Transcript of An Emotional Heart Touching Story || Moral StorIes In Urdu || Sabak Amoz Islamic Kahani in Urdu 47
Video Transcript:
मेरा नाम नबीला है मेरी हाइट 5 फुट 2 इंच है मेरी एज 27 साल है और मैं बहुत ही क्यूट और खूबसूरत हूं मेरा चेहरा फूलों की तरह हुसैन है मेरी आंखों में मस्ती भरी है मेरे गाल मोटे और भरे भरे हैं और मेरे होंठ रस भरे रसीले हैं तो हुआ कुछ यूं था कि मैं इस वक्त तकरीबन 16 साल की थी जब हमारे मैट्रिक के इम्तिहान होने वाले थे मैं कोई बहुत कमजोर स्टूडेंट तो ना थी पर कोई बहुत जहीन स्टूडेंट भी ना थी जिस वजह से इम्तिहान की तैयारी के लिए मुझे किसी ना किसी से रहनुमाई की जरूरत थी मेरी खाला का बेटा शहजाद बीए कर चुका था और वह हमारे घर से ज्यादा दौर भी नहीं रहता था मैंने अम्मा जान से कहा कि वह शहजाद से बात करें कि वह फारिग वक्त में मुझे पढ़ा दिया करें इस तरह मुझे ट्यूशन के लिए ज्यादा दूर नहीं जाना पड़ेगा आने जाने की परेशानी भी नहीं होगी और वक्त भी जाय नहीं होगा अम्मा इसी दिन शहजाद से बात कर आई और और उन्होंने मुझे बताया कि उन्होंने शहजाद से बात कर ली है और वह हर शाम 7:00 बजे से 9:00 बजे तक आया करेगा मुझे पढ़ाने इस दिन ने ने जल्दी-जल्दी तमाम काम निपटाए और अपनी किताबें लेकर ड्राइंग रो में पढ़ने बैठ गई तकरीबन साढ़े बजे होंगे जब शहजाद हमारे घर आए शहजाद की उम्र इस वक्त 25 साल के करीब थी और काफी वजीहा और हैंडसम शख्सियत के मालिक थे उनका कद 6 फुट के करीब जबकि जिस मजबूत और तवाना था क्लीन शेव के साथ सावला रंग कयामत खेज था रस्मी सलाम दुआ के बाद मुझसे मुखातिब होते हुए बोले अच्छा तो मेरी शागिर्द पढ़ाई के लिए तैयार है मैंने भी सर हिलाते हुए कहा जी वेरी गुड यह बताओ किस सब्जेक्ट में खुद को ज्यादा कमजोर समझती हो शहजाद ने मेरी किताब उठाकर उसके वर्क उलट हुए किताब पर ही नजरें जमाए मुझसे दूसरा सवाल पूछा तो मैंने उन्हें बताया कि मैथ और इंग्लिश में कमजोर हूं मैं थोड़ा सिमटकर बैठी हुई थी और बात करते हुए भी थोड़ी जेजे कर रही थी शहजाद ने किताब मेस पर रखते हुए मेरी जानिब देखा और बोले अगर इसी तरह तुम घबराई और जे जेकित रहोगी तो मेरा नहीं ख्याल कि मैं तुमको जो कुछ पढ़ाऊंगा वह तुमको जहन नशीन भी करा सकूंगा लिहाजा रने जेजे किनी की जरूरत नहीं हम बड़े दोस्ताना माहौल में स्टडी करेंगे और जो कुछ भी पढ़ेंगे इसे याद भी रखेंगे जी बेहतर में खुद को थोड़ा रिलैक्स जाहिर करने की कोशिश करते हुए बोली इस दिन पढ़ाई तो कोई खास ना हुई अलबत्ता शहजाद ने अपनी बातों और चुटकुलों की मदद से मेरी जेजेक दूर कर दी मैं अब काफी रिलैक्स भी थी यही वजह थी कि मैं शहजाद के चुटकुलों का जवाब भी