Transcript of Dawah Ya Halakat by Dr. Zakir Naik | Pune, India (Urdu)
Video Transcript:
नद नसली अला रसूल करीम अम्मा बाद अजु बिल्लाह मिन शैतान रजी बिस्मिल्लाह रहमान रहीम आज की इस बाबत मजलिस में मैं फैजुर रहमान नदवी आप तमाम हजरात का पुर तपाक इस्तकबाल करता हूं अस्सलाम वालेकुम रहमतुल्ला व बरकाह खवातीन हजरात प्रोग्राम का आगाज कुराने पाक की तिलावत से होगा इसके लिए मैं इस्लामिक इंटरनेशनल स्कूल मुंबई के उस्ताद कारी मुस्तकीम अंसारी से गुजारिश करूंगा कि वह कुराने पाक की तिलावत से जलसे का आगाज करें [संगीत] मरम बिस्म बरहर [संगीत] रहीम व कद जलना फमा बरु [संगीत] वल कद जालना फिस समा बुरूज व जनाना [संगीत] वना कुली [संगीत] शरम इला [संगीत] मुबी व [संगीत] नाहा वना [संगीत] कु [संगीत] मज व जलना लकम फी [संगीत] मान ल ब [संगीत] व इ मनन इलाना जज [संगीत] वनल इला बद मालू [संगीत] समा [संगीत] मा फसना [संगीत] [संगीत] वम ना [संगीत] [संगीत] लयाना मसमा [प्रशंसा] [संगीत] वम ल बजनी [संगीत] [संगीत] वना व [संगीत] [संगीत] मु व र इह ह [संगीत] [संगीत] जजाकल्लाह रन कारी साहब आप अभी कारी साहब से कुराने पाक की सूरा सूर हिज्र सर नंबर 15 आयत नंबर 16 से 25 तक की आयतों की तिलावत समात फरमा रहे थे आइए हम उनका तर्जुमा सुनते हैं अल्लाह के नाम से शुरू करता हूं जो बड़ा मेहर बान निहायत रहम करने वाला है यकीनन हमने आसमान में बुर्ज बनाए हैं और देखने वालों के लिए उसे सजा दिया गया है और उसे हर मर्दू शैतान से महफूज रखा है हां मगर जो चोरी छुपे सुनने की कोशिश करे उसके पीछे दकता हुआ शोला लगता है और जमीन को हमने फैला दिया है और उस पर पहाड़ डाल दिए हैं और उसमें हमने हर चीज एक मयन मिक दार से उगा दी है और इसी में हमने तुम्हारी रोजिया बना दी हैं और जिन्हें तुम रोजी देने वाले नहीं हो और जितनी भी चीजें हैं उन सबके खजाने हमारे पास हैं और हम हर चीज को उसके मुकरा अंदाज से उतारते हैं और हम भेजते हैं बोझल हवाएं फिर आसमान से पानी बरसाक वो तुम्हें पिलाते हैं और तुम इसका जखीरा करने वाले नहीं हो हम ही जलाते और मारते हैं और हम ही बिल आखिर वारिस है और तुम में से आगे बढ़ने वाले और पीछे हटने वाले भी हमारे इल्म में है आपका रब सब लोगों को जमा करेगा यकीनन वह बड़ी हिकम तों वाला बड़े इल्म वाला है आयतों के तर्जुमे के बाद अब मैं आपके सामने पुन की एक मशहूर शख्सियत को दावत सुखन देने जा रहा हूं जिनकी खिदमा का दायरा काफी वसी है और इस प्रोग्राम को तरतीब देने में आपकी नुमाया मेहनत रही है मेरी मुराद है जनाब पीए इनामदार से प इनामदार की शख्सियत बहुत मारूफ है और खास तालीमी मैदान में आपने उम्मते मुस्लिमा के लिए बड़ा नुमाया रोल अंजाम दिया है आप कई अहम शोब तालीम से मुतालिक इदार में बहुत सारे अहम उदों पर फायज हैं खास तौर पर सद्र महाराष्ट्र कॉस्मोप्रोफ उर्दू जबान मेंबर में मैनेजमेंट कौंसिल हमदर्द यूनिवर्सिटी दिल्ली मेंबर मैनेजमेंट कौंसिल अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी मेंबर सीनेट जामिया मिल्लिया इस्लामिया सेंट्रल यूनिवर्सिटी नई दिल्ली इसके अलावा आपने समाजी शबे में भी एक अहम किरदार अदा किया है आप यतीमखाना अंजुमन खैरुल इस्लाम मुंबई और तिब्बिया यतीम खाने के ट्रस्टी भी है आप महाराष्ट्र स्टेट माइनॉरिटी कमीशन मुंबई के के रुकन भी रह चुके हैं आप अगरचे कानून की कोई डिग्री नहीं रखते मगर इसके बावजूद आपको कानूनी मसाइल हल करने में खास तौर पर तालीमी इदार के मसाइल हल करने में इमतियाज हासिल है य इनामदार साहब के ताल्लुक से मैंने तारुफ में वक्त की कमी की वजह से खते सार से काम लिया है वरना आपकी तालीमी और समाजी खिदमा को इतने कम वक्त में आप हजरात के सामने रख बड़ा मुश्किल काम है मैं उनको यह शेर पढ़ते हुए दावते सुखन देता हूं के लाखों ही मुसाफिर चलते हैं मंजिल पर पहुंचते हैं दो एक लाखों ही मुसाफिर चलते हैं मंजिल पर पहुंचते हैं दो एक अहले जमाना कद्र करो नायाब न हो कामयाब हैं हम पीए इनामदार साहब तशरीफ लाए और अपने कीमती और मुफीद मशर से हम सामन को मजूज फरमाए इनामदार साहब आली जनाब डॉक्टर जाकिर नायक साहब इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन के सभी जिम्मे दरा इस महफिल में जाकिर नायक साहब को सुनने के लिए इस्लाम के बुनियादी उसूलों को समझने के लिए दुनिया के दूसरे मजहब के साथ इस्लाम के उसूलों को पहचानने के लिए इस कैंपस में आए हुए सभी नौजवान बुजुर्ग भाइयों बहनों और साथी दरा पुणा के लिए यह खुशकिस्मती है डॉक्टर नाइक आज और आज से तीन दिन तक हमारे बीच होंगे और आप तक अपने खयालात पहुंचाने का काम करने वाले हैं सबसे पहले पुणा वालों की तरफ से आजम कैंपस की तरफ से मैं उन का उनकी सभी साथीदार का दिल्ली इस्तकबाल करता हूं हम खुशनसीब हैं कि इंटरनेशनल स्कॉलर ऑफ इस्लामिक स्टडीज साथ ही साथ इंटरनेशनल स्कॉलर ऑफ कंपैरेटिव रिलीजन ऐसी शख्सियत हिंदुस्तान में बसती है दूसरी बात व हमेशा आजम कैंपस से यहां के जिम्मेदारों से वाबस्ता है तीसरी बात वह पुना से घर के फैमिली के वजह से भी जुड़े हुए हैं और मैं जानता हूं डॉक्टर जाकिर नायक साहब ने एक ऐसा चेंज इस्लाम के टीचिंग के जरिए इस मुल्क में और सारी दुनिया में लाया हुआ है इससे पहले हम लोगों ने इतने बड़े मजमे सिर्फ जज्बाती बातों के वक्त में देखे हैं दिमाग की बात हो तालीम की बात हो और इतने बड़े पैमाने पर नौजवान डॉक्टर नायक साहब को सुनने के लिए आता है मुझे लगता है डॉक्टर नायक साहब ने अपने स्टाइल के वजह से अपने तरीके का के वजह से सबसे पहले जो चेंज लाया है वह यह है कि अमन के जरिए तालीम के जरिए जज्बात को दूर रखकर भी हम लोग दूसरे मजहब के लोगों के साथ उन्हीं के जबान में उन्हीं के स्क्रिप्चर के साथ राबता कायम कर सकते हैं और मुझे लगता है इस मुल्क की जो बुनियादी कल्चर है जो बुनियादी तहजीब है उस तहजीब से कुछ लोग और खास कर के पॉलिटिशियन इस मुल्क को दूर लेकर जाना चाहते हैं ऐसे वक्त में डॉक्टर नायक साहब ने अपने नॉलेज से अपने एक नए तरीके का से और साथ-साथ में मॉडर्न टेक्नोलॉजी को इस तरी के कार के साथ में जोड़कर एक नया रेवोल्यूशन लाया हुआ है उनका यह कहना है कि अल्लाह अगर एक है ईश्वर अगर एक है गॉड अगर एक है तो उसके पैगाम अलग-अलग नहीं हो सकते उसका पैगाम भी एक है और उस एक पैगाम को सभी स्क्रिप्चर में सभी रिलीजस बुक्स में ढूंढकर एक जगह लाकर उसकी एक जहती का एग्जांपल देने का काम आप कर रहे हैं उन्होंने वक्त के हालात को समझ लिया है आज का नौजवान तालीम आफताब साइंटिफिक टेंपरामेंट रखने वाला और लॉजिक को समझने वाला है व कोई भी ऐसी बात को मानने को तैयार नहीं है जो साइंटिफिकली एक्सप्लेन नहीं की जा सकती लॉजिक के साथ वह समझाई नहीं जा सकती ऐसी बातों को वह समझने के लिए तैयार नहीं है इस्लाम के बुनियादी उसूलों में भी एक ही उसूल है कि अगर आप कुछ कहते हैं तो उसका प्रूफ दी और प्रूफ ऐसा दीजिए कि वह साइंटिफिक एनालिसिस में प्रू हो सके और मुझे लगता है इस चीज को बेहतरीन तरीके से समझकर और उसी को बुनियाद बनाकर डॉक्टर जाकिर नायक साहब ने अपना एक ढंग अपना एक स्टाइल शुरू करते हुए मा तक पहुंचने का तरीके का इख्तियार किया है नॉलेज को शेयर करना नॉलेज को बढ़ाना है और मुझे लगता है कि इस मुल्क में अगर अमन है बहुत छोटी मोटी घटनाओं को छोड़कर 99.9 पर इस मुल्क में अमन है और मैं दावे के साथ कहता हूं कि इस मुल्क में जितनी मुस्लिमों की हालत अच्छी है दुनिया के दूसरे मुल्कों में नहीं है और हिंदुस्तान के दस्तूर में हम लोगों को सभी कमों के साथ बेहतरीन तरीके से आगे बढ़ने का मौका दिया गया है डॉक्टर जाकिर नायक साहब आपने सभी मजहब के लोगों को अमन का पैगाम दिया है उनके साथ आप मिलकर बड़े-बड़े मजम में बिल्कुल साइंटिफिक तरीके से उनके ही स्क्रिप्चर को साथ में रखकर सामने रखकर बात करते हैं और मुझे लगता है इस मुल्क की तहजीब के साथ जोड़कर इस्लाम की फिलॉसफी को आप आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं मुझे पूरी उम्मीद है कि जो भी डॉक्टर जाकिर नायक साहब को सुनता है वह अमन को छोड़कर दूसरा कोई रास्ता तियार नहीं कर सकता और अमन के रास्ते पर चलने के लिए इस्लाम की बुनियादी उसूलों को आगे बढ़ाने के लिए और इसी के जरिए एक जहती का पैगाम देने के लिए आज डॉक्टर जाकिर नायक साहब पुन आए हुए हैं व पुन आते रहते हैं और हमारी रिक्वेस्ट पर उन्होंने तीन दिन का प्रोग्राम यहां पर दिया है मुझे लगता है कि इन तीन दिनों में हम लोग इतना पास जाएंगे कि आने वाले साल दो साल तक अगर हम सिर्फ उसको सोचते रहे उसको एनालिसिस करते रहे और अगर हम उस पर अमल भी करते रहे तो हमारी पॉलिटिकल सोशल रिलीजस एंड फाइनेंशियल पोजीशन चेंज हो जाएगी और यही हमारा मकसद है इस कैंपस को एस्टेब्लिश करने के पीछे और इस कैंपस में जो हम अलग-अलग एक्टिविटीज कर रहे हैं उसके भी पीछे हमारा यही मकसद है मिलकर सारे कमों के साथ इस मुल्क को आगे बढ़ाना है और साथ ही साथ इस्लाम के उसूलों को दूसरे मजहब के उसूलों के साथ एक प्लेटफार्म के ऊपर लाकर जो कॉमन थिंकिंग है उस कॉमन थिंकिंग को आगे बढ़ाना यह हमारे कैंपस का मकसद है और इस मकसद को पूरा करने का एक स्टेप हमने डॉक्टर जाकिर नायक साहब को यहां पर बुलाकर पूरा करने की कोशिश की है मैं आप सब लोगों की तरफ से पुना वालों की तरफ से डॉक्टर जाकिर नायक साहब और उनके सभी साथीदार का फिर एक बार इस्तकबाल करता हूं खुशामदीद कहता हूं वेलकम करता हूं और मैं आपकी रजा लेता हूं जय हिंद शुक्रिया पीए इनामदार साहब आप हजरात अभी आजम कैंपस के रूहे रवा जनाब पीए इनामदार साहब के ख्यालात समात फरमा रहे थे अब मैं आप हजरात के सामने हमारी इस बजम के मुकर जिनको आप सब हजरात सुनने के लिए यहां जमा हुए हैं मैं उनका एक इंतहा मुख्तसर तारुफ आप हजरात के सामने पेश करता हूं आज की हमारी इस बजम के जो मुकर हैं वह डॉक्टर जाकिर नायक साहब है डॉक्टर जाकिर नायक ना सिर्फ एक ब बाक बैनल अकवाले मुफक्कीर बल्कि मजहिल में आपका कोई सानी नहीं है आप पेशे के तबार से एमबीबीएस डॉक्टर है डॉक्टर जाकिर नायक इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन मुंबई के सद्र हैं इस्लामी नजरिया की पास बानी के अलावा आप इस्लाम के मुतालिक फैली हुई गलतफहमियां को कुरान और हदीस और दीगर मजहिल से मंकी दलाल और सांसी हका के जरिए दूर करने में काफी महारत रखते हैं आप अपने नकीद तज जियों और आवामी तकरीरों के दौरान हाजरी की तरफ से किए गए सवालात के मुद और तफी बख जबात के लिए सारी दुनिया में जाने जाते हैं आपने गुज 10 वर्षों में दुनिया के बहुत से मलिक जैसे अमेरिका कनाडा यूके सऊदी अरेबिया मुत्त हैदा अरब इमारा कुवैत कतर बहरे ओमान ऑस्ट्रेलिया न्यूजीलैंड साउथ अफ्रीका और दूसरे मुल्कों में 1000 से जयद आवामी तकरीरें की हैं इसके साथ-साथ हिंदुस्तान के बहुत सारे शहरों में भी आपने बहुत सारी आवामी तकरीरें पेश की हैं खास तौर पर बेंगलोर में आपने 21 जनवरी सन 