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Transcript of बाल्टी भरके आलू की सब्जी खा लो | Saas Bahu | Hindi Kahani | Moral Stories | Bedtime Stories | Story

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[संगीत] बाल्टी भरकर आलू की सब्जी खा लो। अनिल, सुनील और सुशील तीनों भाई डाइनिंग टेबल पर मां के साथ बैठकर खाने का इंतजार कर रहे थे। सुधा क्या हो गया? इतनी देर से खाली कटोरी चम्मच लेकर बैठे हैं। खाना लाने में इतनी देर क्यों लगा दी? मैं देखती हूं आखिर इन तीनों को हुआ क्या है। अरे ला रे बस ले आए। ये लो आलू की सब्जी। वाह सब्जी की खुशबू तो बहुत बढ़िया आ रही है। मेरे तो पेट में भूख से चूहे कूद रहे हैं। बहू खाना बनाने में आज इतनी देर कैसे लग गई? तुम तीनों बहुएं हो रसोई में काम करने के लिए। फिर भी इतनी देर लगा दी। मां जी, हमने जो पहले आलू बनाए थे वो मीठे निकले। फिर अगर हम मीठे आलुओं की सब्जी देते तो आप में से कोई ना खाता। और हम तो सोच रहे थे आज कोई हरी सब्जी बना लेंगे। पर इन तीनों में से कोई हरी सब्जी नहीं खाता इसलिए हमने नहीं बनाई। हरी सब्जी का तो नाम सुनकर ही मेरा खाने से मन उतर जाता है। मुझे तो बस आलू ही पसंद है। मैं तो कभी भी नहीं खाऊंगा हरी सब्जियां। मेरे खुद के गले से नहीं उतरती। मुझे तो बस आलू की सब्जी मिल जाए। अरे आलू की सब्जी के सामने क्या ये लौकी टिंडे तो आलू की सब्जी का मुकाबला कोई सब्जी नहीं कर सकती। सही कहा बेटा। मुझे तो हमेशा से ही आलू की सब्जी बहुत अच्छी लगती है। तुम्हारे बाबूजी जब तक जिंदा रहे आलू ही खाते रहे। बोले मेरी तेरवी पर भी आलू ही बनवाना। तुम्हारे मामा ने गोभी आलू रखवाए। उसी समय आत्मा बनकर आ गए। गोभी बिल्कुल नहीं पड़ेगी। तेरवी मेरी है तो खाना भी मेरी पसंद का होगा। बताओ। हलवाई भी घबरा गए। बोले बहन जी भाई साहब को बोलो परलोक में आराम से सोएं। हम आलू ही बनाएंगे। अच्छा मतलब अपनी 13वीं पर बाबूजी खुद आ गए अपनी पसंद की सब्जी बनवाने। क्या बात है मां? फिर क्या हुआ? तुम तीनों तो छोटे थे स्कूल में पढ़ते थे। तुम्हें कहां याद होगा? हलवाई घबरा गए और एक भी सब्जी उन्होंने आलू के साथ नहीं बनाई। बस आलू ही आलू बनाए। सोच लो वही आदतें तुम्हारी हैं। तुम तीनों को भी आलू ही पसंद है जैसे मुझे और तुम्हारे बाबूजी को। तीनों बहुएं सुधा, मधु और सुमन रसोई में आ जाती हैं और आपस में फुसफुसाने लगती हैं। तभी तो आलू खाकर आलू जैसे बन गए हमारे पति। अरे साथ चलते हैं तो ऐसा लगता है मानो इन्होंने पेट पर कोई ढोल लटका रखा हो। इतना बड़ा पेट कर रखा है आलू खाकर। आपने देखा नहीं ससुर जी भी कितने मोटे थे। फोटो में खाली तों दिखाई देती है। और मां जी ने भी तो इतना वजनदार शरीर किया हुआ है। इन सबकी वजह से हमें भी आलू खाने पड़ते हैं। हम लोग भी आलस कर जाते हैं कि अपने लिए अलग क्या सब्जी बनाए पर ऐसे काम नहीं चलेगा। हमें कोई ना कोई तरीका तो सोचना ही होगा जिससे इनकी हर समय आलू खाने की आदत छूट जाए। बच्चों को भी कोई पौष्टिक आहार नहीं दे पाते। जब देखो आलू-आलू वही तो भाभी इन लोगों की आदत बच्चों में भी आ गई है। हमारे बच्चे भी अब सिर्फ आलू ही मांगते हैं। टिफिन में आलू दे दो बस। इन सबका बस चले तो रोजाना इन्हें बाल्टी भरकर आलू दे दो तो यह तो वह भी खा जाएंगे। 