Transcript of The real storey of Maharana Pratap a play - Glorious Public School Gonder
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[संगीत] केसरिया पगड़ी बनी रहे दरिया पगड़ी रहे [संगीत] हम आपको एक यात्रा पर लेकर चलते भूमि मेवाड़ की है जिसका जिक्र होते ही हल्दीघाटी के एक दृश्य हमारे सामने जन्म ले लेट है जिसमें मेवाड़ी सरदार हिंदू सूरज भारत का वीर पुत्र महाराणा प्रताप अपने चेतन पर स्वर मुगलो के श्रेष्ठ धड़ से अलग कर रहे हैं और मेवाड़ी धारा को रक्त से सच रहे हैं आज हम बड़े सौभाग्यशाली [संगीत] देश में यूं तो ना जान कितने वीर और महान योद्धा थे मगर उनमें से जो बब्बर शेर की तरह निकाला वह था महाराणा प्रताप महाराणा प्रताप के नाम से मुगल बादशाह अकबर तक कम था देश के सबसे वीर योद्धाओं में से एक थे वो राजपूत में अपने पूर्वजों के जा सही उनका अंदाज था मुगलो को भी उन्होंने नाकु चैन चबवा दिए थे महाराणा प्रताप ने वीरता से अपने प्राण इस देश की रक्षा के लिए त्याग किया थे नमन है से निडर महान योद्धा को जो सदियों में एक बार ही जन्म लेते हैं 9 मैं 1540 कुंभलगढ़ दुर्ग में माता जय बंता बाइक रक्षा के लिए धरती पर अवतरित हुए थे [संगीत] [संगीत] मेरी जा भाड़ दूसरा विमान तेरो ना भवन डू काटा शीश पड़े पर ये पग नहीं प्राचीन का देना हो वन तू ओ मी वादा रिजवान दूंगा तेरी मुझको ये जबान मेरी तुझे मारूंगा जान मेरी महाराणा प्रताप जी के राज्य अभिषेक की कहानी बड़ी रोचक है महाराणा उदय सिंह जी की अंतिम इच्छा के अनुसार कुंवर जगमाल को उदयपुर की गाड़ी पर बिताया गया था परंतु जगमाल अकबर के साथ संधि करने के लिए राजी हो गया था इस बात से नाराज होकर राजपूत सरदारों ने मिलकर कुंवर प्रताप को महाराणा बनाने की योजना बनाई परंतु कुमार प्रताप अपने पिता की इच्छा के विरुद्ध नहीं जाना चाहते थे सभी सरदारों की तरफ से कुंवर प्रताप को काका श्री मनाने के लिए जाते हैं [संगीत] सिर्फ महाराणा ही नहीं गई मेवाड़ के सर से मेवाड़ का छात्र चला गया मेवाड़ के सारे समाज और सरदार मेवाड़ की राजगढ़ी का फैसला कर रहे हैं मेवाड़ की गाड़ी का फैसला तो हो चुका है पिताश्री हमारे छोटे भाई जगमाल को राजा बनाना चाहते थे परंतु मेवाड़ की प्रजा और सरदार यह नहीं चाहते वह तो मेवाड़ का राणा आपको बनाना चाहते हैं इसलिए तो हमें यहां भेजो है नहीं नहीं यह नहीं हो सकता मेवाड़ के सरदारों को का दीजिए हम पिता श्री की इच्छा के विरुद्ध कुछ नहीं कर सकते और कहिए काका जी हम आपकी क्या सेवा कर सकते हैं मेरी सेवा नहीं मेवाड़ के सेवक को मेवाड़ की सेवा करनी मेवाड़ी सरदारों ने आपके लिए यह नजराना भेजो है नजराना कैसा नजराना कुंवारा खुद ही देख लीजिए अरे यह तो मिट्टी है हां यह मिट्टी सूरमाओं के खून से रंग इसमें बप्पा रावल राणा संग की आत्मा सो रही है आपने पहचाना नहीं इसे यह मातृभूमि है आपको आपके कर्तव्य के लिए बुलाने आई है मातृभूमि आपको इस मिट्टी के रूप में बुलाने आई लेकिन काका जी लेकिन क्या और दूसरे नज़राने में तड़पती हुई मेवाड़ी प्रजा के आंसू भी देख लो प्रताप जो मेवाड़ ने भाई हैं इन आंसुओं में