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Transcript of How to Manifest all Your Big Dreams (Spirituality Edition) ft. Daaji ‪@heartfulness‬

Video Transcript:

हमारे आज के गेस्ट है कमलेश डी पटेल जिन्हें दुनिया दाजी के नाम से जानती है जो चलाते हैं दुनिया का सबसे बड़ा स्पिरिचुअल सेंटर हार्टफुलनेस अपने 40 साल के योगदान को देखकर कमलेश सम्मानित किया गया है नमस्ते आज मैं आई हूं एक बहुत स्पेशल जगह पे इस जगह का नाम है कान्हा शांतिवनम दिल्ली से काफी दूर 1700 किमी से ज्यादा दूर हैदराबाद से एक घंटे दूर। आज मेरी कन्वर्सेशन है एक बहुत स्पेशल इंसान के साथ। मैं बात कर रही हूं आज दाजी से। वो एक बहुत रनाउंड स्पिरिचुअल गुरु हैं। ही इज द लीडर ऑफ हार्टफुल मेडिटेशन। मैं आज बात करने वाली हूं अबाउट सम वेरी इंटरेस्टिंग क्वेश्चंस जो मुझे काफी फैसनेट करते हैं। सबसे पहले मैं जानना चाहूंगी कि रियल स्पिरिचुअलिटी कैसे होती है? क्या होती है? कैसे आप ट्रूली अपने अंदर जाके अपने जितने भी एब है उन्हें रिमूव कर सकते हैं। कन्वर्सेशन का टाइम हो गया है एंड लेट्स गो। इस कॉन्वर्सेशन के एंड तक आप सीख चुके होंगे कैसे अपनी हायर कॉन्शियसनेस को अनलॉक करें और कैसे अपनी बिजी लाइफ में स्पिरिचुअल पावर्स का यूज करें। नमस्ते दाजी। ऑनेस्टली ऑनर है मेरा प्लेजर है। नमस्ते देव्या जी। इट्स गुड टू बी इंटरव्यूड बाय अ सक्सेसफुल पर्सन एंड नो जनरली वी हैव पीपल हु आर रियली नॉट वेल ऑफ एंड दे मेक पॉडकास्टिंग एज अ प्रोफेशन टू अर्न मनी जी बट पर्सन लाइक यू इट्स आउट ऑफ़ पैशन परहैप्स टू स्प्रेड द वर्ल्ड इन द इन द वर्ल्ड व्हाट कैन बी गुड हाउ दे कैन चेंज देयर लाइफ्स सो दिस इज़ गोइंग टू बी एन एक्सेप्शनल पॉडकास्ट। दादी जब मैं आ रही थी तो मेरे पास एक काफी लिस्ट थी क्वेश्चंस की जो मैंने सोचे थे, रिसर्च किए थे। आके किसी ने मुझसे पूछा कि दिव्या आप कैसे क्वेश्चंस पूछेंगे एंड इंस्टेंटेनियसली मेरे पास एक ही रिस्पांस आया फ्रॉम द हार्ट। समस यू आर एट हार्टफुलनेस। सो आपने एक इतनी सुंदर ऑर्गेनाइजेशन क्रिएट की है। इतनी सुंदर जगह क्रिएट की है दैट आई थिंक पहुंचते ही आई फील माय हार्ट इज ओपन एंड मैं शायद अपने दिमाग को साइड में रख रही हूं। एंड ऑल द क्वेश्चंस जो मैं आपसे पूछ रही हूं। आई रियली नॉट मेरे व्यूअर्स हैं, बच्चे हैं। बट शायद मैं अपने लिए पूछ रही हूं। अह दीज़ आर ऑल क्वेश्चंस जो अह प्रॉब्लम्स हैं, इशूज़ हैं जो मेरे को फेस होते हैं। एंड आई वुड लव कि आई टेक सम इनपुट्स बैक एंड इंप्लीमेंट देम इन माय लाइफ्स विथ माय किड्स एंड माय फैमिली एंड ऑफ कोर्स अह द लार्जर पपुलेशन। लेट अस नो। चलते हैं। सो दास जी चालू करना चाहूंगी मैं आपकी किताब से ऑन होली तीन गर्स। यस। अह आई विल स्टार्ट बिफोर योर आंसर कि 24 तीर्थंकर हैं। अह मैं जैन हूं। और मेरी लव मैरिज थी। सो व्हेन आई फर्स्ट मेट माय हस्बैंड रूबल। तो उन्होंने बोला दादी जी से मिलना पड़ेगा। और अगर दादी जी हां करेगी तभी हम शादी कर सकते हैं। तो दादी जी से मिलके सबसे पहली चीज मैंने रट के गई थी। मैंने 24 तीर्थंकर के नाम बताए। और उनके सिंबल्स बताए और उसके बाद दादी जी ने बोला अच्छा ठीक है कुड़ी ठीक है शादी कर लो बहुत अच्छा सो एंड आई वुड लव टू टॉक अबाउट दिस कि हम तीर्थंकर की बात करते हैं हम 24 भगवान की बात करते हैं ये हमारे से पहले रहते थे यू नो एंड हम सोचते हैं कि उनकी स्टोरीज उनकी लाइफ इतनी अलग थी वो अलग जनरेशन की थी तो उनकी लाइफ की टीचिंग्स और जैसे उन्होंने अपनी लाइफ लीड की है आज के यूथ के लिए आज दिव्या के लिए और उसके स्टूडेंट्स के लिए कैसे रेलेवेंट हो सकती है? हां 10 साल पहले की फैशन डिजाइन क्लोथ्स भी आज आप पहन नहीं सकती हो। तो आप चाहती हो कि 2000 5000 6000 और जो ऋषभ जी जो थे फर्स्ट तीर्थंकर वो तो कब हुए 72 पीढ़ियां जो हुई राजा दशरथ की तो आप पीढ़ियों की उम्र आप गिन लो 30 साल। सो गिनते रहो आप। सो मिनिमम 12,000 इयर्स तो होएंगे ही वो और उनको आज आप अडॉप्ट करना चाहोगे उनकी विचार शैली अलग-अलग रहेगी। लेकिन जो मेन सत्य है वो कभी बदलता नहीं है। रहनी करनी बदल सकती है। लेकिन जो एसेंस है सभी तीर्थंकरों के ऋषभ सिंह महावीर तक और आप किसी को पसंद करना चाहोगे कि कौन अच्छे हैं तो आपको आपकी एक्सरसाइज एकदम फेल हो जाएगी लेकिन उससे फायदा होगा क्योंकि आप एक चीज कंक्लूड कर पाओगे सब एक है। सबका एसेंस एक है और वह हमें बनना है। वह एसेंस को बनना है। और वह एसेंस जो है उनकी जो अंदर की जो आध्यात्मिक हालत है उसको पकड़ने के लिए रादर उन वो हालत को पकड़ने से ही हम उनके जैसे बन सकते हैं ना कि उनकी पूजा पाठ करने से है ना सपोज आपके बच्चे हो और