1 सेकंड मेरे दिमाग में एक आईडिया आया है। क्या कान लाओ? तीनों बहुओं ने आपस में मिलकर एक योजना बनाई और फिर उसी शाम बाल्टी भरकर आलू की सब्जी डाइनिंग टेबल पर रख दी। बाल्टी भरी हुई आलू की सब्जी देखकर सब हैरान रह गए। बेटा ये सारी सब्जी तुम्हारी दादी मां, तुम्हारे पापा और तुम्हारे दोनों चाचू खाएंगे। हां, थोड़ी बहुत सब्जी तुम सब भी खा लेना। कैसी बातें कर रही हो बहू? यह तो बहुत सारी सब्जी है। इतनी सब्जी तो 50 लोग खा लेंगे। मां जी, हम तीनों की तो यही शर्त है। अब रोजाना आप सबको बाल्टी भरकर आलू की सब्जी मिला करेगी। आपको पूरे दिन में एक बाल्टी आलू की सब्जी खत्म करनी है। इसके अलावा कुछ नहीं बनेगा। और अगर आप लोगों ने बाल्टी भरकर आलू की सब्जी नहीं खाई तो फिर हम तीनों जो रसोई में बनाए करेंगे आप सबको वही खाना होगा। अरे हम सबको तो आलू की सब्जी बहुत स्वाद लगती है। हम तो बाल्टी भर कर खा सकते हैं। क्यों भाई लोग? सही कह रहे हो भैया। आलू की सब्जी तो हमें जितनी मर्जी खिला लो। हम तो पूरा दिन खा सकते हैं। चलो शुरू करते हैं। पूरा दिन में तो हम खा ही जाएंगे। तीनों भाई बहुत खुश थे। उन्हें लग रहा था कि उन्हें उनकी पसंद की सब्जी मिल रही है और वह उस सब्जी को बहुत चाव से खा भी लेंगे। पर पहले दिन तो बाल्टी भरकर सब्जी खत्म हो गई। दूसरा दिन आया तो फिर से तीनों बहू ने बाल्टी भरकर आलू की सब्जी लाकर डाइनिंग टेबल पर रख दी। अब सास तीनों भाइयों और सभी बच्चों का मुंह देखने वाला था। मम्मी ये क्या? आज हमें फिर से आलू खाने पड़ेंगे। नो मम्मा नो। मम्मी मुझे तो मैगी खानी है। मम्मी मैं आलू नहीं खा सकता। मेरा बिल्कुल भी मन नहीं है आलू की सब्जी खाने का। मुझे तो पिज़्ज़ा खाना है। बहू कुछ और बना लेती। कल से पूरा दिन आलू खाकर मुझे तो आ गैस बन रही है। मां जी, शर्त के हिसाब से आपको रोजाना तीनों टाइम आलू की सब्जी खानी है। वरना हमारे हिसाब से चलना पड़ेगा। और जैसा हम खाना बनाते हैं वैसा ही खाना पड़ेगा। हम तीनों खाकर देखते हैं। अगर खाई जाएगी तो। वरना हमें तो वही खाना पड़ेगा जो ये तीनों बनाएंगी। अनिल, सुनील और सुशील तीनों ने अभी शर्त हारी नहीं थी। तीनों भाई आलू की सब्जी खाने लगे। पहले एक कटोरी खाई, फिर दूसरी, फिर तीसरी। बाल्टी की सब्जी देखकर उन्हें लगा कि यह सब्जी खत्म हो जाएगी। पर धीरे-धीरे उनका जोश ठंडा पड़ने लगा। दोपहर होते-होते सब ने मुश्किल से आधी बाल्टी सब्जी खत्म की थी। सास और बच्चों ने तो हार मान ली थी और वो लोग वही खाने को तैयार हो गए जैसे सुधा, मधु और सुमन बनाएंगे। बस अब रह गया था तीनों पत्तियों का हार मानना। अगले कुछ दिनों तक अनिल, सुनील और सुशील तीनों ने बाल्टी भरकर आलू की