गुरु ने इजाद की है क्या है ये जैसे मैं फिर समझाऊं फिर से तो ध्यान जो है कई लोग समझ नहीं पाते ध्यान है क्या कई लोग बोलते हैं कि फोकस माइंड या कंसंट्रेशन और एकाग्रित हां लेकिन वो तो रिजल्ट है वो प्रोसेस नहीं है एकाग्रित होना इट्स अ फ्रूट ऑफ एक्शन कर्म फल है लेकिन कर्म कुछ और है ध्यान करना है उनकी फल रूपी हमको एकाग्रता मिलता है ध्यान क्या है ध्यान हम जब इस शब्द को स्प्लिट करते हैं संस्कृत में दी प्लस यान दी हम दो बार गायत्री मंत्र में आता है धीमहि धियो योन प्रचोदयात दी का यहां मतलब है अल्टीमेट विडम यान का मतलब है वाहन या व्हीकल वाहन जो मुझे अल्टीमेट विडम तक ले जा सके उस प्रोसेस को या उस व्हीकल को ध्यान कहते हैं और किसी भी व्हीकल को आगे पहुंचाने के लिए ऊर्जा चाहिए और वो ऊर्जा है प्राणाहुति जैसे हमारे शरीर जो है स्थूल स्थूल शरीर है सूक्ष्म शरीर है और कारण शरीर है स्थूल शरीर के लिए हम अन्न लेते हैं भोजन बैलेंस डाइट मन का विकास के लिए हम इंटरेक्शन करते हैं मनन करते हैं पढ़ाई लिखाई करते हैं बुजुर्गों से सीखते हैं लेकिन जब आत्मा के पोषण करने की बात आती है तो हमारे पास जॉब नहीं रहता है कहां से उनका पोषण करें कैसे करें किन उपनिषद के माध्यम से जब हम सोचे तो एक ही रास्ता है जैसे अन्नमय कोष के लिए अन्न लेते हैं मनोमय कोष के लिए मन की वृद्धि करते हैं लाइक वाइज प्राणमय नॉट प्राणमय बट अपना कॉजलल बॉडी सोल के एनरचमेंट के लिए प्राणाहुति चाहिए अकॉर्डिंग टू केनोपनिषद एंड देयर वाज़ ए ऋषि से 72 पीढ़ी दशरथ राजा के पहले जो प्राणूति की शक्ति से लोगों को जागृत रखते थे लेकिन उन्होंने किसी को दिखाया नहीं सिखाया नहीं तो वो विद्या चली गई अंटिल 1873 व्हेन रामचंद्र जी इन फतेहगढ़ ही रीइन्वेंटेड दिस एट द एज ऑफ़ एट एंड ही सेड वि दिस टेक्निक आई कैन चेंज ह्यूमन बिहेवियर उनको उनकी चेतना को जागृत करना उनके आत्मा को आगे पहुंचाने के लिए प्राणाहुति बहुत मिरेकुलस काम कर सकती है तो उन्होंने शुरू किया काम बचपन से ही और बहुत लोगों को जागृत किया और वो जाने से पहले उन्होंने बहुत लोगों को सिखाया भी कि कैसे और लोगों को भी हम कर सकते हैं और उनके बाद उनका जो सक्सेसर हुआ अनदर कोइंसिडेंटली सिमिलर नेम रामचंद्रा ऑफ शाजहानपुर एंड देन ही स्टार्टेड मेकिंग ट्रेनर्स वर्ल्ड वाइड सो दैट पीपल डोंट हैव टू डिपेंड ऑन वन गुरु एंड देन ही स्टार्टेड दिस ब्रह्मविद्या थ्रू प्राणावृति एंड देन दिस इज़ अ ट्रेडिशन दैट कंटिन्यूस ऑफ़ अ लिविंग मास्टर्स हु कैन बी देयर टू ट्रेड अदर्स एंड दे कैन कंटिन्यू टू ट्रेन मिलियंस ऑफ पीपल थ्रू दिस प्राणा ओनली वन कंडीशन तो क्या क्या है कि विलिंगनेस ऑफ अ पर्सन और दूसरा है कि ये जो ब्रह्म विद्या हम सिखाते हैं लोगों को तो इट शुड बी फ्री वो बोलते थे कि ब्रह्म विद्या अपनी जो कल्चर है इंडियन कल्चर कोई भी ब्रह्म विद्या उसमें कोई चार्ज नहीं लगाया जा सकता है मतलब व्यापार हो जाएगा कि और उनका आर्गुमेंट भी ठीक था वो बोलते कि फॉर गॉड रियलाइजेशन इफ इफ यू वांट टू पे हाउ मच विल यू पे एंड इफ यू कैन पे व्हाई वुड यू नीड गॉड रियलाइजेशन मैं तो नहीं पे करूंगी यह मेरा अपनी सोच है सो इट हैज़ टू बी फॉर फ्री यू कैन नॉट टैग अ प्राइस एंड से फॉर वन सेशन सो मच इंट्रोडक्टरी सेशन सो मच यू नो सो रन अवे फ्रॉम सच गुरुज दैट्स अ फर्स्ट टेस्ट व्हाट इज इन इट फॉर मी एंड व्हाट इज इन इट फॉर हिम इज इज अ बिजनेस ट्रांजक्शन इफ इट इज देन दिस इज नॉट स्पिरिचुअलिटी जैसे मैं बार-बार कहता हूं कि योगी लोग आजकल उद्योगी बन गए हैं उनसे भागो दैट्स अ फर्स्ट टेस्ट ऑफ अ रियल गुरु बिल्कुल दाजी क्या स्पिरिचुअल अवेकनिंग को आजकल ये शब्द बहुत ट्रेंडिंग है सोशल मीडिया पर तो क्या स्पिरिचुअल अवेकनिंग इसी प्राण उहुति के बाद होती है या स्पिरिचुअल अवेकनिंग किसी की भी हो सकती है व्हाट इज स्पिरिचुअल अवेकनिंग दिस स्पिरिचुअल अवेकनिंग इट्स जस्ट इवोलशनरी प्रोसेस जागृतता धीरे धीरे धीरे धीरे धीरे धीरे धीरे हम आगे बढ़ते हैं जितनी हमारे में प्यूरिटी सादगी एवं पवित्रता हमारे हृदय में आती रहेगी टू दैट एक्सटेंट जागृतता बढ़ती जाएगी चेतना बढ़ती जाएगी एकदम सपोज इफ यू आर गिवन अ डोज़ ऑफ कंप्लीट पस्ट कॉन्शियसनेस आप उसको सहन नहीं कर पाओगे आप खुद को भी पहचान नहीं पाओगे कि आईने में कौन है या मैं कौन हूं यू विल बी डिसओरिएंटेड सो दिस ट्रांसफॉर्मेशन जो है स्लोली स्लोली टू द एक्सटेंट वी कैन टोलरेट आवर चेंज इतना होता है जितनी अपनी टॉलरेंस कैपेसिटी बढ़ेगी इतना इतना हम आगे बढ़ेंगे सी सुबह का ध्यान करना है उससे हम सुपर कॉन्शियसनेस के साथ जुड़ जाते हैं प्राणाहुति की वजह से और दीक्षा के बाद इतनी हम में कैपेसिटी आ जाती यह है कि हम खुद के जो संस्कार बने हैं ड्यूरिंग डे टाइम कुछ करते हैं काम या कुछ सोचते हैं या कुछ नहीं करते हैं कुछ सोचते भी नहीं लेकिन एनवायरनमेंट की इफेक्ट पड़ जाती है एक्सटर्नल फैक्टर्स बहुत सारे बहुत आते हैं पीियर प्रेशर्स हम करना नहीं है फिर भी लोग को देख के सपोज मूवी देखने जा रहे हैं कपल इज देयर आइदर दे आर फाइटिंग और मेकिंग लव एंड इट कैन नॉट एस्केप दैट