चुटकुलों की सूरत ही दे रही थी मेरा चंचल पिन बेदार हो चुका था शहजाद ने थोड़ी सी मैथ की मश्क कराई और इंग्लिश से शुरू करने का कहकर घर के लिए उठे अम्मा ने उन्हें रोक लिया कि चाय तो पीते जाएं शहजाद भी चाय के लिए बैठ गए चाय और थोड़ी गुप शिप के बाद शहजाद कल शाम 7:00 बजे आने का कहकर घर चले गए तकरीबन दो हफ्तों तक मामलात ऐसे ही चलते रहे वह वक्त के खासे पाबंद थे वक्त पर आते और अपना काम वक्त पर खत्म करके चले जाते उनकी शख्सियत जाजिम नजर तो थी ही उनके पढाने और समझाने का अंदाज भी खूब था यही वजह थी कि मैं शहजाद की गिरवी द हो चुकी थी और उनसे काफी बेतकल्लुफ भी हो चुकी थी इस दिन शहजाद मुझे मैथ की मश्क करा रहे थे जब अम्मा चाय ले आई उन्होंने मेस पर रखी और बोली के चाय पहले पी लेना यह कहकर वह वापस किचन में चली गई मश्क खत्म हुई तो मैंने चाय की प्याली उठाकर शहजाद को देना चाही तो पता नहीं क्या हुआ कि मेरा हाथ कांप गया और सारी की सारी चाय शहजाद के ऊपर गिर गई जिससे उनकी पतलून और शर्ट भीग गई मेरे तो औसान खता हो गए दौड़ती हुई गई और तौलिया उठा लाई मैं बार-बार शहजाद को सॉरी बोल रही थी और साथ ही साथ उनकी शर्ट को तौलिए से खुश्क करने की कोशिश कर रही थी अब जले तो नहीं मैंने मुसलसल तौलिया रगड़े हुए पूछा चाय से तो नहीं जला लेकिन अब तुम जरूर जला डालोगी मैं उनके इस जुमले को बिल्कुल भी ना समझी और इसी तरह तौलिया से उनकी शर्ट को खुश्क करने में लगी रही मैं शायद कुछ देर और इसी तरह तौलिए से उन्हें खुश्क करने में लगी रहती पर शहजाद ने मुझे रोक दिया और मुझे दोनों कंधों से उठाकर खड़ा करते हुए बोले बस करो बबली घर में मुझे सब इसी नाम से पुकारते थे एवरीथिंग इज फाइन तुम खामखा परेशान हो रही हो लेकिन मैं खुद में बहुत शर्मिंदा थी इसीलिए जब मैंने उन्हें इस शफकत से पेश आते देखा तो मेरी आंखों से आंसू निकल आए उन्होंने जब मुझे म रोते देखा तो अपनी बांहों में भरते हुए मुझे सीने से लगा लिया और माथे पर बोसा देते हुए बोला अरे पगली रोती क्यों हो तुमने जानबूझकर चाय थोड़ी गिराई है यह तो हाद साती ऐसे हुआ उनके धार स बंधने पर मुझे हौसला हुआ और मैंने आंसू ते हुए कहा जानती हूं कि हादसा हुआ है लेकिन हादसात भी तो किसी ना किसी गलती का ही नतीजा होते हैं और इस हादसे की गलती की मैं ही जिम्मेदार हूं शहजाद भी शायद माहौल को खुशगवार बनाना चाहते थे इसलिए बोला बबली मैं तुम्हें इजाजत देता हूं कि तुम ऐसे हादसात रोज किया करो वह हंस रहे थे और उनकी यह मानवी हंसी मेरी समझ से बाहर थी मैं भी उन्हें हंसते देखकर मुस्कुरा दी शहजाद ने कहा चिल्लू वापस वहीं से शुरू करते हैं जहां पर हादसा हुआ था यह कहते हुए उन्होंने मुझे अपनी बांहों के