YouTube to Text Converter

Transcript of What is Loss On Ignition ? How to measure LOI (In Hindi)

Video Transcript:

हेलो फ्रेंड नमस्कार आई एम जेके आज हम बहुत ही इंटरेस्टिंग टॉपिक लेके आए हैं कि लॉस ऑन इग्निशन जो कि बहुत ही इंपॉर्टेंट पैरामीटर होता है जब भी कोई भी रामिक्स की डिजाइनिंग होती है सेवन प्लांट में तो इसका एक अहम रोल होता है तो इसके बारे में जानना बहुत ही जरूरी रहता है कि लॉस ऑन इग्निशन कैसे कैलकुलेट करते हैं और क्या होता है देखिए लॉस ऑन इग्निशन सिंपल वर्ड में जब भी आप प्रॉमिस का डिजाइन करने जाएंगे तो आपको यह पता लगाना रहेगा कि हमारा जो मटेरियल है वो आफ्टर बर्निंग के बाद में कितना उसमें लॉसेस होते हैं मान लीजिए कैल्शियम कार्बोनेट है कैल्शियम कार्बोनेट आप देखेंगे जितना भी रिएक्शन होता है रॉ मिल का तो रॉ मिल लाइमस्टोन से बनता है रॉ मिल और रॉ मिल का जब प्रॉपर तरीके से बर्निंग होता है किल्न में तो वो कितना बन जाएगा आप देखते होंगे ऐसे ही जो क्लिंकराइजेशन फैक्टर होता है वो करीब-करीब 1.56 के अराउंड रहता है हमने तो लाइम स्टोन दिया करीब-करीब 1600 टन लेकिन कितना क्लिंकर प्रोड्यूस हुआ वो एप्रोक्सीमेटली 1000 टन ही निकला तो कहने का मतलब है कहीं ना कहीं लॉसेस होते हैं तो उन लॉसेस को जब भी आप प्रोमिक्स की डिजाइन करने जाएंगे तो इन लॉसेस को जानना जरूरी रहता है तो इन सभी का जितने भी रॉ मटेरियल यूज होते हैं चाहे वो लाइमस्टोन है चाहे वो लेटराइट है चाहे वह बॉक्साइट है चाहे वो रेड मट है चाहे आप सोडियम सिलिकेट भी मिलाते हैं चाहे जो भी मटेरियल आप एट के रूप में चाहे इंप्योरिटी के रूप में चाहे आप एनहांसर के रूप में या परफॉर्मेंस इंप्रूवर के रूप में जितने भी मटेरियल मिलाए जाते हैं उन सभी का लॉस ऑन इग्निशन निकालते हैं तो लॉस ऑन इग्निशन क्या होता है कि जो भी आप मटेरियल उसका लॉस ऑन इग्निशन निकालेंगे मतलब आफ्टर बर्निंग आफ्टर इग्निशन के बाद में जो मटेरियल लॉस हुआ कितना परसेंटेज लॉस हुआ तो लॉस किन-किन रूपे में होती है लॉस होती है जैसे उसमें अगर कुछ भी वोलेटाइल मैटर है ऑर्गेनिक मैटर है या कितना केमिक बाउंड मॉइश्चर वाटर परसेंटेज है मटेरियल में वो रिमूव होगा तो वो कितना परसेंट रिमूव होगा वही है लॉस ऑन इग्निशन सिंपल हम इस पैरामीटर के हिसाब से देखते हैं कि जैसे कि मान लीजिए कि लाइमस्टोन है तो लाइम स्टोन में आप देखते हैं कि कैल्शियम ऑक्साइड की वैल्यू होती है जनरली कैल्शियम कार्बोनेट की वैल्यू रहती है तो उसमें co2 की भी वैल्यू इंक्लूडेड रहता है लेकिन इसमें ए2 होता है सिलिकॉन ऑक्साइड होता है अलमुनिया ऑक्साइड होता है आरन भी होता है और एमजीओ भी होता है जब हम