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Transcript of Why Does the Middle East Always Fight? | ZemTV

Video Transcript:

मिडिल ईस्ट में एक तरफ यमन के तीज रेड सी से गुजरने वाली शिप्स पर हमला कर रहे हैं जिसकी वजह से पूरी दुनिया में शिपिंग लाइन का बोहरा मचा हुआ है तो दूसरी तरफ ईरान ने इजराइल पर 300 से ज्यादा सुसाइड ड्रोन और मिसाइल्स फायर किए हैं चाहे सीरिया हो पलेस्टाइन इराक या फिर यमन हम हर दूसरे दिन मिडिल ईस्ट में हालात खराब ही देखते आए हैं और शायद अपनी पूरी जिंदगी देखते ही रहेंगे इन झड़पों में मिडिल ईस्ट के अलावा बाहर की कंट्रीज भी शामिल होती हैं जैसा कि अमेरिका यूनाइटेड किंगडम और रशिया भी पर ऐसा क्यों है और यह सब मिडिल ईस्ट में ही क्यों हो रहा है मिडिल ईस्ट हमेशा से ही बहुत कॉम्प्लेक्शन में फंसा होता है क्योंकि यहां डिफरेंट लोग हैं जिनके अपने-अपने मफा दत हैं कभी वह एक साइड से लड़ते हैं तो कभी दूसरी जिसकी वजह से मिडिल ईस्ट का कॉन्फ्लेट कम होने के बजाय मजीद बढ़ जाता है मिडिल ईस्ट के इन तमाम मसलों का रूट कॉज या उसकी जड़ क्या है इसको सही से समझने की के लिए हमें एक सदी पीछे जाना होगा जहां इन सारे मसलों की शुरुआत होती है जम टीवी की वीडियोस में एक बार फिर से खुशामदीद नाजरीन यह 20वीं सदी की शुरुआत थी जब मिडिल ईस्ट समेत आज के यूरोप का भी काफी सारा हिस्सा ऑटोमन एंपायर यानी के सल्तनत उस्मानिया के कंट्रोल में होता था इस पूरे खिता में 600 सालों तक हुकूमत करने के बाद मुसलमान काफी कमजोर पड़ चुके थे और इनके बीच अंदर ही अंदर झगड़े शुरू हो गए ऑटोमन एंपायर में मुसलमानों समेत दूसरे भी कई रिलीजस के लोग अपने-अपने रीजंस या प्रोविंसेस में बसते थे लेकिन यह सारी प्रोविंसेस ऑटोमन एंपायर का हिस्सा हुआ करती थी यानी किसी को भी अपना अलग मुल्क बनाने की आजादी नहीं थी इस दौरान ब्रिटिशर्स ने ईस्ट इंडिया समेत मिडिल ईस्ट के कुछ हिस्सों पर भी अपना होल्ड जमाना शुरू कर दिया जैसा कि आज का यूएई सदर्न यमन बेहरेन और इजिप्ट ब्रिटिशर्स को इंडिया और मिडिल ईस्ट में अपने प्रोटेक्टरेट में पहुंचने के लिए इजिप्ट की सबसे ज्यादा जरूरत थी क्योंकि वहां उन्होंने रेड सी को मेडिटरेनियन सी से एक कनाल के जरिए जोर दिया था जिसको आज हम सुईस कनाल के नाम से जानते हैं क्योंकि सुईस कनाल जो कि उनका बहुत ही कीमती असासा था और वह था भी इजिप्ट में इसी वजह से ब्रिटिशर्स को इजिप्ट की सबसे ज्यादा जरूरत थी उन्होंने हर मुमकिन कोशिश की कि इजिप्ट उनकी प्रोटेक्शन में ही रहे इसी दौरान ब्रिटिशर्स ने आहिस्ता आहिस्ता उमान और कुवेत को भी अपना प्रोटेक्टरेट बना