घेरे से आजाद कर दिया मैंने वापस अपनी कुर्सी पर बैठकर किताब खोलना चाहा तो शहजाद ने कहा आज का काम खत्म कल देखेंगे मैं चलता हूं क्योंकि इस हालत में मैं तुम्हें कुछ नहीं पढ़ा पाऊंगा शहजाद अपनी किस हालत के बारे में कह रहे थे मुझे कुछ पता ना चला मैं तो इस दिन जब मैं बेड पर थी तो यह वाकया बार-बार मेरे दिमाग में घूम रहा था और यह सब इस वक्त तो मेरे लिए बेमानी थे लेकिन अब उन वाक्यात को सोचना अच्छा लग रहा था और मुझे पता ही ना चला कि कब नींद ने आ लिया और मैं नींद की गहरी वादी में गौते खाने लगी इस रात में ने बारहा खवाब में शहजाद को देखा कभी हम किसी नदी के किनारे बैठे बातें कर रहे होते कभी किसी पार्क के कोने में किसी बेंच पर बैठे कुछ राज और नियाज की बातें कर रहे होते कभी पहाड़ों जंगलों और सहरावत कभी ठाठ मारते समंदर की लहरों से खेल रहे होते गरज इस रात में ने और शहजाद ने मिलकर दुनिया जहान की सेर की मैं इस दिन बहुत गहरी नींद सुई सुबह उठी तो मेरे ख्वाब का हर हर मंजर मेरे जहन में नक्श था मैं बिस्तर से उठना ही नहीं चाह रही थी मैं उन ख्वाबों की दुनिया से निकलना ही नहीं चाह रही थी मुझे इल्म नहीं कि ऐसा क्यों था पर जो भी था बहुत पुलु था दूसरी शाम जब शहजाद हमारे घर पहुंचे तो मैं इसी वक्त नहाकर निकली थी मेरे बाल गीले थे और उनसे अभी तक पानी टपक रहा शहजाद की बार-बार उती हुई नजर को मैं बखूबी नोटिस कर सकती थी मैं तो शहजाद को ख्वाबों में बसा चुकी थी लेकिन यहां लगता था कि शहजाद के मन में भी कोई बात चल रही है दौरान सडी मुझे आज मेरी दिल में अजीब अजीब खयालात आ रहे थे मैं नहीं जानती थी कि प्यार किया है लेकिन इतना जरूर था कि शहजाद के ख्यालात मुझे मदहोश कर रहे थे जिंदगी में मुझे ऐसी फीलिंग पहले कभी नहीं हुई थी यूही जब शहजाद मुझे मैथ के एक सवाल की मश्क करा रहे थे तो मैं उनके साथ बहुत करीब हो गई थी मैंने ऐसा कोई इरादत ना नहीं किया था बल्कि ऐसा होना इत्तेफाक ना था आखिर 9:00 बजे और शहजाद घर जाने के लिए उठे तो मैं भी किताबें समेट कर उठी तो उन्होंने करीब से गुजरते हुए बड़ी आहिस्ते कीी से कहा बबली तुम आज बहुत खूबसूरत लग रही थी मैंने चौक कर उनकी तरफ देखा तो इस दौरान वह मुझसे दूर हिट चुके थे उनके अल्फाज सारी रात मेरे कानों में बजते रहे शायद ख्वातीन के मुतालिक सच कहा जाता है कि वह बहुत खुद पसंद होती हैं इसीलिए उनकी तारीफ की जाए तो फूले नहीं समाती अगले दिन भी शहजाद वक्त पर ही आ गए अभी हमने स्टडी स्टोर्टी की थी कि बिजली चली गई मैं उठी के मोमबत्ती जलाकर ले आओ तो शहजाद ने मेरा हाथ पकड़ लिया और बोले हमने कौन सा मोतियों से माला प्ररोह नहीं है ऐसे ही बैठ के बातें करते हैं थोड़ी ही