YouTube to Text Converter

Transcript of Live Meditation with Daaji | 16 June | 7:00 pm IST | Aligarh | UP | Daaji | Heartfulness

Video Transcript:

यह ऊर्जा आपके पैरों में ऊपर की तरफ जा रही है और आपके पैरों को आराम पहुंचा रही है आरोग्य ऊर्जा को अपने गुण यहां उपस्थित सभी भाई बहनों की तरफ से और जो वर्चुअली आज उपस्थित हैं हमारे साथ उन सभी की तरफ से पूज्य दाजी को हमारा हृदय से प्रणाम आज से 30 साल पहले पूज्य गुरुदेव चारी जी साहब अलीगढ़ आए थे उसके बाद में आज दाजी का यहां पदार्पण हुआ हम सभी के दिल आज प्रेम आनंद और उत्साह से भरे हुए हैं यहां पे अलीगढ़ से जुड़े हुए सभी सेंटर लोगढ़ अकराबाद बमनोई समामई खैर टप्पल कासिमपुर विलेज कासिमपुर पावर हाउस नानो फकराबाद गोपी चांदपुर के सेंटर के सभी लोग यहां उपस्थित हैं हम सभी के दिल आज साहब आपसे कुछ सुनने के लिए बहुत लालायित हैं कुछ हमारे लिए दिशा निर्देश आप आज हमें दें प्रभु श्री सभी भाई बहनों को प्रणाम और खास करके क्लार्क होटल के जो मालिक है राधेश्याम जी अग्रवाल उनको भी हार्दिक प्रणाम जिन्होंने यह फैसिलिटी बनाई है आज ऐसा लगता है मंदिर बन गया हो ऐसा पवित्र वातावरण खड़ा हो गया है ये तो होटलों में बैंग बैंग नॉइज आज बड़ा शांत है यहां पर हमारा जो हार्टफुलनेस की पद्धति है यह ईश्वरीय देन है वो सीधा निचोड़ सभी पुराणों का सभी वेदों का सभी जितनी भी गीताएं हैं और खास करके भगवत गीता उसका सारांश है कैसे कई कितने संत लोग हो गए अपने देश में अवतार पुरुष भी हो गए सभी का कहना अलग-अलग शब्दों में रहा है जैसे बुद्ध निर्वाण की प्राप्त करो महावीर प्रभु और जैनिज्म जो ट्रेडिशन है वो उनका खास कहना है कि कैवल्य की जो हालत है वहां तक पहुंच जाओ कबीर साहब भी कहते हैं शून्य हो जाओ कैसे बोलते जैसे समंदर में पानी का बूंद गिर जाता है वो समंदर बन जाता है श्री कृष्ण भगवान भी बोलते हैं क्या बोलते हैं वो कि एक कमल के पत्ते जैसी हालत पैदा कर दो जिसकी वजह से आप पर दुनियावी असर नहीं पड़े जहां भी हो आप कहां भी हो कोई भी काम करो लेकिन उसकी असर अपने हृदय पे मत पड़ने दो अपनी चेतना पे मत पड़ने दो अंगुली से दिखा दिया कि यह करो यह करो यह हालत पर पहुंच जाओ लेकिन किसी ने भी रास्ता नहीं दिखाया कि ऐसे ऐसा करोगे तो यह प्राप्त होगा कहीं पे भी नहीं है ये सिर्फ सहज मार्ग वो बताता है ध्यान करो जो आमतौर से लोग समझते हैं ध्यान क्या है वह सब लोग गलत है किसी को भी पूछो आप ध्यान का मतलब क्या है तो सभी लोग बोलेंगे बुजुर्ग से होते हुए बच्चे तक कि ध्यान का मतलब है मन पर काबू लाना विचारहीन हो जाना फोकस माइंड करना कंसंट्रेशन करना ये सब मीनिंग्स गलत है जिस चीज को आप समझे ही नहीं उसको कैसे कर पाओगे ध्यान की पद्धति है