इंप्रेशन सो इट अफेक्ट्स आवर कॉन्शियसनेस सो शाम को हम ये प्रक्रिया से जो इंपेशंस या संस्कार जो हम कलेक्ट करते हैं उसको निकालने की कोशिश करते हैं तो हर दिन सुबह ध्यान शाम की सफाई और रात को सोने से पहले वी ऑफर प्रेयर नॉट लाइक ए मंत्र वी यूज द प्रेयर वंस और ट्वाइस इन द हेड उस पर हम उसका गहन मतलब क्या है उसका अर्थ क्या है वो निकालते हैं और उस पर धीरे धीरे धीरे धीरे मनन करते करते सो जाते हैं तो सबकॉन्शियसली आल्सो हम उनसे जुड़े रहते हैं ऐसे ईश्वरीय करंट के साथ जुड़े रहते हैं पूरी रात भर नींद में है लेकिन सबकॉन्शियस माइंड इज ऑलवेज सेवरिंग दैट डिवििनिटी विद इन तो योग नींद्रा से भी आगे बढ़ जाते हैं और सुबह जब उठते हैं और फिर से ध्यान करते हैं तो अगेन इट्स अ 24 से साइकिल चलता रहता है तो नींद को भी जो हम यूजुअली उसका एडवांटेज नहीं ले पाते हैं अभी नींद का भी हम एडवांटेज लेना शुरू किया सो द होल प्रोसेस बिकम प्रोडक्टिव फॉर यू जी गुरु जी बार-बार एक शब्द जबभी भी हम आध्यात्मिकता के बारे में बात करते हैं जब भी हम स्पिरिचुअलिटी में जाते हैं तो कॉन्शियसनेस चेतना एक शब्द आता है कई लोग अलग-अलग तरीके से कॉन्शियसनेस को परिभाषित करते हैं कॉन्शियसनेस आखिर क्या है किस फॉर्म में है कहां है कैसे हम जान सकते हैं कि इस वक्त मेरी कॉन्शियसनेस किस लेवल की है बहुत निचले तल पर है या बहुत ऊंचे तल पर है इसका डिनिटी के साथ क्या संबंध है कॉन्शियसनेस की परिभाषा देखी जाए तो इंग्लिश में मैं बताऊंगा कि इट्स अ डिग्री ऑफ परसेप्शन डिग्री ऑफ़ परसेप्शन सिंपली डिफाइंड लाइक योर एबिलिटी टू पर्स थिंग्स डिफरेंट फ्रॉम योर चाइल्ड ओके ही आल्सो पर्स टू सम एक्सटेंट यस ही कैन नॉट इंटरप्रेट दैट इज बिकॉज़ ऑफ द एज योर हस्बैंड ह परसेप्टिव एबिलिटीज मे मैच मे नॉट मैच विद योर परसेप्टिव एबिलिटी सो एवरीवन हैज़ अ डिफरेंट स्पेक्ट्रम टू टैप इनू डिपेंडिंग अपॉन वेयर देयर एवोल्यूशन इज समझ गई तो मैं कितना अनुभूति कर सकता हूं कितना जल्द से जल्द पर्सव कर सकता हूं लेकिन वो भी काफी नहीं है एबिलिटी टू पर्सव इट्स नॉट इनफ सपोज योर हस्बैंड नोटिस यू हैव अ हेडेक जी कॉन्शियस तो है उनकी चेतना भी जान गई कि इलाकी हेडेक है अभी इफ ही इज़ वाइजर फुल ऑफ़ विज़डम तनिल से क्या करूं मैं अब नेक्स्ट स्टेप नेक्स्ट स्टेप के बारे में सोचेगा दवाई दूं या उसका मसाज योर हेड रिलीव द ट्राई टू रिलीव योर हेडेक इफ दैट नेक्स्ट स्टेप इज मिसिंग देन अवेयरनेस इज ऑफ नो यूज़ है ना सो इट्स अ कंप्लीट पिक्चर अवेयरनेस विद एप्रोप्रियट रिस्पांस कई लोगों को अवेयरनेस के बारे में पता है लेकिन रिस्पांस नहीं है आगे क्या करना है पता नहीं है ऑल पॉलिटिशियंस ऑल प्रिस्ट्स ऑल प्रोफेसर्स एंटायर नेशन टुडे स्पेशली व्हेन यू टॉक ऑफ इंडिया और अदर नेशंस आल्सो अवेयरनेस इज देयर बट व्हाट इज द नेक्स्ट स्टेप करप्शन इज देयर प्रोग्रेस इज देयर हाउ टू प्रोग्रेस टू अ नेक्स्ट लेवल ए करप्शन दैट यू नोटिस आर यू डूइंग एनीथिंग अबाउट इट इज देयर अ वे आउट ऑफ इट देन दिस एबिलिटी टू पर्सव विदाउट द नेक्स्ट स्टेप इज यूज़लेस इनफैक्ट ये जो अवेयरनेस बन जाती है वो आपको दुखदाई बन जाएगा है ना सपोज़ कृष्ण भगवान होते हैं अभी उनको तो अवेयरनेस है ही है जब देखते हैं कि कैसे लोग आजकल पूजा कर रहे हैं खुश होंगे क्या वो दुखी होएंगे कि लोग कैसे पूजा करते हैं सब धंग है जब मैं कहता हूं कि मैं आपके अंदर बसा हूं कहां-कहां लोग ढूंढते हैं इफ यू सी द चैप्टर 10 श्लोका 20 ही से आई डल इन एव्री हार्ट विभूति योग की बात कर रहे हैं आप आई डल इन एव्री हार्ट आप उपवेद उपनिषद पढ़ोगे हम मोर देन 250 टाइम्स हृदय का शब्द का यूज किया है मैं आपके सब ऑडियंस योर फैंस इला फैंस ऑन स्पीकिंग ट्री दे कैन एनालाइज कि वेद एंड उपनिषद्स अपने जितने भी होली स्क्रिप्चर्स है पुराणाज़ है गीता है देखो कितनी बार मंदिर का मेंशन किया है अब तो Google भी कर सकते हैं हाउ मेनी टाइम्स दिस वर्ड मंदिर इज डिस्क्राइब इन वेदास फाइंड आउट बिल्कुल आपको एक टास्क मिल गया है आप जाइए और फाइंड आउट करके हमें कमेंट बॉक्स में बताइएगा और एक और रिक्वेस्ट कभी कर सकती हो जी कार्बन डेटिंग कार्बन डेटिंग से क्या होता है कि यू नो द एज ऑफ एनी स्ट्रक्चर और ए ट्री कार्बन डेट करो ओल्डेस्ट टेंपल इन इंडिया फाइंड आउट वि वन एंड हाउ फार डस इट गो कब शुरुआत हुई इनकी वैदकालीन में मंदिर थे या नहीं प्रश्न पूछो उसे जवाब मिलेगा उसे हिंट्स भी मिलेगी अब हम कहां है हमारे बुजुर्ग कहां थे दाजी जिस चेतना की मैं बात कर रही हूं अगर मैं इसको मेटाफिजिकल स्पिरिचुअल वर्ल्ड में ले जाकर बात करूं तो बहुत सारे ऐसे लोग हैं जिनको इस मेटाफिजिकल वर्ल्ड के इस स्पिरिचुअल वर्ल्ड के अनुभव नहीं होते हैं क्या उनकी कॉन्शियसनेस नहीं है या चेतना का स्तर बहुत डाउन है कि वो अवेयरनेस ही नहीं है कि कुछ हो रहा है अनुभूतियों की बात कर रही हूं मैं जरूर जरूर देखो कॉन्शियसनेस इट कैन बी डायरेक्टेड आइदर आउटसाइड और इनसाइड आइदर इट इज एक्सट्रोवर्ट टुवर्ड द वर्ल्ड जी और इनवर्ड अंतर्यामी की ओर अंतर्मुखी हो जाना आइडियल सिचुएशन इज बोथ राइट राइट