लिया प्रोटेक्टरेट उन स्टेट्स को कहते हैं जो कि होती तो बजहर आजाद हैं लेकिन उनकी प्रोटेक्शन ब्रिटिशर्स करेंगे और उनको कंट्रोल भी यही करेंगे ब्रिटिशर्स की यह हरकतें ऑटोमन एंपायर को ठीक नहीं लगी कि दुनिया के दूसरे कोने से उठकर कोई आए और हमारे इलाकों पर राज करना शुरू करें यह वह वक्त था जब वर्ल्ड वॉर वन का माहौल गर्म हो रहा था 1914 में ऑटोमन एंपायर ने फैस फसला किया कि वह वर्ल्ड वॉर वन में ब्रिटिशर्स के खिलाफ इंपीरियल जर्मनी का साथ देंगे दूसरी तरफ अरब कंट्रीज को प्रोटेक्टरेट बनाने वाले ब्रिटिश और फ्रेंच ने आपस में फैसला कर लिया कि वर्ल्ड वॉर वन में ऑटोमन एंपायर को हराकर इनके पूरे इलाके को आपस में बांट लेंगे 1916 में ब्रिटिश और फ्रेंच डिप्लोमेट्स मार्क साइक्स और फ्रांस जॉर्ज पीको ने एक सीक्रेट ट्रीटी की जिसमें दोनों ने ऑटोमन एंपायर के हिस्सों की डिस्ट्रीब्यूशन आपस में ही कर ली इस ट्रीटी को इतिहास में साइक्स पको एग्रीमेंट की पहचान दी जाती है ट्रीटी में तय पाया कि यूएई कतर बेहरेन नॉर्थ ईस्टर्न सऊदी और कुवैत डायरेक्टली ब्रिटिश की कॉलोनी बनेगी जबकि नॉर्थ ईस्टर्न सऊदी इराक और जॉर्डन होंगी तो इंडिपेंडेंट अरब स्टेट्स लेकिन यह ब्रिटिश प्रोटेक्टरेट कहलाई जाएंगी टर्की लेबन डायरेक्टली फ्रेंच कॉलोनी बनेंगे जबकि सीरिया और इराक के कुछ हिस्से फ्रेंच प्रोटेक्टरेट में आएंगे ईस्ट टर्की को रशियन एंपायर देखेगी जबकि पलेस्टाइन की क्योंकि बहुत ज्यादा रिलीजियस इंपॉर्टेंस है उसको साइक्स पको एग्रीमेंट में एक इंटरनेशनल एडमिनिस्ट्रेशन डिक्लेयर किया गया साइक्स और पीको ने वर्ल्ड वॉर वन से पहले ही अपने तौर पे मिडिल ईस्ट का बंटवारा तो कर लिया था लेकिन जो मैप्स उन्होंने बनाए थे उसमें वहां ऑलरेडी रहने वाले कबीलों के बारे में नहीं सोचा गया असल में ऑटोमन एंपायर ने इन एरियाज को अलग-अलग प्रोविंसेस में बांटा हुआ था जहां रहने वाले कबीले बेशक अलग-अलग मजहब फॉलो करते थे उनके तौर तरीके मुख्तलिफ थे लेकिन वो सब ऑटोमन एंपायर की छत्री के साय तले रहते थे और किसी को भी अपनी अलग नेशन बनाने की परमिशन नहीं थी इन प्रोविंसेस को जिनमें अलग-अलग लोग बसते थे इनको ब्रिटिश और फ्रेंच अपनी शक्ल देकर एक बहुत बड़ी गलती कर रहे थे जिसके नताइएपीजीईटी मजीद उलझने लगी जब वर्ल्ड वॉर वन से पहले ब्रिटिशर्स ने अरब के साथ वादे करना शुरू कर दिए उनको ऑटोमन एंपायर के खिलाफ उकसाया जाने लगा और वादे किए जाने लगे कि अगर वह वर्ल्ड वॉर वन में ऑटोमन एंपायर के खिलाफ खड़े होंगे तो उनको अपना अलग और आजाद मुल्क दिया जाएगा इसके साथ-साथ ब्रिटिशर्स ने एक और वादा भी किया था यूरोप में रहने