आपकी पूजा पाठ करते ही रहे और दिव्या जैसे नहीं बने लेकिन बेवकूफ बनते ही रहे बनते ही रहे तो क्या फायदा है पूजा मत करो दिव्या की हर दिन हर रात आप घुटते रहते हो उपवास करते हो फास्टिंग करते हो सन्यास लेते हो लेकिन उनके जैसा चरित्र उनके जैसी बनने की चाहना तो होती है लेकिन वो कौन सी चीज है जिसको करने से आप उनके जैसे बन सको और उनकी जितनी भी मूर्तियां हम देखते हैं एक ही मैसेज देता है। एंड वह मैसेज है ध्यान। हम सब ध्यान मुद्रा में है। जी इन सबके अलग-अलग सिंबल्स भी है। वो भी हमें एक मैसेज देते हैं। विजुअल ग्राफिक्स जो कहते हैं सब जैसे बनियन ट्री के नीचे कोई ध्यान करेगा या महावीर जी जैसे साल के नीचे ध्यान करेगा कोई पीपल के नीचे करेगा कोई बबूल के नीचे करेगा तो इट आल्सो एक तरह का संदेश दे रहे हैं हमें जैसे रामायण में हम पढ़ते हैं हनुमान जी राइट छाती खोल खुल के खड़े हैं। वो दिखाते हैं कि मेरा राम और सीता तो मेरे हृदय में है। उसको बाहर मत ढूंढो। अयोध्या में अब नहीं मिलेंगे। इसलिए सब फेल होता है। इसलिए सब झगड़ा होता है। दिल में ढूंढोगे तो लगेगा कि सब 24 अलग सेम है। और आप देखोगे ऋषभ मुनि के। वंशज है श्री रामचंद्र तो अब अयोध्या और हम लोग कहते हैं यह अलग है, वह अलग है। यह तो बड़ी बेवकूफी है। और सब छोड़ के भाग जाना ध्यान करने के लिए आपको कहीं पे भी जाने की जरूरत नहीं है। जो छूटना है वो मन से छूटना है। आप भागोगे कहीं से वहीं से छूटता नहीं है। दादी। सो एसेंशियली जो आप बोल रहे हैं और जो मैं समझ रही हूं कि हमने एक माइंड सेट बना लिया है कि भगवान जी तो कोई और है। उनके जैसे हम बन नहीं सकते हैं। तो उनकी हम पूजा कर लेते हैं। अ एंड आई थिंक दिस ये दिस इज अ कांसेप्ट ऑफ यू नो एक्चुअली स्पिरिचुअलिटी क्या है? अगर मैं सोशल मीडिया और आज के दिन बात करूं तो किसी यू नो लोग अ मैनिफेस्टिंग करेंगे, नाम जाप करेंगे, अ साइलेंट सिंग करेंगे एंड फिर सोचेंगे कि हम स्पिरिचुअल बन गए। बट रियल स्पिरिचुअलिटी एक्चुअली व्हिच इज़ मे बी अपने ईगो से जैसे आपने बोला कि अपनी ईगो में ना रहें। अपनी एक सेंस ऑफ लव से वर्ल्ड को देखें। लेकिन हम उसकी तरफ नहीं जा रहे हैं। सो एक्चुअल अगर बोले तो रियल स्पिरिचुअलिटी क्या होता है? अच्छा बहुत बढ़िया क्वेश्चन है आपका। तो आध्यात्मिकता जो है स्पिरिचुअलिटी उसको समझने के लिए पहले तो समझना पड़ेगा कि धर्म क्या है? धर्म हो सकते हैं हिंदू, मुस्लिम्स, क्रिश्चियंस। लेकिन जो अंदर का एसेंस है स्पिरिट दैट्स व्हाई द नेम स्पिरिचुअलिटी सेम है। एक्सप्रेशनंस आर डिफरेंट। दूसरी चीज है कि धर्म में हम मान्यता रखते हैं कि मेरा प्रभु, मेरे प्रॉफेट, मेरा लॉर्ड और हर एक की डेफिनेशन अलग-अलग है। वो धर्म डिवाइड करते हैं। मैं हूं ये आप यह हो। जब हम आध्यात्मिकता की ओर बढ़ते हैं आगे। तब जो हम मानते हैं कि ईश्वर है वह सर्वव्यापित है, सर्वज्ञानी है और सर्वशक्तिमान है। ये जो मान्यता जो से हम चलते हैं अध्यात्म आध्यात्मिकता में जो शब्द है उनकी अनुभूति हो जाती है। ईश्वर सर्वव्यापी है। तो आपको अनुभूति होने लगती है। स्टार्टिंग विद योरसेल्फ मुझ में है। मुझे उनकी अनुभूति हो रही है। जब मुझ में भी हो रही है तो धीरे धीरे धीरे आपको लगेगा कि वह सब में भी है। हम सब उनसे हैं। तो दिस इज अ नेचुरल प्रोग्रेशन अनुभूति। तो देयर इज अ वेरी स्ट्राइकिंग डिफरेंस। एक है धर्म में मान्यता है। आध्यात्मिकता में अनुभूति है। फीलिंग्स फीलिंग्स या एंड दैट कम्स ओनली फ्रॉम द हार्ट। जब हम धर्म की ओर जाते हैं तो हम फिक्स कर लेते हैं। यहां ही ईश्वर है। देवालय में ही ईश्वर है। मंदिरों में ही ईश्वर है। उनको हम बाहर बैठा देते हैं। घर में भी रखोगे तो कोने में कहीं पर रहेंगे। मैं मेरा धंधा करता रहूंगा जैसे करना है। इसलिए ईश्वर को हृदय में बैठाना लोगों को तकलीफ देता है क्योंकि बार-बार बोलेगा यह मत करो यह मत करो यह मत करो तो पागल हो जाएंगे लोग। आपको एक ही एक बार सपोज़ ऋषभदेव खुश हो गए आप पे। दिव्या मैं बहुत खुश हूं आपसे। आपके घर आना चाहता हूं। आपके साथ तीन चार साल रहूंगा। आपके साथ घूमते फिरते रहेंगे। आपकी हालत क्या होगी? ऋषभ जी छोड़ो मुझे। मुझे जो करना है करने दो। बोलेगी ना तू चिढ़ जाएगी। दादी विद्यानंद सागर जी आए थे हमारे घर जब मैं छोटी थी। हम्म। तो हमारे को पूरा घर साफ करना पड़ा था। क्योंकि एक गुरु जी आते हैं तो फिर आपको पूरा आहार देना होता है। सो आपको इतनी प्रिपरेशन करनी होती है कि आई कैन अंडरस्टैंड कि आपको खुद साफ होना होता है। अगर आप भगवान जी को बट वो एक्सटर्नली तो हम साफ कर सकते हैं। बहुत इजी है। बहुत आसान है वो तो। जी। कितने नौकरों को बैठा लो आप साफ हो जाएगा। जी