2006 को एक बड़ी तारीख साज तकरीर की थी जो श्री श्री रविशंकर के साथ हुई थी यह एक मुबा हैसा था जो लाइव टेलीकास्ट भी हुआ था और इंतिहा कामयाब रहा मशहूर आलमी दाई इस्लाम व माहिरे तकाबबलअल्लाहू उनको एजाज से नवाजा और कहा बेटे तुमने जो काम चार बर्सों में किया है उसको पूरा करने में मुझे 40 साल लगे अल्हम्दुलिल्लाह डॉक्टर साहब ने दावती मैदान में अपना एक मुनफरीद और नुमाया मकाम हासिल किया आपने मौजूदा जराय अबला यानी मॉडर्न टेक्नोलॉजी को अपनाकर दावती कामों को जबरदस्त तरक्की दी और पीश टीवी इसी फिक्र का नतीजा है पीच टीवी आप दुनिया भर के 150 से भी ज्यादा मुल्कों में देखा जा रहा है और मुस्लिम समाज की इस्लाह और गैर मुस्लिमों में इस्लाम के मुतालिक फैली हुई गलत फियों को दूर करने और इस्लाम की सही तस्वीर पेश करने में काफी मासिर साबित हुआ है दुनिया के 150 से ज्यादा मुल्कों में बिला नागा डॉक्टर जाकिर नायक की तकरीरों को बैनल अकवाले पर पेश किया जाता है उम्मते मुस्लिमा के मसाइल के हल के लिए आप हमेशा फिक्र मंद रहे हैं और इसीलिए आज के हालात को सामने रखते हुए और मुसलमानों की माशी बदहाली से मुतासिर होकर आपने इस साल एक बैतुल माल भी कायम किया है जो आईआरएफ यूनाइटेड इस्लामिक एड के नाम से जाना जाता है अब मैं आपके और डॉक्टर साहब की तकरीर के दरमियान ज्यादा हैल होना नहीं चाहता मैं डॉट साहब से गुजारिश करूंगा कि वो माइक पर तशरीफ लाएं और अपनी तकरीर से हमें नवाज हैं और भी दुनिया में सुखनवर बहुत अच्छे कहते हैं कि जाकिर नायक का है अंदाज बयां और जनाब डॉक्टर जाकिर नायक साहब [प्रशंसा] अल्हम्दुलिल्लाह व सलातो सलाम रसूला वाला अमा बाद बिल्ला मनता रजी बिमला रहमान रहीम कुन काना बाक ना ला र स री ली मेरे मोहतरम बुजुर्गों और मेरे अजीज भाइयों और बहनों अस्सलाम वालेकुम रहमतुल्ला बरकात मुझे बेहद खुश हो रही है कि अल्हम्दुलिल्लाह तीन साल बाद मैं फिर से पुना में मौजूद हूं उर्दू तकरीर देने के सिलसिले में और मैं इसके लिए अल्लाह सुभान ताला के बाद जनाब पी नामदार साहब का आभारी हूं और मैं शुक्रिया करता हूं और अल्हम्दुलिल्लाह मैं इस कैंपस के लिए दुआ करता हूं अल्लाह सुभाना ताला इस कैंपस को नाही ही सिर्फ पुना में ब सारे हिंदुस्तान में इंशा अल्लाह एक मिसाल बनके र जाए जैसे आप जानते हैं कि मैं अक्सर तकरीर सिर्फ अंग्रेजी में करता हूं चंद मवा के पर जब ऑर्गेनाइजर इसरार करते हैं तो मैं कोशिश करता हूं कि कुछ बात में उर्दू में कहूं क्योंकि मेरे तालीम अंग्रेजी में हुई है मुमकिन है कि इस तकरीर में जो उर्दू में करने जा रहा हूं काफी गलतिया होंगी इसीलिए मैं तकरीर के पहले आप सब लोग से माजर चाहता हूं आज की तकरीर का मौजू है दावा या हलाक दावा की क्या मानी है जो लोग उर्दू और हिंदी जानते हैं वह दावत की मानी जानते हैं और जब भी यह लफ दावत जब हम सुनते हैं फौरन हम दिमाग में मटन बिरयानी या पुलाव आ जाता है जब भी दावत का लफ सुनते हैं मटन बिरयानी चिकन बिरयानी या पुलाव हमारे जहन में आता है दावत के मानी मटन बिरयानी चिकन बिरयानी नहीं है दावत की मानी है बुलाना इट मीन एन इनविटेशन और आज हम खाने की दावत के बारे में नहीं जिक्र करने वाले हम जिक्र करने वाले दावत इस्लाम के बारे में और जब भी किसी को दावत दी जाती है वो इंसान गैर होता है अपने घर वालों को दावत नहीं दी जाती तो दावत इस्लाम के पस मंजर में इसके सही मानी है गैरों को बुलाना गैर मुसलमानों को इस्लाम की तरफ बुलाना और जब हम कोई मुसलमान से इस्लाम के बारे में बात करते हैं उसके मानी है इस्लाह इस्लाह मतलब मरमत करना अगर अगर हम कोई मुसलमान से इस्लाम की बात करते हैं और कुछ चीज उस इंसान को बतलाते हैं उसे कहते हैं इस्लाह लेकिन जबान में इला और दावत जब इस्तेमाल करते हैं तो लोग यसा करते हैं लेकिन खुसूस तौर पर यह ल दावत इस्तेमाल होता है गैर मुसलमानों के लिए और इला इस्तेमाल होता है मुसलमानों के लिए अल्लाह सुभान ताला फरमाते कुरान मजीद में सर इमरान में सरा नंबर तीन आयत नंबर 110 में कुम रामनास मुसलमान आप सारी इंसानियत में सबसे बेहतरीन कौम है अल्लाह सुभान ताला हमें इज्जत दे रहा है अल्लाह फरमाते कि हम मुसलमान सारी इंसानियत में सबसे बेहतरीन कौम है जब भी किसी को इज्जत दी जाती है इज्जत के साथ जिम्मेदारियां हो लाजिम है जब भी किसी को इज्जत दी जाती है जब भी किसी को औ दिया जाता है नवर देर इ ऑनर गिवन इट इ लवेज फलो रिस्पांसिबिलिटी इज्जत के साथ आदे के साथ जिम्मेदारियां होना लाजिम है मिसाल के तौर पर एक स्कूल में प्रिंसिपल का अवदा टीचर से ज्यादा है एक टीचर का अदा एक टीचर की इज्जत क्लर्क से ज्यादा है एक स्कूल में प्रिंसिपल की इज्जत प्रिंसिपल का ददा टीचर से ज्यादा है एक टीचर की इज्जत एक टीचर का अदा क्लक से ज्यादा है इज्जत और ददे के साथ जिम्मेदारी लाजिम है एक प्रिंसिपल की जिम्मेदारी टीचर से ज्यादा है एक टीचर की जिम्मेदारी क्लक से ज्यादा है जब अल्लाह सुभान ताला कुरान मजीद में फरमाते हैं सूरे आल इमरान में सूरा नंबर तीन आयत नंबर 110 में कुतु खैरा मुसलमानों आप सारी इंसानियत में सबसे बेहतरीन उम्मा है जब अल्लाह सुभान ताला हम इजत दे रहा है ददा दे रहा है उसके साथ जिम्मेदारी लाजिम है और जिम्मेदारियां का जिक्र भी इसी आत में है र बिल मारूफ क्योंकि हम लोगों को अच्छाई की तरफ बुलाते हैं और बुराई से रोकते हैं और अल्लाह सुभाना ताला पर ईमान लाते हैं अल्लाह सुभाना व ताला हमें खैरा उम्मा कह रहा है क्योंकि हम लोगों को अच्छाई की तरफ बुलाते हैं और बुराई से रोकते हैं अगर हम लोगों को अच्छाई की तरफ नहीं बुलाएंगे और बुराई से नहीं रोकेंगे तो हम खैरा उम्मा कहलाने के लायक नहीं है हम मुसलमान कहलाने के लायक नहीं है अगर हम खैरा उम्मा है अगर हम मुसलमान हैं तो हमारे पर फर्ज है कि हम लोगों को अच्छाई की तरफ बुलाए और बुराई से रोके अगर हम लोगों को अच्छाई की तरफ नहीं बुलाते हैं और बुराई से नहीं रोकते हैं तो हम मुसलमान कहने के लायक नहीं है हम खैरा उम्मा कहने के लायक नहीं है अल्लाह ताला फरमाते सूर बकरा में सूरा नंबर दो आयत नंबर 143 में के हमने मुसलमान को एक उम्मते वस्त बनाया है ताकि हम लोगों को शहादत दे जिस तरीके से हमारे आखरी नबी महम स सलम हम पर शहादत द और इस तकरीर के शुरुआत में मैंने कुरान मजीद की एक आयत का तिलावत की सर तौबा सरा नंबर न आयत नंबर 24 सूर तौबा कुरान मजीद की सबसे सखत सूरा है सर तौबा कुरान मजीद में सबसे सख्त सूरा है क्यों मैं कह रहा हूं कि सूर तौबा कुरान मजीद में सबसे सख्त सूरा है क्योंकि यह एक वाहिद सूरा है सारे कुरान मजीद में जिसके शुरुआत में बिस्मिल्लाह रहमान रहीम नहीं है अल्लाह के नाम से जो मेहरबान और बे नियाज है वरना हर सूरा कुरान मजीद में 114 सूरे हैं और हर सूरे के शुरुआत में है बिस्मिल्लाह रहमान रहीम अल्लाह के नाम से जो मेहरबान और रहीम है लेकिन सूर तौबा के शुरुआत में बिस्मिल्लाह रहमान रहीम नहीं है क्यों मिसाल के तौर पर अगर आप अपने अहलिया के साथ या अपने वालिदा के साथ अगर पुना की सड़कों पर चल रहे हैं मशहूर सड़के ई स्ट्रीट और अगर एक लफ आपकी अहलिया या आपके वालिदा की हैंड बैग व छीन के भागता है आप क्या करेंगे बट नेचरल आप उसका पीछा करेंगे और जब आप उस लफंगे को पकड़ेंगे तो आप नहीं कहेंगे अस्सलाम वालेकुम रहमतुल्ला बरकात आप नहीं कहेंगे बिस्मिल्ला रहमा रहीम आप कहेंगे भाई साहब हैंड बैग को वापस दो तो गर्दन तोड़ दूंगा भाई साहब हैंड बैग को वापस दो तो टांग तोड़ दूंगा आप फौरन आएंगे आप नहीं कहेंगे बिस्मिल्ला रहमान रहीम अस्सलाम वालेकुम आप मौजू पर फौरन आएंगे इसीलिए कुछ मुफस्सिर कहते हैं कि सूर तौबा में अल्लाह सुभान ताला पहले चंद आयत में जिक्र होता है एक मदा था मुसलमान और मुशरिक मक्का के बीच और यह मायदा एक तरफा मुशरिक ने तोड़ दिया था जब अल्लाह सुभाना ताला वर्स नंबर पांच में आते हैं अल्लाह ताला कहते मैं आपको चार महीने की मोहलत देता हूं वरना लान जंग और जब अल्लाह सुभाना ताला मुशरिक को तंब देते हैं तो अल्लाह सुभाना ताला मौजू पर फौरन आ जाते इसीलिए कुछ मुसन कहते हैं कि इस सरे के पहले बिस्मिल्लाह रमान नहीं है अला फरमाते कि चार महीने का वक्त मोहलत वरना लान जंग और जब अल्लाह सुभाना ताला आयत नंबर 24 का जिक्र करते हैं जिसकी मैंने तिलावत की थी इस तकरी के पहले सर तौबा सरा नंबर न आयत नंबर 24 अल्लाह सुभाना ताला अब हम मुसलमान से मुखातिब है और अला ताला फरमाते काना आबा कुम कहो चाहे वह आपके वालिद हो व अबना कुम या आपके बेटे हो वन कुम या आपके भाई हो वजवा कुम या आपकी बीविया होक या आपके रिश्तेदार हो अल्लाह फरमाते आप किससे मोहब्बत करते हैं चाहे वह आपके वालिद हो आपके बेटे हो आपके भाई हो आपकी बीया हो आपके रिश्तेदार हो और अल्ला ताला कंटिन्यू करते व तिजार आपने जो जायदाद इकट्ठा की है आप जो तिजारत कर रहे हैं आप जिस घर में रह रहे हैं आपको किससे मोहब्बत है और आठ चीज का जिक्र है इस आत में आपके वालिद आपके बेटे आपके भाइयों आप बीवियां आपके रिश्तेदार आपने जो माल इकट्ठा की है और आपकी तिजारत या जिस घर में आप रह रहे हैं अ फरमाते अ लेकम के आप अगर इनसे मोहब्बत करते हैं लेकम मिनला रस अगर आप इन आटो चीजों से ज्यादा मोहब्बत करते हैं अल्लाह से ज्यादा अल्लाह के रसूल से जदा और अल्लाह की राह में जिहाद करने से ज्यादा अगर आप इन आटों चीजों से ज्यादा मोहब्बत करते हैं अल्लाह से ज्यादा अल्लाह के रसूल से ज्यादा अल्लाह के राह में जिदो जहद करने से ज्यादा अला फरमाते आप ठहरो हता ला आप ठहरो और अल्लाह सुभान ताला आपके ऊपर डिस्ट्रक्शन लाएंगे अल्लाह सुभान ताला आप आपको हलाक करेंगे वल्ला और अल्लाह सुभान ताला फास लोग को सीधी राह नहीं दिखाता अला फरमाते अगर आपको इन आठों चीजों से ज्यादा मोहब्बत है अल्लाह से ज्यादा अल्लाह के रसूल से ज्यादा अल्लाह की राह में जिहाद करने से ज्यादा तो ठहरो अल्लाह सुभान ताला आप पर तबाई लाएंगे अल्लाह सुभाना ताला आपको हलाक करेंगे वल्ला और अल्लाह सुभाना ताला फास लोग को सीधी राह नहीं दिखाता अ फरमाते सर मोहम्मद में सरा नंबर 47 आत नंबर 38 में न सु अगर आप अल्लाह की बात नहीं मानेंगे अल्लाह सुभान ताला आपकी जगह एक दूसरी कौम ले आएंगे त और वो आपके जैसे नहीं रहेंगे अगर आप अल्लाह सुभाना ताला का कहना नहीं मानेंगे अल्लाह सुभाना ताला के पैगाम पर अमल नहीं करेंगे तो अल्लाह सुभाना व ताला आपकी जगह एक दूसरी कौम को ले आएंगे और वह आपके जैसा नहीं रहेंगे और य तारीख इसकी गवाह है जब भी कोई कौम अल्लाह सुभाना ताला की बात नहीं मानती अल्लाह सुभाना ताला उसके बदले एक दूसरी कौम को खड़ा करते हैं और इसकी मिसाल सर जुमा में भी है अल्लाह सुभान ताला ने अपने पैगाम के लिए पहले यहूद को चुना था और अल्लाह ताला फरमाते हैं सूर जुमा में सरा नंबर 62 आयत नंबर पाच में के यहूदी को अल्लाह सुभाना ताला ने पैगाम दिया था लेकिन उनकी मिसाल है गधे की तरह गधे के पीठ प किताब ला दी जाती है लेकिन उनको