सब्जी खाई। पर हफ्ते के आखिरी दिन उन तीनों की भी हिम्मत जवाब दे गई। यार बहुत हो गया। पेट तो पूरी तरह से भर गया है। अब तो आलू की सब्जी देखी तक नहीं जा रही। मुझे तो भूख लगना ही बंद हो गई है। ऐसा लग रहा है जैसे आलू की फैक्ट्री में काम कर रहा हूं। मैं तो अब और नहीं खा सकता। आज के बाद मैं कभी आलू की सब्जी का नाम भी नहीं लूंगा। क्या हुआ? तुम सब तो कह रहे थे कि बाल्टी भर कर भी खा सकते हो। अब क्या हुआ? अभी तो आधी बाल्टी बची है। उठो खाओ या फिर हार मान लो। अभी तो एक ही हफ्ता हुआ है। आप लोग तो कह रहे थे आप रोजाना आलू की सब्जी खा सकते हो। आधी बाल्टी बची हुई है। खत्म करो। नहीं नहीं सुनील के नहीं कहते ही तीनों भाइयों ने एक दूसरे की तरफ देखा। उनकी आंखों में थकान और हार साफ झलक रही थी। वे समझ चुके थे कि आलू की सब्जी की ये बाल्टी भर चुनौती उनके लिए असंभव थी। सुधा मधुसुमन हम हार मानते हैं। हमसे नहीं खाई जाएगी यह सब्जी। आलू और नहीं खाए जा रहे। प्लीज हमें माफ कर दो। आज से हम लोग वही खाएंगे जो तुम तीनों बनाओगी। हरी सब्जी, लौकी, टिंडे जो मन करे बनाओ। बस आलू मत बनाना। मैं कसम खाता हूं कि आज के बाद अगर किसी ने मुझे आलू का नाम भी लिया तो तो मैं खुद किचन में जाकर अपने लिए करेले की सब्जी बना लूंगा। पर आलू मत खिलाना। नहीं नहीं आलू नहीं। अरे तो इतने आलू थोड़ी ना खाने के लिए कहा था तुम्हारे बाबूजी ने। अपनी तेरवीं के दिन आलू की सब्जी के साथ-साथ दाल और भरवा टिंडे भी रखवाए तीनों बेटे अपनी मां का मुंह देख रहे थे और तीनों बहुएं जोर से हंस पड़ती है। अगले दिन से सबने वही खाया जो तीनों बहुओं ने बनाकर खिलाया। भैया जरा सामान आराम से उतारना। कोई भी चीज टूटनी नहीं चाहिए। टेंशन मत लीजिए भैया जी। हम आपके फ्लैट में सामान को आराम से रख देंगे। बहुत देर से तेरे हाथ की बढ़िया अदरक वाली चाय का इंतजार कर रही थी। कितना रह गया सामान सारा ऊपर फ्लैट में रख दिया ना नमस्ते अंकल जी नमस्ते बेटा नए आए हो लगता है जी अंकल जी आज ही आया हूं बस सामान शिफ्ट कर रहा हूं आप भी इस एरिया में रहते हैं क्या हां बेटा वो सामने कोने वाला फ्लैट मेरा है वहां दूध की दुकान है ना वहीं से दूध लेने जा रहा हूं तुम्हें भी कुछ खरीदना हो तो उस दुकान से ले लिया करो वहां पर दूध दही मक्खन पनीर सब कुछ मिलता है जी अंकल बिल्कुल थैंक यू अंकल जी लगता है। हमारे सामने वाले फ्लैट में शिफ्ट किया है क्योंकि सामान वहीं आ रहा है। अकेला ही लग रहा है। लड़का कोई साथ नहीं है। मां जी रात के खाने में क्या बनाऊं? नीचे सब्जी वाला खड़ा हुआ है। एक काम करती हूं कटहल ले आती हूं। कच्चा-कच्चा लग रहा है। बढ़िया बन जाएगा। हां, ठीक है बहू। कटहल ही ले आओ। मेरा भी बहुत मन है कटहल खाने का। आरती नीचे गली में सब्जी वाले से सब्जी लेने चली गई। शोभा उसके उदास चेहरे को ऐसे ही देखते रहती थी। आरती पहले ऐसी नहीं थी। वो हंसती बोलती सबसे खूब बातें करने वाली थी। 