लेकिन अंदर कौन करेगा? जी नो सर्जन कैन डू इट। तो अंदरूनी की जो सफाई होती है इट इज़ योर मेंटल एटीट्यूड। और उसका भी प्रोसेस है हार्टफुलनेस में। हम कैसे अपनी सफाई रखें? जैनिज्म इज द फर्स्ट ट्रेडिशन। जी। जहां ये सफाई के बारे में बात करते हैं। शुद्धिकरण के बारे में। नो अदर रिलजन टॉक्स अबाउट प्यूरी योरसेल्फ परहप्स इट स्टार्टेड वि ऋषभ जी एंड ही वाज़ द फर्स्ट इन्वेंटर ऑफ हाउ टू ट्रांसपोर्ट योर कॉन्शियसनेस टू द हाईएस्ट राजयोग की शोध उन्होंने की प्राणाहुति से वह किसी को भी पहुंचा देते थे लेकिन आजकल किसी में वह ताकत नहीं है कि जो अपने संकल्प से आपको ध्यानमई बना दे। हां हार्टफुलनेस में आप किसी भी ट्रेनर के पास पहुंच जाओगे विनीता को भी आप पहुंच जाओगे तो आपको वही हालत देगी जो ऋषभ जी दे रहे थे। तो दिस टेक्निक वाज इन्वेंटेड ही ऋषभ जी गिफ्टेड इट टू माय आदि गुरु लाला जी महाराज कि लो ये टेक्निक ये संभालो मेरे समय के बाद कोई नहीं कर पाया तो वो टेक्निक से ध्यान में हम आगे बढ़ते हैं। हमारी जो कॉन्शियसनेस है जो अवेलेबल उसको ट्रांसपोर्ट कर लेते हैं इंटू सुपर कॉन्शियसनेस। और ध्यान जो के बारे में सब मूर्तियां बिता दिखाती है हमको कि आप सब ध्यान करो। ध्यान का मतलब क्या है? आप व्हाट इज द मीनिंग ऑफ ध्यान एस पर योर अंडरस्टैंडिंग? थॉट सोचना। एग्जजेक्टली ऑोजिट है। क्योंकि सोच और कॉन्शियसनेस इट्स अ प्रजन। एक सोच हो गई तो कॉन्शियसनेस इज ऑन दैट सोच। इट इज़ फिक्सेटेड। कॉन्शियसनेस वुड लाइक टू बी फ्लूइड। इट इट वुड लाइक टू राइज़ इनू सुपर कॉन्शियसनेस एंड इट वुड लाइक टू आल्सो गो इनू सबकॉन्शियस। सो इन वन वे यू कैन से जब मेरी सोच होती है एक लेवल पर हूं। ध्यान से हाउ कैन आई रीच द सुपर कॉन्शियसनेस? दैट मींस ध्यान इज अ प्रोसेस ऑफ ट्रांसपोर्टिंग योर कॉन्शियसनेस टू हायर लेवल बिय्ड योर प्रेजेंट थॉट। संस्कृत जो शब्द है लाइक मेनी शब्द इन जैनिक लिटरेचर उसके बारे में थोड़ी बात करेंगे। जैसे संवर है आश्रय और आश्रव निर्जरा मीनिंगफुल ध्यान एक संधि से बना है शब्द धी प्लस यान धी का मतलब है अल्टीमेट विज़डम हाईएस्ट प्रज्ञा उच्चतम प्रज्ञा और यान का मतलब है साधन या व्हीकल व्हीकल दैट ट्रांसपोर्ट्स यू टू द हायर लेवल ऑफ कॉन्शियसनेस लीडिंग टू उच्चतम प्रज्ञा। सो दैट्स अ प्रोसेस। नाउ कोई भी व्हीकल हो इट डजंट मूव विदाउट फ्यूल। इट रिक्वायर्स फ्यूल। तो टू ट्रांसपोर्ट कॉन्शियसनेस टू हायर लेवल। व्हाट सॉर्ट ऑफ़ अ फ्यूल विल यू हैव? इट हैस टू बी सलर। उनसे भी सूक्ष्म होना चाहिए। जब हम खाते हैं, अन्न लेते हैं वो तो सॉलिड है। लेकिन उसके जो ब्रेकडाउन होता है डाइजेशन के बाद पार्टिकल फॉर्मेशन सब मॉलिक्यूलर लेवल पे हो जाता है। तो जिसकी वजह से यह सूक्ष्म हो जाता है। देन इट गेट्स अब्सॉर्ब इन आवर डाइजेस्ट थ्रू डाइजेस्टिव सिस्टम देन बिकम्स ब्लड। तो जो भी हम अब्सॉर्ब करना चाहते हैं इट हैस टू बी मोर रिफाइंड देन मायसेल्फ। सो समथिंग दैट प्रोपेल्स माय कॉन्शियसनेस। दैट समथिंग हैज़ टू बी सलर मोर सूक्ष्म मोर रिफाइंड एंड हाउ विल यू फाइंड दैट? तुम्हारे हाथ में ही कॉन्शियसनेस नहीं है तो यू नीड अ गाइड वन लाइक ऋषभ जी हु कुड ट्रांसमिट द द मोस्ट रिफाइंड एनर्जी कॉल्ड प्राणाहुति ऋषभ जी का नाम बहुत बार वेद उपनिषद में आ गया है एंड दिस इज़ हिज इन्वेंशन आल्सो द जस्ट एस अन्नस्य अन्नम है खाने के लिए अन्न लेते हैं हमारे शरीर का पोषण करता है जरूरी चीज है दूसरा दूसरा अपने मन मनोमय कोष एंड विज्ञानमय कोष का पोषण करने के लिए हम पेरेंट्स हमको अर्ली एज में सिखाते हैं। इट दे नर्चर आवर मनोमय एंड विज्ञानमय कोष आवर एल्डर्स आवर सोसाइटी आवर लिटरेचर फ्रेंड्स गुड बैड एवरीथिंग वी लर्न बट नो वन सेस दिस इज व्हाट कैन नरिश योर सोल एंड फॉर दैट यू नीड ऋषभ जी अगेन से ओनली पर्सनालिटी लाइक हिम कैन ट्रांसमिट एंड थैंक्स टू आवर आदि गुरु एंड ह पार्टनरशिप विद रिजर्व जी दे रिवोलशनाइज एंड मेड इट फंडामेंटली अवेलेबल टू ऑल एंड स्री एंड यू कैन अटेंड दिस ड्यूरिंग योर लाइफ टाइम व्हाइल लीडिंग अग्रेस द लाइफ यू डोंट हैव टू लिव द मटेरियल वर्ल्ड टू गेट एक्सेस टू स्पिरिचुअलिटी। जहां ईश्वर है वहां स्पिरिचुअलिटी है। एंड योर ईश्वर योर आत्मन इज इन यू एंड व्हेन दैट ईश्वर इज इन यू दैट आत्मन इज इन यू। दैट हेवन इज इन यू। दैट तीर्थ इज इन यू। आप ही खुद तीर्थ आप ही तो तीर्थंकर भी आप हो जाओगे। बट आप सोचोगे कि उनके सिवा और कोई हो ही नहीं सकता है। तो आपने खुद पर ब्रेक लगा दी। हम एोगेंटली नहीं कहते हैं कि हम बन गए जाएंगे या बनेंगे। लेकिन एक तरह का गर्व तो होना चाहिए। हां और पिताजी नाराज थोड़ी होते हैं। मुझसे अच्छा बेटा बनेगा या बेटी