कुछ फर्क नहीं पड़ता और हम देखते हैं जब यहूदी अल्लाह सुला की बात नहीं मानते तो अल्लाह सुभाना ताला एक दूसरी कौम को लेकर आते अरबों को और यहूदी अरबों को नीचे देखते थे तो जो इंसान को आप नीचे देखते हैं वही इंसान को अल्लाह सुभाना ताला ऊपर लेकर आता है और आपके सिर पर बिठा आता है और अपने कुरान मजीद के जरिए अपने पैगाम के जरिए कुरान मजीद को नाजिल करता अरबों पर और यह कौम अल्हम्दुलिल्लाह दे बिकम द टच बेरर यह कौम ऊपर आती है लेकिन आज अगर हम मुसलमान अल्लाह सुभाना ताला के ए कामात पर अमल नहीं करेंगे तो अल्लाह ताला फरमाते यमर सु अगर आप अल्लाह की बात नहीं मानेंगे अल्लाह सुभाना ताला आपकी जगह एक दूसरी कौम को लेकर आएंगे और वह आपकी तरह नहीं होगी जब हम मुसलमान से पूछते हैं और मैं आपसे भी पूछना चाहता हूं कि आप इस सारे कायनात में सबसे ज्यादा मोहब्बत किससे करते हैं मैं आपसे पूछना चाहता हूं कि सारी कायनात में आप सबसे ज्यादा मोहब्बत किससे करते हैं किससे करते अल्लाह से माशाल्लाह आसान सवाल जवाब भी आसान अगर आप कोई भी मुसलमान से पूछेंगे इस सारी कायनात में आप सबसे ज्यादा मोहब्बत किससे करेंगे तो जवाब है अल्लाह सुभान ताला य जवाब मैं आपसे पूछना चाहता हूं कि अगर आप एक सुबह को अपने घर से निकलते हैं अपने काम पर और आपका पड़ोसी आपकी वालिदा से बुरी बात करता है आपकी वालिदा को गालियां देता है आप जब शाम को वापस आएंगे और आपको पता लगता है कि आपका पड़ोसी आपकी वालिदा को बहुत गालियां दी बिना वज आपको जब पता चलेगा कि आपका पड़ोसी आपकी वालिदा को गाली दिया आप क्या करेंगे क्या करेंगे आप अगर कोई बिना वजह आपकी वालिदा को गाली देता है आप क्या करेंगे लोग कह रहे हैं मारेंगे कोई कहता मैं तंगी तोडूंगा कोई कहेगा मैं जान ले लूंगा अगर बिना वजह कोई इंसान आपकी वालिदा को गालियां देता है तो क्या करेंगे कोई कहता है मैं मारूंगा उसे कोई कहता है तंगी तोडूंगा क्यों क्योंकि हम अपनी वालिदा से मोहब्बत करते हैं करते हैं कि नहीं हां कि नहीं माशाल्लाह बेशक हम अपनी वालिदा से मोहब्बत करते बेशक और यह बात सही है अगर कोई मेरी वालिदा को गालियां देता है बिना वजह हम देखेंगे कि उस शख्स को हम सबक सिखाएंगे अगर हम खुद बदला नहीं ले सकते हम दूसरे को लेके आएंगे भाड़े प लेकिन उसको सबक सिखाएंगे सिखाएंगे क्या नहीं हां कि नहीं बेशक क्यों क्योंकि हम अपनी वालिदा से मोहब्बत करते हैं कोई भी इंसान अगर उसकी वालिदा को कोई गाली देता है तो वह उस इंसान को सबक सिखाएगा अल्लाह सुभान ताला फरमाते हैं कुरान मजीद में सर मरियम में सरा नंबर 19 वर्स ं 88 92 अल्ला ताला फरमाते वन वह लोग कह रहे हैं नसा लोग के अल्लाह सुभान ताला ने बेटा जना रमान लदा यह सबसे बुरी गाली अल्लाह सुभाना ताला को दी किसी ने अगर कोई कहता है कि अल्लाह सुभाना ताला ने बेटा जना अल्लाह सुभाना ताला फरमाते कुरान मजीद में कि वह सबसे बड़ी गाली है अल्लाह के लिए और अगर आसमान के पास जजबा होता तो आसमान फट उता वत और यह जमीन फट उठती और यह पहाड़ गिर पड़ता अल्लाह सुन ताला फरमाते हैं अगर कोई अल्लाह सुभान ताला को गाली देता है और कहता है कि अल्लाह ने बेटा जना अगर आसमान के पास जरा भी जजबा होते तो आसमान खुल उठता ये जमीन फट उठती और यह पहाड़ गिर पड़ता लेकिन हम मुसलमानों को कोई फर्क नहीं पड़ रहा है हम कहते हैं कि हम अल्लाह सुभाना ताला से सबसे ज्यादा मोहब्बत करते हैं अपनी वालिदा से ज्यादा अपने वालिद से ज्यादा अपनी बीवियों से ज्यादा कहते हैं लेकिन हकीकत में इस पर अमल करते हैं क्या हम कहते हैं कि हम अल्लाह सुभाना व ताला को सबसे ज्यादा चाहते हैं अपनी वालिदा से ज्यादा अपने वालिद से ज्यादा अपने बेटों से ज्यादा अपनी बीवियों से ज्यादा हम कहते हैं लेकिन क्या इस पर अमल करते अगर कोई आपकी वालिदा को गाली देता है तो आपको उसको मारने का है आपको उसकी टंगरी तोड़ने का है यहां रोज हमारे गैर मुसलमान भाई हमारे ईसाई भाई हमारे हिंदू भाई कह रहे हैं कि खुदा ने बेटा जना और हम मुंह भी नहीं खोल सकते मैं नहीं कहता हूं कि उनसे झगड़ा करो मैं यह नहीं कहता हू उनकी तंगी तोड़ो मैं यह नहीं कहता हूं कि उनसे मारपीट करो मैं सिर्फ यह कहता हूं अगर हमारे गैर मुसलमान भाई कह रहे हैं कि अल्लाह ने बेटा जना कमस कम आप मुसलमानों अपना मुंह तो खोलो इतना तो कहो कि यह कहना गलत है मैं नहीं कह रहा हूं कि उनसे झगड़ा करो मैं बिल्कुल नहीं कह रहा हूं कि उनसे मारपीट करो कम अपना मुंह तो खोलो इतना तो कहो कि आप अल्लाह सुभाना ताला को गाली क्यों दे रहे हैं हम उनसे दावत करने की बात दूर रही हम उनके साथ बन जाते हैं मिसाल के तौर पर अभी दो महीने बाद एक तवार आएगा क्रिसमस और क्रिसमस में कई मुसलमान ईसाई से कहते मेरी क्रिसमस जब आप मेरी क्रिसमस कह रहे हैं आप नज बिल्लाह शहादत दे रहे हैं कि अल्लाह सुभाना ताला ने 25 दिसंबर को बेटा जना क्योंकि ईसाई य क्रिसमस बनाते हैं 25 दिसंबर और कहते हैं कि अल्लाह सुभान ताला ने नज बिल्लाह एक बेटा जना ईसा अल सलाम 25 दिसंबर को आप उन लोगों से दावत तो नहीं करते दावत की बात तो दूर रही आप उनके साथ मिल जाते हैं आप शहादत दे रहे हैं कि अल्लाह ने बेटा जना दावत देना बहुत आसान है मैं यह नहीं कह रहा हूं कि उनसे झगड़ा करो आप उनकी किताबें पढ़िए और उनकी किताबों के जरिए आप उनके साथ दावत करो हम मुसलमान दावत हमारा फर्ज है हम इस फर्ज को भूल चुके हैं हम फर्ज है कम इस्लाम का पैगाम गैरो तक पहुंचाए आज की जो हालात है गैर मुसलमान जो इस्लाम के खिलाफ बात कर रहे हैं काफी हद तक उसके जिम्मेदार हम भी है क्योंकि हम अल्लाह सुभान ताला का पैगाम इस्लाम का पैगाम कुरान मजीद का पैगाम गैरो तक नहीं पहुंचाते हैं अल्ला ताला फरमाते कुरान मजीद में सूर बकरा में सरा नंबर दो दो आयत न 111 में ल जला मन काना न सारा वो लोग कह रहे हैं यद न सारा के आप मुसलमान आप जन्नत में कभी भी नहीं जाएंगे चाहे आप कितने भी अच्छे आमाल करो चाहे आप नमाज पढ़ो चाहे रोजा रखो चाहे जकात दो चाहे आपके माते पर नमाज का दा हो आप लोग कभी भी जन्नत में नहीं जाएंगे जब तक आप यहूद या नसा ना बने अल्लाला फरमाते तिल का मानी य उनकी बकवास है न डिजायर कुल कहो हा बना आप अपना बुरान पेश करो इनको तुम सकी अगर आप सच्चे हैं और अगर अल्लाह ताला फरमाते हैं कि अगर कोई भी डींगे मारता है बड़ी बड़ी बातें कहता है तो उनसे कहो आप अपना सबूत पेश करो अगर आप सच्चे हो और यह ईसाई अपना सबूत अपना बुरान बाइबल को पेश करते हैं और कहते हैं माय बाइबल सेज दिस माय बाइबल सेज दैट माय बाइबल सेज दिस माय बाइबल सेज दैट मेरी बाइबल ये चीज कहती है मेरी बाइबल यह चीज कहती है मेरी बाइबल यह कहती है मेरी बाइबल वो कहती है हमें क्या करना चाहिए क्या बाइबल को पूरी चाट लेना चाहिए अगर कोई भी अपना बुरान पेश करता है तो हमें उस बुरान की तहकीक करना चाहिए अगर कोई शनाप की कार्ड आपको दिखाता है कोई आईटी कार्ड दिखाता है तो वी हैव टू वेरीफाई द आइटी कार्ड हमें देखना चाहिए कि शनाप कार्ड सही है क्या नहीं उनका जो बुरान है तकी करने की दूर की बात है यह ईसाई लोग मुसलमानों के दरवाजे को खटखटा हैं और हमारा कुरान हमारे खिलाफ इस्तेमाल करते हैं सारी दुनिया में हिंदुस्तान में भी और खुसूस पुना में कई क्रिश्चन इदार हैं कई क्रिश्चियन मिशनरी है जो मुसलमानों के घर को खटखटा हैं और हमारा बुरहान हमारे खिलाफ इस्तेमाल करते हैं वह मुसलमान से पूछते हैं क्या आपके कुरान में नहीं लिखा है कि बाइबल अल्लाह का कलाम है और अक्सर हम मुसलमान यहां लिखा है तो आप बाइबल पर अमल क्यों नहीं करते हमारे पास कोई जवाब नहीं फिर वो सवाल पूछते हैं कुरान मजीद में मोहम्मद सला सल्लम का नाम कितने बार कुरान मजीद में आता है अगर आपको पता है तो आप कहेंगे मोहम्मद सल्ला सलम का नाम कुरान मजीद में पांच बार आता है चार बार मोहम्मद सल्ला सलम और एक बार अहमद ईसा अले सलाम का जिक्र कुरान मजीद में नाम से कितने बार है अगर आपको नहीं पता है तो आपसे कहेंगे ईसा अ सलाम का जिक्र नाम से कुरान मजीद में 25 बार आता है फर सवाल पूछेंगे कौन शख्स बड़ा जिसका जिक्र कुरान मजीद में पांच बार नाम से है वह शख्स बड़ा कि जिसका जिक्र कुरान मजीद में 25 बार है नाम से वो बड़ा कौन बड़ा 25 या पांच आपसे सवाल पूछेंगे लेकिन आपको जवाब नहीं देंगे वो आपके जहन को मजबूर करेंगे सोचने पर दूसरा सवाल पूछते हैं आपके आखरी पैग मुहम्मद सलम क्या उनके वालिद और वालिदा थे बेशक उनके वालिद भी थे वालिदा भी थी नेक्स्ट सवाल पूछते ईसा सलाम ईसा सलाम के वालिद और वालिदा थे हम कहेंगे ईसा अ सलाम की वालिदा थी वालिद नहीं थे फौरन सवाल पूछेंगे कौन बड़ा जो इंसान वालिद के जरिए पैदा होता वो बड़ा कि वो इंसान जो वालिद के बगैर पैदा होता है बड़ा व सवाल पूछेंगे मुसलमान से लेकिन जवाब नहीं देंगे वह आपके जहन को मजबूर करेंगे सोचने पे कौन बड़ा वो शख्स जो वालिद के जरिए पैदा होता है बड़ा है कि वो शख्स जो वालिद के बिना पैदा होता है ब है सवाल करेंगे लेकिन जवाब नहीं देंगे वह आपके जहन को सोचने पर मजबूर करेंगे कई क्रिश्चियन मिशनरी दुनिया भर में मुसलमानों के घर को खटखटा हैं एंड दे आर यूजिंग अस लाइक पंचिंग बैग्स दे आर मेकिंग नेस्ट इन आवर हेड हमारे सिर में घोसला बना रहे हैं और हम जवाब भी नहीं दे सकते दूसरा सवाल पूछते हैं मोहम्मद सला वसल्लम जिंदा है कि उनका इंतकाल हो चुका है और हमें मानना पड़ेगा कि महम्मद सला वसल्लम उनका इंतकाल हो चुका है मदीना में दफन है ईसा अल सलाम वो जिंदा है क्या उनका इंतकाल हो चुका है और इस्लाम में साफ तौर पर लिखा है कि अल्लाह सुभाना ताला ने ईसा अल सलाम को जिंदा उठाया है तो कौन बड़ा वो पैगंबर जो जिंदा है बड़ा है कि वो पैगंबर जो मर चुका है बड़ा है आपसे सवाल करते हैं लेकिन सवाल का जवाब नहीं देते आपके जहन को मजबूर करते सोचने पर हमारा बुरान हमारा कुरान हमारे खिलाफ इस्तेमाल कर रहे हैं दूसरा सवाल पूछते हैं ममम ने कोई भी मोज किए है हम कहेंगे हां बेशक बहुत से मोज किए उन्होंने कभी भी मुर्दों में जान डाली और मानना पड़ेगा कि कुरान शरीफ की कोई भी आयत नहीं है कोई भी सही हदीस में नहीं लिखा है कि मोहम्मद सने मुर्दे में जान डाली उनका अगला सवाल ईसा अ सलाम ने मुर्दे में जान डाली और मैं मानना पड़ेगा कुरान मजीद में साफ तौर पर लिखा हुआ है बल्लाह ई सलाम ने कहा उठो अल्लाह के नाम से ईसा अल सलाम ने मुर्दों में जान डाली तो कौन बड़ा जो मुर्दों में जान डाल सकता वो बड़ा कि जो मुर्दों में जान नहीं डाल सकता बड़ा सवाल करते हैं आपके जहन को मजबूर करते सोचने पर और अब मुसलमान जवाब भी नहीं दे सकते यह सारे सवालात के जवाबाइकिरण लेकिन अफसोस की बात है कि अक्सर मुसलमान कुरान मजीद को समझ के नहीं पढ़ते अगर हम समझ के पढ़ेंगे इन सारे सवालात के जवाबाइकिरण और गैर मुसलमानों में दावत देना बहुत आसान है अ फरमाते सरा इमरान में सरा नंबर तीन आयत नंबर 64 में कुल या किताब कहो अहले किताब से ताला क सवा आओ हम उस बात की तरफ जो आप और