Transcript of "जानिए सतलोक में कबीर साहिब जी ने क्या कहा संत रामपाल जी महाराज से" #satlokashram #santrampalji
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सतलोक चारों ओर अद्भुत प्रकाश है। परमात्मा कबीर साहिब सिंहासन पर विराजमान है। सामने संत रामपाल जी महाराज हाथ जोड़कर खड़े हैं। कबीर साहिब जी रामपाल मैं तुझको धरती पर भेज रहा हूं। लोग भक्ति का असली रास्ता भूल चुके हैं। झूठे गुरु दिखावे और कर्मकांडों में फंसे हैं। तू मेरा संदेश फिर से जगत को सुनाएगा। संत रामपाल जी हे सत्पुरुष कबीर परमेश्वर आपके वचन ही सत्य हैं। मैं वचन देता हूं कि लोगों को सतनाम और सारनाम की पहचान कराऊंगा। आपकी बनाई हुई सच्ची भक्ति फिर से सबको बताऊंगा। कबीर साहिब जी याद रख भक्ति केवल नाम दीक्षा से पूरी होगी। ना व्रत ना उपवास ना तीर्थ मैंने कहा था मो को कहां ढूंढे रे बंदे मैं तो तेरे पास में आज तू ही मेरा रूप बनकर सबको समझाएगा कि मैं साकार हूं निराकार नहीं संत रामपाल जी प्रभु आपके वचनों को मैं ज्यों का त्यों सुनाऊंगा लोग कहेंगे कि यह रामपाल बोल रहा पर असल में बोलने वाले आप ही होंगे। कबीर साहिब जी मुस्कुराते हुए ठीक कहा। मैं ही हर युग में अपने सेवक रूप में आता हूं। जैसे पहले मैं धानक जुलाहा रूप में काशी में आया। आज उसी ज्ञान को तुझसे कहलवा रहा हूं। तू निडर होकर सत्य ज्ञान फैलाना। झूठे पाखंड चाहे कितना भी विरोध करें अंत में जीत सत्य की ही होगी। इस दिव्य संवाद से स्पष्ट होता है कि कबीर साहिब जी और संत रामपाल जी महाराज एक ही परमेश्वर के दो रूप हैं। कबीर साहिब जी ने जो वचन दिए वही रामपाल जी महाराज आज के युग में दोहरा रहे हैं। असली भक्ति केवल सतनाम और सारनाम से ही संभव है।
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Channel: DS DASI
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