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Transcript of Live Meditation with Daaji | 19 June 2025 | 7:00 pm IST | Shahjahanpur | UP | Daaji

Video Transcript:

ऊपर की ओर आ रही है आपकी एड़ियों और तलवों से ऊपर की ओर आपके पैरों में ऊपर बढ़ रही है और आपके घुटनों तक जाते हुए आपके पैरों को आराम पहुंचा रही है महसूस करें कि यह स्वास्थ पत ऊर्जा अब आपके पैरों में और ऊपर बढ़ रही है और उन्हें भी आराम पहुंचा रही है पूज्य दास जी हमारे बीच आ चुके हैं हम उनका शाहजहांपुर में बहुत-बहुत स्वागत और अभिनंदन करते हैं सब लोग से निवेदन है कि प्लीज बैठे रहे अपनी सीट से उठे नहीं सभी से निवेदन है कि वह अपना स्थान पर ही रहे एक फाइनल रिमाइंडर है सभी लोग से प्लीज स्विच ऑफ योर मोबाइल फस काइंडली इंश्योर सभी के मोबाइल फोन स्विच ऑफ मोड पर हो यूपी के फाइनेंस मिनिस्टर माननीय सुरेश कुमार खन्ना जी हमारे बीच हैं अगर साहब की अनुमति हो तो वह साहब का स्वागत करना चाहेंगे अगर आपकी सर अनुमति हो तो हमारे यहां हमारे यूपी के फाइनेंस मिनिस्टर सुरेश कुमार खन्ना जी हमारे बीच हैं वो आपका अभिनंदन करना चाह रहे हैं सर सर सर एक बार सभी से पुनः अनुरोध है कि अपने मोबाइल फोन चेक कर लें वह स्विच ऑफ मोड पर हो प्लीज स्टार्ट मेडिटेशन कृपया ध्यान शुरू करें दैट्स ऑल कृपया ध्यान समाप्त कीजिए हार्टफुल प्रणाम आज के इस पावन दिवस पर हम पूज्य दास जी का सहज मार्ग की जन्म स्थली और पूज्य बाबूजी साहब की कर्म भूमि के आगमन पर हम हार्दिक स्वागत करते हैं यहां पर उपस्थित हार्ट प्रेस परिवार के सभी सदस्य तथा ऑनलाइन जुड़े हुए सभी भाई बहन समाज के आए हुए गणमान्य नागरिक विशिष्ट अतिथि हम सभी का अभिनंदन करते हैं यह हम सभी के लिए एक बहुत खास मौका है एक लंबे अंतराल के बाद पूज्य दास जी का शाहजहांपुर पुनः आगमन हुआ है कृतज्ञता और प्रेम से भरे हृदय से हम सब उनका आभार व्यक्त करते हैं कि उन्होंने अपनी उपस्थिति का आशीर्वाद हमें दिया है आज यहां पे शाहजहांपुर के अलावा यहां के उप केंद्र बंडा पुया तिलहर कटरा शाहबाद जलालाबाद बानगांव गोला और इसके अलावा भी कई अन्य जनपदों के अभ्यासी आपकी उपस्थिति का आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं आइए इस पावन दिन को हम मालिक की प्रार्थनामय याद में रहकर बिताएं हमारे एक साहब की मैं संज्ञान में लाना चाहूंगा कि हमारे बीच बहुत सारे ऐसे लोग हैं जो प्रथम बार ध्यान कर रहे हैं तो अगर आप उनसे कुछ कहना चाहे या उनको संबोधित करना चाहे आप सभी को नम प्रणाम फर्स्ट टाइम में जब शाहजानपुर आया था दैट वाज़ इन 1977 हमारी कॉलेज में वेकेशन था तो यहां पहुंच गए हॉट समर एंड विदाउट रिजर्वेशन दिल्ली टू शाहजान काशी विश्वनाथ एक्सप्रेस खड़ेखड़े आए हमारे प्रिसेप्टर महोदय ने ऊपर चढ़ाई रखा था उम्मीदें बढ़ा दी थी कि बाबूजी