बिकॉज़ हमें इस दुनिया में भी रहना है सही बात है दुनिया छोड़ दो मटेरियल वर्ल्ड जो है और हमारा भौतिक जीवन है और आध्यात्मिक जीवन दोनों का समन्वय होना ऐसे चेतना यदि हमारी बाहर की चीजों की ओर जाएगी कुछ गलत तो है नहीं अंदर भी जाएगी बट एट दैट टाइम हमारा परसेप्शन बदल जाएगा दोनों में जब हम जैसे कृष्ण भगवान कहते हैं कि कोई भी काम करो आप लेकिन यदि उसमें प्रेम नहीं है तो वो कर्म श्रम बन जाता है यस जो भी कर्म करते हैं उसमें हम ईश्वर की प्रसादी समझ के काम करेंगे तो उसके संस्कार नहीं बनते हैं यदि संस्कार नहीं बनेंगे तो उसकी इंप्रेशन नहीं पड़ेगी ना इट विल बी लाइक एक्सजेक्टली लाइक लोटस लीफ कमल का जो पत्ता है गंदगी में रहते हुए भी उसकी असर नहीं पड़ती है ऐसी हालत हो जाएगी तो इट्स अ टेक्निक दैट वी मास्टर स्लोली एंड स्लोली बाय फोकसिंग और व्हाइल कीपिंग माय अटेंशन इनवर्ड टवर्ड्स अंतर्यामी एंड परफॉर्म माय डेली एक्टिविटीज बहुत आसान है जैसे मैं एग्जांपल देता हूं जब अभी तो आपका बेटा 14 मंथ्स का है लेकिन जब थोड़ा बड़ा होएगा 3 साल ढाई साल तीन साल का आप उनकी साइकिल चलाओगे वो गिर भी जाएगा ट्रेनिंग व्हील रखा है फिर भी गिरेगा बाद में ट्रेनिंग व्हील निकाल लोगे मास्टरफुली वह चलाएगा बाद में थोड़ा बड़ा होएगा हाथ छोड़ के भी चलाएगा गाना गातेगाते अपने दोस्तों के साथ स्कूल पर भी जाएगा लेकिन उनके पैडल तो काम करते हैं शुरुआत में पता चलता है कि मेरे पैडल काम करते हैं मम्मी मम्मी देखो मैं पैडल चला रहा हूं बड़ा होएगा तो बोलेगा नहीं मम्मी मैं पैडल चला रहा हूं उसका भान नहीं होता है उस समय जरूरी भी नहीं है राइट तो लाइक वाइज जब हम अपने मन को तैयार करते हैं टू गो इनवर्ड एट द सेम टाइम डूइंग द वर्ल्डली थिंग्स यू आर पैडलिंग इनसाइड यू गोइंग विदाउट नोइंग दिस एफर्टलेस हो जाता है दैट इज जो आपने अभी बताया मुझे लगता है आज का यूथ वही अप्लाई करना चाहता है कि आप अंतर्मुखी भी हो ऑन द अदर हैंड सेम टाइम पे आप बाहर मुखी भी हो बाहर भी हो क्योंकि अभी क्या हो रहा है ना मेरे पास खुद मेरे व्यूअर्स के पर्सनल सवाल आते हैं कमेंट्स में आते हैं कि इला जी हमें ना बड़े अनुभव हो रहे हैं हम स्पिरिचुअल वर्ल्ड में बहुत अंदर जा रहे हैं हमारी कुंडलिनी जागृत हो रही है चकरा जग रहे हैं लेकिन हम फिर नौकरी करने कैसे जाएं हम पैसा कैसे कमाएं हम करियर ओरिएंटेड कैसे बने तो लोग ना दो चीजों के बीच में कंफ्यूज्ड हो गए उनको लग रहा है अगर यह लाइफ है एक स्पिरिचुअल लाइफ है तो यह मटेरियलिस्टिक लाइफ ये दोनों साथ नहीं चल सकती ये अभी बहुत बड़ा कंफ्यूजन फैला हुआ है लोगों के बीच देखो अपने जो अंडरस्टैंडिंग है आध्यात्मिकता का बहुत अधूरा है और गलत भी है लोग बोलते हैं कुंडलिनी जागृत करके बहुत कुछ करेंगे हवा में उड़ेंगे पानी पे चलेंगे चमत्कार दिखाएंगे हां चमत्कार लेकिन आप जब देखते हैं रावण की कुंडलिनी भी जागृत थी राम की भी थी आप रावण बनना चाहोगी तो सीता आप करोगे क्या कुंडलिनी जागृत करके सपोज भगवान आपको बोल दे चलो आपको मैं सब कुछ ताकत देता हूं आपको जो करना है 5 मिनट में कर लो दिस 5 मिनट्स विल डिसाइड हु यू रियली आर सोचो चक्र जो जागृत होते हैं वो ऐसे नहीं जागृत होते हैं लाइक टॉयज टू प्ले विद नो नेचर लॉक रखा है पासवर्ड के साथ आपके पास पासवर्ड होना है तभी खुलेगा नहीं तो नहीं खुलेगा से द की इज ऑलवेज देयर क्या प्राण आहुति वो पासवर्ड बन सकती है नो नो प्राणाहुति विल हेल्प यू अनवेल द पासवर्ड इन सच अ वे कि कोई दरवाजा ही नहीं रहेगा ओके वेल हट जाएगी हट जाएगी हां कोई लॉक भी नहीं रहेगा कि जो आपको खोलना पड़ेगा सब कुछ अपने आप खुल जाता है व्हेन दैट मोमेंट कम्स जैसे हृदय चक्र से हमारी शुरुआत होती है कई लोग पूछते हैं दाजी आप सात चक्र के बारे में क्यों बात नहीं करते मैं बोला सात में से तीन तो प्राणियों में भी है कुत्ते में भी है गधे में भी है बाकी के चार चक्र जो है हृदय से शुरू होते हैं तीन जो लोअर है हम मूलाधार स्वाधिस्थान एंड मणिपुर मणिपुर दे आर देयर इवन इन डॉग्स यस ह्यूमन कंडीशन स्टार्ट्स विद द हार्ट हार्ट हृदय चक्र और उसके अगल-बगल में पांच और है टोटली फाइव मेन चक्रास इन द हार्ट एरिया दे आर ऑल पंचाग्निस पंचभूताज़ और ये अनाहत के आसपास है हां पांच टोटल फाइव इधर इंक्लूडिंग दिस कंत चक्र विशुद्धि विशुद्धि उसके बाद ये जो आज्ञ आता है बाद में मेन है ये है यहां पे सहस्त्रधल कमल है बाद में ब्रह्मरंद्र है ब्रह्मरंद्र के बारे में लोग बात नहीं करते हैं लेकिन बिटवीन ब्रह्मंद्र एंड आग्ञ मोर चक्रास आल्सो देयर इज़ अ सरस्वती चक्र देयर इज़ अ चित्रले देयर इज़ अ फैशन पॉइंट देयर इज़ हनुमान जीस पॉइंट देयर आर सो मेनी चक्रा एंड बियड ब्रह्मंद्रा आल्सो देयर इज़ अ फाइनल गेट द से द सेंटर लेकिन लोग सात चक्र के बाद की कोई बात ही नहीं छेड़ते हैं छेड़ भी नहीं सकते हैं देयर इज अ रीजन कि जो ट्रेडिशनली स्पीकिंग जो सेवंथ चक्र है सहस्त्रदल कमल जब हम योगिक साधना करते करते लकीली वहां पहुंच जाते हैं तो एक बहुत सा आनंद जैसी हालत पैदा हो जाती है बहुत सा आनंद और वहां से निकलने का मन नहीं करता है क्योंकि ऐसा लगता है कि हम पहुंच गए आगे जाती नहीं है गाड़ी बाद में ऐसे इट्स अ ट्रैप इट्स अ ट्रैप दैट्स व्हाई यू आर नॉट एबल टू प्रोग्रेस फर्दर गाड़ी रुक गई है आपकी क्योंकि यू बिगेन टू एंजॉय यू डोमिनेट आई इला वांट्स टू एंजॉय दिस स्टेट आनंद यू आर फोकस्ड विद इन बट टुवर्ड्स योरसेल्फ इज लोअर सेल्फ नाउ देयर इज अ कंपटीशन लॉर्ड वर्सेस माय लोअर सेल्फ व्हाट डू यू वांट लॉर्ड सो देन यू हैव टू फॉरगेट दिस एक्सपीरियंसेस यू हैव टू ट्रांसेंड दैट एक्सपीरियंस यू हैव टू ड्रॉप इट एंड एंड दैट इज रियल सन्यास ड्रॉपिंग इवन द ब्लेसिंग्स और द कंडीशंस ऑफ आनंदमय स्टेट यू हैव टू लेट गो ऑफ इट एटसेट्रा एंड फदर वी गो यू आर नाउ सब योर ईगो टू द फाइनेस्ट लेवल लाइक मीरा लाइक कबीर जीरो ईगो ऑलमोस्ट नॉन एक्सिस्टेंट ओनली ही प्रिवेल्स एंड दैट इज द रियल स्टेट सी मोर ऑफ यू मीन्स लेस ऑफ हिम यस एंड यू नो दिस व्हाई माय गुरुजी गव वनक्रा द नाइंथ चक्र इन बिटवीन फ्रॉम द हार्ट इट इज़ द नाइंथ सो इट इज द 13th फ्रॉम मुरादार दैट ही इन ही गव द नेम हनुमान चक्र इन द ऑनर ऑफ लॉर्ड हनुमान से हनुमान वाज़ नॉट ह रियल नेम ह नेम वाज़ समथिंग एल्स एंड मोर ही वाज़ नॉट अ मंकी आल्सो ऑल दिस वानर्स एंड अस दे वर आइडेंटिफाइड बाय द स्टोरी टेलर्स टू हाईलाइट देर कररेक्टर्स वानर मींस मंकी माइंड एंड दोज़ भक्ताज़ ऑफ़ लॉर्ड रामा दे हैड अ मंकी माइंड सिंगल ट्रैक माइंड टू सर्व द लॉर्ड दैट्स व्हाई द ऑल्टरेशन इन दे कैरेक्टर्स नेम कैरेक्टर बाय द वे ड्रिफ्टिंग अ लिटिल टू एक्सप्लेन व्हाई द नेम्स व चेंज्ड तो ये नाम क्यों बदल गए जो हिस्ट्री लिख रहे हैं कथाकार लोग ने नाम क्यों बदला टू है इसलिए कि उनका कैरेक्टर जो उनका जो जो उनकी रहनी करनी है उससे हम परिचित हो जाए हनुमान का सिंगल ट्रैक माइंड था बंदर जैसा इसलिए उनको बंदर बना दिया दुर्योधन दुष्ट योद्धा लेकिन कौन कौन ऐसी मां होगी ऐसा नाम देगी दुष्ट योद्धा मेरा लड़का बचपन से ही इट इज द वो कंट्रास्ट देने के लिए एक को दुर्योधन बना दिया एक को युधिष्ठिर बना दिया जस्ट टू गिव दे वर ये उनके असल नाम नहीं थे हनुमान वो भी उनका नाम नहीं था ये नाम बाद में पड़ा इतिहासकारों ने बनाया हनु मींस विदाउट मान ईगो जिसके मान अपमान रिस्पेक्ट ईगो कुछ नहीं है वही परम भक्त हो सकता है हनुमान जैसा इनमें कुछ अपनेपन के कुछ भाव ही नहीं है उनमें तो ये नाम ऐसे बनाए गए जिसकी वजह से लोग समझ सके कि हमें भी ऐसे बन बनना है विदाउट मान अपमान रिमूविंग ईगो दाजी एक प्रश्न आ रहा है अभी जो आपने हमारे पौराणिक इतिहास के बारे में बात की वेदव्यास जी ने महाभारत के साथ 18 पुराणों की रचना की तो जब हम गीता की भी बात करते हैं और जो पहले अध्याय का पहला श्लोक देखते हैं धर्मक्षेत्र युद्ध क्षेत्र वहां तो दुर्योधन का भी नाम आ रहा है वहां धृतराष्ट्र का भी नाम आ रहा है तो क्या व्यास जी ने ये नाम बदल दिए मतलब ये थोड़ा मैं समझ नहीं पा रही हूं व्यास कोई इंडिविजुअल आदमी नहीं था उपाधि थी उपाधि थी सो किसने किया क्या पता एक बात समझने जैसी है लेकिन जी विकल बज रहे थे शंखनाद हो रहा था हम महाभारत का युद्ध जस्ट अबाउट टू स्टार्ट शुरू ही होने वाला था अर्जुन रो पड़ा मैं अपने गुरु को कैसे मारूं दादा नाना को दादा जी को कैसे मारूं मैं और मारने के बाद भी यदि मैं जीत भी जाऊं तो क्या क्या फायदा अपनों को ही मार के लड़ाई से उसका मन नहीं करता था कि नहीं करना है ऐसे समय पे क्या 700 श्लोक रिपीट करना पॉसिबल था आप फास्ट स्पीड पे बिना समझे भी आप पढ़ लो तभी दो घंटा निकल जाएगा जहां 5 मिनट का भी टाइम नहीं रहा युद्ध रोकने का तो इज इट पॉसिबल कि ये लोग ने 700 श्लोक एक्सचेंज किए श्री कृष्ण भगवान एक बार हमारे गुरु जी से बात हुई कि उस समय हमारे पास छह या सात श्लोक से ज्यादा बोलने का समय ही नहीं था लेकिन जो मैंने ट्रांसमिट किया जी नॉलेज टू अर्जुन वो विटनेस किया गया था व्यास जी ने विटनेस किया और विटनेस करने के बाद उसको फिर लिखा फिर से लिखा ओके ओके सो द मेन श्लोकाज जस्ट से और एट परहप्स बिफोर विश्वू दर्शन देयर सिक्स और से एंड आफ्टर विश्वूप दर्शन दे थ्री और फोर समथिंग लाइक दैट एंड व्हिच वी हैव मेंटेन दैट दैट डज़ नॉट मीन दैट व्हाट वाज़ ट्रांसमिटेड इज़ यूज़लेस एंटायर गीता इज़ गुड बट वी हैव टू अंडरस्टैंड दिस फैक्ट कि उस समय उनके पास टाइम नहीं था 700 श्लोक बोलने का सो थोड़े ही बोले बाकी का ट्रांसमिट किया था एंड दैट हैपन ओनली बिकॉज़ ऑफ़ दिस प्राणाहुति प्राणाहुति कैन बी ट्रांसमिटेड द स्टेट ऑफ माइंड कैन बी ट्रांसमिटेड द स्टेट ऑफ़ माइंड ऑफ़ समबडी एल्स मनोचेतना जो है उसको हम बदल भी सकते हैं वही प्राणाहुति से कुछ नई चीज़ इनफ्यूज़ भी कर सकते हैं और जो परेशान करती है चीज़ उसको निकाल भी सकते हैं और मैं यह करवा सकती हूं या मेरे कोई भी दर्शक ये प्राण आहुति ले सकते हैं इसकी कोई पात्रता है ट्रेनिंग करनी पड़ती है विलिंगनेस टू सर्व अदर्स ट्रेन तो हार्टफुलनेस वाले लोग कर लेते हैं लेकिन आप इसके ट्रेन बनो ट्रेनर बनो उससे पहले अपनी खुद की साधना तो होनी है ना थोड़े समय तक का साधना करनी पड़ती है बहुत लंबा समय