वाले ज्यूज के साथ उस वक्त जूस को दुनिया में कोई भी एक्सेप्ट नहीं करता था लिहाजा उनसे वादा किया गया कि वर्ल्ड वॉर वन जीतने के बाद उनको पलेस्टाइन में अपना खुद का मुल्क दिया जाएगा वर्ल्ड वॉर वन जीतने के लिए अलाइज को ऑयल की भी सबसे ज्यादा जरूरत थी ब्रिटिशर्स ने सबसे पहले 1908 में ईरान से ऑयल ढूंढ निकाला था पर यह इतना ज्यादा ऑयल नहीं था जंग में टैंक्स प्लेंस गाड़ियां और दूसरी मशीनरी के लिए ज्यादा ऑयल की जरूरत थी उस वक्त अमेरिका ऑयल का सबसे बड़ा प्रोड्यूसर था और ब्रिटिशर्स ऑयल के लिए अमेरिका पर डिपेंडेंसी नहीं चाहते थे क्योंकि उस वक्त के अमेरिकन प्रेसिडेंट वुड्रो विल्सन जंग के बाद अंपायर्स और कॉलोनियल सिस्टम के बहुत खिलाफ थे जबकि ब्रिटिश और फ्रेंच तो पहले से ही अपनी कॉलोनी ज का सीक्रेट प्लान बनाकर बैठे थे लिहाजा ऑयल खरीदने के लिए अमेरिका ब्रिटिशर्स के लिए रिलायबल ऑप्शन नहीं था तो उन्होंने मिडिल ईस्ट में ही ईरान के करीब अपना होल्ड मजीद बढ़ा दिया जहां उनको लगता था कि ऑयल का काफी फ्यूचर है बाद में यहां से बहुत ज्यादा ऑयल के जखीरे भी दरयाफ्त हुए वर्ल्ड वॉर वन खत्म हो चुकी थी और अलाइज जीत चुके थे जीतने वाले अलाइज आमने-सामने बैठे और मिडिल ईस्ट के बॉर्डर्स को एक बार फिर से चेंज कर दिया गया वहां ऑटोमन एंपायर ऑफिशियल 1922 में खत्म हो गई और 29 अक्टूबर 1923 को एक आर्मी ऑफिसर मुस्तफा कमाल अतातुर्क ने टर्की को रिपब्लिक डिक्लेयर कर दिया उभरती हुई तुर्क गवर्नमेंट ने फॉरेन ब्रिटिशर के खिलाफ बगावत कर दी और अगले 2 सालों तक अलाइज के खिलाफ जंग जारी रखी ब्रिटिश और फ्रेंच मिलिट्री वैसे ही वर्ल्ड वॉर व की वजह से थक चुकी थी जिनको टर्किश आर्मी बहुत हार्ड टाइम दे रही थी तभी वह टर्किश गवर्नमेंट के साथ टेबल टॉक्स करने पर मजबूर हो गए और एक बार फिर से मिडिल ईस्ट के बॉर्डर्स में बदलाव देखा गया यह मीटिंग टर्की के लिए बहुत फायदेमंद साबित हुई और मिडिल ईस्ट के मैप में आखिरकार स्याही भर दी गई यह मैप आज के मिडिल ईस्ट से काफी मिलता-जुलता है अलाइज ने टर्की को उनका एरिया दिया जबकि ऑटोमन एंपायर खत्म हो जाने के बाद बकाया मिडिल ईस्ट को आपस में ही बांट दिया पहले जो ऑटोमन एंपायर की प्रोविंसेस बसरा बगदाद और मसूल हुआ करती थी उनको ब्रिटिशर्स ने जॉइन करके उसको मैंडेट फॉर मेसोपोटामिया का नाम दिया जो बाद में इराक बन गया हालांकि इन प्रोविंसेस में अलग-अलग रिलीजन और कल्चर के लोग रहते थे लेकिन बिना सोच विचार के इन को आपस में मर्ज किया गया जिसके असरात इराक की इंटरनल स्टेबिलिटी पर गहरे दाग छोड़ने वाले थे मसूल के लोग कडिस्क थे बगदाद में ज्यादातर