7 साल पहले आरती के पति का देहांत हो गया था। उसके बाद आरती अपने मायके चली गई क्योंकि उसके माता-पिता ने एक और लड़का देखा जिससे आरती दूसरी शादी कर सके। पर वो लड़का भी गलत था। इसलिए आरती ने उससे शादी करने के लिए मना कर दिया और उसके बाद फिर से आरती अपनी बूढ़ी सास के पास आ गई और तभी से आरती अपनी सास शोभा के साथ रह रही है। शोभा ने कई बार आरती को दूसरी शादी करने के लिए कहा। पर आरती ने फिर मन नहीं बनाया। ओ सब्जी वाले भैया कटहल कैसे दिया? आरती की आवाज सुनकर रोहित नाम के उस आदमी की नजर आरती पर गई जो नया-नया फ्लैट में आया था। रोहित ने आरती को हाय किया। आरती ने बहुत धीरे से हाय का जवाब दिया। हाय हाय भैया आधा किलो कटहल दे दो। कटहल यह तो मेरी भी फेवरेट सब्जी है। भैया जी सारा सामान आपके फ्लैट में रखवा दिया है। हमारा हिसाब करो तो हम जाएं शाम होने वाली है। अब हां देता हूं। आरती ने कटहल लिया और चुपचाप ऊपर फ्लैट में आ गई। रोहित भी अपने फ्लैट में सामान सेट करने लगा। आरती की रसोई की खिड़की से रोहित की रसोई की खिड़की साफ दिखाई देती थी। आरती रसोई में कटहल की सब्जी बना रही थी। अचानक उसकी नजर रोहित की रसोई की खिड़की की तरफ गई। रोहित आटे के डिब्बे को रसोई की ऊपर वाली अलमारी में रख रहा था। अचानक डिब्बे का ढक्कन खुल गया और सारा आटा रोहित के मुंह से लेकर कपड़ों पर गिर गया। रोहित ऐसा लग रहा था मानो कोई आटे में भीगा हुआ भूत हो। यह देखकर आरती अपनी रसोई से जोर से हंसी। मानो पहली बार इतने सालों बाद आरती के चेहरे पर हंसी आई हो। रोहित भी उसकी तरफ स्माइल करके देखने लगा। आरती ने अपनी हंसी को रोका। तभी शोभा आ गई। अरे बहू हंसना क्यों बंद कर दिया? तुम हंसती हुई बहुत प्यारी लगती हो। ऐसे ही हंसती रहा करो। रोहित बेटा आरती बता रही है कि तुम्हें कटहल की सब्जी बहुत पसंद है। एक काम करो तुम बहुत थक गएगे सामान सेट करने में। आज रात का खाना हमारे घर ही खा लेना। थैंक यू आंटी जी। कटहल की सब्जी का नाम सुनकर तो मेरे से रहा ही नहीं जाएगा। मैं टाइम से पहले आ जाऊंगा। आरती उसे टेढ़ी नजरों से देख रही थी। वो चुप रही। थोड़ी देर बाद रोहित खाना खाने के लिए उनके घर आया। आंटी जी ये फूल आपके लिए। तुम्हें कैसे पता कि मुझे गुलाब के फूल पसंद है? बहुत सुंदर गुलदस्ता है। आओ बेटा बैठो। आरती रोहित के लिए वो आम का पन्ना ले आओ। आरती ज्यादा बात नहीं कर रही थी। शोभा ने रोहित को आरती के बारे में बताया। बस यही कारण है कि आरती उदास रहती है। मुझे तो इसकी बहुत चिंता होती है। वैसे अपने बारे में कुछ बताओ बेटा। आंटी जी मम्मी पापा इस दुनिया में नहीं है। भैया भाभी हैं। वो ज्यादा मतलब रखते नहीं। बस अकेला हूं। 