लाइम स्टोन का लॉस ऑन इग्निशन निकालते हैं तो उसमें हमको देखने को मिलेगा तो करीब-करीब 39.0 उसका एओआई आता है एप्रोक्सीमेटली रेंज है 39 का रेंज आता है तो एओआई मतलब 39 पर का लॉस हुआ आफ्टर बर्निंग वो 39 पर किन किन रूप में गया चाहे वो जितने भी ऑर्गेनिक मैटर है चाहे वो कैल्शियम कार्बोनेट जो सीओटी के रूप में कन्वर्ट होके एनवायरमेंट में गया वह सभी इसमें काउंट होता है जब हम राम इस का डिजाइन करने जाएंगे तो लोवाई का सबसे इंपॉर्टेंट रोल रहता है जैसे क्ले है क्ले क्ले का जब हम लॉस न इग्निशन निकालते हैं तो करीब करीब आता है 20 जो भी मॉइश्चर है कुछ उसमें वोलेटाइल मैटर है वो सारा रिमूव होता है तो करीब-करीब 20 के एप्रोक्सीमेटली एलो आई आता है क्ले का ऐसे ही हम आयरन ओर का जब निकालते हैं तो आयरन ओर में आप देखते हैं कि ह्यूज परसेंटेज ऑ जो मात्रा होता है वो आयरन ऑक्साइड का होता है तो इसमें इग्निटर बर्निंग के बाद ही आया तो उसका जो लॉस ऑफ इग्निशन है जो करीब-करीब जीरो होता है लो आई रिफर टू रिलीज ऑफ वोलेटाइल मैटर सच एज co2 co2 जो भी है वो रिमूव हुआ वाटर वेपर वाटर के फॉर्म में जितने भी उसमें मटेरियल है वो और अदर कंबल मटेरियल जो भी ज्वलनशील मटेरियल है वो सारा रिमूव होगा उसके बाद ही लॉस ऑन इग्निशन के बाद में जो भी परसेंटेज रिमूव होता है वही है लॉस ऑन इग्निशन अब हम देखते हैं कि एलो आई निकालते कैसे हैं लॉस न इग्निशन जो है उसको निकालने का तरीका क्या होता है जनरली सीमेंट प्लांट में इसके लिए सबसे पहला क्या है कि इसमें कौन-कौन सा इक्विपमेंट का यूज होता है तो इसमें सबसे पहला है कि प्लैटिनम क्रुिबल होता है यह अलग-अलग साइजों में आते हैं करीब करीब 20 से 25 एमएल तक और बड़े साइज में भी आते हैं ए बर्थ रिक्वायरमेंट कि कितना हमको सैंपल की क्वांटिटी को मेजर करने के लिए यूज करना है दूसरा क्या है डेसी केटर का यूज होता है जो भी सैंपल है उसको अगर हमको कूल करना है उसको हमको रखना है तो इसके लिए डेस केटर का यूज होता है इसके बाद मफल फर्नेस का यूज होता है जो कि करीब करीब 1000 डिग्री सेल्सियस तक का टेंपरेचर का रेंज रहता है तो इसमें करीब 950 डिग्री सेल्सियस तक के लिए इन सैंपल को इसमें रख के हीट किया जाता है इग्नाइट किया जाता है वेट बैलेंस है यह यूज में आता है कि जो भी मटेरियल है उसको वेइंग करने के लिए और यह फुल क्लोज रहे कि जैसे कि एनवायरमेंट का कोई भी एयर मॉइश्चर से इफेक्टेड ना हो कोई फैन चल रहा है तो फैन से वेट लॉस वेट में कोई वेरिएशन ना आने पाए जिससे कि हमको परफेक्ट मेजरमेंट मिल पाए एओ आई का और सैंपल का जरूरत पड़ता है उसके लिए आप कुछ भी आप ले सकते हैं अब हाउ टू कैलकुलेट एलो आई इसके