हम यसा है सबसे पहली बात अल्लाह हम सिर्फ एक खुदा एक अल्लाह सुभान ताला की इबादत करें अल्ला ना इल्ला लान का भी के हम अल्लाह के साथ किसी और को शरीक ना करें लान का भी लाबा बाला और हम आपस में किसी और किसी और को माबूद ना बनाए ला और अगर व आपकी बात नहीं मानते तो आप शहादत दो कि हम मुसलमान हैं ये आयत मेरे नजरिए में कुरान मजीद की दावती मैदान में सबसे अहम आयत है मैं कहता हूं यह मास्टर की है दावती मैदान के सब ताले को खोलने वाली चावी है और इंशा अल्लाह मेरे कल के तकरीर का मौजू है मजहब का सही तसवर रिलीजन इन द राइट पर्सपेक्टिव और मैं इस आयत के जरिए इंशा अल्लाह सारे मजहब का सही तसर पेश करने की कोशिश करूंगा कल और कल की तकरीर आप कह सकते कि इस तकरीर का पार्ट टू है किस तरीके से आप गैर मुसलमानों को उनकी किताब के जरिए आप यह साबित कर सकते कि खुदा एक है लेकिन अक्सर हम मुसलमान दावती मैदान से दूर भागते हैं और हम मुसलमान के पास बहुत से एक्सक्यूज है बहुत से एक्सक्यूज है अक्सर जब मैं मुसलमानों से कहता हूं कि आप गैर मुसलमानों से दावत क्यों नहीं करते तो कहता है के मेरे पास इल्म की कमी है इंशा अल्लाह जिस दिन मैं आलिम बन जाऊंगा तो उस दिन इंशा अल्लाह मैं दावत करना शुरू करूंगा अगर आप ठहर तब तक आप शेख अहमद ददा जैसे बनेंगे तो वो दिन कभी आएगा ही नहीं अगर आप ठहर क्या मैं माहिर बनूंगा एक बड़ा आलिम बनूंगा इस्लाम और दीगर मजब के मौजू पर शेख दीदा जैसा बनूंगा और फिर मैं दावत के मैदान में आऊंगा वो वक्त कभी भी नहीं आएगा अल्लाह के रसूल महम्मद फरमाते स बुखारी में ब आया अगर एक भी आयत आप जानते इस्लाम के मुतालिक आपका फर्ज है क्या आप दूसरों तक पहुंचाए ब आया एक जानते हैं अगर आप सही तरीके से जानते हैं आपका फर्ज है के वह गैरो तक पहुंचाए हर मुसलमान कमस कम यह तो मानता है कि खुदा एक है वो तो कम से कम कहो गैर मुसलमानों से कमस कम यह तो कहो कि खुदा हर मुसलमान मानता है महम्मद स सलम अल्लाह के आखरी नबी है कम से कम वो तो कहो आप उसको मुतमइन करेंगे क्या नहीं वो दूसरी बात है अगर आप कहेंगे खुदा एक के व आपसे कहेगा कि सबूत दो अगर नहीं पता आज का दौर है साइंस एंड टेक्नोलॉजी का कितनी किताबें लिखी गई है इस मौजू प कई ऑडियो कसेट है कई वीडियो कसेट है कई डीवीडी है और मैंने भी एक तकरीर की है खुदा का तसव्वुर दिगर मजहब में अगर आप इसको पढ़ेंगे और इसका हवाला देंगे गैर मुसलमान को इंशा अल्लाह उसे मानना ही पड़ेगा कि खुदा एक है आप जब घर पे आके होमवर्क करेंगे आप एक सवाल के जवाब के माहिर है फिर कहो क्या आप महम्मद सल्ला सलम में क्यों नहीं मानते तो वो कहेगा क्यों मानना चाहिए मुझे आपको जवाब नहीं पता घर प आके होमवर्क कीजिए मैंने एक तकरीर की है मोहम्मद सला सल्लम का जिक्र दीगर मजहब की किताबों में और साबित किया है हिंदू मजहब की किताब में ईसाई मजहब की किताब में यूद मजहब की किताब में पारसी मजहब की किताब में बुद्ध मजहब की किताब में अक्सर मजहब की किताबों में मोहम्मद सलाम का जिक्र है मोहम्मद स की पेशन गोई है आप पढ़ो किताब को तकरीर को देखो और आप गैर मुसलमान से दावत कर सकते हैं आसान है फिर कहो आप सलाह क्यों नहीं पढ़ते वो पूछेगा क्यों मुझे पढ़ना चाहिए नहीं जवाब पता आके होमवर्क कीजिए मैंने तकरीर की है सलाह द प्रोग्रामिंग टर्ड राइच सनेस इस तरीके से आप जब शुरू करेंगे इंशा अल्लाह इंशा अल्लाह आपको और इल्म हासिल होगा और आप सवाल के जवाब दे सकेंगे अल्लाह के रसूल फरमाते ब अ आया प्रोपेट इन इ य नो वन वर्स अगर एक भी आयत आप जानते हैं इस्लाम के मुतालिक आपका फर्ज है कि व गैरो तक पहुंचाए कई मुसलमान मुझसे कहते हैं कि जाकिर बहुत से मुसलमान सही रास्ते पर नहीं है हम पहले मुसलमान को पक्का मुसलमान बनाएंगे और उसके बाद हम गैर मुसलमानों को दावत देंगे यह अच्छी बात है अल्हम्दुलिल्लाह मुसलमानों के साथ इस्लाह करना अच्छी बात है लेकिन अगर कोई शख्स यह कहता है कि मैं मुसलमान को पक्का मुसलमान पहले बनाऊंगा और उसके बाद दावत करूंगा यह वक्त कभी भी नहीं आएगा क्योंकि अल्लाह के रसूल मोहम्मद सला सलम खुद अपने रिश्तेदारों को मुसलमान बना सके तो आप कैसे कर पाएंगे खुद उनके चाचा इस्लाम नहीं कबूल करे और सही बुखारी की हदीस है कि मदीना में अल्लाह के रसल फरमाते हैं कि मदीना में कई मुसलमान थे जो फर्ज सला के लिए मस्जिद में नहीं आते थे जुमा सला के लिए और अल्लाह के फरमाते कि मैं चाहता हूं कि उनके घर में आग लगा दूं अरे मदीना में भी कुछ मुसल थे जो पक्के मुसलमान नहीं थे फिर भी अल्लाह के रसूल ने गैर मुसलमान तक दावत पहुंचाई अल्लाह के रसूल ने पैगाम भेजा किंग ऑफ एनिया को किंग ऑफ पर्शिया को किंग एलेक्जेंडर को और कहा कि इस्लाम कबूल करो उन्होने नहीं कहा कि मैं रे मुसलमान को पक्का मुसलमान बनाऊंगा और फिर मैं गैर मुसलमान तक दावत पहुंचा हंगा और अगर आप अल्लाह के रसूल आखरी तकरीर को सुनेंगे हजज विदा अरफात के मैदान में उस वक्त तकरीबन एक ख हज सहाबा थे और अल्लाह के रसूल उनसे पूछते हैं कि मैंने मेरा पैगाम आप तक पहुंचाया कि नहीं और सारे सहाबा कहते हैं बेशक आपने पहुंचाया फिर वह कहते हैं कि आप उन लोगों तक यह पैगाम पहुचा जो लोग यहां मौजूद नहीं है और एक लाख हज में से एक लाख से ज्यादा सहाबा वह अरेबिया के बाहर जाते हैं क्या करने के लिए मुसलमान को पक्का मुसलमान बनाने के लिए गैर मुसलमानों को इस्लाम की दावत देने के लिए इस्लाह करना अच्छी बात है लेकिन यह कहना कि मैं मुसलमान को पहला पक्का मुसलमान बनाऊंगा और फिर गैर मुसलमान को दावत दूंगा यह गलत थे जब आप मुसलमान से मिलते हैं उनके साथ इस्लाह करो जब गैर मुसलमान से मिलते हैं उनके साथ दावत करो दोनों साथ-साथ होना चाहिए कई मुसलमान मुझसे कहते हैं कि जब हम दावत देते हैं गैर मुसलमानों को वो कहते हैं माइंड योर ओन बिजनेस आप अपने काम से काम रखो मैं हमेशा मिसाल देता हूं कि अगर आप अपने फैमिली के साथ कोई हिल स्टेशन जाते हैं मा बलेश्वर और वहां जब आप टेबल लैंड पर जाते हैं एक पहाड़ी इलाके प आपका छोटा बेटा जब आप अपनी अहलिया से बात करते हैं आपका छोटा बेटा अहमद जो चार साल का है वह आप से दूर होता है और दूर पहुच जाता है पहाड़ी के किनारे की तरफ चलते हुए जब आपको पता लगता है कि अहमद आपके साथ नहीं है तो आप देखते कि वो दूर पहुंच गए पहाड़ी के किनारे पे आप चिल्लाने जाते अहमद संभालो आप गिर जाएंगे लेकिन आपकी आवाज नहीं पूछती है उस पहाड़ के किनारे पे एक इंसान अपने हाथ पे हाथ बांधे हुए नजारे देख रहा है आप कहना चाहते भाई साहब मेरे बेटे को बचाओ आपकी आवाज नहीं पहुच सकती लेकिन आप देखते हैं वो इंसान आपके बेटे को किनारे के नजदीक आते हुए देखता है आपके बेटे के तरफ देखते हुए मुस्कुराता है और फिर से नजारे देखने में मशगूल हो जाता है कुछ देर बाद आपका बेटा और एक कदम लेता है और पहाड़ी से गिर पड़ता है मैं आपसे पूछना चाहता हूं कि आप इस शख्स को दोषी ठहराए कि नहीं आप कहेंगे आपने मेरे बे बेटे को क्यों नहीं बचाया आपके इतने करीब था आपको एक कदम लेने की जरूरत भी नहीं थी सिर्फ हाथ आगे करते थे और मेरा बेटा बच जाता था लेकिन वो शख्स कहेगा आपसे आई वास माइंडिंग माय ओन बिजनेस मैं अपने काम से काम रख रहा था और देखे जाओ तो व सही कह रहा है उसने तो आपके बेटे को धक्का नहीं मारा उसने नहीं कहा आपके बेटे से कि आप खुद ही मारो वो अपने काम से काम रख रहा था फिर भी आप उस शख्स को दोषी ठहराए कि नहीं आप कहेंगे मेरा बेटा तो मासूम था यह शख्स अल्लाह ने उसको समझ दी सिर्फ हाथ आगे कर लेता और मेरा बेटा बच जाता फिर भी आप उस शख्स को दोषी ठहराए गे इसी तरीके से अगर कोई गैर मुस्लिम आपसे कहता है जब आप दावत कर रहे उससे कि आप अपने काम से काम रखो तो आप उसको जवाब देना चाहिए वही तो मैं कर रहा हूं मैं अपने काम से तो काम रख रहा हूं हर मुसलमान का फर्ज है कि वो गैर मुसलमान तक दावत पहुंचाए तो ये तो मेरा फर्ज है मैं मेरे काम से ही काम रख रहा हूं मेरा फर्ज है कि मैं आप तक दावत पहुंचाओ और अगर आप दावत नहीं पहुंचाएंगे आखिरत के दिन पे ये गैर मुस्लिम या आपका गरबान पकड़ेंगे कहेंगे कि अल्लाह ने इनको तो हिदायत दी इनने लेकिन हम तक दावत नहीं पहुंचाई उस वक्त आप क्या जवाब देंगे अगर आपका पड़ोसी मुशरिक है और आपने अपने पड़ोसी तक दावत नहीं पहुंचाई और उसका इंतकाल हो जाएगा आखरत में अल्ला उनसे पूछेगा क्या आपने इस्लाम क्यों नहीं कबूल करा तो उनको भेजेंगे जहन्नम में आपसे पूछेंगे के आपने अपने पड़ोसी को दावत दी के नहीं और अगर आप कहेंगे नहीं तो आप भी उसको फॉलो करेंगे हर मुसलमान का फर्ज है कि वो गैर मुसलमान तक इस्लाम की दावत पहुंचाए और अल्लाह ताला फरमाते हैं सूरे अल असर में सूरा नंबर 103 आयत नंबर एक से तीन लस इनल इनसान इ आमन ती तवा अल्लाह ताला कसम खा रहे हैं वक्त की ल असर की कसम खाते हैं आदमी खसारे में है लस इनल इ सिर्फ वह लोग ससार में नहीं है जो लोग चार चीज पर अमल करते न जिसके पास ईमान है त जो अच्छे आमाल करता है त और जो लोग हक की तरफ बुलाते हैं दावत देते हैं और जो लोगों को सबर की तरफ बुलाते हैं अगर कोई भी इंसान को जन्नत जाना है उसको निजात पाने के लिए चार चीजें जरूरी है ईमान अमल सलेहा तवास बिल हक दावत देना और तवास ब सब्र लोगों को सब्र की तरफ बुलाना अगर इन चारों चीजों में से एक भी चीज मिसिंग है एक भी चीज के ऊपर अमल आप नहीं करेंगे तो आमतौर पे सूरे अल असर के हिसाब से आप जन्नत में नहीं जाएंगे सिर्फ दावत देना काफी नहीं आपके पास ईमान होना चाहिए अमल सलेहा होना चाहिए दावत भी देना चाहिए और लोगों को सबर की तरफ बुलाना चाहिए अगर आप नमाज पढ़ते हैं जकात देते हैं हज प गए हैं लेकिन दावत नहीं करेंगे तो आप जन्नत में नहीं जाएंगे चारों चीज जरूरी है ईमान अमल सलेहा दावत देना और लोगों को सबर की तरफ बुलाना आमतौर पर अगर इन चारों में से एक भी चीज प आप अमल नहीं करेंगे तो आप जन्नत में नहीं जाएंगे अगर अल्लाह ताला आपको माफ करना चाहता है और फिर जन्नत में डालना चाहता है तो अल्लाह सुभान ताला के खर में है क्योंकि अल्लाह ताला फरमाते सूर निसा में सरा नंबर चार आयत नंबर 48 में और सूर निसा सूरा नंबर चार आयत नंबर 116 में के अल्लाह सुभाना ताला अगर चाहे तो कोई भी गुनाह को माफ कर सकता है लेकिन शिर्क को कभी नहीं माफ करेगा क्योंकि जिस इंसान ने शिर्क किया उसने सबसे बड़ा गुनाह किया तो अल्लाह चाहे आपको माफ करना चाहता है और फिर जन्नत में डालना चाहता है तो अल्लाह के इयार में लेकिन सूरे अल असर के हिसाब से अगर आपने इन चारों चीजों में से एक भी चीज पर अमल नहीं किया तो आप जन्नत में नहीं जाएंगे अलाला फरमाते सूरे नहल में सरा नंबर 16 आयत नंबर 125 में आप लोगों को अल्लाह की तरफ बुलाओ इला सबी र हिकमत के साथ और हु सनत के साथ और लोगों के साथ अच्छे तरीके से आप बात कीजिए और अला फरमाते सरा इमरान में सरा नंबर तीन आयत नंबर 104 में के आप लोगों में से आपकी उम्मत में से एक ऐसा ग्रह पैदा होना चाहिए जो फुल