2 साल पहले एक लड़की से बात हुई थी। बात सगाई तक पहुंची थी। सर, लड़की ने मुझे इसीलिए शादी के लिए मना कर दिया था क्योंकि मेरे पास कार नहीं थी। अब देखिए ना मैंने अपनी मेहनत से फ्लैट खरीद लिया। धीरे-धीरे कार भी खरीद लूंगा। पर उस समय लड़की ने मेरी बात पर ध्यान नहीं दिया और मैंने भी सोचा कि शायद शादी करने के लिए मुझे और कमाने की जरूरत है। कोई बात नहीं बेटा। समय सब कुछ ठीक कर देता है। तुम मेहनती हो। कोई ना कोई अच्छी लड़की जरूर तुम्हारी जिंदगी में आएगी। अरे और कटहल की सब्जी लो ना बेटा। बस आंटी जी मजा आ गया। आरती जी आपके हाथ की कटहल की सब्जी बहुत टेस्टी है। पता है आंटी जी? मेरी मम्मी बिल्कुल ऐसी ही कटहल की सब्जी बनाती थी। क्या हुआ था तुम्हारे मम्मी पापा को? आंटी जी पापा तो तभी चल बसे थे जब मैं और मेरे भाई छोटे थे। मम्मी अभी 4 साल पहले ही गुजरी है। भैया की शादी बाद में हुई है। लव मैरिज थी। इसीलिए उन्होंने अलग फ्लैट ले लिया। बस मैं काफी टाइम से किराए पर था तो सोचा कि अब अपना ही ले लेता हूं। आंटी जी डिनर के लिए थैंक यू। अब तो अक्सर ही रोहित और आरती के बीच चलते फिरते बातचीत। नमस्ते। हाय हेलो हो जाती थी। कभी शोभा कोई सामान लेकर आती थी और लिफ्ट बिजी होती थी तो रोहित सीढ़ियों से सामान ऊपर तक ले आता था। धीरे-धीरे रोहित सास शोभा को अच्छा लगने लगा और एक दिन शोभा ने रोहित के बारे में आरती से बात की। आरती मैं चाहूंगी कि तुम जिंदगी को एक मौका और दो। अगर तुम कहो तो मैं रोहित से बात करूं। रोहित बहुत अच्छा लड़का है और मुझे लगता है कि शायद वह तुम्हें मन ही मन पसंद भी करता है। नहीं मां जी ऐसी कोई बात नहीं है। एक कटहल की सब्जी की तारीफ रोहित ने क्या कर दी? आपको यह लगने लगा कि रोहित के मन में मेरे लिए कुछ चल रहा है। ऐसा कुछ नहीं है। ना ही मेरे मन में रोहित के लिए कुछ है और ना ही रोहित के मन में मेरे लिए कुछ है। हम सिर्फ पड़ोसी हैं। आरती शोभा को दूध देकर गैलरी में टहलने के लिए आ गई। कहीं ना कहीं शोभा की बातें आरती के मन में चल रही थी। तभी उसने देखा गैलरी में रोहित किसी से फोन पर बात कर रहा है। रोहित ने दूर से आरती को देखा और हाथ हिलाकर हाय किया और फिर से फोन पर लग गया। कुछ देर बाद आरती कमरे में आकर सो गई। अगले दिन आरती शोभा से बोली, "आप मुझे कह रही थी ना कि रोहित के मन में मेरे लिए कुछ चल रहा है। पता भी है? रात को रोहित अपनी गैलरी में फोन पर किसी से बात कर रहा था। काफी देर तक रोहित ने इतनी देर रात तक किसी से फोन पर बात की। और आधी रात के समय कोई किसी से फोन पर बात क्यों नहीं करेगा? कोई गर्लफ्रेंड होगी। तभी तो इतनी देर फोन बिजी रहा। हां, कह तो तू ठीक रही है। हो सकता है मेरे मन का वहम ही होगा। चल छोड़ कोई बात नहीं। मैं अब इस बारे में कोई बात नहीं करूंगी। अगले कुछ दिनों तक रोहित दिखाई नहीं दिया। आरती बार-बार उसके फ्लैट की तरफ झांकती तो फ्लैट के बाहर ताला ही दिखाई देता। हिम्मत करके आरती ने नीचे गार्ड से पूछ ही लिया। अरे मोहन इधर आना। बोलो आरती दीदी क्या हुआ? वो जो हमारे सामने फ्लैट पे रहते हैं क्या नाम है उनका? रोहित। वो कहां गए हुए हैं? उनके फ्लैट के बाहर कुछ दिन से ताला लगा हुआ है। वो शादी के लिए गए हैं। आरती ने गार्ड के मुंह से बस इतनी बात सुनी और उसकी आंखों में आंसू आ गए। शायद उसके मन के किसी कोने में रोहित