देर में बिजली तो आ ही जाएगी तो मैं भी उधर ही बैठ गई और हम इधर-उधर की बातें करने लगे शहजाद ने मेरा हाथ ऐसे ही पकड़े रखा था लेकिन मुझे अजीब लग रहा था अगरचे शहजाद की मोहब्बत मुझ पर हावी हो चुकी थी और उनकी पर असर शख्सियत ने मुझ पर जादू सा कर दिया था लेकिन मैं फौरी तवक्कोल में इस वक्त चूंकि अंधेरा था और हम एक दूसरे के चेहरों के तासु आत नहीं देख पा रहे थे हकीकत कहूं तो मुझे उनके हाथ अपने हाथ पर बहुत मजा दे रहा था लेकिन कोई अंदरूनी खौफ था जो रोक रहा था लेकिन अगर शहजाद की जगह कोई भी और होता तो मैं यकीन से कह सकती हूं कि मैं इसका मुन नोच लेती लेकिन शहजाद के लिए तो मैं पहले से ही सब कुछ हारी हुई थी लेकिन फिर भी मैं यह सब कुछ नहीं चाह रही थी जो हो रहा था मुझे अजीब लगने लगा था इसीलिए मैंने शहजाद के हाथ को छोड़ा और टॉयलेट जाने के बहाने वहां से उठ गई लेकिन मैं जैसे ही उठकर कदम बढ़ाने वाली थी पता नहीं मुझे क्या हुआ मैं डगमगा गई इसी लमहे शहजाद ने हाथ बढ़ाकर मुझे सहारा दिया तो मैं गिरने से बच गई मैं बहुत नर्वस हो गई थी शायद मैं जल्दी से टॉयलेट की तरफ भागी मुझे कुछ हाजत तो ना थी अलबत्ता ठंडे पानी से मुन पर छींटे मारे तो गर्मी का एहसास कुछ कम हुआ मैं अभी टॉयलेट में ही थी कि बिजली आ गई मैं वापस ड्राइंग रो में आई तो शहजाद वहां मौजूद नहीं थे मुझे परेशानी हुई कि ऐसा किया कि वह बताए बगैर ही चले गए इसी वक्त अम्मा ड्राइंग रो में आई तो उन्होंने बताया कि कह रहा था कि इसके सर में दर्द हो रहा है और बिजली भी नहीं है इसलिए वह घर जा रहा है मैंने भी किताबें समेटे और अपने बेडरूम में चली आई मेरी सोच का महर बस शहजाद ही थे इस रात भी मैं उन्हीं सोच में गर्क सो गई सुबह उठी तो शहजाद के याद में सारा दिन मशहूर होती रही शाम होने से पहले ही मैं शाम का बेचनी से इंतजार करने लगी मैं देखना चाहती थी कि शहजाद आज कैसे बर्ताव करते हैं लेकिन वक्त होने के बावजूद वो नहीं आए मैं इंतजार करती रही लेकिन मेरा इंतजार बस इंतजार ही रहा वह 8 बजे तक नहीं आए तो मैंने अम्मा से कहा कि खैर हो शहजाद पता नहीं आज क्यों नहीं आए अम्मा ने कहा कोई और काम पड़ गया होगा इसलिए नहीं आ सका होगा मैंने कहा नहीं अम्मा कल जब वह गए थे तो उनकी तबीयत ठीक नहीं थी क्या पता वह अभी तक ठीक ना हुए हो अब खाला को फोन करके उनका पता तो कराए अम्मा को भी जैसे कुछ याद आया तो उन्होंने खाला को फोन लगाया तब खाला ने बताया कि शहजाद तो कल से सख्त बुखार में तप रहा है मुझे इल्म हुआ तो सख्त बचीनी हुई दिल चाहा कि अभी जाऊं और उसका बुखार खुद पे ले लू लेकिन मैं इस वक्त किया कर सकती थी सुबह में अम्मा को साथ लेकर उनका पत्ता लेने खाला के घर गए तो