प्रक्रिया है दूसरा सफाई करने को बताया है हमारे में क्या ऐसी चीज है उसको निकालना है सभी चीज को निकालना है यह कौन सी चीज हमारे में है जो उसको निकालना है बाबूजी सिंपली बोलते हैं संस्कार संस्कार की वजह से पुनरपी जन्मम वो जो बोलते हैं ना वह चक्कर चलता रहता है आने जाने के बीज संस्कार नहीं होते आते क्यों सो जब तक संस्कार रहेंगे तब तक आना जाना तो रहेगा ही तो क्या साफ करना है यह बीज रूपी जो संस्कार है उसको निकालना है वह प्रक्रिया भी सहज मार्ग पर है दूसरा ध्यान को आगे समझते हुए उसको समझो यह शब्द क्या कहता है सभी संस्कृत के शब्द संधि से जुड़े हुए हैं सभी कोई भी एक्सेप्शन नहीं है ध्यान जो शब्द है उसकी भी संधि है संधि से जुड़ा हुआ है शब्द दी प्लस यान दी का मतलब है अल्टीमेट डिवाइन विडम जो गायत्री मंत्र में भी आता है ना धीमहि धियो यो प्रचोदयात तो यह धी तक पहुंचने के लिए यान है डी प्लस यान यान का मतलब है व्हीकल वाहन जिस वाहन से हम उच्चतम चेतना की हालत पर पहुंच जाए उसको ध्यान कहते हैं अभी सवाल उठता है कि यह वाहन कैसा होना चाहिए कोई भी वाहन हो उसके लिए तो हमें ऊर्जा की जरूरत पड़ती है ध्यान में यह ऊर्जा कहां से आएगी केनोपनिषद बताता है कि प्राणस प्राणा जो प्राण की और चेतना देता है वह दूसरा प्राण है गुरु की कृपा है तो प्राणस्य प्राणा अपना जो ट्रांसमिशन है वो एक फ्यूल ऊर्जा की तरह काम करता है अपनी चेतना को ईश्वरीय चेतना के साथ जोड़ देता है जिसकी हम अनुभूति करते हैं तो एक ख्याल रखना है कि ऑर्डिनरी ध्यान नहीं है उनके संपर्क में जुड़े हुए हैं उनके साथ एक सूक्ष्म धागे से जुड़े हुए एक एनर्जी के फ्लो से ऊर्जा के फ्लो से उनके साथ जुड़े हुए हैं उनका सम्मान करो उनको आगमन दो कि हे प्रभु आपको तो हम जानते नहीं है है या नहीं वह भी मुझे पहचान नहीं है लेकिन जो भी हो आपकी हम अनुभूति करना चाहेंगे और वैसे सुबह का ध्यान शुरू करो प्रार्थनामई होके एक तरह की अंदर की पीड़ा अंदर की बेचैनी लोंगिंग को क्रिएट करते हुए ईश्वर के सामने अपनी हालत रख देनी है और ध्यान करना है बाद में ध्यान के बाद जो हालत बनी रहेगी उसको सतत याद करते रहना है छूट जाए हम कुछ काम में पड़े हैं थोड़ी देर के लिए छूट भी सकती है फिर से याद करके उनकी गहराइयों में ले आओ कंडीशन जो हमने एक्वायर की सुबह के ध्यान के बाद हालत आध्यात्मिक हालत जो पैदा हुई उसको बार-बार याद करने से वो अति जीवित और एकदम इंटेंस बन जाती है उस पे और एकद मिनट और ध्यान करने से काम करते वक्त तो उसके साथ ल हो जाने की कोशिश करनी है ऐसे हम काम में भी रहेंगे और एक तरह का उनके साथ का जो हमारा संबंध है वो जारी रहेगा चालू रहेगा अपने भौतिक काम में भी आध्यात्मिकता की फ्रेगरेंस सुगंध आती रहेगी कोई भी काम करेंगे