हजारों विधवाओं के सुहाग सैकड़ो माता की ममता तड़पकर पुकार रहे हैं क्या अब भी आपकी तलवार मेवाड़ की रक्षा के लिए बाहर नहीं आएगी बस करो काका जी बस करो हम सब कुछ समझ गए परंतु पिताजी की इच्छा के विरुद्ध हम कुछ नहीं कर सकते एक वीर राजपूत पिता की इच्छा के लिए भूमि का कर्तव्य और करोड़ लोगों की अभिलाषाओं की बाली नहीं दे सकता और मंत्र भूमि के उधर से एक पिता की आत्मा दुखी नहीं सुखी होगी प्रताप सरदारों का विरोध और जगमाल का आगरा चले जाना क्या इन बटन से लोग यह नहीं कहेंगे की प्रताप ने सरदारों से मिलकर जगमाल को गाड़ी से हटा दिया और खुद मेवाड़ का मलिक बन बैठा आप मेवाड़ मंत्र उधर मेवाड़ रक्षा और अपने कर्तव्य से भीड़ जाना चाहते हैं ऐसा कभी नहीं हो सकता कुमार जी मेवाड़ की टूटी हुई कश्ती को बचाने के लिए आज मैं और आपकी प्रजा आपके पास आए हैं चलो कुंवर जी चलो और थम लो मेवाड़ की बागडोर को अपने हाथ में ताकि कोई शत्रु फिर से आंख उठाकर मेवाड़ की तरफ ना देख सके यह कहानी है चरण भारत की जो दरबारों में जाकर दरबारों की गाथा गायक करता था वह दरबार में जान के लिए अपनी पत्नी से पगड़ी लाने को कहता है और उसकी पत्नी उससे कहती है की गुलाम की पगड़ी पहने से अच्छा तो आप मेरी चुनरी ओड लो और शीतल यह कटाक्ष सुनकर मेवाड़ की तरफ निकाल पड़ता है और सीधा महाराणा प्रताप के दरबार में पहुंचना है राणा का दरबार लगा हुआ है एक लिंग जी की जय हो [संगीत] मैं आपके किस घर-घर को सुनकर ए रहा हूं प्रजापालक मेवाड़ केसरी महाराणा प्रताप की जय हो यह चरण की वाणी है यह लोगों की शीतल नहीं राजन आज पूरे भारतवर्ष में एक ही नाम के चर्च हैं एक ही ऐसी पगड़ी है जो अकबर के सामने झुकी नहीं रहना जी शीतल तुम अकबर के दरबार से आए हो क्या हाल है वहां का अन्नदाता आपकी प्रतिज्ञा घर-घर गंज रही है लोगों की जुबान पर दो ही नाम है मेवाड़ और महाराणा प्रताप चेनाराम केसरिया पगड़ी बनी रहे मेवाड़ पति के केसरिया पकड़ी बनी रहे एक अनोखी पगड़ी है मेवाड़ पति के सर पर केसरिया पगड़ी बनी रहे केसरिया पगड़ी बनी रहे वह वह धन्य होचारण धन्य हो तुम चरणों की वाणी ही है जिसने आज तक राजपूताना को जिंदा रखा है बोलो क्या चाहिए मुझे और कुछ नहीं चाहिए अन्नदाता केवल आपकी पगड़ी चाहिए पगड़ी पगड़ी का क्या करोगे एक लिंग जी का प्रसाद समझकर इसे सदा अपने मस्तक पर रखूंगा महाराज इन्हें हमारी एक पगड़ी भेंट की जाए याद रहे यह उसे मस्तक की पगड़ी है जो मस्तक भगवान एकलिंग के शिवाय और कहानी नहीं झुका यह अच्छी तरह जानता हूं मैं इस पगड़ी की प्रतिष्ठा अपनी जान से भी बढ़कर रखूंगा गनी खम्मा राणा जी खम्मा गनी राजा अभिषेक के बाद ही राणा प्रताप मुगलो से लोहा लेने लगे थे और अपने केले हासिल करने के लिए उनसे युद्ध कर रहे थे और तभी एक दिन दरबार में एक बुध व्यक्ति आता है और वह राणा को एक बीच में प्रतिज्ञा लेने पर मजबूर कर देता है आगे देखते हैं वह प्रतिज्ञा अरे वही बिल्कुल वही संग वही चेहरा वही तेज बोलो बाबा क्या चाहते हो [संगीत] आज तेरी प्रजा मशाल रही है उसके घर पर जल रहे हैं उसकी लहराती हुई फसलों को घोड़े पैरों तले कुछ रहे हैं