सुन्नी मुसलमान जबकि बसरा प्रोविंस में शिया मुसलमान बसते थे वर्ल्ड वॉर व के बाद ब्रिटिश ने ऑफिशियल कुवैत को बसरा प्रोविंस से अलग करके 1960 तक अपना प्रोटेक्टरेट बनाए रखा पर क्योंकि यह इराकी प्रोविंस बसरा से फोर्सफुली अलग किया गया था इसी वजह से आने वाले सालों में जब ब्रिटिशर्स चले गए तो इराक ने कुवत को अपना हिस्सा मानना शुरू कर दिया और फिर 1990 में इसी क्लेम को लेकर सद्दाम हुसैन ने कुवैत पर हमला भी किया इराक ब्रिटिशर से आजाद होने के बावजूद भी काफी बिखरी हुई हालत में था कुर्द सुन्नी शिया इनके आपसी झगड़े और साथ में इनका कोवत वापस पाने का दावा दोनों मुल्कों में गहरी टेंशंस का बायस बना ऐसी ही कुछ गलतियां लेबन और सीरिया में भी की गई लेबनोल को क्रिश्चियंस की मेजॉरिटी की बिना पर आजादी दी गई जबकि इसमें सुन्नी और शिया अरब्स भी काफी तादाद में बसते थे इसी तरह सीरिया में भी क्रिश्चियंस सुन्नी शिया और दूसरे मजहब भी पाए जाते थे लेकिन इन सारी ऑटोमन प्रोविंसेस को भी मर्ज करके जान छुड़ाने की गर्ज से सीरिया बना दिया गया 1930 में टर्की ने फ्रेंच गवर्नमेंट के सामने सीरिया की हाटे प्रोविंस वापस मांगने की डिमांड रखी फ्रांस को डर था कि टर्किश गवर्नमेंट नाज जर्मनी से ना जा मिले इसीलिए फ्रांस ने हाटे प्रोविंस टर्की को दे दिया जिससे सीरिया और टर्की के बीच एक नया तनाजा खड़ा हो गया इसके अलावा यूफ्रेट्स रिवर जो कि असल में टर्की से शुरू होती है और सीरिया से गुजरती हुई इराक में जाती है यानी टर्की अगर चाहे तो यूफ्रेट्स रिवर का पानी रोक सकता है जिससे इन तीनों मुल्कों के बीच कॉन्फ्लेट पैदा होने के चांसेस मजीद बढ़ गए 1946 में सीरिया फ्रेंच कॉलोनी से आजाद हुआ लेकिन यह आजादी शुरू हुई झगड़े से हुई उठते साथ ही उन्होंने टर्की की हाटे प्रोविंस और लेबनोल को क्लेम करना शुरू कर दिया बिना सोच समझ के जान छुड़ाने के लिए जो डिविजंस की गई इनसे पैदा होने वाले मसले एक तरफ और दूसरा मसला ऑयल ने खड़ा कर दिया क्योंकि ऑयल भी उन अरब कंट्री से निकला जहां ऑलरेडी इतने सारे मसले चल रहे थे मिसाल के तौर पे इराक में जहां से ऑयल निकला वो लोकेशंस थी बसरा और मसूल जहां शिया अरब्स और सुन्नी कुर्द बसते थे जबकि बाकी पूरा इराक सुन्नी अरब था इसकी वजह से इराक को ऑयल की डिस्कवरीज को संभालना काफी मुश्किल हो गया ईरान में 90 पर ऑयल कुर्दिस्तान से निकला जहां शिया अरब्स रहते थे जबकि बाकी पूरे ईरान में पर्शियन शिया का होल्ड था कुवैत जिसको ऑलरेडी इराक अपना हिस्सा मानता था और यह कार्ड वह किसी भी वक्त इस्तेमाल कर सकता था वहां भी ऑयल निकल गया जिसकी वजह से इराक और कुवैत के दरमियान