नहीं लगता है आत्मा चक्र तक पहुंच गए हम हृदय चक्र से आत्मा चक्र तक यू बिकम एलिजिबल दाजी इससे पहले जब हम चक्रों की बात कर रहे थे तो आपने अपने गुरु जी का जिक्र किया था कि मूलाधार से लेकर ऊपर हनुमान चक्र तक उन्होंने 13वें चक्र को हनुमान चक्र नाम दिया तो इस चक्र का उपयोग क्या होता है क्या क्या सिग्निफिकेंस है हर चक्र का हम उपयोग के बारे में बात नहीं करते हैं हर चक्र की एक खासियत होती है जैसे ये जो पंचभूत है जी हृदय आत्मचक्र अग्नि चक्र जल चक्र और वायु चक्र व्हिच इज कंथ चक्र क्वालिटी वाइज हार्ट इज ऑल अबाउट कंटेंटमेंट ओके आत्मचक्र इज ऑल अबाउट शांति कामनेस इसलिए हम कई बार बोलते हैं आत्म शांति इसको किसी और के साथ कंपेयर नहीं करते क्योंकि जो शांति की महसूसी होती है अनुभूति होती है बहुत परम होती है उसको कंपैरिजन नहीं कर सकते हैं यहां जो थर्ड चक्र जो है अग्नि के साथ उनका वो है वो क्या बोलते हैं अग्नि एलिमेंट अग्निभूत वहां पे है अग्नि को जनरली हम इमोशन के साथ जोड़ देते हैं एंड इट इज ट्रू देयर हमें क्रोध भी आता है रम भी होता है घृणा भी होती है यह चक्र पे वही हालत हो जाती है यहां पे डर है फियर है हिम्मत है जल चक्र पे और वायु चक्र पे क्लेरिटी ऑफ माइंड क्लियरली आप बोल सकते हैं या नहीं वह सब बर्न यहां होता है तो क्वालिटेटिवली इसका ऑोजिट भी हो सकता है क्योंकि जब तक हम पिंड प्रदेश या हृदय क्षेत्र में रहते हैं तो दो डलिटीज होती है द्वंद भी होता है कंटेंट में वहां डिस्कंटेंटमेंट भी तो होएगा ही शांति जो होती है वहां अशांति भी हो सकती है सो यह डलिटी जब तक रहेगी पंचभूत की जैसे हृदय क्षेत्र में तब तक हम इस दुनिया में फंसे रहेंगे मोमेंट यू हैव अ मास्टर ओवर पंचभूतस और हम ब्रह्मांड में शुरू करते हैं आगे तो टेक इट फॉर ग्रांटेड यू आर लिबेटेड इन दिस लाइफ बिकॉज़ यू हैव मास्टर्ड दिस पंचभूताज़ एंड नाउ यू आर एलिजिबल टू एंटर द ब्रह्मांड देन पर ब्रह्मांड एंड देन आगे चलता रहता है पर ब्रह्मांड के बाद आती है जो हनुमान जी की हालत मैंने बताई वेयर प्रपन्न गति स्टार्ट्स प्रपना मींस एक तरह की शरणागति की भाव आ जाता है इसमें डिफरेंस क्या है शरणागति करना और शरण में हो जाना एक में प्रयत्न है दूसरे में प्रयत्न नहीं है अपने आप हो जाता सहज रूप से हो जाता है ऐसे इसलिए सहज मार्ग में हम कुछ छोड़ते नहीं है हम छूट जाता है अपने आप स्वत हो जाता है और उसके बाद की हालत जो है प्रपन्न के बाद प्रपन्न प्रभु मीनिंग मैं कुछ नहीं हूं और प्रभुत्व दोनों में कंपटीशन रहती है कभी हम यह कभी हम वो और उसके बाद की जो हालत आती है प्रभुत्व ओनली ही रिमेंस यस देन हम बाईपास हो जाते हैं ब्रह्म रंद्र चक्र और सिद्धता यदि आप आपके पास गुरु नहीं होते तो ब्रह्म रंद्र तक पहुंच गई ना तो वहां से ही आत्मा निकल जाएगी आगे नहीं पहुंच पाओगे लेकिन गुरु नोटिसेस के नाउ यू आर अबाउट टू क्रॉस दैट सो ही बाईपासेस ब्रह्मरंद्रा उसको साइड में रख देते हैं और सीधा फाइनल गेट लगा देते हैं सेंटर पे कि जहां और फिर से और तैरना होता है जिसको सेंट्रल रीजन बोलते हैं जहां से श्री कृष्ण और राम वहां से आए थे वो वो प्रदेश से बहुत सुंदर तो वहां हमें एंट्री मिल जाती है धीरे धीरे धीरे धीरे धीरे वह क्षेत्र में हमारी तैराई शुरू हो जाती है ऐसे और उसका कोई अंत नहीं है नो एंड टू दिस स्विमिंग इन दिस रीजन वेरी वास्ट अकॉर्डिंग टू माय गुरु जी द फर्स्ट ऋषि हु स्टार्टेड स्विमिंग ही स्टिल स्विमिंग टुवर्ड्स द सेंटर अभी भी अभी भी इट्स इनफिनिट यदि आप समझते हो ना कि ईश्वरीय ईश्वर असीमित है जी तो दो चीजें बाद में आती है जो असीमित है उसको प्राप्त कैसे करोगे इट्स नेवर नेवर पॉसिबल और असीम सीमित चीजों के लिए हम सीमित प्रयत्न कर सकते हैं असीमित के लिए तो असीमित ही रहेगा प्रयत्न इसीलिए ये जर्नी हमेशा चलती रहती है चलती रहेगी तो मोक्ष फिर कहां से आया दाजी इसमें मोक्ष के बाद जो आत्मा की हालत रहती है अनमैनिफेस्टेड रहती है वो जो आगे के डायमेंशंस हैं वहां पे उनकी प्रोग्रेस होती रहती है अपने आप होती रहती है एंड बिल्कुल लास्ट जो डायमेंशन है जिसको विष्णु लोक बोलते हैं जो ब्रह्मलोक से भी ऊपर बैकुंठ बोलते हैं उससे भी आगे उससे भी आगे है वहां तक कोई आत्मा पहुंच पाती है हां वह बहुत रेयर है विदाउट गुरु यू कैन नॉट मेक इट आप किसी गुरु को जानते हैं जिन जिनको आप जिनका आपके बारे में आपने सुना हो कि वो वहां हमारे गुरु जी ऐसे ऐसे बहुत लोगों को उन्होंने पहुंचाया अच्छा लेकिन वो बोलेंगे नहीं कि मैं पहुंच गया ऐसा नहीं है कि बोलना नहीं चाहते हैं लेकिन बोलने वाला रहता ही नहीं है तो कैसे बोलेगा कबीर की बात सुनो कबीर जी वाज़ इन दैट क्षेत्र हम वो बोले कि बारिश की बूंद समंदर में गिर जाए तो समंदर बन जाता है तो बारिश की बूंद तो रही नहीं वो कैसे बोलेगा कि मैं अब समंदर बन गया और जो बोलता है मैं समंदर बन गया उससे भाग जाओ फेक कॉल है वो फेक कॉल इट्स वेरी इजी टू अंडरस्टैंड बट लोग इतने लोभी है ना उनके पांव पड़ेंगे शायद वो होएंगे चलो क्या जाता है ₹1 लाख दे देते हैं एक करोड़ देते हैं कुछ तो मिलेगा और जितना भी