Transcript of Live Meditation with Daaji | 23 June 2025 | 7.30 PM IST | Lucknow Ashram | UP | Daaji
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सभी को प्रणाम मालिक की ओर से आप सभी के लिए एक संदेश इसका जो टाइटल है वह है आपका इरादा यानी इंटेंशन ध्यान यानी अटेंशन नॉट मेडिटेशन ओके और भाव आपका जो एटीट्यूड है इरादा ध्यान और भाव इन तीनों से मिलके बनती हुई त्रिवेणी इस बारे में दाजी के कुछ विचार आप सभी के लोगों के साथ हम साझा कर रहे हैं इरादा यानी आपका आशय ध्यान और भाव तीन पथों की त्रिवेणी दाजी हम सब लोगों से पूछ रहे हैं कि मैं एक ऐसा प्रश्न पूछकर आरंभ करना चाहता हूं जो शायद कुछ लोगों को थोड़ा असहज कर दे आप में से कितने लोगों ने कभी ध्यान सत्र के दौरान अपना फोन चेक किया है या किसी आध्यात्मिक प्रवचन के दौरान आप लोगों ने अपना फोन चेक किया हो या शायद प्रार्थना करते समय कृपया हाथ उठाने की जरूरत नहीं है यह मैं इसलिए पूछ रहा हूं क्योंकि मैंने खुद ऐसा किया है और जब मैंने दिव्यता की ओर बढ़ने की बजाय फोन की ओर हाथ बढ़ाया तब मुझे एहसास हुआ कि हम एक अभूतपूर्व समय में जी रहे हैं हम उस युग में हैं जहां पर अटेंशन यानी ध्यान डिजिटल बाजार की सबसे अधिक मांग वाली वस्तु बन चुकी है टेक्नोलॉजी कंपनियां केवल आपके तीन और चार सेकंड पकड़ने के लिए अरबों खर्च करती हैं इसे ही ध्यान अर्थव्यवस्था कहा जाता है लेकिन यह लेकिन यही विरोधाभास है हमारे पास ध्यान देने से पहले कहीं अधिक साधन हैं फिर भी हम पहले से कहीं अधिक विचलित हैं हमारे फोन में ध्यान एप्स हैं जो ध्यान के दौरान ही उसे बाधित करते हैं हम आध्यात्मिक पडकास्ट सुन हम दिव्य उपस्थिति चाहते हैं लेकिन सचेत जागरूकता के अभाव में जीते हैं आज मैं आपके साथ एक शाश्वत सत्य बांटना चाहता हूं एक ऐसा सत्य जिसे प्राचीन ऋषियों ने जाना जिसे आज का न्यूरो साइंस भी स्वीकार करता है और जो हमारे जीवन को पूरी तरह रूपांतरित यानी बदल सकता है यह सत्य है कुछ इस प्रकार जिस पर हम ध्यान देते हैं हम वही बन जाते हैं जिस चीज को हम अटेंड करते हैं हम वही बन जाते हैं जिसे हम उपेक्षित करते हैं या जिसकी अवहेलना करते हैं वह हमारे अस्तित्व की परिधि से बाहर ही रह जाता है लेकिन मुझे इससे आगे की भी एक बात कहनी है केवल आपकी अटेंशन यानी ध्यान पर्याप्त नहीं है यदि उसमें सही इरादा आपकी राइट इंटेंशन और ऊंचा भाव जो हाईएस्ट आपका जो एटीट्यूड है वो ना हो तो वह एक ऐसी नौका बन जाती है जिसमें ना तो पतवार है ना ही उसकी पाल आपके पास चाहे जितना भी शक्तिशाली इंजन हो बिना दिशा और अनुकूल अवस्था के आप केवल गोलगोल चक्कर काटेंगे इसलिए प्राचीन ऋषियों ने केवल ध्यान की नहीं केवल अटेंशन की नहीं बल्कि एक त्रिवेणी की बात की है मैं त्रिवेणी है आपका इरादा इंटेंशन आपका ध्यान अटेंशन और आपका भाव एटीट्यूड इरादा हमें दिशा देता है हमारे प्रश्न का उत्तर जो कि हम कहते हैं कि क्यों कोई चीज करनी चाहिए उसका उत्तर हमारे आशय हमारे इरादे से आता है अटेंशन जो हमारी लाइफ में है जो ध्यान है वह हमें फोकस