टाइम डाई है जो लोगों को अच्छाई की तरफ बुलाता है और बुराई से रोकता है और यह लोग है जो जन्नत में अच्छा मकाम पाएंगे यहां अल्लाह सुभान ताला जिक्र कर रहे हैं जिस तरीके से हमारे पास फुल टाइम डॉक्टर्स है फुल टाइम इंजीनियर्स है फुल टाइम लॉयर्स है फुल टाइम एडवोकेट्स है कितने फुल टाइम दाइ है हमारे पास कितने दुआ है कितने लोग अपनी सारी जिंदगी वफ किए है अल्लाह के राम में अल्लाह का पैगाम पहुंचाने के लिए तो इस आयत में जिक्र हो रहा है फुल टाइम दाइ का पार्ट टाइम दाई बनना हर मुसलमान का फर्ज है पार्ट टाइम दाई मतलब आपको गैर मुसलमान को दावत देना फर्ज है थोड़ा बहुत दावत देना फर्ज है लेकिन यहां जिक्र हो रहा है फुल टाइम डाइस का और अल्ला ताला फरमाते यह फुल टाइम दाइ जन्नत में एक ऊंचा मकाम पाएंगे मैं तकरीर खत्म करना चाहता हूं उसके पहले चंद कुरान की आ पेश करूंगा अल्ला ताला फरमाते हैं कुरान मजीद में तीन जगह सर सफ में सरा नंबर 61 आ नंबर में सर तबा सरा नंबर 9 आ नंबर 33 में और स फता में स 48 8 में र अल्लाह सुभाना ताला ने अपने आखरी पैगंबर मोहम्मद सला सलम को भेजा दन हक के साथ ताकि वह सारे दिनों सारे मजब पर गालिब हो अल्ला ताला फरमाते हुी अर रस हमने आखरी पैगंबर मोहम्मद सला सलम को भेजा हक के साथ ताकि वो सारे मजब पर लिब हो इस्लाम इज डिटा टू सुपरसीडे ऑल सुपरसीडे देम ऑल ऑल द इजम्स वेद ब क्रिश्चियनि जम हिंदुइज्म जुडा इजम बुद्धिज्म सेकुलरिज्म एथीम इस्लाम इज टाइन टू सुपरसील ये अल्लाह ताला का वादा है के अल्लाह ताला दीन उल हक दनल इस्लाम को सारे दूसरे मजहब पे गालिब करेंगे चाहे वो हिंदुइज्म हो क्रिश्चियनि जम हो बुद्धिज्म हो जुडा इजम हो सेकम हो ए हो कमम हो सारे मज पर लिब होगा और फरमाते कितना भी मुशरिक नहीं चाहेंगे तो दो जगह और ज अला ताला कहते बला और काफी है अल्लाह शहादत के लिए मैं तकरीर खत्म करूंगा कुरान मजीद के आ से सर फलत के सरा नंबर 41 ं मु कौन श सबसे बेहतर है वह शख्स जो लोगों को अल्लाह की तरफ बुलाता है अच्छे आमाल करता है और कहता है कि मैं मुस्लिम हूं ख दावा अदला रल आलमीन अल्हम्दुलिल्लाह हम डॉक्टर जाकिर नायक साहब की मालूमात तकरीर दावा या हलाक के उनवान पर समात कर रहे थे अब इस इजलास का दूसरा का दौर शुरू होता है यह सवालो और जवाब का सेशन है जिसमें आप मुकर से सवाल कर सकते हैं और मुकर आपके सवालात के इंशा अल्लाह जवाबाइकिरण जेंट्स की जानिब और तीसरा खवातीन के शबे में पहला सवाल दरमियान से होगा दूसरा सवाल खवातीन के शबे से और तीसरा सवाल पीछे की जानिब जेंट्स की तरफ से होगा इस सवाल जवाब के सेशन में सवाल करने वाले से गुजारिश है कि वह सबसे पहले अपना नाम और प्रोफेशन यानी पेशा बताएं सवाल करने वालों में गैर मुस्लिम भाइयों को पहले मौका दिया जाएगा और उन्हें इस्लाम के ताल्लुक से कोई भी सवाल करने की पूरी पूरी आजादी हासिल होगी सवाल करने वाले सवाल करने में खते सार से काम लें कोशिश करें कि सवाल करने में कोई तमदी बात ना हो बल्कि अपना नाम और पेशा बताकर फौरन सवाल शुरू कर दें हमारे मुस्लिम भाइयों से गुजारिश है कि उनके सवालात उनवान से मुतालिक हो तलाफी और फिक सवालात करने की इजाजत नहीं दी जाएगी एक वक्त में एक ही सवाल की इजाजत होगी अगर सवाल गैर जरूरी हो तो उसे रद करने का मुझे इख्तियार हासिल होगा मुझे उम्मीद है कि आप हजरात इन उसूलों को सामने रखते हुए इस सेशन को दिलचस्प और कामयाब बनाने में मेरी हर तरह से मदद करेंगे हरात से मेरी गुजारिश है कि वह गैर मुस्लिम भाइयों को पहले मौका द जी भाई साहब आप अपना सवाल करें गैर मुस्लिम भाई को तरजीह दी जाएगी आई एम वसीम भंडारी आई एम फ्रॉम बिजापुर कर्नाटका आई आ वन ऑफ माय फ्रेंड टू कम टू दिस प्रोग्राम बट ही सेड आई कैन नॉट कम बट आई हैव क्वेश्चन एंड य आस्क दिस क्वेश्चन टू डॉक्टर जाकिर नायक सो द क्वेश्चन गोस लाइक दिस वह पूछते हैं कि कुरान में एक जगह बोलते है कि हर एक चीज का हिसाब लिया जाएगा एंड जस्ट ना य सेड और यह क्वेश्चन वो भी बोलता है कि अगर अल्लाह चाहेगा तो हर गुनाह को माफ करके जन्नत में दाखिल करेगा सो इंट इट अ कांट्रडिक्शन दिस इज व्हाई ही इज आस्किंग बिकॉज आई से देयर इज नो कांट्रडिक्शन इन द ग्लोरियस कुरान एंड दिस जज बीन सेड बाय डॉक्टर जाकिर नायक एंड आई एश्योर यू दैट देयर इज नो कांट्रडिक्शन थैंक यू भाई साहब ने अपने गैर मुस्लिम का सवाल पूछा है और कहते हैं कि कुरान मजीद में लिखा है कि हर आमाल का हिसाब लिया जाएगा और मैंने अपनी तकरीर में कहा हूं कि अल्लाह ताला अगर चाहे तो किसी को भी माफ कर सकता है तो ये कांट्रडिक्शन है कि नहीं जो लोग को कुरान के बारे में इल्म नहीं है उनको गलतफहमी हो सकती कि कांट्रडिक्शन है जब अल्लाह ताला फरमाते कई जगह अल्लाह ताला ने फरमाया कि जर्रा भर अगर आपने नेक काम किया है तो अल्लाह ताला उसका हिसाब लेगा और जर्रा भर गलत काम क्या उसका हिसाब लेगा इसमें कोई शक नहीं लेकिन साथ-साथ यह भी लिखा है कि अगर अल्लाह चाहे तो आपको माफ कर सकता है लेकिन अल्लाह सिर्फ ऐसा नहीं चाहता है कि यह आदमी अच्छा दिखता है तो इसको माफ कर दूं यह आदमी का शक्ल बुरी है तो उसको माफ नहीं करूंगा यह आदमी गोरा है तो माफ करूंगा यह आदमी काला है तो माफ नहीं करूंगा तो फिर अल्लाह सुभान ताला अनज होंगे माफ करने के भी क्राइटेरिया है और अल्लाह ताला कुरान मजीद में य भी फरमाता है अगर मेरा बंदा तौबा करता है तो मैं उसे माफ करूंगा तौबा करने के शराय है तौबा करने के शराय है कि अगर कोई आदमी गलत चीज करता है तो पहले उसे मानना चाहिए क्या वो गलत है नंबर दो उस गलत काम को रोकना चाहिए नंबर तीन उस गलत काम को फिर से नहीं धनाना चाहिए नंबर चार अगर वह गलती को अंडू कर सके उस गलती को वापस से अंडू कर सके मिसाल के तौर पर अगर कोई शख्स चोरी करता है हज रुप वो वापस दे सकता है उसे वापस देना चाहिए तो अगर वह तौबा करता है और चारों शर्तों पे निकलता है तो अल्लाह ताला उसे माफ करेगा उसका मतलब कांट्रडिक्शन नहीं है क्योंकि अल्लाह ताला रहमान और रहीम है अल्लाह रहमत वाला है अल्लाह रहीम है इसीलिए अल्लाह सुभाना व ताला इंसानों को मौका देता है कि अगर आप गलती करेंगे आपको माफी मांगने का मौका दिया जाएगा और अल्लाह ताला अगर हर इंसान की छोटी गलती पकड़े और अगर एक भी गलती को माफ नहीं करे तो अल्लाह के रसूल के हिसाब से कोई भी इंसान जन्नत में नहीं जाएगा इसीलिए हर सूरे के पहले बिस्मिल्लाह रहमान रहीम है सूर तौबा सूरा नंबर नौ छोड़ के हर सूरे के पहले लिखा है बिस्मिल्लाह रहमान रहीम अल्लाह के नाम से जो रहीम और रहमत वाला है क्योंकि अल्लाह सुभाना व ताला दयालु है ही इज लविंग ही इज मर्स फुल हीज बेनिफिस इसमें कोई कांट्रडिक्शन नहीं अल्लाह सुभाना ताला हमें मौका दे रहा है तौबा करने का और सही रास्ते पर आने का खवातीन के शबे में कोई अगर सवाल हो गैर मुस्लिम खवातीन की तरफ से तो कर सकते हैं माय नेम इ धनश्री सावन एंड आई एम स्टूडेंट ऑफ बी कंप्यूटर सेकंड ईयर सो आई जस्ट वां टू आस्क इ फर्स्ट पेर ऑफ ह्यूमन बीइंग इ हैव बीन प्रूव बट इट नॉट एब्लिश यट बट नाउ हाउस विल बी गोइंग टू प्रूव बज गो बैक इन टाइम थैंक यू बहन ने सवाल पूछा है कि कुरान मजीद और दर मजब की किताब में लिखा है के सबसे पहली जोड़ी आदम और ईव थी आदम सलाम और हवा सलाम थे लेकिन साइंस तस्लीम नहीं करता हम वक्त में फिर से वापस नहीं लौट सकेंगे तो किस तरीके से हम साबित करेंगे कि सबसे पहले जो जोड़ी है वद अ सलाम और बीवी हवा थे पहले मैं ये कहना चाहता हूं कि कुरान मजीद एक साइंस की किताब नहीं है एस सी आई ई एन सी ई लेकिन यह किताब है साइंस की एस आई जी एन एस ये आयात की किताब है यह किताब है निशानियां की और कुरान मजीद में सब साइंस के फार्मूला नहीं है लेकिन कुरान मजीद में 6000 से ज्यादा आयत हैं 6000 से ज्यादा निशानियां है और इस 6000 में से 1000 से ज्यादा अल्हम्दुलिल्लाह साइंस के बारे में बात करती है और मैं यह कहना चाहता हूं कि साइंस इतनी एडवांस नहीं है तो मैं क्यों कुरान मजीद में हर बात पर अमल करता हूं जो भी कुरान मजीद में लिखा है साइंस के बारे में अगर आप तकरीर सुनेंगे मिसाल के तौर पर हम कह सकते कि 80 फस साइंस प्रूफ कर चुका है कि जो भी कुरान में लिख 100 फीस सही है 80 फीस जो कुरान में लिखा है साइंस यह साबित कर चुका है कि 100 फीस सही है अभी 20 फीस इज एमगस जो हमें पता नहीं इस 20 फीसद में से एक भी फीसद अभी तक साबित नहीं किया गया है कि वह गलत है नोन एमगस पता नहीं तो हम डालते उसे डाउटफुल कैटेगरी में डाउटफुल वी डोंट नो तो मेरी लॉजिक यह कहती है अगर 80 फीस 100 फीस सही है और 20 फीस डाउटफुल है अननोन है एमिगस है उसमें से % भी साबित नहीं हो चुका कि गलत है क्योंकि साइंस इतनी एडवांस नहीं है कि उसे साबित कर सके तो मेरी लॉजिक यह कहती है कि यह 20 फीसद भी इंशाल्लाह सही होगा और इस 20 फीसद में आता है कि पहली जोड़ी इंसान की थी आदम अल सलाम और बीवी हवा साइंस इतनी एडवांस नहीं कि यह कह सकते कि इस जिंदगी के बाद और एक जिंदगी है लाइफ आफ्टर डेथ आखरत के बारे में साइंस इतनी एडवांस नहीं साइंस यह नहीं तस्लीम करती जो कुरान में लिखा है कि कुरान में जिक्र है जन्नत और दोजख का कुरान में जिकर है जिन का साइंस अब तक इतनी एडवांस नहीं कि इसके बारे में कह सके कि ये सही है तो बहुत सी चीजें जो कुरान मजीद में लिखी थी 1400 साल पहले अक्सर चीजें साइंस तस्लीम नहीं करती थी लेकिन आज साइंस एडवांस होने के बाद साइंस तरक्की करने के बाद 80 फीसद से ज्यादा हम यह कह सकते हैं कि साइंस आज तस्लीम करती है कि 100 फीस सही है इंशा अल्लाह हो सकता है कि 50 साल बाद 100 साल बाद 200 साल बाद साइंस ये भी तस्लीम करेंगी के जन्नत है दोजख है जिन है एंजल है और यह भी तस्लीम करेंगे कि पहली जोड़ी आदम और बीवी हवा थी अप्रिशिएट द क्लास ट यू गेव इट हैड अ गुड इंपैक्ट ऑन पीपल एज वेल एस द प्रीचिंग मूड ट यू कैड अबाउट द सुप्रीम लॉर्ड ट अल्लाह ज मोस्ट प्रेज वर्दी दिस इज व्ट द सोसाइटी रियली नीड्स टुडे बट एस ऑफ सम थिंग्स च आई हर्ड फ्रॉम यू देर र मेनी क्वेश्चंस बट आईल आस्क वन एस ऑफ द फॉर्मेलिटीज कंसीडर यू सेड ट प्लीज नेम ब्रदर सॉरी सॉरी आई एम दिलीप मिश्रा एंड आईव बीन स्टडिंग गीता एंड भागवत एंड वेरियस स्क्रिप्चर एंड आई एम बी कंप्यूटर्स इन प्रोफेशन एंड आई एम डूइंग सॉफ्टवेयर जॉब वन ऑफ माय कलीग मजीद खान ही इनवाइटेड मी एंड बेसिकली आई केम टू नो अबाउट यू न आई वास वर्किंग विथ हिम एंड वी वर बोथ अंडरगोइंग ट्रेनिंग सो ही सॉ दैट आई प्रैक्टिस समथिंग एंड ही आस्क मी सम क्वेश्च लाइक यू हैड ऑलरेडी टॉक ऑफ नतस्य प्रतिमा स्ती एंड वेरियस अदर थिंग्स एंड आड आर्गुमेंट सो ही सेड दैट व्हेन वी विल हैव अ सेमिनार वी विल टॉक टू मिस्टर जाकिर नायक डायरेक्टली आई सेड इफ यू अलाउ आई कैन टॉक आई हैव नो प्रॉब्लम सो इफ यू डोंट माइंड कैन आई आस्क यू अ क्वेश्चन श मोस्ट वेलकम ब्रदर थैंक यू नाउ यू सेड दैट एक्चुअली नोबडी इज द सन