मामलात मजीद खराब होने लगे कुल मिलाकर बात इतनी है कि पूरे मिडिल ईस्ट में से काफी सारा तेल निकला तकरीबन पूरी दुनिया की ऑयल रिजर्व्स का भी आधा और यह सारा तेल उन लोकेशन से निकला जहां ऑलरेडी रिलीजन और कल्चर की बिना पर झगड़े चल रहे थे इसके अलावा बड़ी कंट्रीज जैसा कि अमेरिका ने भी यहां तेल की वजह से मुदा शुरू कर दी जिसने मिडिल ईस्ट की सूरते हाल को बद से बदतर बना दिया लगे हाथ ब्रिटिशर्स ने जूस से किए गए वादे को पूरा करने के लिए उनको पलेस्टाइन में अपनी खुद की स्टेट भी दे दी जिसके इजराइल के नाम से आज पूरी दुनिया में चर्चे हो रहे हैं उस वक्त पलेस्टाइन की अपनी पापुलेशन वहां मौजूद ज्यूस से तकरीबन डबल थी लेकिन फिर भी जूस को पलेस्टाइन की 62 पर जबकि अरब्स को सिर्फ 38 पर जमीन दी गई जिसकी वजह से पैदा होने वाला कॉन्फ्लेट आज तक लड़ा जा रहा है यह पार्टीशन उठते साथ ही अरब्स ने रिजेक्ट कर दिया लेकिन ऑब् वियस जूज ने इसको कबूल किया शुरुआत में कोई एक भी अरब स्टेट नहीं थी जिसने स्टेट ऑफ इजराइल को कबूल किया हो बल्कि ज्यादातर अरब स्टेट्स ने 1948 में इजराइल के खिलाफ जंग का ऐलान कर दिया ब्रिटिशर्स और अमेरिकंस की मदद से इजराइल जो चारों तरफ अरब स्टेट से घिरा हुआ था यह जंग जीत गया और यहीं से शुरुआत होती है इजिप्ट के कमाल अब्दुल नसर की एक ऐसा सेकुलर अरब नेशनलिस्ट जिसने मिडिल ईस्ट में तमाम अरब जमीनों को एक सुपर स्टेट बनाने का ख्वाब देखा और यह सुपर स्टेट मिडिल ईस्ट के ही तेल को एक सुपर वेपन के तौर पर इस्तेमाल करेगी नसर जान चुके थे कि बाहर से आने वाली ताकतें उन्हीं के तेल को इस्तेमाल करके उनको अपनी उंगलियों पर नचा रही हैं तो क्यों ना हम वही तेल इजराइल और अमेरिका के खिलाफ इस्तेमाल करें 1954 में कमाल अब्दुल नसर पावर में आए और उन्होंने अमेरिका इजराइल और उनको सपोर्ट करने वाले सऊदी और कुवत डायनेस्टी के खिलाफ सारी अरब स्टेट्स को इकट्ठा कर लिया सबसे पहले नसर ने सुईस कनाल पर से ब्रिटिश और फ्रेंच की ओनरशिप खत्म की इस फैसले पर ब्रिटिश फ्रेंच और इजराइल ने मिलिट्री के जोर पर नसर के खिलाफ जवाबी कार्रवाई की लेकिन इजिप्ट यह जंग जीत गया और स्विस कनाल को आजाद करवाने में कामयाब रहा कमाल अब्दुल नसर की पूरे मिडिल ईस्ट में बड़ी वाह-वाह होने लगी पर कुछ अरब स्टेट्स थी जिनको नसर की कामयाबी से खतरा था जैसा कि सऊदी अरब को कुवेत जॉर्डन और इंपीरियल ईरान वह नसर के इस इंकलाब को यहीं खत्म करना चाहते थे क्योंकि उनको यह डर था कि अगर यह इंकलाब हमारी स्टेट्स तक पहुंच गया तो हमारी बादशाहत खत्म हो जाएगी इसी मसले को लेकर यमन में नसर के हामी नेशनलिस्ट और वहां