देता है क्या करना चाहिए उसका उत्तर अटेंशन से आता है भाव जो हमारा एटीट्यूड है वह गुणवत्ता तय करता है जब हमारा जब हमारे इन दो प्रश्नों का जवाब हां में आ जाता है क्यों क्या तो उस उसके बाद जो सवाल आता है कि कैसे उसके लिए भाव उसकी गुणवत्ता तय करता है कल्पना कीजिए कि आप खाना बनाना सीख रहे हैं आपका इरादा हो सकता है अपने परिवार को पोषण देना आप ध्यान देते हैं रेसिपी उसकी सामग्री भोजन में जो सामग्री डलेगी उस पे और उसके बनाने की टेक्निक पे तक उसकी तकनीक पर लेकिन भाव क्या आप प्रेम से पका रहे हैं या फिर झुंडलाहर्ट में यही बात तय करेगा यही बात तय करेगी कि आप सिर्फ भोजन बना रहे हैं या फिर या फिर या फिर या फिर प्रसाद तैयार कर रहे हैं इन तीन पथों की ओर जब हम बढ़ते हैं जिनके विविध स्वभाव हैं पर गंतव्य एक है प्राचीन ऋषियों ने एक अत्यंत सूक्ष्म सत्य पहचाना वह क्या है वह यह कि मनुष्य केवल एक प्रकार का एक प्रकार का नहीं होता है हर व्यक्ति का स्वभाव उसके समझने का तरीका और उसके भीतर आत्मा की अभिव्यक्ति भिन्न होती है अलग-अलग होती है इसी विविधता के कारण इसी वेरिएशन के कारण उन्होंने सत्य तक पहुंचने के तीन प्रमुख मार्ग बताए हैं किन्होंने तीन प्रमुख मार्ग बताए हैं हमारे प्राचीन ऋषियों ने जो एक ही लक्ष्य की ओर ले जाते हैं लेकिन अलग-अलग द्वारों से पहला कर्म योग यानी क्रिया का मार्ग उन लोगों के लिए जो यह पूछते हैं कि मुझे क्या करना चाहिए ज्ञान योग यानी ज्ञान का मार्ग यह उन लोगों के लिए जो पूछते हैं मुझे क्या जानना चाहिए भक्ति योग प्रेम और समर्पण का मार्ग जो पूछते हैं मैं किससे प्रेम करूं अब दास जी हमें एक कथा की ओर ले चलते हैं यह कथा है एक गुरु और उसके तीन शिष्यों के बारे में एक बार एक महान संगीत गुरु ने एक ही दिन तीन शिष्यों को स्वीकार किया तीनों में सीखने की तीव्र ललक थी पर स्वभाव में गहरा अंतर था पहला शिष्य जो कि एक कर्म योगी था उसने पहले दिन से ही दिन पहले दिन से ही दिन के आठ घंटे अभ्यास शुरू कर दिया उसकी उंगलियां सटीक गति से तारों पर नाचती थी उसका इरादा था उसकी इंटेंशन थी कि मैं श्रेष्ठ बनूं उसका ध्यान पूर्णत तकनीक समय और अनुशासन पर था लेकिन उसका भाव थात्वाकांक्षा एंबिशन मुझे दूसरों से बेहतर बनना है एक वर्ष बाद उसका संगीत तकनीकी रूप से त्रुटिहीन था हर स्वर बिल्कुल सही हर ताल बिल्कुल सटीक लोग सिर हिलाकर कहते बहुत शुद्ध है पर कोई नाचता नहीं था कोई उसके गीतों से रोता नहीं था किसी की आंखों में आंसू नहीं झलकते थे उसका संगीत आत्मा रहित था दूसरी शिष्या ज्ञान योगिनी थी वह घंटों तक संगीत के सिद्धांत रागों की संरचना ध्वनि की भौतिकी भावों के पीछे के कारण को समझने में लगी रहती उसका ध्यान विश्लेषण यानी कैसे चीजों को एनालाइज किया जाए और कैसे समझा जाए उसमें था उसका भाव था उसका एटीट्यूड था बौद्धिकता मुझे सब समझना है एक वर्ष बाद वह संगीत पर व्याख्यान दे सकती थी और जब वह बजाती तो ऐसा लगता मानो कोई संगीत में शोध पत्र यानी रिसर्च पेपर सुन रहा है सब कुछ सटीक परंतु बिल्कुल ठंडा शीतल और बिना