लिए सबसे पहला क्या है कि जो भी आप सैंपल ले मान लीजिए लाइमस्टोन है तो लाइमस्टोन को सबसे पहले क्या करेंगे उसको लेबोरेटरी के बाल मिल में उसको परफेक्ट ग्राइंडिंग कर लेंगे फाइन ग्राइंडिंग जिससे कि उसमें यूनिफॉर्म मेंटेन रहे कि जब हम उसको बर्न करने जाए मफल फर्नेस के इनसाइड में तो वह इनफॉर्म तरीके से बर्न हो जिससे प्रॉपर तरीके से उसके अंदर में जितना भी वोलेटाइल मैटर है और ऑर्गेनिक मैटर है या कंबाइंड वाटर है वह सारा रिमूव हो पाए तो यूनिफॉर्म के लिए उसका ग्राइंडिंग करना बहुत ही जरूरी है सबसे पहले आप सैंपल प्रिपेयर कर लीजिए सल वो कितना भी हो सके न से लेकर 100 ग्राम तक का सैंपल आप ले सकते हैं तो वह डिपेंड करता है कि आप जो प्लेटिनम क्रुिबल है उसका साइज क्या है अगर वो 20 एमएल तक का है तो आप हार्डली 10 ग्राम तक का सैंपल आप ले सकते हैं तो सबसे पहले क्या है तो जो क्रुस बल है उसको बेइंग स्केल में सेट कर लेते हैं कि जो कबल का बेट है वेइंग स्केल में अटैच हो जाना चाहिए उसका डल व बेट बोलते हैं कि जो कसफल है उसका वेट वंग स्केल में आ गया तो वंग में सबसे पहले उसको हम काउंट कर लेंगे इसके बाद में प्लेटिनम कुश बल में सैंपल को रखेंगे मान लीजिए 1 ग्राम या 2 ग्राम जितना भी सैंपल आपको रखना है उस सैंपल को प्लेटिनम क्रुस बल में रखें और फिर उसका हम मेजरमेंट कर लिए वेइंग स्केल में तो जब हम वे स्केल में इसका मेजरमेंट ले लिए उसके बाद में प्लेटिनम क्रुस बल को हम रख देते हैं मफल फर्नेस के इनसाइड में तो मफल फर्नेस में क्या करेंगे कि हम टेंपरेचर मेंटेन करेंगे 900 50 डिग्री सेल्सियस और यह जो हीट अप का काम है वह करीब-करीब 15 मिनट तक हम उसको हीट करेंगे प्रॉपर और हीट करने के बाद में अगर हम 15 मिनट तक रखते हैं और हीट करने के बाद में 950 डिग्री सेल्सियस में व सारा बर्न हो जाए जितने भी जितने भी वाटर कंटेंट है जितने भी वोलेटाइल मैटर है जितने भी कंबाइंड वाटर है वह सारा रिमूव हो जाएगा और उसके बाद में जितना परसेंटेज आप लॉस आएगा उसके बाद हम निकालेंगे तो उसके बाद में 15 मिनट के बाद में फिर से हम सैंपल को निकाल के सपल को निकाल के हम डेस केटर में रख देते हैं डेस केटर में रखने का परपज यही है कि अगर हमारा कुछ भी रर है सैंपल में आफ्टर मफल फर्नेस के बाद में तो वोह पता लगाया जा सके तो इसलिए सबसे पहले फिर से उस को हम कूल डाउन करते हैं डिस केटर में फिर सेम सैंपल को हम फिर से मफल फर्नेस में रखते हैं फ मिनट के लिए रखते हैं और उसके बाद में फिर से हम बाहर निकालते हैं फिर उसका वेइंग स्केल करते हैं तो करीब-करीब वे इ स्केल जब उसका करेंगे वे करेंगे तो करीब-करीब सैंपल का जो वेट आता है वो करीब-करीब