की मोनार्किस्ट गवर्नमेंट के बीच एक जंग छिड़ी यमन की गवर्नमेंट को सऊदी जॉर्डन और इंपीरियल ईरान की मदद हासिल थी जबकि नेशनलिस्ट्स को इजिप्ट सपोर्ट कर रहा था यह मिडिल ई में लड़ी जाने वाली पहली प्रॉक्सी वॉर थी पर इस जंग में इजिप्ट को बड़ी हार का सामना करना पड़ा मौके का फायदा उठाकर इजराइल ने देखा कि इजिप्ट की आर्मी का मोराल डाउन है तो उन्होंने भी पुरानी लड़ाई का बदला लेने के लिए इजिप्ट पर सरप्राइज अटैक कर दिया व हमला जिसको सिक्स डे वॉर के नाम से याद किया जाता है इस हमले में इजराइल ने इजिप्त के पूरे साइनाइ पेनिंस सुला पर कब्जा कर लिया जिसका मतलब यह था कि अब सुईस कनाल से से कोई भी शिप नहीं गुजर पाएगी यही वह पॉइंट था जब इजिप्ट को अगले ठ सालों तक सुईस कैनाल बंद रखना पड़ा कमाल अब्दुल नसर यह शिकस्त बर्दाश्त ना कर पाए और 1970 में हार्ट अटैक की वजह से चल बसे पर इजराइल से बदला लेना अभी बाकी था नसर के जाने के बाद उनके ही एक जानशीन अनवर सादात इजिप्ट के नए प्रेसिडेंट बन गए उन्होंने सीरिया के साथ मिलकर इजराइल पर हमला करने का मंसूबा बनाया और सि अक्टूबर 1973 को इजराइल पर दोनों साइडों से सरप्राइज अटैक कर दिया यह यादगार जंग इतिहास में कई नामों से पहचानी जाती है यम केपर वॉर रमजान वॉर अक्टूबर वॉर या फिर फोर्थ अरब इजराइल वॉर वैसे तो इस जंग में भी इजराइल का पलड़ा भारी रहा लेकिन इस वक्त अमेरिका बीच में आ गया और प्रेसिडेंट जिमी कार्टर के कहने पर इजिप्ट और इजराइल दोनों ने हाथ मिला लिए जिस पर इजराइल ने साइनाइ पेनिनसुला को खाली करके इजिप्ट को वापस कर दिया पर इस एग्रीमेंट में यह भी तय पाया कि इजिप्ट इजराइल को एज अ स्टेट कबूल करेगा बस यही व दिन था जब मिडिल ईस्ट में एक नई जंग का आगाज हो गया क्योंकि इजिप्ट व पहली अरब स्टेट थी जिसने अरब के दुश्मन इजराइल को कबूल करने की गलती की तकरीबन सारी अरब स्टेट्स ने इजिप्ट के इस फैसले की मुखालफत की और एक इस्लामिस्ट ग्रुप ने इजिप्शियन प्रेसिडेंट अनवर सादात को इजराइल से हाथ मिलाने पर कत्ल कर दिया एक तरफ इजिप्ट में जब यह सब कुछ हो रहा था उसी वक्त ईरान में शाह ऑफ ईरान मोहम्मद रजा पहलवी के खिलाफ इंकलाब फट पड़ा ईरान का शाह अमेरिका से फंडिंग लेकर उनके मफा में काम करता था जिसका तख्त उलट करर ईरान के लोगों ने यहां इंकलाबी हुकूमत रूहुल्लाह खुमैनी की सरपरस्ती में कायम की ईरान का यह इंकलाब मिडिल ईस्ट पर बहुत सारे असरात लेकर आया क्योंकि यह हुकूमत मिडिल ईस्ट में पहली इस्लाम पसंद हुकूमत के तौर पर उभरी थी इस नई ईरानी हुकूमत का शिया इस्लामी नजरिया पूरी दुनिया के तमाम मुसलमानों को एक प्लेटफार्म पर लाना चाहता