ऑफ गॉड सो आई डू अंडरस्टैंड दैट एज ऑफ बी गेटिंग अ सन ओबवियसली नोबडी इज डायरेक्टली बिगोट एज द सन हियर बट इन भगवत गीता एट वेरियस प्लेसेस इट ऑलरेडी मेंशन ट कृष्णा सेइंग मम वाशो जीव लोके जीव भूत सनातन मन स इंद्रिया प्रकृति स्थानी करति आई नो यू आर लडी नोइंग अबाउट इट ब आ जस्ट रीड द ट्रांसलेशन इफ यू डोंट माइंड इट से द लिविंग एंटिटीज इन दिस कंडीशन वर्ल्ड आर माय इटरनल फग मेंटल पार्ट्स ड्यू टू द कंडीशन लाइफ दे आर स्ट्रगलिंग वेरी हार्ड विद द सिक्स सेंसेस च इंक्लूड द माइंड यर द सुप्रीम लड कृष्णा सेट यू आर माय पार्ट एंड पार्सल एंड देयर इज वन मोर स्पेशल श्लोक व्हिच सेज दैट आई एम द फादर आई एम द मदर आई एम द सीड गिविंग फादर सो दैट इज 9.17 इफ यू वांट आई कैन जस्ट रीड इट फॉर यू इट सेज पिता मस्य जगतो माता धाता पितामह विद्यम पवित्रम ओमकार वृम यजुर वच आई जस्ट रीड द ट्रांसलेशन आई एम द फादर ऑफ द यूनिवर्स द मदर एंड द सपोर्ट एंड द ग्रैंड सायर आई एम द ऑब्जेक्ट ऑफ नॉलेज एंड प्यूरीफायर एंड द सिलेबल ओम आई एम द रिग द साम एंड द यजुर्वेद सो हियर इफ वी सी दैट द सुप्रीम लड सेइंग ऑल ऑफ आर माय सस आई टेक केयर ऑफ देम सो आई डू एग्री विथ योर फर्स्ट पॉइंट सेइंग दैट सम बडी इ डायरेक्टली बिगोटेड एज अ सन दैट कैन बी डिनाइड बट एस ऑफ स्पिरिचुअल पार्ट एंड पार्सल्स वी आर शुरली द सन ऑफ द लॉर्ड एंड वी डिजर्व हिज मर्सी सो आई फेल्ट दैट दिस बिट कांट्रडिक्ट्स विथ व्ट यू ऑलरेडी सेड साहब ने एक अच्छा सवाल पूछा है आई एम सॉरी आईल आंसर इन उर्दू बिकॉज द प्रोग्राम इज इन उर्दू एंड आई बिलीव य क अंडरस्टैंड हिंदी माशाला माय हिंदी इ आल्सो नॉट दैट गुड इट इज सिंपल विथ ल द ग्रामेटिकल रस भाई साहब ने सवाल पूछा है कहा है कि उन्होने मैं तकरीर सुन चुकी है और कुछ बातों प उसे ऐतराज है और उन्होंने कहा उनके दोस्त से कि जाकिर कहते नात से प्रति मस्ती और मैं इसमें नहीं मानता हूं क्या मैं कुछ सवाल पूछ सकता हूं मैंने बोला बेशक और उनके सवालात में उन्होने कहा कि जब मैं कहता हूं कि अल्लाह सुभाना ताला ने बेटा नहीं जना लेकिन उन्होंने भगवत गीता के दो श्लोका का जिक्र किया और एक श्लोक में लिखा था कि श्री कृष्ण कहते हैं कि मैं आपका पिता हूं मैं आपका माता हूं तो यह सवाल करने वाले कहते कि मैं मानता हूं के खुदा बेटा नहीं जनता गॉड कैन नॉट बगेट अ सन लेकिन आम सन हो सकता है आम सन फॉर एग्जांपल इफ यू रीड द बाइबल बाइबल सेज इन द बुक ऑफ रोमट ल दो र लेड बाय द स्पिरिट ऑफ गड दे आर सस ऑफ गड जो भी अल्लाह के एकामा को मानता है वह अल्लाह का बेटा है उस अंदाज में अगर आप कहते हैं कि हम भन के बच्चे है आई गट नो प्रॉब्लम हम भगवान के बच्चे हैं मिसाल के तौर पर अगर कोई जफ इंसान अगर मुझे कहेगा या कोई नौजवान को कहता है बेटा इधर आओ तो व फौरन बोलेगा जी चाचा जान मगा लेकिन अगर कहेगा कि आप मेरे जने हुए बेटे है इधर आओ तो व उसको एक लाफा मारेगा बेटा मतलब सन व छोटा आदमी ही गिविंग रिस्पेक्ट मिसाल के तौर पर मेरे इंट्रोडक्शन में शेख फैजुर रहमान ने कहा कि शेख दीदात ने कहा डॉक्टर जाकिर नायक को बेटा और फिर बेटा मतलब मैं उनकी इज्जत करता हूं वह मेरे वालिद के समान है लेकिन अगर वो लिखते थे कि मेरा जनाबा बेटा तो प्रॉब्लम है आप समझ रहे कि नहीं दिस इ द लैंग्वेज तो इस तरीके से अगर आप बेटा कहते हैं और कहते हैं कि गड इ फादर तो अगर आप कांटेक्ट में देखते हैं कि वह हमारा पालने वाला है वह हमारा खालिक है वह हमारा रब है उस तरीके से आप कहते मुझे कोई भी प्रॉब्लम नहीं लेकिन इसीलिए कुरान मजीद में 99 सिफत है अल्लाह ताला की उसमें से अब जो आसान है जानबूझ के नहीं लिखा है लेकिन रब जो और मुश्किल है रब बोलना अब से और मुश्किल है जान अपने सिफ तों में अब को नहीं लिखा क्यों लोग उससे गलत मानी ले सकते हैं वरना फादर बोलना अच्छी बात है और हम आमतौर पर कहते हैं बेटा इधर आओ कोई हरज नहीं इसीलिए मैं कहता हूं बाइबल में अगर कहते कि जो लोग अल्लाह की बात मानते हैं वह अल्लाह के बेटे हैं मुझे कोई हर्ज नहीं उस तरीके से ईसा अल सलाम बेशक अल्लाह सुभाना व ताला के भेजे हुए अजम पैगंबर थे वो बेशक बेटे थे लेकिन अगर कोई कहता है कि ईसा अल सलाम अल्लाह के जने हुए बेटे हैं तो ऑब्जेक्शन अब समझ रहे ना तो बाइबल में किधर भी नहीं लिखा है कि ईसा अल सलाम अल्लाह के जने हुए बेटे हैं एक वर्स है गोस्पेल ऑफ जॉन चैप्टर नंबर थ वर्स नंबर 16 जिसम लिखा है क्या फॉर गड सोल ऑफ द वर्ल्ड दैट ही गव ओनली बिगन सन हु सोवर बिलीव इनम शल नॉट डाय बट आ एवर लास्टिंग लाइफ तो ये वर्स जो बा बिल की है गोस्पेल ऑफ जॉन चैप्टर नंबर थ वर्स नंबर 16 फॉर गॉड सोल ऑफ द वर्ल्ड दैट ही गेव हिज ओनली बिगन सन हु सवर बिलीव विथ इन हिम शल नॉट डाय बट आ हैव एवर लास्टिंग लाइफ ये एक ही जगह पे लिखा हुआ है बिगन सन लेकिन जब आप आरएसवी पढ़ते हैं रिवाइज स्टैंडर्ड वर्जन ऑफ द बाइबल रिवाइज बाय 32 स्कॉलर्स 32 स्कॉलर्स क्रिश्चियन स्कॉलर्स ऑफ द हाईएस्ट एमिनेंट वो लिखते हैं कि ये लव जना हुआ ये लफ बिगन इंटरपोलेशन है फैब्रिकेशन है बनावटी है यह बाइबल में था ही नहीं और वो क्रिश्चियन स्कॉलर्स ने यह लफ को बाइबल के बाहर उठा के फेंक दिया है इसी तरीके से आपने जो कहा कि भगवत गीता में लिखा श्री कृष्ण कहते हैं के मैं माता हूं मैं पिता हूं इन कॉन्टेक्स्ट मुझे प्रॉब्लम नहीं है हालांकि मैं नहीं कहूंगा कि खुदा हमारे वालिद है क्यों क्योंकि लोग को गलतफहमी हो सकती है लेकिन अगर कोई इंसान सही कांटेक्ट में कह ता है कि हम अल्लाह के बच्चे हैं मुझे कोई तराज नहीं लेकिन जने हुए नहीं इसी तरीके से आप पढ़ेंगे गीता वेद वेद सबसे ऊंची किताब है वेद के बाद आता है उपनिषद उपनिषद के बाद आता है इतिहास तो अगर आपको जानना इतिहास के अंदर महाभारत का एक हिस्सा है भगवत गीता अगर आपको कोई शक है इसकी मानी में क्या हो सकता है अगर दो मानी निकलती है तो आपको जाना चाहिए वेद के पास या उपनिषद के पास आप अगर उपनिषद पढ़ते हैं स्ता उपनिषद चैप्टर नंबर छ वर्स नंबर न उसमें लिखा है ना जनिता चपा जिसके मानिए उस भगवान उस खुदा का ना वालिद है ना वालिदा है ट नो सुपीरियर नो फादर नो मदर मैं कंप्लीट करता हूं फिर मका दूंगा इसी तरीके से आपने कहा कि मैं नाथ सरपति मा अस्थ को नहीं मानता हूं क्या आप वेद को नहीं मानते आप यह कह सकते कि मैं र जो ट्रांसलेशन देता है मैं उसमें नहीं मानता हूं तो मैं जवाब दे सकता हूं तो आपके भगवत गीता का जवाब तो दे दिया हूं लेकिन पहले जब आपने क नात पति मा अस्थ यह हवाला है स्वेता स्तार उपनिषद चैप्टर नंबर फोर वर्ष नंबर 19 और आता है यजुर्वेद चैप्टर नंबर 32 वर्स नंबर थ में जहां लिखा है न तस प्रतिमा अस्ति प्रतिमा एक संस्कृत वर्ड है अगर आप संस्कृत डिक्शनरी में जाएंगे लिखा है कि प्रतिमा के मानी है बुध के माननीय फोटोग्राफ के माननीय स्टैचू उसके माननीय स्कल्पचर तो जब वेद और स्तास उपनि में आता है ना तस प्रतिमा अस्थ उस खुदा की कोई प्रतिमा नहीं उस खुदा का कोई बुत नहीं है उस खुदा की कोई तस्वीर नहीं उस खुदा का कोई फोटोग्राफ नहीं कोई स्कल्पचर नहीं तो यह मानी है अगर आपको संस्कृत नहीं पता है तो आपको जाना चाहिए संस्कृत डिक्शनरी में और हमारे इलाम र् फाउंडेशन में अल्हम्दुलिल्लाह सांकृत डिक्शनरी है फिर हम कह सकते हैं कि मानी में आप मानते कि नहीं मानते तो इसीलिए कुरान में लिखा है सूर नहल में सूरा नंबर 16 आयत नंबर 43 में और सर अंबिया में सरा नंबर 21 आयत नंबर सा में फस इ अगर आपको नहीं पता है तो उससे पूछिए जो इस मैदान का माहिर है और जो मैं कह रहा हूं आपको कई कमेंट्री दिखाऊंगा जो अहमदुल हिंदू पंडितों ने लिखी है आप आर्य समाज की किताब पढ़ेंगे तो जो मेरी तकरीर है वह खुद मैं अपने जहन से नहीं कहता हूं मैं तहकीक करता हूं और हवाला भी देता हूं वह अलग बात है कि आपको इल्म नहीं होगा संस्कृत का इसीलिए आप इस बात में नहीं मानते आई होप क्वेन बदर या आई वड लाइक टू कंटिन्यू इ य डोंट माइंड फर्स्ट पार्ट व्ट यू सेड वाट वी ल आर सनस ऑफ गॉड इ वी सेट देर इ नो हमम एंड एज ऑफ सेइंग दैट वी आर बिगन सस ऑफ गॉड दैट इज नॉट एक्सेप्टेड एंड दैट इज ट्रू सो माय काइंड रिक्वेस्ट इज दैट व्हेन यू स्पीक बिकॉज व्हेन यू सेड पीपल कैरी दिस इन देयर माइंड दैट एनी वन हु सेज दैट यू आर सनस ऑफ गॉड द मुस्लिम कम्युनिटी वि अपोज सो दैट विल जस्ट क्रिएट अ डिस हार्मोनी विदाउट अंडरस्टैंडिंग द कांटेक्ट सो दैट वाज माय कंसर्न जस्ट होल्ड ऑन देर इज नेवर अ डिमनी ब्रदर इफ यू से वी आर चिल्ड्रन ऑफ गॉड मोस्ट मुस्लिम विल नॉट ऑब्जेक्ट द ओनली ऑब्जेक्ट व्हेन अ क्रिश्चियन सेज दैट जीसस इ सन ऑफ गड पीस बी अपॉन हिम बिकॉज वी नो द कॉन्टेक्स्ट वी ऑब्जेक्ट व्हेन यू टेक अ डायटी नेम एंड से दैट दिस डायटी इज द सन ऑफ गॉड मोस्ट मुस्लिम विल नॉट ऑब्जेक्ट इफ यू से दैट द ह्यूमन बींग आ चिल्ड्रन ऑफ गॉड आई डोंट नो एनी सो व्हाट बिकॉज वीी नो द कॉन्टेक्स्ट दैट द रीजन ब्रदर व्हेन यू आस्क अ क्वेश्चन यू शुड रिलाइज इन जनरल टर्म सन मींस बिगन सन इट इज अ ड्यूल मीनिंग व्हेन वी यूज सन इट्स जस्ट इन कॉन्टेक्स्ट सो देयर फोर वी आर वेरी केयरफुल वी डोंट वांट एनी वन टू मिस अंडरस्टैंड हम यह नहीं चाहते कि गलतफहमी हो इसीलिए हम जान पूछ के यह भी नहीं कहते कि हम बेटे हैं खुदा के वो बिल्कुल गलत हो जाएगा अगर कोई गलतफहमी लेता है मेरे अल्फाज से हम इसीलिए वी आर वेरी केयरफुल हम जानबूझ के एहतियात लेते हैं और ऐसे अल्फाज जिससे गलतफहमी पैदा हो सकती है खुसूस खुदा के लिए भगवान के लिए हम क्या करते करते और वी आर वेरी केयरफुल न टू यूज दिस वड क् भाइयों की तरफ से कोई सवाल हो गैर मुस्लिम भाइयों को तरजीह दे मेरा नाम कैलाश माने है मैं प्रोफेशनल से टेलीकॉम इंजीनियर हूं आपने कहा था कि हर रिलीजन में लिखा है कि हर बुक में लिखा है कि भगवान एक है खुदा एक है तो मैं यह कहना चाहता था कि इस्लाम को फॉलो करना चाहिए माशाल्ला भाई साहब ने बहुत बहुत अच्छा सवाल पूछा अहम सवाल कि अगर हर मजहब हर धर्म की किताब में लिखा है कि भगवान एक है तो मुझे इस्लाम ही क्यों फॉलो करना चाहिए बहुत अच्छा सवाल अगर हिंदू जम में लिखा भगवान एक है क्रिश्चिया मेका भगवान एक है इस्लाम भगवान एक है तो मुझे इस्लाम ही क्यों फॉलो करना चाहिए मैं हिंदू ही रहूंगा मैं ईसा ही रहूंगा बहुत अच्छा सवाल है मैं ये कहना चाहता हूं कि जिस तरीके से मैंने तकरीर की थी चंद साल पहले 1993 में इसी कैंपस में कुरान एंड मॉडर्न साइंस कुरान और जदीद साइंस और उसके जरिए मैंने यह साबित किया कि कुरान अल्लाह की आखरी किताब है अगर आप इस साइंस से दूसरी मजहब की किताबों को जाते हैं तो बाकी मजहब की किताब इस साइंस के टेस्ट पे नहीं उतरते हैं लेकिन हम यह कहते हैं कि अल्लाह सुभाना ताला ने ने कई किताबें नाजिल की है अल्लाह सुभाना ताला ने कई किताबें नाजिल की नाम से सिर्फ चार का जिक्र है कुरान मजीद में तौरा जबूर इंजील और कुरान तौरा वो वही है जो