बनेगी तो नाराज थोड़ी होते हैं। ऋषभ जी वो आपसे खुश होएंगे कि दिव्या बहुत आगे बढ़ चुकी है। मुझसे भी महावीर से भी आगे बढ़ चुके हैं। तो वो लोग तो खुश होएंगे। क्यों उनके जैसा कोई दूसरा नहीं आएगा। सो यह जो शास्त्रकार है ना दे थिंक बाय प्रजिंग दी तीर्थंकर मुझे कुछ मिल जाएगा लेकिन वो ऐसे आप नहीं खुश कर सकते हो कि आप आप आखिरी हो आपके आपसे अच्छा कोई आने ही वाला नहीं है वो बड़ी बेवकूफी है ना जी आपने बहुत अच्छी बात बोली एंड जैसे हम आपने बहुत चालू में बताया था कि रिलीजन बांटता है। सब बोलते हैं हम जैन हैं। हम हिंदू हैं, हम मुस्लिम हैं। लेकिन अगर आप दीपावली का दिन देखेंगे जब राम जी वापस आए थे अयोध्या से। उसी दिन महावीर जी को मोक्ष मिला था। वो जेनीस के लिए भी सबसे बड़ा दिन है। तो सारे रिलीजन कहीं ना कहीं कनेक्टेड हैं। लेकिन हमने अपनी मेंटल रिक्वायरमेंट के हिसाब से उन्हें काट दिया है। बट अगर हम तीर्थंकर की बात करेंगे, स्पिरिचुअलिटी की बात करेंगे और मैं अपने बच्चों की बात करती हूं। मैं किसी से बात करूंगी कि स्पिरिचुअल होना है, ध्यान करना है। एंड एक रिस्पांस यह होता है मैडम हमें काम करना है, जॉब करनी है, जॉब करके पैसे कमाने हैं। पैसे कमाने हैं, गाड़ी खरीदनी है, गाड़ी आएगी, घर आएगा तब लड़की आएगी। तब शादी होएगी, तब बच्चे होएंगे तब हम गृहस्थ बन सकेंगे। तो एक ये माइंडसेट है कि स्पिरिचुअल क्या आप गृहस्थ होते हुए भी क्या आप हासिल करते हुए भी एस्पिरेशनल होते हुए भी मटेरियलिस्टिक होते हुए भी क्या हम स्पिरिचुअल हो सकते हैं क्योंकि तीर्थंकर तो सब कुछ छोड़ के उन्होंने फिर यह योग पाया है बट क्या इसमें बैलेंस है ऑफ लिविंग अ नॉर्मल लाइफ कि मैं चाहता हूं कि मैं काम करूं अचीव करूं लेकिन फिर मैं स्पिरिचुअल िटी कैसे लाऊं अपनी लाइफ में और बैलेंस करूं। पहले ही मैंने आपको बताया कि जो भौतिक जीवन है और आध्यात्मिक का समन्वय होना है इंटीग्रेशन। जी जस्ट एज अ पक्षी जो है पंछी उनको बहुत दोनों पंख चाहिए। एक पक्ष से तोड़ेगा नहीं। आई प्रैक्टिस्ड एज अ फार्मासिस्ट इन न्यूयॉर्क। आज ही मेरे को ख्याल आया कि पहले जो प्रैक्टिस करता था मैं फार्मेसी काउंटिंग पिल्स एंड गिविंग इट टू पेशेंस बेस्ड ऑन प्रिस्रिपशंस और जैसेजैसे आध्यात्मिकता में ग्रोथ हुई और जैसेजैसे आगे बढ़े और तो बाद में आखिर में भी वही होता था काउंटिंग टेबलेट्स एंड गिविंग इट टू द पेशेंट्स जैन सिस्टम भी वही बताती है जैन नॉट जैन जैन लाइक बुद्धिज्म जी वह बोलते हैं कि कि व्हाट डू यू डू बिफोर योर रियलाइज़ेशन? सो ही सेज़ कि बिफोर रियलाइजेशन आई वाज़ कटिंग वुड एंड फैचिंग वाटर। आफ्टर रियलाइजेशन आई वाज़ कटिंग वुड एंड फैचिंग वाटर। वही काम। लेकिन अंडर करंट जो है वह बदल जाता है। योर भाव, योर लव चेंजेस। सपोज़ इन योर ट्रांसपोर्टेशन बिज़नेस, यू हैव योर यू नो सबोर्डिनेट्स। हुम यू पे एक्स अमाउंट ऑफ़ मनी। फॉर एग्जांपल, लेट्स से 2 एंड लाख। पर मंथ। आप बोलोगे थोड़ा एक्स्ट्रा काम करो ना। बहाना बनाएंगे। ठीक है। लेकिन आप उनको बोलो। मैं आपको इस प्रॉपर्टी की इस बिजनेस की पार्टनर बनाती हूं। ओनर तो आपसे भी ज्यादा काम करेगा वो। सो ओनरशिप चेंजेस एवरीथिंग। और ओनरशिप हाउ डस यू चेंज योर एटीट्यूड? यू लव समथिंग। यू लव मोर मनी, योर रिवॉर्ड्स। सो लाइक दैट जो पेनेंसिस तपस्या में आगे बढ़ता है। बाहर घर छोड़ देने से तपस्या आसान हो जाती है। सब कुछ छोड़ दिया। सब कुछ आसान हो गया। किसी के साथ रहोगे ना बहुत मुश्किल होती है। यह करना है, वह करना है, उसको संभालना है, उसको संभालना है, बिजनेस देखना है, ड्राइवर का भी समझना है, मेड आएगी या नहीं आएगी। है ना? सो गृहस्थ जीवन इफ यू थिंक कि इतना आसान है, इतना आसान भी नहीं है। सन्यास ले लिया तो आप सुखी हो गए। कुछ करना ही नहीं है। एक्सेप्ट बेगिंग यदि आप में गर्व नहीं है, अभिमान नहीं है तो आप बेगर ही रहोगे। मैं आपको एक सही कहानी बताता हूं। 1976 मंथ ऑफ जून हमारा वेकेशन था तो मैंने डिसाइड कर लिया आज सन्यासी ले लेते हैं घर छोड़ दिया और हमारा घर नर्मदा के बहुत नजदीक था नर्मदा किनारे और थोड़ी दूर ही शिव जी का मंदिर था और शिवजी के मंदिर पे तो परिक्रमा होती रहती है वो नर्मदा के किनारे परिक्रमा बहुत होती है खास करके जो अगरी अगोरी बाबा है वो शुरू से अंत तक नर्मदा के तो घूमते ही रहते हैं और अगोरी बाबा चुंगी मारते रहते हैं ऐसे तो मैं सुबह पहुंच गया तो एक बहुत बुजुर्ग थे 80 साल से ऊपर वो मुझे देखते रहे 5 बजे आए मेरे पास करीबन बोले बेटा क्या चाहते हो मैं आपको देख रहा हूं सुबह से मैंने बोला आप मेरे गुरु बन जाओ आपकी सेवा करूंगा मैं सन्यासी बनना चाहता हूं हूं तो ही टियर्स इन ह आईज। वो रोने