था जिसके सुप्रीम लीडर रूहुल्लाह खुमैनी होंगे यह देखते हुए दूसरी अरब स्टेट्स खास तौर पर सुन्नी मुसलमानों को खतरा महसूस होने लगा कि कहीं ईरान का यह रेवोल्यूशन उनकी स्टेट्स तक भी ना फैल जाए ईरान का सबसे बड़ा टारगेट सऊदी बादशाही निजाम था जिसको अमेरिका की सपोर्ट हासिल थी इसी वजह से ईरान के इंकलाब के सबसे बड़े दुश्मन जहां अमेरिका और इजराइल तो थे ही वहीं साथ में सऊदी भी बन बैठा ईरानी इंकलाब के डर से सऊदी ने इराक में सद्दाम हुसैन को फंड करना शुरू कर दिया जो कि एक सुन्नी मिलिट्री ऑफिसर थे सद्दाम हुसैन को भी ईरान से खतरा था क्योंकि इराकी तेल बसरा की प्रोविंस से निकलता था जहां ऑलरेडी शिया पॉपुलेशन थी कुवैत और सऊदी की बैकिंग के होते हुए सद्दाम हुसैन ने ईरान के इंकलाब के खिलाफ अरब नेशनलिज्म की आवाज उठाई और 1980 में ने ईरान पर हमला कर दिया उन्होंने ईरान की कुज स्तान प्रोविंस पर कब्जा कर लिया जहां से ईरान का 90 पर ऑयल निकल रहा था इससे इराक के ऑयल रिजर्व्स में अब मजीद इजाफा हो गया यह जंग आठ सालों तक चलती रही 5 लाख लोग मारे गए और 10 लाख से भी ज्यादा जख्मी हुए सऊदी और कुवत ने सद्दाम हुसैन को फंडिंग जारी रखी ताकि वह ईरान को लड़ाई में ही उलझा रखें पर सऊदी को ईरान से एक और खतरा भी था बेहरेन को देखा जाए तो वहां शिया पापुलेशन ज्यादा थी लेकिन वहां का रूलर सुन्नी था और इसकी लोकेशन सऊदी की ऑयल फील्ड से काफी करीब है ईरान जो कि ऑलरेडी बेहरेन को अपना हिस्सा मानने लगा था सऊदी को खतरा था कि अगर यहां की शिया पॉपुलेशन ने सुन्नी रूलर का तख्त उलट दिया तो सऊदी और ईरान आमने-सामने आ जाएंगे जिससे सऊदी का तेल खतरे में पड़ सकता है यह भी एक वजह थी कि सऊदी ने मुसलसल सद्दाम हुसैन को सपोर्ट किया था आठ सालों के बाद ईरान ने सद्दाम हुसैन से अपने खुज स्तान प्रोविंस का कब्जा छुड़ा लिया लेकिन 1988 में इराक ने अपना कुवैत पर बहुत पुराना क्लेम कार्ड वापस से निकाल लिया सद्दाम हुसैन ने कुवैत को सीधा-सीधा कहा कि या तो ईरान के खिलाफ लड़ने के लिए जो फंडिंग दी थी वह भूल जाओ या फिर कुवैत को इराक में मर्ज कर दो जब कुवैत ने मना कर दिया तो सद्दाम हुसैन ने पूरे कुवैत पर हमला करके सारी ऑयल फील्ड्स पर कब्जा जमा लिया इससे इराक के अपने ऑयल रिजर्व्स में इतना इजाफा हो गया कि अब दुनिया के टोटल ऑयल रिजर्व्स का 20 पर हिस्सा अकेले इराक के पास था कुवत से इतने साल फंडिंग लेने के बावजूद सद्दाम हुसैन ने उल्टा कुवैत पर ही कब्जा कर लिया यह चीज सऊदी को भी टकने लगी क्योंकि वो भी तो कई सालों तक इराक को फंडिंग करता आया था सऊदी को डर था कि अब सद्दाम की आर्मी किसी भी वक्त