मूसा अल सलाम पे नाजिल की थी जबूर वो वही है वो किताबें जो दाऊद अल सलाम पे नाजिल की गई थी इंजील वो किताब है जो ईसा अल सलाम जीसस क्राइस्ट पीस बेपन पे नाजिल की गई थी और कुरान मजीद आखरी किताब है जो आखिरी पैगंबर मोहम्मद सल्ला सल्लम पर नाजिल की गई थी लेकिन कुरान मजीद में ये भी लिखा है सूर राद में सर नंबर 13 आयत नंबर 38 में न किताब और हर दौर में हमने किताब नाजिल किए अने अल्लाह ताला ने बहुत से किताबें नाजिल किए सिर्फ चार का जिक्र है लेकिन जितने भी किताबें कुरान मजीद के पहले नाजिल हुई थी वह सिर्फ एक ग्रह के लिए नाजिल की गई थी और एक वक्त के लिए नाजिल की गई थी जिस तरीके से बाइबल में लिखा है गोस्पेल ऑफ मैथ्यू चैप्टर नंबर 15 वर्स 24 गोस्पेल ऑफ मैथ्यू चैप्टर नंबर 10 वर्स नंबर फव एंड सिक्स ईसा अ सलाम सिर्फ बनी इसराइल के लिए भेजे गए थे तो इंजील सिर्फ बनी इसराइल के लिए भेजे गए थे उसी तरीके से जितने भी किताबें जितने भी पैगंबर मोहम्मद सलम के पहले या कुरान के पहले नाजिल की गई किताब वह सिर्फ एक महदूद वक्त के लिए थे और एक ग्रह के लिए था लेकिन क्योंकि कुरान मजीद आखरी कलाम है अल्लाह सुभान ताला की और महम्मद सलाम आखरी पैगंबर है वो सिर्फ मुसलमानों के लिए नहीं भेजे गए थे सिर्फ अरबों के लिए नहीं भेजे गए थे कुरान मजीद में लिखा है सूर इब्राहिम में सूरा नंबर 14 आयत नंबर 52 में 52 में सूर इब्राहिम सरा नंबर 14 आयत नंबर एक में सूर अजमर सूरा नंबर 39 वर्स नंबर 41 में सूर बकरा में सूरा नंबर दो आयत नंबर 185 में कि कुरान मजीद सारी इंसानियत के लिए नाजिल किया गया है और मोहम्मद सला सल्लम सिर्फ मुस्लिम या सिर्फ अरबों के लिए नहीं भेजे गए थे कुरान मजीद में जिक्र आता है सर अंबिया में सरा नंबर 21 आयत नंबर 107 में लना इला रहमत आलमीन के हमने मोहम्मद सलाम को नहीं भेजा लेकिन सारी इंसानियत के लिए सारे आलम के लिए और सारे जहां के लिए तो यह कहना है कि जितने भी किताबें पहले आई अल्लाह का पैगाम एक ही था अल्लाह एक है अल्लाह के पैगंबर अनेक थे लेकिन उनका अहम पैगाम एक ही था कि अल्लाह एक है और हम उसी की इबादत करें लेकिन वक्त जाने के वजह से जितने भी पहले किताबें नाजिल की गई थी वो वक्त वक्त वक्त उनमें मिलावट आने लगी और आप कोई भी स्कॉलर से पूछो चाहे बिबल स्कॉलर पूछो क्रिश्चियन स्कॉलर से पूछो देयर आर सो मेनी इंटरपोलेशन इन द बाइबल बाइबल में मिलावट है अगर आप वेद के स्कॉलर से पूछेंगे वो कहेंगे वेद में मिलावट है तो जितने भी किताबें पहले नाजिल की गई थी उनमें मिलावट है जितने पैगंबर भेजे गए थे उनका पैगाम बदल चुका है लेकिन एक अहम बात है कि यह किताब के अंदर मिलावट आने के बावजूद फिर भी हर मजहबी किताब में तौहीद है हर मजहबी किताब में लिखा है कि भगवान एक है तो मैं कहता हूं गैर मुसलिम से और मुस्लिम से भी कि आप मान लो कि एक किताब 100 फीसद खुदा की किताब है कोई भी शख्स कोई भी इंसान जो खुदा में मानता है उसे कोई भी तराज नहीं होगा मानने के लिए कि एक किताब 100 फीस खुदा की किताब है हिंदू कहेगा वे 100 फीसद खुदा की है क्रिश्चियन कहेगा बाइबल 100 फीसद खुदा की है मुसलमान कहेगा कुरान 100 फीसद खुदा का है नो प्रॉब्लम तो मैं कहता हूं जो भी चीज यह मजहब की किताबों में यकता है वो चीज पर हम अमल करें और जब हम तहकीक करते हैं यसा नियत मिलती है कि खुदा एक है दूसरी अनत मिलती है कि सब किताबों में लिखा है कि आखरी पैगंबर आने वाले हैं उनका नाम है मोहम्मद सल्ला वसल्लम आप बाइबल पढ़ेंगे बाइबल में लिखा है बुक ऑफ ड्यूटन चैप्टर नंबर 18 वर्स नंबर 18 में बुक ऑफ ड्यूटन चैप्टर नंबर 18 वर्स नंबर 19 में सॉन्ग ऑफ सॉलमन चैप्टर नंबर फाइ वर्स नंबर 16 में इन द बुक ऑफ आइया चैप्टर नंबर 29 वर्स नंबर 12 ये ओल्ड टेस्टामेंट है न्यू टेस्टामेंट पढ़ेंगे लिखा है गोस्पेल ऑफ जॉन चैप्टर नंबर 14 वर्स नंबर 16 गोस्पेल ऑफ जॉन चैप्टर नंबर 15 वर्स नंबर 26 गोस्पेल ऑफ जॉन चैप्टर नंबर 16 वर्स नंबर से गोस्पेल ऑफ जॉन चैप्टर नंबर 16 वर्स नंबर 12 टू 14 मैं कह सकता हूं कितने हवाले बाइबल में जिसमें लिखा है कि आखरी पैगंबर आने वाले मोहम्मद सला सलम है उसी तरीके से हम जब हिंदू मजहब की किताबों का मुताल करते हैं उसमें लिखा है भविष्य पुराना पर्व थ खंड थ अध्याय थी श्लोकास पाच से आठ तक भविष्य पुराना पर्व थ्री खंड थी अध्याय थ श्लोकास 10 टू 27 इसमें लिखा है कि आखरी पैगंबर मोहम्मद सलाम आने वाले हैं इसी तरीके से आप पढ़ेंगे जजर बे चप नंबर 21 वर्स नंबर 31 यजुर्वेद चैप्टर नंबर 21 वर्स नंबर 55 आप अगर पढ़ेंगे कुंट सुकता अथर्वा वेद बुक नंबर 20 हिम नंबर 127 वर्स नंबर में लिखा है महम्मद सल्लम आने वाले और मैं 100 से ज्यादा हवाले दे सकता हूं सिर्फ हिंदू मजहब की किताबों में जिसमें लिखा है मोहम्मद सल्ला सलम पे अमल करो मोहम्मद सलाम आखरी पैगंबर है आप अगर कलकी पुराना पढ़ेंगे उसमें लिखा है कलकी अवतार आखरी पैगंबर उसका नाम है मोहम्मद सला सल्लम उसकी मां का ना नाम लिख सुमती सुमती की मानी अमन अरबी में ट्रांसलेट करेंगे आमिना जो मोहम्मद सलाम की मां का नाम था उसमें लिखा है कि इस कल के अवतार के वालिद का नाम है विष्णु यास विष्णु यास मीस खुदा का बंदा ट्रांसलेट करेंगे अरबी में अब्दुल्लाह वो था नाम मोहम्मद स वालिद का लिखा गया है कि वो पैदा होंगे ऐसे शहर में जिसका नाम है अमन जो मक्का है वो पैदा होंगे उस ग्रह में जो चीफ होंगे मक्का के और आप जानते हैं मोहम्मद सला सलम कुरेश में पैदा हुए थे उसमें लिखा है कि यह कलक उतार आखरी पैगंबर होंगे इसमें लिखा है कि यह कल के अवतार सारी इंसानियत के लाएंगे इसमें लिखा है यह कल के अवतार के चार करीब दोस्त होंगे चार खुलफा राश दीन हजरत अबू बकर हजरत उमर हजरत उस्मान हजरत अली मे अल्ला बी पीस वि देम ल इस तरीके से डिटेल लिखा है के वो 12वी तारीख माधव में पैदा होंगे जो 12वी रबबी अव्वल है को बशारत होंगी सबसे पहली बशारत होंगी एक गार में एक केव में व गार हीरा और वह बाद में माइग्रेट करेंगे नथ वापस आएंगे हम जानते मोहम्मद स मक्का से जाते मदीना नथ वापस आते मैं फुल एक तकरीर करने वाला हू लखनऊ में दो हफ्ते बाद मोहम्मद सला सलम हिंदू मजहब की किताबों में तो मैं आपको कहता हूं अगर आपको अच्छा हिंदू बनना है तो आपको एक खुदा में मानना पड़ेगा नात प्रतिमा उस खुदा की कोई प्रति नहीं उस खुदा का कोई बुत नहीं उस खुदा की कोई तस्वीर नहीं उस खुदा का कोई स्टैचू नहीं आपको मानने पड़ेगा आखरी पैगंबर मोहम्मद सला सलम है आपको मानने पड़ेगा कि जो तालीमाबाद तर से एक अच्छा क्रिश्चन को अगर क्रिश्चन बनना है उसको एक खुदा में मानना पड़ेगा उसको मानना पड़ेगा ईसा अ सलाम खुदा नहीं उसे मानना पड़ेगा आखरी पैगंबर मोहम्मद सलाम में और वह ऑटोमेटिक आपको अगर मुस्लिम नाम से नफरत है तो मुस्लिम नाम मत लो लेकिन आप अपनी सारी खवाहिश अल्लाह और अल्लाह के आखरी रसूल मोहम्मद सला सलम के हिसाब से चलो और आप सबसे अच्छे इंसान बनेंगे इंशाल्लाह जरूर अच्छा हिंदू ब भाई साहब मैं आपसे पूछना चाहता हूं आप अच्छा हिंदू बन के सही मुसलमान बनना चाहते हैं कि नहीं आज आप अगर सच्चे हिंदू है और अपने हिंदू धर्म की किताबों में अमल करना चाहते हैं मैंने इतने हवाले दिया तो आप मानते हैं कि खुदा एक है आप मानते हैं कि नहीं मोहम्मद सल्ला सलम आखिरी पैगंबर है मैं जानना चाहता हूं आपसे हां आप मानते हैं कि अल्लाह एक है खुदा एक है हां मानता हूं मानते हैं कि नहीं हां मानता हूं मानते हैं आप मानते हैं कि मोहम्मद सलाम आखरी पैगंबर है हां सर आपने कहा मानते कि कलकी अवतार आखिरी पैगंबर मोहम्मद सला सलम है कि नहीं सर मैं अभी पढ़ूंगा बिल्कुल सही अब पढ़ के अगर मुतमइन होंगे तो फिर मानेंगे क्या नहीं हां माने कितना वक्त चाहिए आपको एक दिन चाहिए तो कल पढ़ सकते दो दिन चाहिए तो परसों पढ़ सकते एक दो दिन दो दिन दो दिन अच्छा परसों में आपका इंतजार करूंगा इंशाल्लाह ठीक है सर नंबर थ्री अगर वहां कोई नॉन मुस्लिम सिस्टर्स हो तो उनको मौका दिया जाए जी सर मैं दीप्ति है मुझे कुरान में की बहुत बातें अच्छी लगती है और उसमें से बहुत कुछ सीख मिलती है तो यह जरूरी है कि इस्लाम कबूल करना चाहिए और इस्लाम मुझे अच्छा लगता है बन का सवाल है किने कुरान मजीद पढ़ चुकी है बहुत स बातें अच्छी लगती है कुरान मजीद इस्लाम पसंद करती है तो मुझे इस्लाम कबूल करना चाहिए कि नहीं अगर आप पसंद करती है कुरान मजीद के तालीमाबाद आप अगर कुरान मजीद पढ़ चुके हैं और आप कहते कि कुरान मजीद में जो लिखा आप उसके पसंद है तो पसंद है तो उसके ऊपर अमल भी करना चाहिए सर यह बराबर लेकिन सर मैं आजम कैंपस में इधर तीन महीने हुए मैंने एडमिशन लिया है तो फ्रेंड सर्कल में सब मेरे फ्रेंड सर्कल है तो बहुत सारे मॉमेडियन फ्रेंड्स है मेरे तो ऐसा कुछ नहीं पहले तो नहीं थी लेकिन बहुत कुछ सीखने को मिलता है इधर आने के बाद मुझे बहुत कुछ सीखने को मिला और उसके बाद सर अच्छा लगा और बहुत कुछ लाइफ में सर कुछ बहुत सीख मिलती है इससे तो अच्छा लगता है कुन मुझे अगर आपके बहुत से फ्रेंड मुसलमान है सही लफ मुसलमान है मोहम्मद सही लफ्ज नहीं है मुसलमान सही लफ्ज है सॉरी सर अगर आप कैंपस में आ चुके हैं एडमिशन ले चुके हैं आपके बहुत से सहेलियां अगर मुसलमान है आपको अच्छा लगता है कि जो मुसलमान में चीज अच्छे है तो इस्लाम में कोई भी जबरदस्ती नहीं है इस्लाम में कोई भी किसी को को मुसलमान जबरदस्ती बना ही नहीं सकता यह हराम है लान दीन में कोई कंपलशन नहीं है अगर आप इस्लाम कबूल नहीं करेंगे तो कोई भी आपको एम कैंपस के बाहर नहीं निकालेगा जनाब पीए इनामदार साहब भी इधर है वो यह नहीं कहते कि अब इस्लाम कबूल नहीं करेंगे तो आज हम कैंपस के बाहर निकालेंगे और इस कैंपस में माशाल्लाह बहुत से गैर मुसलमान भी पढ़ रहे लेकिन अगर आपको समझ में आता है कि यह मजहब सही मजहब है और आप अपनी पुरानी किताब प पते हिंदू मजहब की किताब पढ़ते हैं और आपके हिंदू मजहब की किताब में लिखा हुआ है कि आखिरी पैगंबर आखरी अवतार जो आने वाला है वो मोहम्मद सल्ला सल्लम में और आपको इल्म हो जाता है कि यह पैगाम कुरान में मौजूद है और अल्लाह के आखरी रसूल के हदीस में मौजूद है तो आप अगर अपने पुरानी किताब वेद पर अमल करना चाहती है और आपको पता लग गया है कि यह पैगाम सही है तो आपको इस पैगाम को कबूल करना चाहिए अगर आपको वक्त चाहिए वक्त लीजिए एक दिन लीजिए दो दिन लीजिए वो भाई को दो दिन चाहिए दो महीना लीजिए बट जब आपको इत्मीनान हो जाएगा कि यह मजहब सही है यह तरीका जीने का सही है तो आपको इसको कबूल करना पड़ेगा तो ही असली तौर पे लोग को पता चलेगा कि आप इस किताब और इस दन से मोहब्बत करते हैं होप द आंसर क्वेश्चन माइक नंबर वन से काफी देर से मैं देख रहा हूं कि एक भाई खड़े हैं मेरी उनसे गुजारिश है कि वो सवाल करें माय नेम इज गोरे आर माय क्वेश्चन इज व्हाट इज द पोजीशन इन कुरान ऑन चाइल्ड एडॉप्शन एक मुस्लिम चाइल्ड अडॉप्ट कर सकता है क्या भाई साहब ने सवाल किया है कि