साहब के पास जाओगे तो बहुत खुश होंगे आप पे मैंने बोला क्यों आप यंगस्टर्स लोग हो ना 18 19 साल के बाबूजी बहुत खुश होंगे नाराज तो प्रेजेंस में जो एटमॉस्फियर था सो कैप्टिवेटिंग हमारा माइंड मनस इधर उधर नहीं भटके से फुल्ली इनू इट कंप्लीटली इनू इट आई वास देर और मेरे साथ मेरा दोस्त भी था तो हम दोनों ही थे रात को पहुंचे थे तो उस जमाने में तो बैटल रिक्शा हुआ करती थी आप बैठो और केस जाओ नीचे से और बड़ी ताकत से बैठना पड़ता था तो जो हमको ले जा रहे थे भाई साहब उनका नाम भी राम था वो बोले बाबूजी महाराज का मकान यहां पर है लेकिन आपको हम अभी नहीं ले जाएंगे सीधा आश्रम जाना पड़ेगा मैंने बोला ठीक है भाई ही वास बॉसिंग सुबह आपको ले जाऊंगा बाबूजी के पास बोला ठीक है भाई तो उस जमाने में कोई आता ही नहीं था यहां पे और जो आते थे वह सब सफेद बाल वाले ऐसे यंगस्टर्स नो वन आई एम सो हैप्पी कि आप यहां पर इतने युद्ध आध्यात्मिकता की और आगे बढ़ने की कोशिश तो कर रहे हैं कितने सक्सेसफुल होएंगे वो प्रयत्नों पर आधारित है जीवन का पपज एक ही है आध्यात्मिकता में आगे बढ़ो आध्यात्मिकता है क्या उसमें बढ़ने के लिए उनको जानना पड़ेगा आध्यात्मिकता है क्या और धर्म से कैसे अलग है जो हम पूजा पाठ कर रहे हैं वो आध्यात्मिक है या धार्मिक रिचुअल है वो समझने की बड़ी कोशिश करनी पड़ेगी आपको मान्यता है धर्म में ईश्वर है हमको एक तरह की शिक्षा देते हैं लेकिन यह शिक्षा को आगे बढ़ाना हमें ये सब तो चिन्ह है मूर्तियां फोटोग्राफ्स ये सब सिंबल्स है वो आकार से पार होके निराकार की ओर जाना पड़ेगा नहीं तो आकार की जेल में फंसे रहोगे ईश्वर है वह मान्यता है कुछ गलत नहीं है अच्छी मान्यता है लेकिन जब हम उनकी अनुभूति करते हैं ईश्वरीयता की तब हम आध्यात्मिक क्षेत्र में आते हैं हम धर्म से अलग नहीं हो गए अभी हम जो धार्मिक मान्यता है आध्यात्मिकता की वजह से वह स्ट्रांग हो गई है उसका फाउंडेशन बढ़ जाता है क्योंकि कोई भी मकान का फाउंडेशन को स्ट्रांग नहीं रहेगा तो टूट जाएगा कुछ मुसीबतें जीवन में आएगी कुछ गड़बड़ हो जाएगी किसी के साथ झगड़ा हो जाता है तब भगवान को प्रश्न पूछते कैसा भगवान मैं इतना अच्छा आदमी हूं और मुझको भी ऐसा आपकी प्रेजेंस होते हुए भी मुझे ऐसी बर्बादी में आपने डाल दिया शंका होती है और शंका बढ़ती जाती है तो धार्मिकता भी छूट जाती है बिलीफ भी टूट जाती है क्योंकि आपकी बिलीफ खोखरी है खाली है एम्प्टी है उसको अनुभूति का चिन्ह एक भी नहीं है पर मैं तो शायद गुस्सा मत हो आप मानती हूं तो लेकिन आगे पूछोगे क्यों मानते हो तो क्या बोलेगी मेरी मां ने सिखाया मेरे मां बाप ने सिखाया हमारे शास्त्र ऐसा कहते हैं लेकिन तू क्या कहती है तो यह हमेशा के लिए यह समस्या हम सबके लिए है लेकिन जब अपने ग्रैंड चिल्ड्रन हमको पूछेंगे दादा की जरूरत नहीं है मानता वो है जिसने