हमारी ऑयल फील्ड्स पर भी हमला कर सकती है तो फिर इस मौके पर सऊदी ने अपना अमेरिका कार्ड निकाला और उनसे मदद मांगी अमेरिकन आर्मी ने मुदा की और कुवत से सद्दाम की आर्मी को वापस इराक में धकेल दिया साथ ही यूनाइटेड स्टेट्स ने बेहरेन में भी अपना हेड क्वार्टर बना लिया जिससे सऊदी को बहरे में आने वाले ईरानी रेवोल्यूशन का डर भी खत्म हो गया इसके फौरन बाद 1994 में जॉर्डन इजराइल को एक्सेप्ट करने वाली दूसरी अरब स्टेट बन गई मिडिल ईस्ट में अमेरिका की ती हुई प्रेजेंस और इजराइल की सपोर्ट ने नई इस्लामिक ऑर्गेनाइजेशंस को जन्म दिया जैसा कि अलकायदा आ इसिस हिजबुल्लाह तीज और इस्लामिक जिहाद इनका मकसद दुनिया के तमाम मुसलमानों को अमेरिका इजराइल और उनके सपोर्टर्स के खिलाफ एक छतरी के नीचे लेकर आना था लिहाजा उनको एंटी अमेरिकन स्टेट्स की तरफ से फंडिंग मिलना शुरू हो गई और इस सब का रिजल्ट आज हमें मिडिल ईस्ट में देखने को मिल रहा है हमास का इजराइल पर हमला करने के बाद इजराइली फोर्सेस ने गाजा स्ट्रिप पर खूब गोलाबारी की और बचे हुए फलस्तीनी भी यहां से भागने पर मजबूर हो गए इसके नतीजे में यमन में मौजूद तीज ने रेड सी से गुजरने वाली वो शिप्स जो इजराइल या उनको सपोर्ट करने वाली कंट्रीज की थी उन पर अटैक करना शुरू कर दिया दूसरी तरफ हिज्बुल्लाह और दूसरी ऑर्गेनाइजेशंस ने सीरिया और लेबनोल की साइड से इजराइल पर हमले जारी रखे ईरान जो अभी तक खुलकर इजराइल के खिलाफ सामने नहीं आया था फर्स्ट अप्रैल 2024 को जब इजराइल ने सीरिया में ईरान की कॉन्सुलट पर हमला किया और उनका टॉप जनरल मार दिया उसके नतीजे में ईरान भी अब पहली बार इजराइल के खिलाफ खुलकर आया है और दर्जनों ड्रोन और मिसाइल्स इजराइल पर फायर कर दिए बेशक ईरान को पहले से मालूम था कि उनका यह अटैक इजराइल आसानी से नाकाम बना देगा लेकिन यह इजराइल को सिर्फ जवाब देने का एक तरीका था यह सिलसिला जो पिछली कई दहाई से चल रहा है यह शायद आगे भी ऐसे ही चलता रहेगा अरब की दुनिया में हंगामा खीज की असल वजह मेरी नजर में यहां बसने वाले मुख्तलिफ बिलीव्स के लोगों का एक साथ रहना है दूसरा ब्रिटिश और फ्रेंच ने 100 साल पहले जो डिविजंस की उसमें रिलीजन और कल्चर को नजर में नहीं रखा गया था ब्रिटिशर्स तो अब यहां नहीं है लेकिन यह जंगे और हंगामे शायद हमेशा ऐसे ही चलते रहेंगे इस बारे में आपका क्या ख्याल है मुझे कमेंट सेक्शन में जरूर बताइएगा उम्मीद है एटीवी की यह वीडियो भी आप लोग भरपूर लाइक और शेयर करेंगे आप लोगों के प्यार भरे कमेंट्स का बेहद शुक्रिया मिलते हैं अगली शानदार वीडियो में

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