Transcript of Live Meditation with Daaji | 18 June 2025 | 8 am IST | Budaun Ashram | UP | Daaji | Heartfulness
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जिन किसी के भी क्वेश्चन हो वह से पूछ प्रणाम मालिक वी आर ग्रेटली ऑनर्ड दैट यू आर योर योर एस्टीेटेड प्रेजेंस योर एस्टेटेड प्रेजेंस हैज़ ग्रेस द लैंड ऑफ़ बदाइंग सर माय क्वेश्चन इज़ दैट वी आर डूइंग लॉट ऑफ़ मेडिटेशन एंड रिलैक्सेशंस एंड क्लीनिंग िंग एंड वी फाइंड अ लॉट ऑफ इंप्रूवमेंट इन अस बट व्हेन वी से टू आवर रिलेटिव्स इन आवर फैमिली एक्चुअली माय मदर और माय ब्रदर दे कम टू थर्ड और फोर्थ संडे थ्री टू फोर्थ संडे बट दे क्वाइट इन बिटवीन तो हाउ टू इंप्लीमेंट हाउ टू इंप्लीमेंट ऑन देम एंड हाउ टू अप्लाई नियम नंबर फोर ऑन अस थैंक्स दाजी क्या करते हैं मैं यह कह रहा था कि हम अपने अंदर जब हम ध्यान और रिलैक्सेशन करते हैं और क्लीनिंग करते हैं तो हम अपने अंदर बहुत इंप्रूवमेंट लाते हैं इंप्रूवमेंट पाते हैं लेकिन जब हम अपने रिश्तेदारों से कहते हैं परिवार से कहते हैं तो वो तीन-चार संडे आते हैं ज्वाइन करते हैं हम लोगों को और बीच में क्वाइट कर देते हैं तो उनप इंप्लीमेंट कैसे करें कि वह मतलब उस चीज को रेगुलर करें और वह भी आए हो उनको भूल जाओ ओके सॉरी थैंक्स दाजी जी वेलकम प्रणाम दाजी जी मेरा नाम उत्कर्ष सक्सेना है और मेरा क्वेश्चन यह है कि जैसे कि हम लाइफ में इजीली बहुत जल्दी डिस्ट्रैक्ट हो जाते हैं किसी भी चीज से और हम कितना भी अपने आप को बिजी रख लें बट वो डिस्ट्रैक्शन के लिए हम टाइम निकाल लेते हैं तो हम कैसे इस चीज को कम करें तो बाबूजी महाराज बोलते थे कि एक साधे सब सद सब सा एक के साथ ऐसा जुड़ाव कर लेना चाहिए एकदम स्ट्रांग रिलेशन एक के साथ बनाए रखो तो बाकी के जो है अपने आप गिर जाएंगे यह युद्ध की ही समस्या नहीं है आप तो बोल सकते हो है ना ये बूढ़े लोग भी इतने तरसते हैं कैसे कैसे ख्वाबों में भी लेकिन बेवकूफी का प्रदर्शन नहीं हुए इसलिए बोल नहीं सकते नहीं तो कोई भी बंदा यहां प्रेजेंट हो वह कर्म से नहीं कह सकता कि हम में बुरे विचार नहीं आते लेडीज आल्सो तो पहले से ही अपना मन ईश्वर की ओर जोड़ देना है बस बाकी कोई डिस्ट्रक्शन नहीं होगा सब फर्ज हो जाएगा ड्यूटी हो जाएगी मालिक प्रणाम मालिक मैं मयंक चंदूसी सेंटर से मालिक मेरा यह प्रश्न है जैसे हम ध्यान कर रहे हैं तो कभी-कभी यह होता है मालिक कि हमारा बहुत अच्छा चलता है सब कुछ चलता है मगर फिर एक क्षण ऐसा आता है मतलब एक समय ऐसा आ जाता है कि सब कुछ बिल्कुल जैसे हम ऊंचाई पर पहुंचे एकदम नीचे खाई में आ गए ना ध्यान में मन लगना बेचैनी अजीब सी होना मतलब एक ऐसी बेचैनी सी हो जाती है जिसे हम पार नहीं पाते यह स्वाभाविक है हर एक के जीवन में हर अभ्यासी के जीवन में यह अनुभूति सबको होती है कभी हाई पे रहते हैं कभी लो पे रहते हैं कभी हाई पे रहते हैं कभी लो पे रहते हैं ये नेचुरल है जब भी हम लो में चले जाते हैं कि ध्यान में अपनी उसमें मन नहीं लगता है तो प्रिसेप्टर के पास जाके सिंग ले लो तो फिर से फाइन ट्यून हो जाएगा तो बस इतना काफी है थैंक यू फिर मिलेंगे कभी सभी लोग कृपया थोड़ा स्पेस दे दीजिए ताकि दाजी आराम से वक कर पाएंगे
Live Meditation with Daaji | 18 June 2025 | 8 am IST | Budaun Ashram | UP | Daaji | Heartfulness
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