कोई रस के तीसरा शिष्य एक भक्ति योगी था वह तो अपने वाद्य को सिर पर रखकर प्रेम से रो पड़ता उसका ध्यान हृदय से बहता था हर स्वर उसका अर्पण था समर्पित था लेकिन उसका भाव था भावनात्मकता मैं इतना महसूस करता हूं कि उसमें डूब ही जाता हूं एक वर्ष बाद उसका संगीत श्रोताओं को रुला सकता था पर दिशा विहीन था मानो वर्षा ऋतु की बाढ़ जो पोषित तो करती है पर नियंत्रण हीन होकर विनाश भी ला सकती है गुरु ने उन तीनों को बुलाया बोले तुम में से प्रत्येक ने संगीत का एक रूप साधा है पर संगीत जैसे जीवन के तीन चेहरे होते हैं जो एक होना चाहिए कर्म के बिना प्रेम अधूरा है प्रेम के बिना ज्ञान नीरस है और ज्ञान के बिना कर्म कर्म दिशाहीन है फिर उन्होंने आदेश दिया कि अब आप तीनों एक दूसरे को सिखाओ तीनों एक दूसरे को कर्म योगी भक्ति योगी से समर्पण सीखे और ज्ञान योगी से समझ ज्ञान योगी कर्म योगी से अनुशासन और भक्ति योगी से प्रेम भक्ति योगी अपने प्रेम को अभ्यास और दर्शन में गुथे मौन की शिक्षा हमारे भीतर की जो त्रिवेणी है उसके बारे में दास जी हमें बता रहे हैं अब मैं आपको एक और कथा सुनाता हूं जो और भी गहराई तक जाती है एक प्रसिद्ध संगीत आचार्य के पास एक नया छात्र आया वह दूर गांव से पैदल चलकर आया था उसने इस अवसर के लिए सब कुछ बेच दिया था घर वाद्य यंत्र वस्त्र यहां तक कि अपने सपने तक गिरवी रख दिए थे वह बड़ी आशा लेकर आया था लेकिन पहले महीने में गुरु ने उसे कुछ भी सिखाया नहीं कोई राग नहीं कोई अभ्यास नहीं बस एक ही निर्देश इस कोने में बैठो और देखते रहो दिन बीतते गए वह बस बैठा रहा और भीतर एक संघर्ष शुरू हो गया तीन आवाजें उठने लगी कर्म की आवाज चिल्लाई मैं यहां बैठने नहीं कुछ करने आया हूं मैं कुछ अभ्यास करना चाहता हूं उंगलियां कांप रही हैं मन व्याकुल है ज्ञान की आवाज विश्लेषण में उलझ गई इस मौन के पीछे क्या सिद्धांत है इस निर्देश में छिपा रहस्य आखिर क्या है क्या यह कोई प्रतीकात्मक शिक्षा है भक्ति की आवाज धीरे से फुसफुसाई शायद शायद गुरु की उपस्थिति में बैठना ही शिक्षण है शायद मुझे और कुछ चाहिए ही नहीं हर दिन एक अलग स्वर जीतता कभी कर्म की हड़बड़ी कभी ज्ञान की जिज्ञासा कभी भक्ति की तृप्ति लेकिन वह भीतर से भीतर से उलझा रहा फिर एक सुबह कुछ बदल गया भीतर एक सामंजस्य प्रकट हुआ यानी हार्मोनी वह पूरी उपस्थिति से वह पूरी उपस्थिति से सुनने लगा यह था कर्म जो सतत जागरूकता में प्रकट हुआ वह मौन में अर्थ देखने लगा यह था ज्ञान जो अनुभव से उपजा उसके हृदय में पूर्ण श्रद्धा और समर्पण था यह थी भक्ति जो प्रक्रिया में विश्वास रखती है प्रोसेस में विश्वास रखती है उसके परिणाम में नहीं ठीक उसी क्षण गुरु बिना पीछे देखे कहते हैं अब तुम अब तुम चौक गया किस बात के लिए गुरुदेव गुरु मुस्कुराए अब तुम समझने के लिए तैयार हो कि सच्चे संगीत में जैसे सच्चे आध्यात्म में करना जानना और प्रेम करना यह क्रमश घटने वाली प्रक्रियाएं नहीं है यानी ये एक के बाद एक घटने वाली प्रक्रियाएं नहीं है ये एक ही क्षण में एक साथ एक साथ ये एक ही क्षण में एक साथ घट जाती हैं जब तुम वाद्य उठाओ तो हाथ से क्रिया हो मन से समझ हो और हृदय से अर्पण हो तभी वह संगीत जीवित होता है यही कारण था कि तुम्हें पहले भीतर की तीनों धाराओं को एक करना सीखना था आधुनिक जीवन में शिक्षाओं का प्रयोग अब आप सोच रहे होंगे ताजी हमसे बता रहे हैं कि अब आप सोच रहे होंगे यह सब तो सुंदर कहानियां हैं पर इसका हमारे दैनिक जीवन से क्या संबंध है इसका मेरी डेली लाइफ से क्या संबंध है आइए इसे पूरी तरह व्यवहारिक बनाते हैं लेट अस मेक इट वेरी प्रैक्टिकल क्या आपने कभी ध्यान के दौरान ध्यान के बीच में फोन चेक किया है कर्म योगी की दृष्टि से यह वैसा है जैसे कोई रसोइया बार-बार रसोई छोड़ता है खाना या तो या तो जल जाएगा और या क्या होगा पद पक्का रहेगा ज्ञान योग की दृष्टि से आप शाश्वत के स्थान पर क्षणिक को चुन रहे हैं आप शाश्वत के स्थान पर क्षणिक को चुन रहे हैं आप यह मान रहे हैं कि जो सूचना फोन पर आई है वह उस चेतना से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है जिसकी खोज में आप आए थे और ध्यान मग्न हुए थे भक्ति योग की दृष्टि से यह वैसा है जैसे कोई अपने प्रियतम की ओर से हटकर देखता है कि कहीं कोई और तो नहीं आया यह दर्शाता है कि हमारा प्रेम अस्थिर और असयमित है बाबू जी कहते हैं घर पर रहकर यदि मास्टर की स्मृति में हो उनकी याद में हो तो वह उस उपस्थिति से अधिक मूल्यवान है जब जहां आपका मन उनकी उपस्थिति में रहकर व्यापार में उलझा हो या किसी और दुनियावी चीज में उलझा हो हर मार्ग इसे एक विशिष्ट दृष्टि से देखता है कर्म योगी शरीर उपस्थित हो पर मन नहीं यह विफल कर्म है ज्ञान योगी सच्ची उपस्थिति चेतना की होती है शरीर की नहीं भक्ति योगी कभी विरह भी साक्षात मिलन से अधिक प्रेमपूर्ण होता है त्रिवेणी साधना दिनचर्या के यह तीन चरण सुबह से आरंभ करें प्रभात समय से एकीकरण से आरंभ करते हुए कर्म योग पहला कार्य दिन का पहला कार्य उसको ध्यान पूर्वक करें अटेंशन के साथ करें जैसे बिस्तर को समेटना पानी पीना इन सभी को साधना समझा गया है ज्ञान योग स्वयं से पूछें मैं कौन हूं उत्तर मत खोजिए प्रश्न को अपने भीतर रहने दीजिए भक्ति योग कहे यह दिन सेवा में बीते मेरी समझ गहरे जाए मेरी समझ गरी जाए मेरा प्रेम अधिक व्यापक हो अधिक विस्तृत हो सुबह-सुबह मॉर्निंग रूटीन के बाद हम लोग अपने कार्यस्थल या अपने कॉलेज स्कूल में पहुंचते हैं हमारे जो कार्यस्थल है वो साधना का प्रयोग वो साधना की एक प्रयोगशाला है कर्म परिणाम को छोड़े बिना श्रेष्ठ कर्म करें सफलता और असफलता दोनों को प्रसाद माने ज्ञान यानी हर चुनौती को आत्म ज्ञान का अवसर माने भक्ति अपने सहकर्मियों में दिव्यता को पहचाने हर कार्य को अर्पण मनाएं नाउ व्हेन वी कम बैक टू आवर होम अपना इवनिंग रूटीन रात्रि तीन गुना आत्मचिंतन कर्म की समीक्षा कौन से कर्म हमारे आज सेवा में बदले कौन से अहंकार से उत्पन्न हुए हम सभी दाजी हमें बता रहे हैं कि पूरे दिन के जो हमने कर्म किए हैं हम उनकी समीक्षा करें कर्म समीक्षा कौन से ऐसे कर्म जो हमारी सेवा में बदले कौन से अहंकार से