सेम आता है अगर उसमें वेरिएशन आ रहा है तो देयर इज सम प्रॉब्लम है ् बेट हमारा पहला था जो कि क्रुस बल का बेट था दूसरा बेट है हमने वेट किया कि क्रुस बल और प्लस जो हमने सैंपल लिया कितना सैंपल लिया और तीसरा वेट आया w3 मतलब आफ्टर बर्निंग आफ्टर इग्निशन मफल फर्नेस के बाद में जो हम निकालते हैं उस उसका हम बेइंग करेंगे वो आ गया वेट w3 और फिर एक सिंपल फार्मूला है कि w2 - w3 डिवाइड बा w2 - w1 w2 w2 यही कि हम जो सैंपल का बेट लिए हैं क्रुस बल के साथ में वो w3 आफ्टर मफल फर्नेस के बाद में जो बेट आया और डिवाइडेड बाय w2 मतलब जो हम सैंपल का वेट लिया - w1 w1 जनरली जीरो ही रहता है आप देखते होंगे कि जो प्लेटिनम का क्रूस बल है उसको जब हम वेइंग स्केल में सेट करते हैं तो जीरो सेट कर देते हैं वेइंग स्केल में तो वो ऑटोमेटिक वो सेम वेट को काउंट कर लेता है अगर नहीं है तो क्रुस बल का वेट जो आ रहा है उसको भी आप यहां पर मेंशन कर सकते हैं तो वो क्रुस बल का वेट आपका डट में भी रिफ्लेक्ट होगा w3 में भी रिफ्लेक्ट होगा डट में रिफ्लेक्ट होगा तो उसी रेशियो के साथ में आप इन सभी का वैल्यू आप w2 w3 डट और डव में रखेंगे इसके बाद परसेंटेज ऑफ एओ आई निकल जाता है तो एओ आई निकलने के बाद में हम रमस डिजाइनिंग की तरफ जाते हैं नेक्स्ट सीरीज में आगे वीडियो में हम देखेंगे कि मोस्टली एलो आई का क्या बेनिफिट होता है हेलो दोस्तों नमस्कार आई एम जेके देखिए एक चीज मैं आपको बताना चाह रहा हूं अगर आपको अपने प्रोफेशनल लाइफ में आगे बढ़ना है तो आपके पास में एक कोच होना बहुत ही जरूरी है जो आपको हर क्षेत्र में बता पाए आपके प्रोफेशनल लाइफ के बारे में बता पाए प्लांट के रिलायबिलिटी के बारे में बता पाए प्लांट के ऑपरेशन मेंटेनेंस के बारे में बता पाए अगर आप मैनेजर बनना चाह रहे हैं तो उसके लिए क्या स्किल होना जरूरी है उसके बारे में पता चल पाए लीडरशिप हायर पोस्ट प जाना चाह रहे हैं तो उसके बारे में अच्छी खासी जानकारी आपको कहां मिलेगा इसलिए आपके पास में एक कोच होना बहुत ही जरूरी है इसलिए सीमेंट पीडीएम ऐप एक ऐसा प्लेटफार्म है जहां पर आपको इंडस्ट्रियल नॉलेज प्रोफेशनल नॉलेज सॉफ्ट स्किल प्लांट ऑपरेशन मेंटेनेंस के बारे में अच्छी खासी जानकारी मिलेगी वो भी प्रैक्टिकल और थ्योर तो देर किस बात का तुरंत आप सीमेंट पीडीएम ऐप डाउनलोड कीजिए और अपने प्रोफेशनल लाइफ को इनलाइट मेंट कीजिए बहुत-बहुत धन्यवाद

What is Loss On Ignition ? How to measure LOI (In Hindi)

Channel: CementPDM

Convert Another Video

Share transcript:

Want to generate another YouTube transcript?

Enter a YouTube URL below to generate a new transcript.