लगे कि बेटा तू वापस चला जा। तेरी जैसी उम्र में ही मैंने घर छोड़ा था। अभी तक भटकता रहा हूं। मुझे कुछ मिला नहीं है। इन सब जितने भी मेरे साथ जो अगोरीज है उनकी आंखें देखो। किसी की आंखों में कोमलता नहीं है। भूखी आंखें हैं। तरसती है। अब कोई घर नहीं जा सकता है। क्योंकि वाओ प्रतिज्ञा ली थी। लोग हसेंगे। तो उन्होंने जीवन बचा दिया। मैं तो वापस चला गया फिर। एंड सेम मंथ आई फाउंड एक्सेस टू माय गुरुजी। थ्रू अ लेडी शी वाज़ शी हेल्ड फ्रॉम अ वेरी ऑर्थोडॉक्स मारवाड़ी फैमिली चेंज एंड शी वाज़ ट्रेन बाय माय आदि गुरु टू ट्रांसमिट व्हाट ऋषभ जी इन्वेंटेड एंड इंस्टेंटली आई मीन आई वाज़ ट्रांसपोर्टेड टू अ डिफरेंट लेवल एंड यू नो एक ताज्जुब की बात है। उन्होंने मुझे पूछा आप ध्यान करना क्यों चाहते हो? जनरली पीपल गेट वेरी हैप्पी कि आइए ध्यान करते हैं। लेकिन मुझे उसने हैरान कर दिया उस फर्स्ट सेशन में। आप ध्यान करना क्यों चाहते हो? यहां क्यों आए? इंस्टेड ऑफ़ फीलिंग हैप्पी शी वाज़ ट्राइंग टू कंफ्यूज मी। मैंने बताया कि आई वांट टू बिकम लाइक स्वामी विवेकानंद। हर जगह पवित्र स्थानों पर जाके तीर्थ धामों की यू नो यात्रा करनी है। शादी नहीं करोगे? मैंने बोला नहीं क्या जरूर है? तो क्या आप ईश्वर से भी बहुत इंटेलिजेंट हो? क्यों? तो हमारे गुरु जी कहते हैं कि गॉड वाज़ नॉट अ फूल टू क्रिएट टू सक्सेस। इफ वन वाज इनफ। तो सेलिब्रेसी इज अननेचुरल अकॉर्डिंग टू दिस ट्रेडिशन। सबके अलग-अलग है। लेकिन हमें बहुत सोचना पड़ता है कि क्या मेरे लिए ठीक है। आपके लिए ये ठीक है तो आप करो। बट नो द फैक्ट इट इज़ अननेचुरल। दे कीप ह्टिंग सबकॉन्शियस विल कीप ह्टिंग। अनफुलफिल डिजायर्स ऑलवेज हंट्स। एंड दैट्स वेयर जैनिज्म हैव फ्यू प्रिंसिपल्स व्हेन इट समवेयर हाउ टू ब्लॉक द इनकमिंग डिजायर्स बट हाउ कैन यू डिजायर्स आर नॉट फिजिकल नो वॉल्स कैन स्टॉप देम देयर इज़ अनदर स्टेप इट्स लाइक अ घर में धुआं आ गया कोई सिगरेट पिया फर्स्ट थिंग इज़ नॉट टू अलव द स्मोक टू कम इनसाइड दैट इज़ समवर् हम सेकंड इज़ इफ एट ऑल दैट स्मोक सिगरेट स्मोक हैज़ कम इन योर रूम हाउ टू गेट इट आउट ऑफ योर रूम ओपन विंडोज़ एंड डोर्स दैट स्टेप इन जैनिज्म इज कॉल्ड आश्रव जिस चीज ने आश्रय ले लिया है मेरे घर में उसको निकालना है। मेरे हृदय में जिस नेगेटिव ने आश्रय ले लिया है उसको निकालना है। दैट इज़ आश्रम। और यू विल रीच अ स्टेट कॉल्ड निर्जरा। इट्स लाइक यू हैव एम्प्टीड द रिवर ऑफ डिजायर्स। एंड ओनली देन यू कैन अटेन अ स्टेट ऑफ़ कैवल्या। व्हेन यू आर टोटली डिजायरलेस। दैट डज़ नॉट मीन दैट आई शुड नॉट थिंक ऑफ़ फ़ूड व्हेन आई एम हंग्री। दैट डज नॉट मीन आई शुड नॉट ड्रिंक वाटर व्हेन आई एम थस्टी। सो इट इज अ नेचुरल थिंग। फुलफिल दोज़ हंगर्स। दीज़ आर नॉट अगेंस्ट योर डिजायर्स बट टू थिंक दैट आई मस्ट हैव पिज़्ज़ा। और आई मस्ट हैव सम गुड ड्रिंक बिफोर आई कैन क्वेंच माय थस्ट। इट विल बी रोंग। सो अब्सोलुटली नथिंग रोंग इन हैविंग सम एंबिशन। इट सेट्स अ गोल। हम बिकॉज़ यू नीड टू हैव अ गोल इन मटेरियल लाइफ। इन स्पिरिचुअल लाइफ यू कैन नॉट फिक्स अ गोल बिकॉज़ स्पिरिचुअलिटी इज नॉट अ सेंस ऑफ़ अचीवमेंट। मोमेंट यू थिंक इन आध्यात्मिकता कि मैंने कुछ पाना है और पा लिया है तो आप घमंडी बन जाओगे। तो शरणागति लॉर्ड कृष्णा दैट्स व्हाई ही सेस मोस्ट मिसअंडरस्टुड श्लोक इन द वर्ल्ड टुडे इस गीता कर्मवाधिकारस्ते मा फलेशु कदाचन कि कर्म करो फल की आशा मत रखो क्यों आपके यहां कौन बेवकूफ काम करेगा सैलरी तो चाहिएगा ना कृष्ण भगवान खुद फ्रूट लेके आए फुल फ्रूट की आशा जन्म लेने से पहले उन्होंने ध नक्की कर लिया था कि यह मुझे पाना है। इस पाने के लिए मुझे यह करना है। यू नो दैट नो इसको मारना है। इसको सुधारना है। इसको सुधारना है। सो अकॉर्डिंगली ही एडजस्टेड हिज वर्क स्केजूल। तो ही वाज़ नॉट फुलिश इनफ टू से दैट डोंट एक्सपेक्ट रिजल्ट्स ऑफ योर कर्मा। देन मेनी इयर्स लेटर दिस कन्फ्यूजन वाज़ रिजोल्व इन माय हार्ट वि ह ब्लेसिंग्स ओनली एंड ही केम मी रियलाइजेशन ऑफ दिस फैक्ट दैट इन माय टाइम्स कर्मा एंड श्रमा दिस टू टर्मिनोलॉजीस वेर यूज्ड फॉर डिफरेंट एक्शंस श्रमा इज फॉर रेगुलर लेबर फिजिकल लेबर इन दिस मंडेन वर्ल्ड कर्मा इज एनीथिंग यू डू फॉर हायर एंटीिसिपेशन हायर फुलफिलमेंट जब ब्रह्म विद्या के लिए आप कर्म कर रहे हो तो ईश्वर से आप डिमांड नहीं कर सकते हो कि मुझे यही चाहिए इसलिए फल की इच्छा मत रखो ब्यूटीफुल आई एम आई वास मेसमराइज व्हेन ही क्लेरिफाइड दिस थिंग श्रम उसके लिए तो करना पड़ेगा मुझे मुंबई जाना है या कोलकाता जाना है टिकट लेना है पैसा बनाना है तो आई हैव टू फाइंड द वे हाउ टू मेक