माताएं रो रही है [संगीत] तुम्हारा कहना सच है बाबा लेकिन मेवाड़ की रक्षा के लिए हमारी तलवारे मुगलो से बराबर टकरा रही हैं [संगीत] की मेरी अंतिम सांस रणभूमि में दुश्मनों से लड़ते लड़ते [संगीत] में जाना चाहता हूं मुझे भी ले चलो अपने साथ ना अपने बेटे से मिलन चाहता हूं मेरा बेटा चित्तौड़ का वीर सैनिक आजाद ना हो जाए हम महलों में नहीं रहेंगे नहीं खाएंगे जारी के कपड़े नहीं पहनेगी आज से आसमान हमारा छात्र होगा तो हमारे वंशज भी हमारी प्रतिज्ञा का पालनपुर करेंगे उधर अकबर के दरबारी उसे पाल पाल की खबरें पहुंच रहे थे किरण ने हमारे नाक में दम कर रखा है धीरे-धीरे सारे केले जीत रहा है और अकबर की नींद उड़ी हुई थी और राणा ने शेर पूरा का किला भी जीत लिया था इस बात से अकबर बड़ा नाराज था उधर अकबर का दरबार चल रहा है केसरिया पगड़ी बनी रहे [संगीत] [संगीत] अनोखी पगड़ी है जो इन कदमों में झुकी नहीं मेवाड़ पति के सर पर करने की ज्योति जय बनी रहे केसरिया [संगीत] केसरिया पगड़ी बनी रहे क्या गुस्ताखी है पगड़ी उतार कर आदाब क्यों बजाई इस गुस्ताख का सर उतार लेना चाहिए आलंपना अपराध क्षमा दूर की पगड़ी है जिसने आज तक अपना सर किसी के सामने नहीं झुकाया कौन है वो शख्स मेवाड़ केसरी [संगीत] में प्रताप को जो वीरता का प्रतीक है तू लो पुरुष तू मंत्र भगत तू अखंडता का प्रतीक है अगर ऐसा ही है हम भी देखते हैं तुम्हारे उसे राणा की पगड़ी हमारे सामने झुकते है या नहीं मानसिंह हुकूमत यह हमारा हम है तुम्हें जितनी फौजी चाहिए ले जो और उसमें वार्ड पर हमला कर दो और उसे मगरूर पर तप का सर मां बैदौला झुका दो जो हुकमलीजा शक्ति सिंह तुम भी मानसिंह के साथ जो और अपना इंतकाम लो अगर तुम्हारी बहादुर ने प्रताप की गार्डन दरबार ऐसा ही में झुका दी तो मेवाड़ की सूबेदारी तुम्हें दे दी जाएगी जो हुकुम अलीगढ़ में नाच रंग बंद रहेगा हल्दीघाटी के युद्ध में 80 हजार मुगलो की सी के सामने कल 20000 राजपूत की सी थी एक-एक राजपूत पांच-पांच मुगलो को कैट रहा था यह बड़ा ही भयंकर युद्ध था इस युद्ध में महाराणा प्रताप ने अपने सबसे प्रिया घोड़े चेतन महाराणा प्रताप की कथा में चेतन का जिक्र ना हो तो महाराणा प्रताप की कहानी अधूरी है चेतन उनका बड़ा ही बहादुर और स्वामी भक्ति घोड़ा था इस युद्ध के बाद महाराणा प्रताप अरावली के पर्वतों में चले गए अंदर से बिल्कुल तुठलातों को देखते हुए उनके में संधि पत्र लिखने का ख्याल जन्म लेने लगा था सोच रहा हूं की अकबर को सैंडी पत्र लिख डन ऐसा कभी नहीं हो सकता राणा जी भामाशाह मुझे भी विश्वास नहीं हो रही है बात सुनकर की क्या अब जंगल का शेरों के साथ रहेगा जब सूर्य बादलों के पीछे चुप जाएगा क्या जातक अब धरती का पानी पिएगा क्या हाथी अब कुत्तों के जैसा जीवन बिताएगा राजपूत की तलवार अब मैं जान के अंदर चली जाएगी राजपूतानी अब विधवा हो जाएगी यह बात सुनकर मेरा दिल कम उठा क्या तानी हुई मुझे नीचे चली जाएगी क्या यह बात सही है बादलों में संता कहां जो सूर्य को रॉक सके शेर की मार सा सके ऐसे सेरो ने जन्म नहीं लिया धरती का पानी पीने के लिए चटक की कोंच बनी ही नहीं और कुत्ते