इन्वेस्टमेंट ज्यादा रहेगा तो अपना ईगो भी बढ़ता रहेगा लोगों को बोलेंगे तो यह अंधा श्रद्धा चलता रहता है ऐसे तो दाजी फिर ऐसे लोग तो कभी भी मोक्ष की यात्रा पर चल ही नहीं पाते होंगे नेवर पॉसिबल जो लोगों को अच्छे क्या बोलते हैं चीटिंग करते हैं ना हम और मैं उन लोगों की भी बात कर रही हूं जो अपना ईगो सेटिस्फाई करने के लिए ऐसे लोगों से जुड़ते हैं ऐसे गुरुओं से जुड़ते हैं उनकी भी तो परेशानी होएगी बिकॉज़ यू हैव लॉस्ट योर डिस्क्रिमिनेशन विवेक एक बुद्धि चली गई उसका नाश तो होने ही वाला है लोभ इज आल्सो ए डिजीज जैसे अभी हम गंगा में डुबकी मारने गए इतना आसान है कि आपके पाप मुक्त हो जाओगी लेकिन लोग जाते हैं श्रद्धा हो या ना हो जैसे आज बोलते हैं ना फोमो फोमो एक्सक्टली फियर ऑफ़ मिसिंग आउट मिसिंग आउट है ना तो आज शायद मैं नहीं गया डुबकी मारने नहीं गया तो अब क्या होगा चलो जाके आते हैं घूम के आएंगे प्रयागराज कभी देखा नहीं है तो देख लेंगे डुबकी भी मार लेंगे इतना आसान नहीं है मोक्ष के और मैं तो कॉन्फिडेंस से ही बोलता हूं मैंने पाप ही नहीं किया क्यों नहाने की जरूरत है तो इट आल्सो शोज़ योर गिल्ट कि तुम कितने महापापी हो कि नहाने की जरूरत पड़ गई तुम्हें करना ही बंद करो शुरुआत तो करो अभी नहीं तो दूसरा महाकुंभ 100 प्लस इयर्स के बाद आएगा तब फिर से आना पड़ेगा ना है ना तो तुम्हारा मोक्ष गायब हो गया तो दादी मोक्ष की बात हो रही है तो थोड़ी सी ना मैं सोल जर्नी पे भी बात करना चाहूंगी कि आपको क्या लगता है कि यह सब हमारा प्रारब्ध ही होता है कि हम किस गुरु से टकराएंगे किससे से दीक्षित होंगे किस आध्यात्मिक मार्ग किस विचारधारा से जुड़ेंगे क्या हम कभी जुड़ भी पाएंगे क्या यह सब हमारे बहुत सारे पिछले जन्मों के कर्म का ही एक नतीजा होता है यस एंड नो हाउ और नो हां इसलिए कि कई चीजें ऐसी होती है यदि हम इंटरफेयर नहीं होंगे तो हमारे पूर्व कर्म के आधारित ही होएगा अच्छा हम यदि पूर्व कर्म के इस वजह से सब कुछ होता तो सपोज मेरे पूर्व कर्मों में ऐसा लिखा होता कि मैं डॉक्टर बनने वाला हूं तो ये जेई एग्जाम ही क्यों देता मैं उसके लिए तो पढ़ना तो पड़ेगा ना बिल्कुल दूसरी बात बताता हूं यदि पूर्व कर्म सब कुछ होते हैं कुछ तो होते हैं उसका असर तो जरूर पड़ता है लेकिन यदि पूर्व कर्म से हमारा प्रारब्ध नक्की होता है तो श्री रामचंद्र जी ऑफ अयोध्या और सीता जिनके पूर्व कर्म कुछ भी नहीं थे उनका प्रारब्ध कैसे बना इतने दुखी क्यों हुए किसी ने उनका प्रारब्ध बदल दिया कोई भी बदल सकता है कई कई ने बदल दिया मां ने बदल दिया और बाप का भी इतना घमंड था आई वुड कॉल दशरथ एज अ हैंड पैक हस्बैंड उसने डिमांड की उन्होंने मना लिया प्राण जाए पर वचन नहीं जाए इतना घमंड था उन्होंने में उन्होंने सुन ली और रामायण शुरू हो गया लाइक वाइज महाभारत आल्सो इफ यू हैव टू ब्लेम वन पर्सन देयर आर सो मेनी बट इफ भीष्मा वाज नॉट हेड बेंट ऑन ह वचन तो महाभारत क्यों होता वो सब लोग कहते थे ना कि लीला है रामायण में भी श्री कृष्ण श्री राम ने लीला की लीला इसलिए बोलते हैं क्योंकि उसका कोई और एक्सप्लेनेशन ही नहीं है लेकिन सही सही में देखा जाए तो मुझे तो यही दिखाई देता है दोनों के घमंड के कारण यह सब हो गया तो कोई भी अपना भविष्य बदल सकता है अभी जो अहमदाबाद में फ्लाइट क्रैश हुई क्या सभी के जीवन में कर्म ऐसे थे कि एक साथ मरे नहीं इसी के भूल फ्यू डेज बिफोर वह फ्लाइट दिल्ली से आई थी अहमदाबाद उसमें एयर कंडीशन चलता ही नहीं था पैसेंजर लोगों ने कंप्लेन की नोबडी नोटिस्ड इट एंड सेम फ्लाइट उसमें एसी नहीं चलता था फिर भी वह लंदन के लिए तैयार हो गई सो इट इज समवनस मिस्टेक दैट चेंज द लाइफ्स ऑफ सो मेनी एंड दोज़ हु डिपेंडेंट ऑन देम इमेजिन देयर स्पाउसेस देयर पेरेंट्स देयर चिल्ड्रेंस डेस्टिनी सो देयर इज़ अ रिपल इफेक्ट किसी की सोच की वजह से कहां डिस्ट्रक्शन हो जाता है गाज़ा में देखो इजराइल में देखो अपने यहां देखो पागल लोग आके टेररिस्ट बन जाते हैं तो उनके नसीब में थोड़ी था कि गोली खा ले समवनस ईगो समवनस हेट्रेड और ये सब अपना जीवन बदल सकता है अगर पुराने जन्मों के कर्म ही इतने खराब हैं दाजी कि वो उसी विचारधारा की तरफ आगे बढ़ेगा कि आगे जाकर टेररिस्ट बनेगा आतंकवादी बनेगा तो यहां पे फिर कर्म कैसे चेंज कर सकते हैं प्रारब्ध तो इतना प्रबल है उसका हां लेकिन चेंज करने का मौका भी मिलता है जैसे वाल्मीकि लुटा रहा था सडन चेंज संकल्प कर लिया आपने अभी मुझे बदलना है मेरी दिशा बदलनी है तो बदल जाता है क्योंकि जो लोग इतने पाप कर चुके हैं ना उनका संकल्प भी बहुत गहरा रहता है अच्छा इतने संकल्पों से उन्होंने बुरा काम किया है वही संकल्प पॉजिटिव काम कराएगा उनका संकल्प भी बहुत दृढ़ होता है ये ट्रांसफॉर्मेशन होता कैसे है कैसे हो सकता है निश्चय करो कि मुझे प्राप्त करना ही है वो होके ही रहेगा नॉट आलतू-फालतू बोलते हैं ना कि चलो आज ये वो करना है वो करना है नॉट लाइक दैट इट हैज़ टू बी अ ऑथेंटिक सिंसियर अपील के आज मुझे बदलना है और बदल के ही जाओगे ऐसे ये पैशन होना है लॉन्गिंग होना है बेचैनी होनी है कि इस चीज को प्राप्त किए