के लिए हल्की सी जगह बनने लगी थी। पर एक बार फिर आरती का दिल टूटा। वह अब उदास हो गई। उसने रात को खाना भी नहीं खाया और चुपचाप सो गई। अगले दिन आरती को रोहित के फ्लैट से आवाज सुनाई दी। मानो कोई शोर मचा रहा हो। अरे आरती बेटा देख तो जरा रोहित किसी मुसीबत में दिखाई दे रहा है। तू जाकर मदद तो कर। रोहित कब आया? जी मां जी। आरती ने रोहित का दरवाजा खटखटाया। दरवाजा खुला हुआ था। मैं दरवाजा नहीं खोल सकता। जिसको अंदर आना है अपने आप आ जाओ। दरवाजा खुला हुआ है। आरती को यह सब अटपटा लगा। पर वो रोहित के फ्लैट में घुस गई। रोहित किचन में था और उसके दोनों हाथ चिपके हुए थे। सामने आधा कटा बिखरा हुआ कटहल रखा था। यह क्या कर रहे हो आप? और आपके दोनों हाथ चिपक क्यों गए? अरे क्या बताऊं आरती जी? दोस्त की शादी में गया था गांव। वहां उसने पेड़ का ताजा कटहल दे दिया। बोला कि मुझे पसंद है तो मैं लेता जाऊं। ले तो आया पर कटहल काटना कितना मेहनत का काम है। यह आज पता चल रहा है। मेरे तो दोनों हाथ ऐसे चिपक गए मानो इस पर गोंद लगा दी है। छुड़वाने में मेरी मदद कीजिए ना। आरती जी। आप दूर से क्या देख रही हैं? घबराओ नहीं। सरसों का तेल कहां रखा है? वो सामने बोतल रखी हुई है। आरती ने सरसों का तेल रोहित के हाथों पर छिड़का। अब दोनों हाथों को छुड़ाने की कोशिश करो। नहीं छूट रहे आरती जी। दोनों हाथ चिपक गए हैं। आप मदद कीजिए ना। आरती ने रोहित के दोनों हाथ छुड़ा दिए। थैंक गॉड आपने कितनी बड़ी मुसीबत से मुझे बाहर निकाल दिया। वैसे आईडिया अच्छा है। कटहल काटने के लिए सरसों के तेल का इस्तेमाल कर लो। पर अब मैं क्या करूं? मेरे से तो यह सब हो ही नहीं रहा है। अब हटिए सब्जी मैं बना दूंगी। आरती ने फटाफट से बढ़िया सी कटहल की सब्जी बनाकर तैयार कर दी। ऐसी सब्जी रोज खाने को मिल जाए तो कसम से मेरी तो लाइफ सेट हो जाएगी। अरे आप तो शादी कर रहे हो ना उससे जिससे रात को फोन पर बातें करते थे। इसीलिए तो आप गए हुए थे। अरे मैंने बताया तो मेरे दोस्त की शादी थी। मेरी शादी होती तो मैं इस बिल्डिंग में सभी को इनवाइट करता और आप रात में बात करने की बात कह रही हैं। वो तो मेरे बड़े भैया थे। कभी-कभी मेरा हालचाल पूछ लेते थे। दिन में हम लोग बिजी होते हैं। इसीलिए रात में थोड़ी बात कर रहे थे। वैसे बात तो मुझे आपसे भी करनी है। अगर आप इजाजत दे तो। मेरे से बात करनी है पर किस बारे में? अगर आप बुरा ना माने तो मुझे आपके हाथों की कटहल की सब्जी पूरी जिंदगी खानी है। रोहित की बात सुनकर आरती शर्मा गई। उसकी आंखों में खुशी के आंसू थे। शायद मन ही मन वो भी रोहित को प्यार करने लगी थी। आरती के साथ शोभा की खुशी का ठिकाना नहीं था क्योंकि रोहित बहुत अच्छा लड़का था। कुछ दिनों बाद पूरी बिल्डिंग के लोगों के सामने रोहित आरती के साथ सगाई करता है। और फिर कुछ दिनों बाद रोहित के किचन में बढ़िया सी कटहल की सब्जी बन रही थी। जो उसकी पत्नी आरती बना रही थी।

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