उत्पन्न हुए ज्ञान समीक्षा आज मैंने क्या सीखा कहां मैं शाश्वत से चयूत हुआ यानी कहां मैं जो एटरनल एनर्जी है उससे अलग हुआ भक्ति समीक्षा कहां मेरा हृदय बंद हुआ और कब वह खुला तकनीकी जीवन के लिए त्रिवेणी सूत्र कर्म दृष्टिकोण फोन उपयोग को स्वचालित नहीं सचेत बनाएं नियम बनाएं जैसे हर बार फोन छूने से हर बार फोन छूने से पहले तीन गहरी सांसे लें ज्ञान दृष्टिकोण पूछें क्या यह जानकारी मुझे शांत करेगी या विचलित करेगी भक्ति दृष्टिकोण सेवा की भावना से टेक्नोलॉजी का प्रयोग करें हर मैसेज हर ईमेल प्रेम से भेजें अंतिम एकीकरण तीन शक्तियों की एक धारा साथियों यह अंतिम रहस्य है कर्म ज्ञान और भक्ति अलग-अलग मार्ग नहीं है ये एक ही सत्य के तीन रूप हैं एक ही नदी की तीन धाराएं हैं एक ही राग के तीन सुर हैं जब यह अलग होते हैं कर्म बन जाता है व्यस्तता बंधन ज्ञान बन जाता है बौद्धिकता सुशुकता सूखापन ड्राइनेस भक्ति बन जाती है भावुकता असंतुलन पर जब ये इकट्ठे होते हैं एकीकृत होते हैं कर्म बनता है कर्म शक्ति यानी जागरूक क्रिया ज्ञान बनता है ज्ञान शक्ति यानी जीवंत समझ भक्ति बनती है भक्ति शक्ति एक रूपांतरकारी प्रेम तीनों शक्तियां जैसे अग्नि की लौह ताप और प्रकाश एक ही तत्व के रूप हैं अंतिम आवाहन जागो जुड़ो समर्पित हो जाओ अब इस क्षण को महसूस करें आपके भीतर तीन स्वर सक्रिय हैं कर्म योगी मैं कैसे इस ज्ञान को व्यवहार में लाऊं ज्ञान योगी क्या मैं इसे सही समझ रहा हूं भक्ति योगी क्या मैं इन शब्दों में छिपे प्रेम को अनुभव कर पा रहा हूं और एकीकृत साधक वह पूछता नहीं जीता है हाथ कर्म के लिए मस्तिष्क विवेक के लिए और हृदय प्रेम के लिए जब इरादा यानी इंटेंशन दिशा देते हैं ध्यान यानी अटेंशन केंद्रित करता है और भाव गुणवत्ता लाता है तब जीवन स्वयं योग बन जाता है कर्म तप हो ज्ञान दीप हो भक्ति हृदय हो यही समर्पण का संगीत है प्रिय साथियों यह मार्ग अलग नहीं है वे केवल हमें हमारी भिन्न प्रारंभिक अवस्थाओं से एक ही केंद्र की ओर लाते हैं हृदय की गुहा दहर जहां कर्म ज्ञान और प्रेम एक हो जाते हैं हम जीवन से भागने नहीं आए हम केवल हमें केवल उसका रूपांतरण करना है हम गुफाओं में नहीं भागना चाहते बल्कि बाजार के बीचोंबीच हृदय की गुफा को खोजना है यही समय है क्या आप अपने दिनों को यूं ही बिखरे हुए ध्यान के साथ जिएंगे या आप अपने इरादे को तलवार की धार ध्यान को प्रकाश की किरण और भाव को दर्पण बनाकर पूर्णता से जीवन को अपनाएंगे चेतना का साम्राज्य आपका स्वागत कर रहा है उठो और दिव्य आत्माओं तुम्हारा कर्म भक्ति बन जाए तुम्हारे प्रश्न साधना बन जाए तुम्हारा प्रेम प्रकाश बन जाए अंधकार में भटकते पिकों के लिए याद रखो तुम कौन हो अपने स्वभाव को पुनः प्राप्त करो पूर्णता में लौटो स्वागत है घर में और दिव्य आत्मा स्वागत है धन्यवाद प्रेम एवं आदर सहित कमलेश 23 जून 2025 लखनऊ उत्तर प्रदेश भारत प्लीज स्टार्ट मेडिटेशन कृपया ध्यान आरंभ करें [संगीत] दैट्स ऑल कृपया ध्यान समाप्त करें कल सुबह का ध्यान प्रातः 7:30 बजे होगा [संगीत] सभी भाई बहनों में से अगर