बिना मैं चैन से जी नहीं सकता तब बदल सकते हैं नहीं तो नहीं हो सकता है ये सब दाजी आजकल एक शब्द बहुत वायरल हो रहा है सोलमेट और आपके सोल कनेक्शंस आपके सोल फैमिली ये शब्द आजकल बहुत वायरल हैं कि हम उन्हीं लोगों को चुनते हैं जिन लोगों से हमारे पास्ट लाइफ के कनेक्शंस होते हैं जिनको हम चुनकर आते हैं कि भाई इस परिवार में मुझे जन्म लेना है या इस व्यक्ति से टकराना है कई लोग ऐसा भी दावा करते हैं कि आज मैं और आप मिल रहे हैं या इतने सारे लोगों से मैं आज मिल रही हूं तो यह कहीं ना कहीं मेरी उस सोल जर्नी का हिस्सा है कि इस समय पे तय नियत पर इस डेट पर मैं मिलूंगी ही मिलूंगी यह होता है या मैं चाहती तो आज नहीं भी आ सकती थी यह मेरा एक्शन है यस और नो अगेन मैं मानता हूं कि जब आत्मा का सृजन हुआ ये दुनिया जो बनी पृथ्वी है ग्रह बने आर्य बने गैलेक्सीस बनी ऐसे उससे पहले तो कुछ नहीं था जब कुछ नहीं होता है नो तारे ना सितारे कुछ भी नहीं पूरा अंधेरा ही था सृष्टि के सजन के बाद यह सब पैदा हुआ यूनिवर्स विश्व ये तो भौतिक यूनिवर्स है लेकिन जब एनर्जी आत्मा के रूप में बही पुरुष आयन प्रकृति वो दोनों का क्रिएशन हुआ तो उसके उसके करंट्स जो डिसेंड हुए हम है ना तो जो दो करंट होते हैं तो ऐसा और जो लेवल एक होता है तो उसको हम सोलमेट बोलते हैं और इसकी एक्टिविटीज और उसकी एक्टिविटीज उसकी वजह से जब कर्म बदलते जाते हैं और एक हैवी हो जाता है एक लाइट पर रहता सोलमेट थे फिर भी मिलने के बाद क्योंकि दोनों बदल चुके अब तो कुछ सिमिलर है कुछ नॉट सिमिलर है तो ये प्रॉब्लम तो रहेगा ही लगता है कि सोलमेट है बट लेकिन बाद में भी प्रॉब्लम हो सकती है क्योंकि आप बदल गए हैं और कोई लोग यहां थे और कोई लोग यहां है अपने कर्मों से अगेन दे कैन मैच या तो यहां वाला यहां पहुंच जाए या यहां वाला यहां सो इट्स अनप्रिड डिक्टेबल आप कैसे बदलोगे किस समय बदलोगे लेकिन यदि मेरे में तड़प है एक गोल है मेरा ईश्वर प्राप्ति का और जो मेरा सोलवेट नहीं है बट उनका भी गोल है ईश्वर प्राप्ति का वो दोनों मेट मैच हो जाते हैं बाद में सो लुकिंग फॉर सोलमेट आजकल ह्यूमन बीइंग की इतनी कैपेसिटी नहीं है कि वह पहचान लेवे यदि पहचान भी लेवे तो स्वार्थ के कारण पहचानेंगे वो उनको लिखेंगे मैसेज भेजेंगे यू आर माय सोलमेट बट इट इज ओनली टू ट्रैप फंसाने के लिए ही ऐसे मैसेज पहुंचाते हैं इतने में खुद कौन है वही पता नहीं तो दूसरा क्या है और बोलेगा कि मैं सोलमेट पे ये तू यह गलत है हम क्या कर सकते हैं अगर हमें पहचानना हो कुछ आप गलत होएगा वहां गारंटेड नो ह्यूमन बीइंग टुडे कैन रिकॉग्नाइज सोलमेट्स खुद को ही नहीं पहचानते हो तो दूसरों को कैसे पहचानोगे अवेकन सोल्स भी नहीं पहचान पाते हैं वै रेयर अवेकन सोल्स को जानने की जरूरत ही नहीं है कि मेरा सोलमेट है या नहीं दे विल एडजस्ट विद एनीथिंग बिकॉज़ लव मेक्स यू एडजस्ट यस लव बिगिंस टू वाइब्रेट विद अदर नॉट द अदर वे अराउंड से दे विल एडजस्ट अवेकन सोल ऑलवेज एडजस्ट चाहे कितना ही दुख मिले उनको कोई कंप्लेन ही नहीं है तो सब कुछ अपना ही लगता है जहां अपनापन रुक गया तो सोलमेट भी भाग जाएगा दाजी आप चमत्कारों में बिलीव करते हैं मेरा बहुत मन था आपसे ये सवाल पूछने का चमत्कार तो होते ही रहते हैं बहुत कुछ होता है कई बार ऐसा लगता है कि हम डेड एंड पे आ गए लेकिन ऐसी हेल्प मिल जाती है हमको वहां से जो फंस गए थे वहां से उठा के ले जाते हैं अच्छी तरह से हमारा निर्भव होता है ऐसे जनरली हम आप तो साइंस के स्टूडेंट रहे हैं दाजे जनरली हम जब भी चमत्कारों की बात करते हैं तो हम उस चमत्कार को चमत्कार मानते हैं जिसको मेडिकल साइंस या साइंस परिभाषित नहीं कर पाता है जैसे कई लोगों को आउट ऑफ बॉडी एक्सपीरियंस होते थे ड्यूरिंग देयर सर्जरी जब उनकी सर्जरी चल रही है बहुत सीवियर हाल है उनको आउट ऑफ बॉडी एक्सपीरियंस हुआ उन्होंने पूरी सर्जरी देखी उन्होंने अपने आप को पाया कि वो बॉडी के ऊपर थे सब कुछ देख रहे थे इस टाइप के जो एक्सपीरियंसेस होते हैं ये किस तरह है हो जाता है ये हो जाता है हो जाता है आउट ऑफ बॉडी एक्सपीर आउट ऑफ बॉडी एक्सपीरियंसेस होते हैं कई लोगों को बोले कि आपको यह बीमारी है और तुरंत अच्छा हो जाता है हां जी हां जी कई बार ऐसा होता है दैट्स अ मिरेकल तो इसको हम नेचुरली या इन अ मॉडर्न साइंटिफिक लैंग्वेज बता नहीं सकते ये कैसे हुआ ताजी आपको कभी हुआ है आउट ऑफ बर्थडे एक्सपीरियंस मैं तो देख रहा हूं दुनिया में बहुत होते हैं सही में कई बार हम प्रार्थना करते हैं काम हो जाता है प्रार्थना ऐसे ही होता है कई बार प्रार्थना करते हैं नहीं होता है लेकिन हमारा फर्ज है प्रार्थना करो किसी पर भी किसी के भी जीवन में हमें कुछ बदलाव लाना है तो प्रार्थना से बढ़िया कोई चीज है ही नहीं कोई लोग मिस बिहेव करते हैं ना हां जी तो उनके लिए भी प्रार्थना करो कि प्रभु उनको सद्बुद्धि दे नो टाइम यू विल सी चेंज कोई बीमार हो गया हो डर गया हो तो हम दो चीज कर सकते हैं आइदर प्रभु आप उनकी बीमारी हटा दो नहीं तो उसकी ऐसी हिम्मत दो कि उसको परेशानी नहीं हो क्योंकि आप जाओगे भी कहां हमें एक डिफरेंशिएट करना है एक ये