देखा ही नहीं हमने देखे हैं उन्होंने हमने उनकी अनुभूति की है तो उस से हम गर्व से कह सकते हैं कि हां है आप भी कर सकते हैं उनकी अनुभूति तो उन लोगों को कॉन्फिडेंस रहेगा आप ही डग रहे हो तो आप बच्चों को कैसे संस्कार दोगे और जब तक सॉलिड संस्कार बच्चों को नहीं मिलेंगे व्यक्ति कैसे सुध समाज और देश आगे कैसे लास्टिंग इंप्लिकेशन ऑफ योगिक साधना हमारी आध्यात्मिकता का जो फाउंडेशन है उस फाउंडेशन पे सब कुछ निर्भर है फैमिली का विकास समाज का विकास देश का विकास विश्व का विकास नॉट ऑन बिलीफ यदि हम धर्म पे मानते रहेंगे तो डिवीजन होता ही रहेगा और जब डिवीजन होता है तो छोटे बड़े का प्रश्न तो उठेगा ही मैं बड़ा हूं आप जो मानते हो आप गलत हो आप बेकार हो और हम देखते आए यह ड्रामा अभी तक इन तमिलनाडु वो बोलते हैं कृष्णा है ही नहीं हम शिव में मानते हैं शिव वाले बोलते हैं हम कृष्ण में नहीं मानते कृष्ण वाले बोलते हैं हम शिव में नहीं मानते ये सब फालतू बातें हैं जिन्होंने देखा ही नहीं जिन्होंने अनुभूति नहीं की है शिव के क्लेम करते हैं आपने शिव जी को देखा कृष्ण भगवान थे तब भी किन लोगों ने उनको पहचाना कितने लोगों ने पहचाना उनको नो वन उनकी हयाती में भी कोई पहचान नहीं पाया उनकी दिव्यता जब दिव्यता दिखाने जाते थे तो अर्जुन तो घबरा गया और बोला प्रभु बंद करो यह मुझे से सहा नहीं जाता है वापिस बैक टू आवर फ्रेंडियर फॉर्म उनकी हयाती में कोई पहचाना नहीं तो आप कार्बन कॉपी ज़ेरॉक्स कॉपी इमेजिनेशन से आप ईश्वर के पास कैसे पहुंचोगे अंदर से पहचाना क्या है इतने खुश क्यों थे कृष्ण एक तो तीन चार बार मिले होंगे राधा को और क्या-क्या पोएम्स लिखे जा रहे हैं क्या-क्या चित्र बनाए जाते हैं उनके बारे में वो तो छोटा लड़का था जब तक वृंदावन में था 13 14 साल का लड़का एंड शी वाज अ मैरिड वुमन और ऐसी ऐसी रोमांटिक फिगर्स बनाकर उनको साथ में खड़े कर देते हैं यू डोंट इवन हैव रिस्पेक्ट फॉर गॉड्स एंड गडेसेस सो वी हैव टू रिथिंक फिर से गहराई में सोचो क्या जो हम कर रहे हैं वह सही है मोर देन फोर टाइम्स और मोर देन फाइव टाइम्स इन भगवत गीता श्री कृष्ण बताते हैं कि मैं हर एक के हृदय में मौजूद हूं श्री रामचंद्र जी भी जब लक्ष्मण को सिखाते हैं रामायण में सुप्रीम नॉलेज वो राम गीता के नाम पर जानी जाती है उसमें सब उल्लेख है कि मैं हर एक के हृदय में हूं वह भी कहते थे यह भी कहते हैं उपनिषद एक सेजिस वह भी बताते हैं अंगुष्ट मात्र अपने हृदय में एक स्पेस है तारा उस स्पेस में हम रहते हैं उनको अंतर्यामीन कहते हैं बाहर रहते होते तो नाम बोल देता ना बहिर्यामिन कभी सुना है बहिर्यामीन आपने और ढूंढते हैं हम कहां बाहर बड़े-बड़े मंदिर बनाते हैं क्या फायदा जाते हैं दर्शन करते हैं और वही का वही बेवकूफ वापस नो चेंज ईश्वर के सानिध्य में आते ही हम में कुछ फर्क होना