मनी। सो वी हैव टू अंडरस्टैंड व्हाई दे सेड व्हाट दे सेड एंड फाइंड द राइट मीन्स ऑफ़ डूइंग इट। दादी ब्यूटीफुल। आई थिंक ऑनेस्टली आपने मेरे को इतनी क्लेरिटी दी है इन दी स्टोरीज राइट फ्रॉम व्हाट यू हैव सेड ऑफ कि अगर कोई यू नो गोइंग टेकिंग वनवास इज नॉट एन आंसर। सब कुछ त्यागना बहुत आसान होता है। लाइफ लीड करना मुश्किल होता है। एंड बीइंग अ पार्ट ऑफ दैट इज प्रोब्ली योर पर्पस और मोरेंट। एंड ये जो आपने क्लेरिफिकेशन दिया है ऑफ धर्मा ऑफ श्रम एंड कर्म। यह आई थिंक बहुत डिस्टिंक्ट है क्योंकि हम इसको काफी कंफ्यूज कर देते हैं। दाजी इसमें एक और मैं वर्ड जोड़ना चाहूंगी इज ऑफ सैक्रिफाइस। कि त्याग जैनिज्म में भी त्याग की बहुत बात होती है कि आप अ खाना त्यागो या कुछ चीजों को त्यागो। एंड अगेन अगर मैं यूथ के पॉइंट ऑफ व्यू से देखूंगी तो सैक्रिफाइस और त्याग एक ऐसा वर्ड है जो वो नेगेटिवली पर्सीव करते हैं। सो आपका त्याग के ऊपर क्या टिप्पणी है ऑफ़ अ यंग पर्सन? त्याग इज़ गुड। करना चाहिए नहीं करना चाहिए? कितना करना चाहिए? और कैसे हम उसको इनकपोरेट कर सकते हैं अपनी लाइफ में विदाउट फीलिंग कि हम कुछ छोड़ रहे हैं और फीलिंग बैड अबाउट इट। इसी हिंदूइज़्म में जो खास करके योग शास्त्र में जी पतंजलि मुनि के जी अष्टांग योग जी फर्स्ट टू स्टेप्स के बारे में जानते हो यम एंड नियम देन आता है आसन प्राणायाम प्रत्याहार धारणा ध्यान समाधि जो फर्स्ट टू स्टेप्स है टू माय अंडरस्टैंडिंग दे वर बोरोड फ्रॉम जैनिज्म यमा एंड नियमा दे वेरी वेल मेंशन एंड डिस्क्राइब व्हाई वी शुड इंप्लीमेंट यम एंड नियम यम एंड नियम यम का मतलब है यू नो यम जानती हो यम कौन है यम इन लॉर्ड ऑफ़ डेथ जी डेथ लॉर्ड ऑफ़ डेथ लॉर्ड ऑफ़ डेथ जी वो आता है आपको पिक अप कर जाता है ऐसे मीन्स यू हैड टू बिकम लॉर्ड ऑफ डेथ फॉर व्हाट टू फिनिश ऑफ सम ऑफ द वीक पर्सनालिटीज दैट यू आर हारबरिंग इनसाइड योर हार्ट चोरी करना सेलिब्रेसी के बारे में बताया ब्रह्मचर्य रखना अवॉयडिंग थिंग्स सर्टेन टेंडेंसी को मार डालो इट्स ऑल अबाउट मार डालो इसको खत्म करो इसको खत्म करो कहीं पे भी लिखा नहीं है कि मां को छोड़ दो मां का त्याग करो ये तो हमारी हमारा धर्म है मां को लुक आफ्टर करना तो देयर इज अ मिसअंडरस्टैंडिंग त्याग वही चीज का करना चाहिए जो हमारे एववोल्यूशन में हमें तकलीफ दे। आपके इवोल्यूशन में मां तो तकलीफ नहीं देती है ना। पिताजी भी नहीं देते हैं। हस्बैंड भी नहीं देगा। क्यों छोड़ना है हस्बैंड को? यदि साथ में वह आपके साथ ध्यान करें, बच्चे भी ध्यान करें तो सब तीर्थंकर हो जाएंगे। एटलीस्ट उनकी यात्रा उनकी और तो शुरू हो जाएगी। पहुंचे ना पहुंचे लेकिन हमने शुरुआत की लेकिन उनको जन्म देने के बाद आप सब चले जाओगे। तो क्या आप उन पर न्याय करोगे? गलत है ये सब। बड़े दुख की बात है। पीपल लाइक टू गो टू एक्स्ट्रा माइल्स इन प्लीजिंग अनइविज़िबल। बट व्हाट इज ऑब्वियस दे कीप डिस्ट्रइंग दैट इज व्हाई जैनिज्म डिस्पाइट ऑफ हैविंग ग्रेट क्वालिटीज कुड नॉट स्प्रेड ऑल अक्रॉस। वी कैन नॉट अंडरस्टैंड। एंड इट्स नॉट प्रैक्टिकल। नॉट ओनली नॉट लॉजिकल बट इट्स नॉट प्रैक्टिकल। हाउ कैन यू अप्लाई समथिंग इन प्रैक्टिस व्हेन इट डज़ नॉट लॉजिकली अपील टू योर हार्ट। और टू योर माइंड। हम्म यू कैन गेट कन्विंस्ड आउट ऑफ़ फियर परहप्स। फियर ऑफ़ मिसिंग आउट। यू नो दिस वाइडली यूज़्ड वर्ड फोरमोर। मैं भी रह जाऊंगा इधर तो क्या होएगा जी डुबकी नहीं मारी आपने महाकुंभ में मारी थी आपने तो ठीक है Instagram पे सबने मारी थी हां वही तो प्रॉब्लम है नहीं मारूंगा तो क्या हो जाएगा कबीर साहब को याद रखो कबीर बोलते थे गंगाजल इतना पवित्र होता कि आपको मोक्ष दे देते तो ये मगरमच्छ और मछलियों का भी मोक्ष हो सो वी आर गोइंग टू फायर विद सर्टन बिलीफ सिस्टम्स फेथ इज गुड नॉट ब्लाइंड फेथ जैसे जैनिज्म की जो बेसिक फिलॉसोफीस है कि अंदर से एक पवित्रता होनी चाहिए और यह पवित्रता के साथ-साथ सादगी होनी चाहिए। प्यूरिटी एंड सिंपलीसिटी तो परिटी को हटाने के लिए इंप्युरिटीज को हटाने के लिए आप क्या करोगे? भूखे रहोगे जी सफरिंग करोगे उससे थोड़ी होता है क्योंकि आप टॉर्चर जो कर रहे हो वो शरीर को कर रहे हो। मन की बात कुछ और है। आप सीधा करना चाहते हो मन को और मारते हो शरीर को। सिंपलीसिटी मींस कॉम्प्लेक्सिटी ऑफ लाइफ। दे आर द पोलर ऑोजिट तो कॉम्प्लेक्सिटी को आप कैसे हटाओगे बाय इंक्रीजिंग दिस फैक्टर ऑफ मोर एंड मोर लेस एंड लेस तभी हो सकोगे लेकिन आजकल देखा जाता है मोर एंड मोर ऑफ मोर एंड मोर इवन इफ यू आर अ स्ट्रांग जैनी बट सब में देखो मोर एंड मोर मोर एंड मोर इवन दैट ऑफ डिटचमेंट मोर एंड ना दिखावा होता है लेकिन जब सिंपलीसिटी