तो एक जीवन है दूसरा एकिस्टेंस है लाइफ है और एकिस्टेंस है लाइफ का एंड हुआ लेकिन एकिस्टेंस का थोड़ी हुआ वो समझदारी आ जाएगी तो कुछ प्रॉब्लम नहीं है ये लाइफ के बारे में है मरे या ना मरे लेकिन सबसे बड़ा जो मिरेकल मैं समझता हूं वो है फियरलेसनेस अभय हम फियरलेस कोई आपको बना दे इससे बढ़िया कोई गिफ्ट नहीं हो सकती है कुछ भी हो जाए बाद में क्यों आप बदलना चाहोगे कम व्हाट में यू आर नाउ रेडी टू फेस इट एंड जब हम फेस करेंगे तभी हम स्ट्रांग इमर्ज होएंगे कम व्हाट में कोई भी प्रॉब्लम आ जाओ आ जाओ वेलकम द प्रॉब्लम्स दैट विल मेक यू स्ट्रांग बहुत बलवान बनाएगा वो यदि प्रॉब्लम आए और आप भागने की कोशिश करो प्रॉब्लम जाएगा नहीं जाएगा और नहीं जाएगा और दूसरा प्रॉब्लम है आप कुछ सीख भी नहीं पाओगे यदि आप प्रॉब्लम आया और एक्सेप्ट करोगे बहुत कुछ सीखने को मिलेगा आप सीख जाओगे और उसको टैकल कैसे करें वह भी आपको समझ आ जाएगा तो मिरेकल के लिए प्रार्थना पर्सनली मत करो लेकिन आप दूसरों की समस्या को देख के प्रार्थना कर सकते हैं दूसरों के लिए खुद के लिए प्रार्थना करना नहीं चाहिए राजू आखिरी सवाल अगर किसी को इस साइकिल से मुक्त होना हो पुनरप जननम पुनरप मरणम आना ही नहीं है यहां पर तो वो क्या कर सकता है मुझे पता है बहुत बहुत गंभीर सवाल है क्योंकि इसके लिए लॉट्स ऑफ वर्क लॉट्स ऑफ स्पिरिचुअलिटी बहुत सारा ध्यान सब कुछ चाहिए ये भी बेवकूफी है जो जिन्होंने शरणागति ले ली प्रभु की हम उनको किसी भी चीज का डर नहीं है हमें वो वापस भेज दे आने को तैयार है वही तो भेज रहे हैं मुझे फिर से ये सब देखने फिर से स्मृति उनकी जिम्मेदारी है मैं उनका काम करता रहूंगा सी व्हेन लॉर्ड से कृष्ण भगवान कहते हैं कि मैं फिर से आऊंगा हां जी राइट गौतम बुद्ध भी कहते हैं कि जब तक ह्यूमैनिटी में दुख है तब मैं बार-बार वापस आऊंगा तो ये कोई पनिशमेंट नहीं है और सपोज़ किसी वजह से हमको वापस आना पड़े इट इज़ लाइक फिफ्थ ग्रेड में आप फेल हो गए रिपीट करना पड़ेगा तो ये हमें जीवन रिपीट करना पड़ता है ना तो इट्स एन अपॉर्चुनिटी टू टू पास योर फिफ्थ ग्रेड ये पनिशमेंट नहीं है इट डिपेंड्स हाउ यू लुक एट इट आप फ्रीडम या लिबरेशन के बारे में बहुत सोचोगे तो दैट इटसेल्फ बिकम्स योर ट्रैप लिबरेशन आपको जेल दे देता है बाद में से उसके पीछे ही पड़ गई आप सो माइंड हैस टू बी अब्सोलटली फ्रीड लेट द विल बी डन आपकी जो इच्छा है प्रभु हम तैयार हैं शरणागति शरणागति आखिर में दाजी मेरा मन तो कर नहीं रहा है ये एपिसोड मैं यहीं पे खत्म करूं क्योंकि मुझे ऐसा लग रहा है मैं एक मतलब मैं बहुत अलग ज़ोन में बैठी हूं और मुझे लगता है आप भी यह सब फील कर रहे होंगे मुझे कमेंट बॉक्स में अपने अनुभव भी बताते हुए जाइएगा आखिर में अगर मैं कहूं आपसे दाजी कि मेरे ऑडियंस के लिए एक सबसे इंपॉर्टेंट बात जो उनको गांठ बांध के रख लेनी चाहिए करना ही है सोचना ही है उसके बारे में वो क्या होगी ध्यान करो हर दिन ध्यान करो और देखो ध्यान से हम आगे कैसे बढ़े श्री कृष्ण भगवान के बारे में बताता हूं बोलते हैं कि हर जीव को चाहिए कि मैं सुखी हूं सब जीव और आप सुखी कैसे बन सकते हो यदि आपके हृदय में शांति नहीं है तो सब कुछ होते हुए भी आप सुखी नहीं हो सकोगे शांति की जरूरत है और शांति कब पैदा होगी जब आपके अंदर हार्मोनी होएगी और हार्मोनी कब होएगी जब हम मनन कर सकते हैं मनन कब कर सकते हैं जब हमारा मन एकाग्र हो और श्री कृष्ण फाइनली पूछते हैं कि मन एकाग्र कब हो सकता है ध्यान से ही हो सकता है तो ध्यान और सुख बोथ आर कनेक्टेड से वेरी डीपली कनेक्टेड सो प्लीज मेडिटेट इफ यू वांट हैप्पीनेस इन लाइफ नेवर इग्नोर इट या वेलकम टू मेडिटेट वि हार्टफुलनेस इफ यू वांट बिल्कुल बहुत-बहुत धन्यवाद आज जुड़ने के लिए और आज हमने इतनी सारी इतनी लंबी चर्चा की है क्योंकि आपके विज़डम को एक पडकास्ट में समेटना और लोगों के लिए बहुत कुछ निकालना मेरे लिए बहुत मुश्किल था तो मैं उम्मीद करूंगी कि अगली दफा एक बार फिर आप हमें समय दें और हम फिर किसी और विषय पर चर्चा करें यू आर ऑलवेज वेलकम बहुत-बहुत धन्यवाद दाजी देखिए जैसा कि दाजी ने लास्ट में एक आपको बहुत इंपॉर्टेंट टिप दी है बहुत इंपॉर्टेंट एक लेसन दिया है कि ध्यान को जरूर अपने जीवन में शामिल करिए आप स्पीकिंग ट्री पे ही सैकड़ों पडकास्ट देखते होंगे कितने सारे ध्यान पर ही थे यह पडकास्ट में भी हमने शुरुआत से ध्यान पर ही बात करी है बात हर जगह से घूमकर ध्यान पर ही आई है आप कब से स्टार्ट कर रहे हैं अपनी ध्यान की जर्नी क्योंकि सुनने से सिर्फ कुछ नहीं होगा एक्शन लेना पड़ेगा श्री कृष्ण कहते हैं ना कि जब तक कर्म नहीं करोगे तब तक कोई भी चीज आप कैसे हासिल कर पाओगे तो कर्म बहुत जरूरी है इनएक्शन मोड में सिर्फ सुनने से काम नहीं चलेगा कब से स्टार्ट कर रहे हैं आप अपनी जर्नी मुझे कमेंट बॉक्स में बताते हुए जाइएगा जुड़े रहिए स्पीकिंग ट्री के साथ नमस्कार
Awaken Your Soul Power & Journey Towards Spirituality । Soul Family & Karmic Cycle । Kamlesh D Patel
Channel: Speaking Tree
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