देखा शहजाद वाकई बुखार की वजह से बिस्तर में पड़े थे थोड़ी सी रस्मी बातचीत के बाद में इधर ही बैठ गई खाला और अम्मा भी साथ बैठी अपनी बातों में मसरूफ हो गई शहजाद ने एक बारगी हमारी तरफ देखा फिर उन्होंने अपनी आंखें मूंद ली हम खाला और अम्मा की मौजूदगी में कोई बात नहीं कर सकते थे इसलिए हम खामोश बैठे थे जबकि खाला और अम्मा बातें कर रहे थे बातों-बातों में खाला ने बताया कि उनकी सहेली की बेटी की शादी थी जहां उनका जाना बहुत जरूरी था लेकिन नहीं जा सकती अम्मा पूछ रही थी क्यों नहीं जा सकती हो तो खाला बोली जिसके साथ जाना था वह तो बिस्तर पर पड़ा है और आपके भाई साहिब खालू भी ऑफिस से छटी नहीं ले सके कि उनके साथ चली जाती अम्मा चूंकि खाला की सहेली को जानती थी और उन्हें पता था कि वह किधर रहती है इसलिए खाला से बोली तुम्हारी सहेली कौन सा दूसरे शहर में रहती है टैक्सी पकड़ो और दो-तीन घंटे में वापस आ जाओगी मैंने यह सुना तो मेरे दिमाग में आइडिया आया कि अगर अम्मा और खाला शादी पर चली जाएं तो मुझे शहजाद से अकेले में बात करने का मौका मिल जाएगा यही सोचकर मैंने भी अम्मा की तायब में कहा खाला अगर आपकी सहेली इसी शहर में रहती है तो तब आप जरूर हो आएं शहजाद की फिक्र ना करें दो-तीन घंटों तक हम उनकी तीमारदारी कर लेंगे खाला और अम्मा दोनों को मैंने शादी में जाने पर आमादा कर लिया अगरचे अम्मा जाना नहीं चाहती थी उन दोनों के जाने के बाद में और शहजाद अब घर में अकेले थे कोई 15 मिनट तक हमें कोई बात ना हुई शहजाद वैसे ही आंखें मूंदे लेटे रहे शायद वह मेरा इंतजार कर रहे थे कि मैं कोई बात शुरू करूंगी लेकिन मैं तजब जुब में रही कि बात शुरू कैसे करूं और कौन सी बात करूं तन्हाई और खामोशी माहौल पर अजब पर सरत थी शहजाद ने मेरी तरफ करवट लेकर आंखें खोल दी नबीला तुमने मुझे जला डाला उनकी आवाज मेरी समा तों से टकराई उनकी नजरें मेरे चेहरे पर गड़ी थी तुम शायद समझ रही होगी कि मैं बुखार से तप रहा हूं लेकिन ऐसा नहीं है यह आग जिसमें मैं जल रहा हूं तुम्हारी ही प्यार में लगी हुई है देखो जल रहा हूं में यह कहते हुए उन्होंने मेरा हाथ अपने माथे पर लगा दिया उनका माथा सच में अंगारे की तरह था जी जी शहजाद मेरे मुन से बस इतना ही निकल पाया शहजाद दीवानों की तरह मेरे हाथ को अपने चेहरे पर रख रहे थे जैसे वह इस तरह सुकून पा रहे हो सुकून तो मुझे भी हासिल हो रहा था मोहब्बत तो मुझे भी हो गई थी
An Emotional Heart Touching Story || Moral StorIes In Urdu || Sabak Amoz Islamic Kahani in Urdu 47
Channel: Bhabhi stories
Share transcript:
Want to generate another YouTube transcript?
Enter a YouTube URL below to generate a new transcript.