की ओर जाते हो ना लिखा हुआ जीरो हो जाता है तो एक एक क्रिटिसिज्म भी है और एक तरह की चाह भी है कि जैनिज्म जैसा जो पंथ जो दीक्षा आई मीन जो दिखाता है हमें वह सिंबॉलिकली बहुत पावरफुल है। लेकिन उनको कोई समझे नहीं है। सब के सब महाराजा थे। और एक समय ऐसा आया कि चलो ये ये रास्ता पकड़ते हैं। वो तो एक्सपेरिमेंट है उनके लिए। आज की दुनिया में वह पॉसिबल ही नहीं है। सपोज महावीर जी आज आए वही रूप में कोलकाता में घूमेंगे तो ममता क्या बोलेगी? पकड़ो इसको। कृष्ण भी आएंगे। इवन मथुरा में जाएंगे, वृंदावन जाएंगे, वो घूमेंगे तो लोग उनको पकड़ाएंगे। कोई नाटक ही आएगा। और उनके जमाने में भी लोग पहचान नहीं पाए कि ईश्वरीयता है उन्होंने में। तो आज उनकी फिजिकल एब्सेंस में और तीर्थंकर को आप कैसे पहचानोगे और अंत ला दिया है कि वो आखिरी ही है उसके बाद कोई होएगा ही नहीं यह भी इगोइस्टिक स्टेटमेंट है ऑफ कम्युनिटी हर धर्म अभी यही बोलता है इसके बाद और कोई नहीं प्रॉफेट के बाद और कोई नहीं जीसस के बाद और कोई नहीं मोजिस के बाद और कोई कोई नहीं। महावीर के बाद और कोई नहीं। कितना घमंड है। यू मीन टू से कि मेरे बच्चे उनके जैसे नहीं बन सकते। पहले ही से ही आपने नकारात्मक एटीट्यूड कर दिया तो आगे कैसे बढ़ोगे? नेगेटिव एप्रोच से आप पॉजिटिविटी कभी भी नहीं ला सकते हो। महावीर जैसा अभी कोई आएगा ही नहीं, बनेगा ही नहीं। तो मैं क्यों कोशिश करूं तपस्या करने की? एंड यू सी ऑल रिलज विदाउट एन एक्सेप्शन दे थ्राई ओनली ऑन टू थिंग्स फियर ऑफ हेल एंड टेंप्टेशन ऑफ हेवन ओनली टू थिंग्स एंड पीपल दे थ्राइ दे फॉलो रिलजन ओनली बिकॉज़ ऑफ़ दिस टू थिंग्स अदरवाइज कौन करेगा कोई नहीं करेगा कैवल्य का भी एक मोह है उसको जाना भी नहीं है कि क्या है? वह हालत क्या है? फिर भी इट लुक्स सो अट्रैक्टिव। सो पीपल डू ऑल काइंड्स ऑफ़ थिंग्स टू अटेन दैट इंक्लूडिंग सैक्रिफाइसिंग देयर लाइफ्स द पेरेंट्स, देयर चिल्ड्रन एंड व्हेन यू अबंडन व्हेन यू रन अवे फ्रॉम योर ड्यूटी, नो गॉड कैन बी मेड हैप्पी और कंटेंटेड। अभी और कुछ है सामान। सो अभी तो चालू हुए हैं। बट एस पर योर इफ यू हैव कंफर्ट गो अहेड दाजी यू नो आई वांट टू टॉक अबाउट द कांसेप्ट ऑफ़ फॉरगिवनेस। हमने किताब में भी फॉरगिवनेस की बात की है। महावीर जी बोलते हैं कि जब सांप ने भी उन्हें काटा था तो उन्होंने उनको माफ़ कर दिया था। एक मक था जिसने जिसके किसी प्लेट में किसी ने स्पिट किया उन्होंने उनको माफ कर दिया। एंड फॉरगिवनेस हेल्प्स यू अर्न गेट रिड ऑफ़ योर कर्मा। सो मैं इसके बारे में बात करना चाहूंगी कि हाउेंट इज़ फॉरगिवनेस या अगर आप किसी को फॉरगिव करते रहेंगे तो हाउ डस दैट इंपैक्ट और समवन कीप्स हर्टिंग यू? सो एट व्हाट पॉइंट इज़ फॉरगिवनेस ओके एंड व्हाट पॉइंट इज इट नॉट? फॉरगिवनेस इज़ अ गुड क्वालिटी बट वन हैज़ टू बी प्रैक्टिकल। किसी को माफ़ करना यह अंदर की हालत है। इट्स अ क्वालिटी ऑफ़ योर हार्ट। सपोज़ यू हैव अ बॉय और अ गर्ल और बोथ। बोथ। सपोज़ दे मिसबिव। डू यू से आई हैव फॉरगिवन माय चिल्ड्रन? डांट पड़ती है? अच्छा वुड यू कंसीडर डांट पढ़ना एज अ वायलेंस बिकॉज़ योर इंटेंशन ऑफ पनिशिंग इज डिफरेंट। यदि सपोज बिजनेस पार्टनर है, चोरी करता है, चीटिंग करता है। यू कैन फॉरगिव फ्रॉम द हार्ट। उसका बोझ नहीं रखना है। डोंट मेक योर हार्ट सो टॉक्सिक। बट समवन इन द बिजनेस वर्ल्ड उसको काटना ही पड़ेगा। आई कैन नॉट डिस्ट्रॉय दैट मैन वि सम बुलेट्स बट आई कैन डिसोसिएट फ्रॉम बिजनेस वर्ल्ड एट द सेम टाइम आई शुड रिस्पेक्ट। उन्होंने किया जो किया मैं तो बदल नहीं सकता हूं। बट व्हाई शुड आई कैरी दैट टॉक्सिन इन माय हार्ट? यदि कोई बार-बार मुझे झापट मारे एक्चुअली डोंट बी लाइक जीसस और गांधी जी हु सेड किसी ने आपको एक थप्पड़ मारा तो दूसरा चिक दे दो दिस इज अ मिसअंडरस्टैंडिंग ऑफ कंपैशन मिसअंडरस्टैंडिंग ऑफ नॉन वायलेंस अरे गुरुजी बोलते हैं कोई एक मारे तो उनको दो तीन दे दो बट डोंट हेट दैट पर्सन हेट आपको ब्रिंग डाउन करेगी। इट्स अ नेगेटिव इमोशन। इट ब्रिंग्स यू डाउन डेफिनेटली। इट मेक्स योर हार्ट हैवियर एंगर कैरिंग दैट बोज़ ऑफ रिवेंज। इफ यू डोंट फॉरगिव व्हाट हैपेंस? यू वांट टू टेक रिवेंज। जी एंड रिवेंज मेक्स योर हार्ट कॉन्स्ट्रिक्ट बिकम्स वेरी हैवी। एंड यू कैन नॉट थिंक करेक्टली। सो देयर आर क्स दी आर व्हाट वी कॉल बटरफ्लाई इफेक्ट दाजी आपको कभी गुस्सा आता है आता है ना डिस्पाइट द मेडिटेशन जितना आपका प्रैक्टिस बट इट डजंट टच माय हार्ट इट डजंट टच योर हार्ट आई हैव टू डू समटाइम पीपल हु आई गेट एंग्री अपॉन दिस स्माइल बिकॉज़ देयर इज़ नो हेटेड बिहाइंड इट सी दे आर हैप्पी दैट आई एक्सप्रेस माइसेल्फ एट लीस्ट