चाहिए फर्क नहीं होता है क्योंकि हम बाहर से एकदम संतुष्ट हो जाते हैं कि हम उनको नमन करके आए लल्ला की मूर्ति को देख के आए लेकिन यह दर्शन नहीं है जैसे मैंने आपको बताया राम के टाइम में भी कोई पहचान नहीं पाए उनकी मां खुद पहचान नहीं पाई तो आप 7 8ाउ इयर्स के बाद आप कैसे पहचानोगे कृष्ण को भी कोई पहचान नहीं पाया था फोटोग्राफ से कैसे पहचानोगे यू थिंक आई एम सीरियसली टेलिंग यू गाइस करो घर में वेद एंड उपनिषद है हाथ ऊंचा करो ओके नॉट इवन 1% कितने लोगों ने सही ढंग से उसको पढ़ा है कोई नहीं जब पढ़ा ही नहीं तो समझोगे कैसे और जीवन में कैसे उतारोगे तो अपना देश जिसके पर हम गर्व लेते हैं इंडोनेशन शर्माना चाहिए किसी के घर में ना तो वेद है ना गीता है ना कभी पढ़ा है ना कभी समझे है नहीं जीवन में उतारा है ठोटे हो आप सब तो अनुभव कब करोगे जीवन चला जाएगा बीत जाएगा और आखरी समय आएगा तब यू विल हैव नथिंग बट रिग्रेट्स एंड देन यू विल बी रिसाइकल्ड लेकिन आप सब लोग समझो असल हिंदू क्या है कितनी बार वेद उपनिषद में मंदिर का शब्द वापस आया है कितनी बार वो जरा सोचो पढ़ के देखो वो भी देखो तो यह बच्चे लोग रिसर्च कर सकते हैं Google पर जाओ है ना वेरी इजी फाइंड द नंबर्स ऑफ टाइम्स टेंपल और मंदिर वर्ड इज बीइंग यूज्ड इन उपनिषद एंड वेदास देन यू विल नो जीरो टाइम्स क्योंकि उनका उनकी अनुभूति आंतरिक है बाह्य नहीं है बाहर तो बाहर ही रह जाएगा अंदर का भी अंदर ही रह जाएगा जब जाएंगे तब लेकिन जब अंदर अनुभूति होती है तो हम में टोटल दिव्य ट्रांसफॉर्मेशन हो जाता है तब हमें दर्शन की जरूरत नहीं पड़ती है क्योंकि आप वह बन चुके हैं जिनके पीछे पड़े थे आप तो क्रेव हैव द तड़प टू रियलाइज द अल्टीमेट एंड ध्यान वही चीज है दी प्लस यान ध्यान दी मींस अल्टीमेट नॉलेज यान मींस व्हीकल जिस चीज से हम आखरी नॉलेज तक पहुंच जाते हैं अल्टीमेट विडम तक दिव्य नॉलेज उसको ध्यान कहते हैं और कैसा दान साजहानपुर में बसे हुए श्री बाबूजी महाराज ने यह प्राणाहुति की वजह से इसको टोटली रिवोलशनाइज कर दिया कोई भी बंदा कोई भी शख्स जिसके दिल में तड़प है दिल खोल के बैठ जाओ देखो आपको दिव्यता का अनुभूति होती है कि नहीं चैलेंज के साथ कह सकते हैं हम सो थैंक यू कल हम फतेगढ़ जाएंगे तो नेक्स्ट टाइम और आप सबको तो पता है जनवरी फरवरी में पूरा 30 40 डेज हम सहजानपुर में ही रुकेंगे सो उस समय बार-बार मिलते रहेंगे और तब तक आप विल हैव फ्यू थाउजेंड पीपल अटेंडिंग देखेंगे थैंक यू सभी से अनुरोध है कि पूज्य दास जी के जाने तक अपनी स्थान पर ही बने रहे कुछ इंपॉर्टेंट अनाउंसमेंट्स भी हैं सभी से अनुरोध है कि अपने स्थान पर बने रह

Live Meditation with Daaji | 19 June 2025 | 7:00 pm IST | Shahjahanpur | UP | Daaji

Channel: heartfulness

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