किसी के कोई प्रश्न है तो मालिक एक दो प्रश्न लेना चाहते हैं आप लोग अपने हाथ खड़ा करें ब्रदर साइड से एक ब्रदर ने हैंड रेज किया है [संगीत] [संगीत] मालिक को प्रणाम मालिक हम अपना अभ्यास करते हैं इस दौरान जैसा कि हमको बताया गया है कि हम अपने ही विकास पर पहले फोकस करें लेकिन जो प्रियजन हमसे बहुत जुड़े होते हैं और एक ही घर में रहते हैं चाहे वह हमारा भाई हो बहन हो तो उससे कहीं ना कहीं हमें आशाएं हो जाती हैं तो उसको कैसे नजरअंदाज करें कि क्योंकि हम कहीं ना कहीं उसको ढालना चाहते हैं तो इन आशाओं के परे जाने से कैसे जाए प्रार्थना करें कि वह भी आध्यात्मिकता की ओर आकर्षित हो रहे हैं भगवान ईश्वर उनको प्रेरित कर रहे हैं कि सच्चे राह पर चलने की उनमें एक तरह की जागृतता आवे बस उनको अपना रास्ता मिल जाएगा इसमें किसी को फोर्स नहीं करना चाहिए सिर्फ बता दो कई बार हम कह सकते हैं कि आज बहुत अच्छा लगता है कई बार हम कह सकते हैं आज हमने यह पढ़ा आप भी पढ़ लो देखो पढ़े ठीक है नहीं पढ़े तो बहुत बहस मत करना [संगीत] मालिक प्रणाम अ क्या अपने गुरु के समीप रहने से हमें ध्यान में ज्यादा कुछ फायदा होगा क्या हमें आगे बैठने की हमेशा कंपटीशन करना चाहिए या हम कहीं भी बैठ के उस तरह का ध्यान कर सकते हैं आपके पास जॉब तो है इसलिए तो इतने दूर रहते हो इससे कुछ भी फर्क नहीं पड़ता है बाबूजी की महाराज की आदत थी जब भी ग्रुप सत्संग हुआ करता था और लाला जी से एकदम दूर एकदम कोने में बैठते थे वह जैसे कि वहां प्रेजेंट ही नहीं हो इतने अपनी नफ्ज़ को अपने ईगो को इतने छुपा के रखते थे कि किसी की नजर में भी नहीं पड़े हम जब हम कोशिश करते हैं आगे बैठने की वो एक दिखावा है एक लोभ है ग्रीड है कि कुछ ज्यादा मिल जाएगा यदि ऐसी समझ है आप में तो उसको निकाल दीजिए वह गलत है मधुमक्खी चट्टानों में भी थोड़ा फ्लावर्स खिलते हैं ना चट्टानों के बीच में भी हमको नजर नहीं आएगी लेकिन मगदूमक्की को आ जाएगा पता चल जाता है और जो जीपीएस सिस्टम है लॉकिंग इन सिस्टम ऑफ मास्टर्स इट इज आल्सो शार्पर बेटर देन मधुमक्खी कहीं से भी उसको ढूंढ लेता है और जिनकी बहुत तड़प है और वो क्यों ना कोरिया में रहता हो चाइना में रहता हो या यूएस में रहता हो यहां नहीं है लेकिन जो वहां बैठे-बैठे तड़प रहे हैं अंदर से ईश्वर प्राप्ति के लिए उनको मिल जाता है तो डिस्टेंस इट डजंट कम बिटवीन मास्टर एंड डिसाइपल डिसाइपल के लिए शायद कॉन्फिडेंस बढ़ाने के लिए हो सकता है बट वो टेंपरेरी होना चाहिए आगे आजा तू भाई नहीं तो वहीं खड़ा रहेगा तू इधर आ [संगीत] प्रणाम मास्टर मास्टर मैं भी क्लास 12th में हूं और साथ में जेई की तैयारी भी कर रहा हूं तो मास्टर कभी पढ़ाई और मेडिटेशन को बैलेंस करने में प्रॉब्लम हो जाती है मेडिटेशन छोड़ दे पढ़ाई कर अभी जी मैं सच कहता हूं जस्ट दो मिनट ध्यान कर ले बस जी मास्टर थैंक यू गुड नाइट [संगीत]
Live Meditation with Daaji | 23 June 2025 | 7.30 PM IST | Lucknow Ashram | UP | Daaji
Channel: heartfulness
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