हम आधा नहीं छोड़ पाएंगे ऐसा वैसा नहीं कर पाएंगे उसमें भी कंप्लीशन होएगा कुशलता रहेगी तो इसकी वजह से क्योंकि हम उनके साथ जुड़े हैं वह ख्याल से जब हम काम करते हैं तो कोई भी कर्म हमारी चेतना पर असर नहीं कर पाता है वह संस्कार नहीं बनता है तो जीवन की शैली ऐसी होनी है कि हम संस्कार नहीं बनाए जो बन गए हैं उसको प्रार्थना करके निकाल देने हैं हमसे जो नहीं निकल पाए छोड़ दो वो करते रहेंगे और रात के समय जानवर की तरह जो सो जाते हैं सिर्फ प्रार्थना करो कि रात के ये मेरी गहरी नींद में भी आपके साथ मेरा संबंध चालू रहेगा अपने दिनचर्या के जो काम किए हैं उस पर गहराई से सोचो कहां हम ठीक से कर सकते थे और गलत किया उस पर देखो थोड़ा ध्यान उस साइड ले जाओ और माफी मांगो कि प्रभु आइंदा हम ऐसी गलती नहीं करेंगे हम किसी को जा ईश्वर से ही हमारी जिम्मेदारी है और किसी से नहीं है तो उनके साथ सौदा करना है उनको ही प्रॉमिस देना है और देखो अपने जीवन में कैसा कैसे परिवर्तन आते हैं जिंदगी तो वही है लेकिन यह जो आध्यात्मिक धागा हम जो अपने जीवन में लगा देते हैं उससे नई नई तरह का प्रारब्ध शुरू हो जाएगा अंग्रेजी में कहते हैं टू स्पिरिचुअलाइज द मटेरियल एक्सिस्टेंस तो वही है एक सहज रूप में हो जाता है इसलिए अपना मार्ग सहज मार्ग है हृदय से सब कुछ काम करते हैं इसलिए वह हार्टफुलनेस है किसी भी एंगल से देखो एकदम नेचुरल सहज पाथ है आप पूरे दिल से करते रहो यह मार्ग खुद के लिए है दूसरों को बदलने के लिए नहीं है लोग बहुत कोशिश करते हैं कि इसको भी देवे उसको भी देवे अच्छा चीज है कि लोग और लोग भी करें लेकिन उसके पीछे आप टाइम बहुत बर्बाद मत करो उनको बताओ यह ध्यान की पद्धति है करना है करो नहीं करना है आपकी मर्जी के पीछे क्यों पड़ रहा है थैंक यू [प्रशंसा] आप सब बाहर से आए हैं कि यहां रुकेंगे सुबह कितने बजे आप पाओगे 7:00 बजे इतना जल्दी आ जाओगे ये तो अलग-अलग सेंटर से आ रहे हैं बोलते हैं मैं 8:00 बजे का रखता हूं सो लोग अपनी जो सिस्टर्स जो है अपना काम भी आदमी लोग तो बोल देते हैं 6:00 बजे आएगा लेकिन उनकी तो सोचो आपको चाय बना के देगी कल को जो छोड़ के आएगी उनके लिए ब्रेकफास्ट बनाना पड़ेगा कभी बर्तन धोए हैं आपने चलो ठीक है सुबह का सत्संग प्रातः 8:00 बजे है सभी भाई बहनों से निवेदन है 7:30 बजे तक जरूर अपना स्थान ग्रहण कर लें धन्यवाद 8:00 बजे कितने बजे सभी लोग अभी कृपया अपनी सीट पर बने रह अपनी सीट ना छोड़ें

Live Meditation with Daaji | 16 June | 7:00 pm IST | Aligarh | UP | Daaji | Heartfulness

Channel: heartfulness

Convert Another Video

Share transcript:

Want to generate another YouTube transcript?

Enter a YouTube URL below to generate a new transcript.