नाउ इन अर्लियर डेज़ इज़ ऑफकोर्स व्हेन पीपल डिड अंडरस्टैंड व्हाई आई गेट अपसेट देन दे फील इट इट्स बिकॉज़ द ईगो हर्ट्स बट व्हेन यू नो एस्पेशली व्हेन चिल्ड्रन एंड विथ लाउड वंस व्हेन यू शेयर योर ओपिनियन अबाउट एंगर और यू से आई एम वेरी अपसेट अबाउट दिस बिहेवियर ऑफ यर्स दे विल बी ग्रेटफुल दैट एटलीस्ट यू एक्सप्रेस योरसेल्फ व्हाट यू डोंट लाइक जी सो इट अगेन डिपेंड्स ऑन योर रिलेशनशिप हाउ दैट लव प्लेस द पार्ट सी एंगर एंड पैशन बोथ आर गॉड गिवन विदाउट एंगर विदाउट दैट यू कैन नॉट मूव फदर यू कैन नॉट करेक्ट योरसेल्फ कुछ गलती हो गई तो किसी को ब्लेम करने से बदले खुद को ब्लेम करो खुद पर गुस्सा करो करो तो देखो कितना जल्दी परिवर्तन आता है आप में द डायरेक्शन ऑफ़ जो हमारा गुस्सा है क्रोध इंस्टेड ऑफ़ दिस वे कीप इट दिस वे देन यू विल बी ट्रांस ट्रांसफॉर्म्ड सिमिलरली पैशन इज़ गॉड गिवन यू कैन नॉट डिस्ट्रॉय इट विदाउट पैशन यू विल नॉट हैव पैशन इवन फॉर कैवल्या दादा जी मैंने मेडिटेशन की हार्टफेट मेडिटेशन विनीता जी एंड ऑनेस्टली आई थिंक एक ट्रांसफेटिव एक्सपीरियंस था मेरे लिए। काफी डिफरेंट फॉर्म्स ऑफ थॉट कंट्रोल ट्राई किए हैं। बट आई फेल्ट बहुत जल्दी आई वाज़ इन अ स्टेट ऑफ समाधि बोले या डीप थॉट बोले। व्हाट इज सो स्पेशल अबाउट द हार्ट फेल्ट मेडिटेशन? मैंने बोला ना आपको ऋषभ जी का ट्रांसमिशन है ये प्राणाहुतियां प्राणाहुति दैट ट्रांसपोर्ट योर कॉन्शियसनेस टू अ डिफरेंट लेवल व्हाट व्हाट इज ट्रांसमिशन? इट इज़ दैट दैट एनर्जी देयर इज़ नो बेटर वर्ड एक्चुअली टू से व्हाट इट इज़। सो वी से इट्स एनर्जी ट्रांसफर्ड। बट इट्स नॉट बिकॉज़ इट इज़ मोर रिफाइंड देन कॉन्शियसनेस बिकॉज़ टू चेंज टू ट्रांसफॉर्म आवर कॉन्शियसनेस एंड लिफ्ट टू अ नेक्स्ट लेवल इट नीड समथिंग मोर रिफाइंड देन देन दैट एंड दैट इज़ दैट। इफ आई लाइक इफ आई आई मीन इफ आई मे पुट इट दिस वे। समथिंग इफ आई से यू विल हियर इट बट यू वोंट अंडरस्टैंड इट। व्हेन आई से दिस एनर्जी वाज प्रेजेंट दिस प्राणाहुति कॉल्ड आदि शक्ति जनरली आदि शक्ति इज नोन एज आई मीन इन दिस वर्ल्ड इज नोन एज आइदर दुर्गा और सम अदर नेम इन डिफरेंट कंट्रीज ओरिजिनल द प्राणाहुति टू मी इज दैट ओरिजिनल शक्ति आदि शक्ति जो क्रिएशन की जब बात करते हैं साइंस बोलता है इट बिगेन ऑल फ्रॉम सिंगुलरिटी हमारे शास्त्र कहते हैं एस्पेशली बेस्ड ऑन वेदाज़ सिमिलर थिंग इट वाज़ स्टर कंपन हुआ और वहां से शुरुआत हुई और उपनिषद में भी ये लिखा है कि जो ओरिजिनल हालत जो थी वो कैसी थी? मेरे को संस्कृत तो इतना आता नहीं है इसलिए हिंदी में बताऊंगा या इंग्लिश में कि अब जब सोचो कि सृष्टि थी ही नहीं तब क्या तारे थे, सितारे थे, ग्रह नहीं थे, उपग्रह नहीं थे, गैलेक्सीस नहीं थी। कुछ भी नहीं था। जब कुछ भी नहीं होता है तो क्या होता है? अंधेरा होता है ना? तो दैट डार्कनेस इज द ओरिजिनल फोर्स एंड दैट डार्कनेस इज डिप्टेड एज काली। समझ गए? सो काली इज़ नॉट अ पर्सन। काली इज़ अ फॉर्म डिपिक्टेड। इट्स अ विजुअलग्राफिक ऑफ द ओरिजिनल स्टेट ऑफ द यूनिवर्स। एंड हर फॉर्म मूव में ब्लड। उजिंग आउट वि द टंग आउट इट्स अ वेरी वटाइल वायलेंट फॉर्म इट डिपेक्ट्स एट मोमेंट ऑफ क्रिएशन ब्लास्ट सो वायलेंट मिलियंस एंड बिलियंस ऑफ एटम बम्स ब्लास्टेड फ्रॉम दैट एंड दैट मोमेंट यू कैन नॉट इमेजिन द वायलेंस ऑफ दैट सो दैट फॉर्म ऑफ काली दैट्स व्हाई वी से व्हाट वास देर फर्स्ट प्रकृति दैट प्रकृति इज काली द फेमिनाइन एनर्जी इज़ द ओरिजिनल एनर्जी एंड दैट्स व्हाई इट्स कॉल्ड आदि शक्ति एंड दैट इज़ टू मी आई थिंक इट्स प्राणाहुति टू टैप इंटू दैट ओरिजिनल फोर्स एंड डायरेक्ट इट टुवर्ड्स द पीपल हु वुड लाइक टू एक्सपीरियंस इट इट्स हार्टफुल मेडिटेशन यू कैन कॉल एनी मेडिटेशन समवन हैस टू बी एबल टू ट्रांसमिट इट टू यू दादी कैन आई रिक्वेस्ट वी डू अ स्माल मेडिटेशन ओके ध्यान शुरू करें तो दैट्स ऑल बस कीजिए। व्हाट अ फिनोमिनल एक्सपीरियंस। यह जो हार्टफुल मेडिटेशन थी, आई रियली फल्ट कि एट सम लेवल आई एक्सपीरियंस गॉड। हम सोचते हैं कि भगवान मंदिर में हैं, बाहर है, मूर्तियों में हैं। बट इन 60 मिनटों में जो मैंने रियलाइज किया है कि गॉड हमारे अंदर है और हमारे को अपने अंदर अगर देख के इसको समझ लें इट प्रोबब्ली इज द बेस्ट थिंग वी कैन डू फॉर आवरसेल्व्स। थैंक यू टू हार्टफुलनेस फॉर हैविंग अस हियर। एंड माय ग्रेटट्यूड टू दाजी फॉर इनवाइटिंग मी एंड फॉर शेयरिंग ह वर्ड्स ह थॉट्स एंड दिस कन्वर्सेशन।

How to Manifest all Your Big Dreams (Spirituality Edition) ft. Daaji ‪@heartfulness‬

Channel: Divya Jain

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