की तरह जीवन बिताने की बात आज तक हमने सनी ही नहीं मैं भूख रहकर भी मेवाड़ की रक्षा करूंगा और अपने प्राण जान दूंगा पर मेवाड़ नहीं जान दूंगा जब तक यह मेवाड़ का मंत्री पीडिया का चक्र बुध भामाशाह जीवित है तब तक ऐसा कभी नहीं हो सकता अन्नदाता आज मैं एक प्रार्थना लेकर आया हूं और कैसी प्रार्थना भामाशाह राणा जी महाराणा कुंभ की समय से सदा हमारा वंश आपके ही दिए हुए अंश पाल है तब से लेकर आज तक हमने जितना भी धनिकटता किया है वह सब में आपके चरणों में भेंट करना चाहता हूं इस धुन से आप मेवाड़ के मुक्ति का उपाय कीजिए महाराज भामाशाह मेरी इतनी प्रार्थना स्वीकार कीजिए महाराज भामाशाह क्या एक इशारे पर सब कुछ न्योछावर कर सकता है धन्य हो तुम मेवाड़ के मंत्री ही नहीं बल्कि घर कहलाओगे हम यह स्वीकार करते हैं पतझड़ का सिंहासन होता बाकी बच्ची बाहर ना होती भामाशाह नहीं होते तो राणा की तलवार एन होती हल्दीघाटी लाड गए वन वन भटक रहे थे अपमानों के अंगारे तन मां चटक रहे थे एक-एक कर सारे संगी साथी चले गए सिसोदिया सूर्य नमस्कार सभी टेढ़ा थे सीधी यह रफ्तार ना होती भामाशाह नहीं होते तो राणा की तलवार ना होती चंपा जैसी प्यारी बिटिया भूखी तरस रही थी अमर सिंह की आंखें मेघ सावन बरस रही थी बनी घास की रोटी उसको भी दिलवाले [संगीत] [संगीत] 80 में से 70 केले वापस ले लिए थे और अकबर की नींद हराम कर दी थी कहते हैं की अकबर को सपना में भी प्रताप दिखाई देने लगे थे और वह एक-एक करके अपने सारे केले जीत रहे थे परंतु कहते हैं की जंगल में शिकार के समय राणा प्रताप घायल हो गए थे और लंबी बीमारी के चलते उनका देहांत हो गया अंतिम समय में उन्होंने अपनी प्रजा मेवाड़ के सरदारों वह अमर सिंह के लिए जो संदेश दिया था वह दृश्य आपके सामने प्रस्तुत महाराज और सती अब इसकी आवश्यकता नहीं राणा जी आखिर आप कुछ चिंता क्या है हमें चिंता है हमें चिंता है हमारे खून से चचा हुआ मेवाड़ फिर दुश्मनों के हाथ में ना चला जाए और हमारी प्रतिज्ञा अधूरी ना र जाए पिताश्री ऐसा कभी नहीं होगा हम सब प्रतिज्ञा करते हैं की जब तक चित्तौड़ आजाद नहीं हो जाएगा तब तक आकाश हमारा छात्र होगा हम पटलो में खाएंगे और हमारे वंशज भी इसी प्रतिज्ञा का पालनपुर करेंगे जय राजपूताना टूट गया बाल हो गए हताश आंखें हैं नाम दुर्ग से फहराना बहुत मजबूत करें [संगीत] रोटा है मां जय जय जिसकी होती थी जय [संगीत] बिछड़ना है क्या कभी बिन बाटी दीपक जलता है क्या कभी अंबर से सूर्य बिछड़ना है क्या कभी बिन बाटी दीपक जलता है छोड़ गया छोटू कैसे जिएंगे हम तू ही किनारा तू ही सहारा तू जग सर तू ही हमारा सूरज तू ही तारा जय जयकारा जय जय कर स्वामी देना साथ हमारा जयकारा जय जयकारा स्वामी देना साथ [प्रशंसा] हमारा जय जय राणा प्रताप को महाराणा प्रताप बनाने में अलग-अलग स्थान पर अलग-अलग बलिदान दिए गए तब जाकर राणा से महाराणा तक की यात्रा त्याग की गई उसमें चेतन का बलिदान वीर झाला का बलिदान भामाशाह का सम्मान भीलों का बलिदान प्रजन विश्वास और सम्मान इन सभी से मिलकर बंता है केसरिया पगड़ी बनी रहे
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