इस्लाम में चाइल्ड एडॉप्शन जायज है क्या नहीं के इस्लाम में चाइल्ड को अडॉप्ट किया जा सकता है कि नहीं अगर कोई मुसलमान अनाथ बच्चे को लेना चाहता है और उसको बाप का प्यार मां का प्यार देना चाहता है बेशक अलाउड है तो इस्लाम में अनाथ बच्चे को घर देना मां का प्यार बाप का प्यार देना बिल्कुल अच्छी बात है और इसको इनकरेज किया है लेकिन लीगल एडॉप्शन अलाउड नहीं है लीगल एडॉप्शन का मतलब जिस तरीके से मैंने कहा कि मां का प्यार दे सकते हैं बाप का प्यार दे सकते हैं लेकिन अगर नाम देगा तो झूठ हो जाएगा तो इसी तरीके से आप कोई अनाथ को बाप का प्यार देते बेशक जायज है अच्छी बात है इनकरेज किया गया है मां का प्यार दीजिए घर में लाओ ले न उसको लीगल नाम नहीं दे सकते क्यों क्योंकि इससे कई मसाइल आ सकते हैं मिसाल के तौर पर अक्सर लोग जब यतीम बच्चे को गोद लेते हैं एक आम वजह है क्योंकि उनके पास कोई बच्चा नहीं है जब कोई यतीम बच्चे को गोद लेते हो सकता है कि चंद साल बाद वह कपल वह जोड़े को कोई बच्चा पैदा होता है तो फिर प्रॉब्लम हो सकता है उसके अलावा अगर कोई शख्स एक लड़के को गोद लेता है जब लड़का बड़ा होता है बालिग होता है 18 साल 20 साल का क्योंकि वह उसका जनाबा बेटा नहीं है इस्लाम में हिजाब है अगर कोई ना महरम कोई बालिक लड़के के सामने आती है हिजाब करना फर्ज है तो इसके अंदर जब बेटा बड़ा होगा तो उसको मां के साथ हिजाब करने पड़ेगा तो पहले से अगर बेटे को बोल लेंगे कि मैं आपका असल वालिद नहीं हूं असली वालिदा नहीं हूं और उसको प्यार दो बेशक अलाउड है लेकिन लीगल एडॉप्शन में और कई प्रॉब्लम हो सकते हैं मिसाल के तौर पर जब एक इंसान मरता है उसके मरने के बाद उसकी जायदाद उसकी विरासत का बंटवारा होता है और बंटवारा में क्राइटेरिया दिया गया कुरान में कुरान मजीद में लिखा गया सर निसा में सरा नंबर चार आयत नंबर 11 और 12 में किस तरीके से जायदाद किस तरीके से विरासत का बंटवारा होता है और उसमें लिखा है कि अगर एक इंसान एक आदमी मरता है उसकी कोई भी औलाद नहीं है तो उसके बीवी को मिलता है एक चौता हिस्सा अगर उसके औलाद है तो मिलता है एक आठवा हिस्सा उसी तरीके से अगर एक औरत मरती है अगर औरत के कोई भी बेटे बेटिया नहीं है कोई भी औलाद नहीं है तो शौहर को मिलता है आधा हिस्सा अगर औलाद है तो शौहर को मिलता है एक चौथा हिस्सा तो अगर हम लीगल एडॉप्शन करते हैं तो फौरन आपके बीवी को आधा हिस्सा कम मिलेगा तो इस्लाम में अगर आप बच्चे को गोद लेते हैं आप गोद ले सकते हैं लेकिन लीगल एडॉप्शन नहीं कर सकते क्योंकि इसमें बाकी रिश्तेदार से नाइंसाफी होंगी लेकिन इस्लाम में इसका भी हल है अगर आप इसको गोद लेते लीगली नहीं लेकिन प्यार देते हैं कोई यतीम को लेते इस्लाम में इजाजत है कि एक तीसरा आपके विरासत का आप किसी को भी गैर रिश्तेदार को दे सकते हैं तो अगर आप किसी को मां का प्यार बाप का प्यार देते हैं वालिद वालिदा का प्यार देते हैं और अगर आपके विरासत में हिस्सा देना चाहते हैं तो मैक्सिमम आप न थर्ड दे सकते हैं लेकिन विदाउट मेंशनिंग अगर आप लीगल एडॉप्शन करते हैं तो आपके बाकी रिश्तेदार व कई रिश्तेदारों की जो उनको शेर होना चाहिए वो मिल जाता है आधा तो इसमें देर इंजस्टिस डन तो इसकी वजह से हिजाब के के वजह से इंजस्टिस के वजह से विरासत के वजह से लीगल एडॉप्शन इज नॉट अलाउड लीगल गोद लेना अलाउड नहीं लेकिन अगर आप किसी को मां का प्यार बाप का प्यार देना चाहते हैं उसको घर देना चाहते हैं तो कोई हर्ज नहीं है होप आंस क्वेन यदि लीगली इफ ही कैन नॉट अडॉप्ट अ चाइल्ड इफ अ मुस्लिम कैन नॉट अडॉप्ट अ चाइल्ड लीगली तो कुरान जब लिखा गया उसको 1400 साल हो गए आज के तारीख में यदि लीगली एडॉप्शन करना वो बच्चे के लिए और व इंसान के लिए जो अडॉप्ट करना चाहता है दोनों के लिए यदि फायदेमंद साबित होता है तो इसमें कोई बदलाव इसमें कोई चेंज इसमें कोई सुधार नहीं हो सकता भाई साहब ये कहना चाहते हैं कि 1400 साल गुजर चुके हैं अभी अगर लीगल एडॉप्शन बच्चे का फायदा होता है तो कुरान में तब्दीली आ सकती है क्या नहीं लेकिन मेरे हिसाब से फायदा नहीं होता है और अल्लाह सुभाना ताला भगवान जानता है क्या चीज इंसान के लिए फायदेमंद है क्या नहीं और यह किताब कुरान मजीद भगवान की खुदा की आखिरी नाजिल की गई किताब है जिसमें कोई भी कांट्रडिक्शन नहीं है हम हमारे सोच से सोचते हैं कि ये शराब ये शराब क्यों हराम है अभी तो कई फायदे मुझे थंडी लगती तो शराब पी सकता हूं मैं यह हमारी सोच है लेकिन जब हमें और डिटेल मालूम पड़ते शराब के बारे में वह ज्यादा नुकसान दार है तो इसी तरीके से लीगल एडॉप्शन से फायदा नहीं होता है ज्यादा नुकसान होता है जब जब अल्लाह ने यह कहा है के जितने भी यतीम लोग है उनको देखो उनको प्यार दो वो तो जायज कहा गया है ना ये नाम की क्या प्रॉब्लम है नाम नाम से क्या आपकी मोहब्बत कम होने वाली है तो प्रॉब्लम आप में कुरान में नहीं है आप समझ रहे इस्लाम में आपका दर्जा बढ़ता है कि भले यह मेरा बेटा नहीं मैं उनको पैसे दे रहा हूं मैं इसको प्यार करर उसम प्रॉब्लम क्या है क्योंकि दे कैन बी अदर प्रॉब्लम दे कैन बी जेनेटिक प्रॉब्लम एंड फदर मोर मैं मेरे बीवी से ना इंसाफ भी करूंगा अगर मेरी औलाद नहीं है और मैं कोई लड़के को गोद लेता हूं तो मैं नाइंसाफी करता हूं मेरी बीवी के साथ उसकी जायदाद आदी हो जाती है होती है क्या नहीं मैं नाइंसाफी कर रहा हूं मेरी वालिदा के साथ मेरी वालिदा की जायदाद भी आदी हो जाती है तो इसके अंदर किसी से नाइंसाफी ना हो इसीलिए अल्लाह ने कहा है प्यार दो मोहब्बत दो लेकिन आज के लोग ज्यादा मानते बनावट दिखा के लिए तो दिखावे के लिए करना चाहते हैं तो प्रॉब्लम है तो इस्लाम में दिखावे के लिए नहीं करना चाहिए अल्लाह के लिए करना चाहिए भाई साहब अभी नाइंसाफी हो जाएगी फिर जाकर नायक साब समझा रहे हैं नाइंसाफी के बारे में अगर हम बहनों को मौका नहीं दे तो य नाइंसाफी होगी मैं बहन से गुजारिश करता हूं कि व सवाल करें आईम डॉक्टर गीता कदम आई हैव क्वेश्चन रिगार्डिंग टेस्ट ट्यूब बेबी लेडी हैविंग र सो ड ड टेस्ट टू बेबी इ इट हराम और हलाल एक्चुअली आई हैड एन आर्गुमेंट विथ वन ऑफ माय फ्रेंड एंड शी सेड इट इज हराम इफ इट इज हराम सो व्ट ट लेडी कैन डू फॉर हैविंग अ किड प्लीज एक्सप्लेन मी मैंने सवाल पूछा है जो डॉक्टर है और कहती है कि अगर एक औरत को ओरिन फेलियर है और वो टेस्ट ट्यूब बेबी से बच्चे को जन्म देती है तो जायज है क्या नहीं जितने भी मेडिकल जरिए है बच्चे पैदा करने के मिसाल के तौर पर इन वेट्रो फर्टिलाइजेशन टेस्ट टू बेबी जितने भी तरीके हैं उसमें दो टाइप के तरीके एक होता है होमोजीनस एक होता है हेट्रो जनस होमोजीनस मतलब के जो ओवम है बैदा है वो होता है बीवी का और स्पर्म है मनी है शौहर का इसे कहते हैं होमोजीनस हेटजनर में क्या होता है आप स्पर्म लेते स्पर्म मैंग में से इसके अंदर जो शोहर नहीं है उसकी मनी लेते तो यह हराम है तो अगर कोई भी मेडिकल साइंस का तरीका है लेकिन वो होमोजीनस है अगर बैदा है बीवी का ओवम है बीवी का और अगर सीमन अगर मनी है शौहर की तो जायज है लेकिन अगर स्पर्म बैंग में से आप लेते हैं दूसरे कोई आदमी का लेते हैं यह हराम है तो जितने भी मेडिकल तरीके है अगर होमोजीनस है इसमें कोई तराज नहीं है हेट्रो जिनिस है तो हराम है होप क्वे भाइयों की तरफ से कोई सवाल हो तो कर सकते हैं एनी नॉन मुस्लिम ब्रदर और सिस्टर है एनी क्वेन प्लीज गो बिहा द क्य ऑफ नॉन मुस्लिम ओनली यू डों हैव टू गो बहा द फुल क्यू लाइक द ब्रदर द फर्स्ट क्वेन आई टो गो बहा द नॉन मुस्लिम सो सिस्टर शली स्ट द माइक्रोफोन दे न नॉन मुस्लिम इशाला इला विन फ्य मिनट चांस अन सो एनी नॉन मुस्लिम सेकंड क्वेन कैन गो बिहा द क्य ऑफ नॉन मुस्लिम कोई भी गैर मुसलमान को सवाल पूछना है तो वह गैर मुसलमानों के पीछे वापस जा सकता है और दूसरा सवाल पूछ सकता है जी भाई साहब हा माने सर्विस करतो इ पुण्या मे माझा मित्र आशिफ शेख यांनी सांगल इ आले है ईश्वर एक है अल्ला एक है म ही धर्माची विधता कशासाठी म एव आटा पटा कशासाठी चालला है हे धर्म ला पाहिजे ते धर्म ईश्वरा एक धर्म निर्माण केला ना म तुम्ही करता ईश्वरा काम नी एक र् केला असता तर य आली नसती तुम्हाला प्रचार कराय आली नसती भा साब ने बहुत अच्छा सवाल पूछा है के ईश्वर एक है पैगाम एक है तो यह दिगर धर्म क्यों है यह इतने धर्म क्यों है इसीलिए कुरान मजीद में लिखा है के अल्लाह सुभाना ताला ने एक ही मजहब भेजा है जितने भी किताबों में मजहब जो लिखा व एक ही है य हम इंसानों ने गलत बनाए है हम इंसानों ने जितने भी इलाफ है हम इंसान ने किए है तो कुरान मजीद में लिखा है कि अल्लाह भगवान ने एक ही धर्म भेजा है और व एक धर्म में लिखा है एक ही खुदा मुसलमान हिंदू क्रिश्चियन सिख ई क इस्लाम धर्मा स पतेती मराठी मुझे सम जवाब देने आता नहीं भाई साब ने पूछे क्या ये मुसलमान हिंदू क्रिश्चन स क्या ये यह भांड क्यों करना चाहिए एकता पा तो एकता के लिए तकरीर रही है भांड हो रहा है गड़बड़ हो रही है इसलिए तो तकरीर कर रहा हूं अगर भांड नहीं होगा तकरीर क्यों करू देवाने इस्लाम धर्मा जन् लाता हा तो इसीलिए आप देखेंगे जो आप कह रहे हैं हर किताब में लिखा हुआ है कि आप भगवान के पैगाम पर अमल करो यह आप देखते हैं मिसाल के तौर पर आप तहकीक करेंगे आप कहेंगे कि आप पानी को वाटर क्यों बोलते यह पानी वाटर जल क्या है सिर्फ पानी कहो य मान पानी कह सकते जल कह सकते पानी कहते हिंदी में जल कहते संस्कृत में वाटर कहते इंग्लिश में मोया कहते अरबिक में लेकिन मैं कहना चाहता हूं कि अगर आप तहकीक करेंगे सब मजहब सब धर्म का पैगाम एक ही है वह मिलावट को हटा दो जो य उसके ऊपर अमल करो इसीलिए मैं कहता हूं अगर आपको सग जर इस्लाम धर्मा आले ना तु गरज नती म देवाने पले जन्म ला पा हो हे वि का तयार झाली अस का व तुम का मत बद्दल क्या बोले जरा मराठी इतनी मेरी अच्छी नहीं समझ गया मैं आप यह कहना चाहते हैं क्या आप क्यों कहते हैं कि इस्लाम ही सही है आप इस्लाम बोल रहे हैं तो भगवान ने व इस्लाम एक ही करना मांगता था ना व हिंदू मुस्लिम सिख ऐसा क्यों हुआ भाईब के सवाल को अच्छे से समझ चुका हूं आप शायद हिंदी नहीं समझते मैं जवाब देने जा रहा हूं बीच में बोल रहे अब मैं जवाब देने जा रहा हूं बीच में बोल रहे आपका सवाल है कि अगर धर्म एक है तो यह अलग-अलग धर्म के नाम क्यों हैं ईसाई सिख बुध इस्लाम क्यों तो उसका ही तो जवाब दे रहा हूं मैं हा बोलो भगवान ने ईश्वर ने एक ही धर्म भेजा वह है के एक भगवान में मानो और उसके पैगाम पर अमल करो लेकिन जितने भी पैगंबर आए जब यह पैगाम लेके आए उसके मानने वालों ने आस्ते आस्ते उस पैगाम में तब्दीली ले आए और आपके पहले एक भाई ने यही सवाल पूछा था तो मैंने यह जवाब दिया था कि पैगाम तो सब पैगंबर का एक था कि भगवान एक है ईश्वर एक है और सिर्फ एक भगवान में मानना चाहिए बुत परस्ती गलत है भगवान का बुत नहीं बनाना चाहिए भगवान ने बेटा नहीं जना लेकिन वक्त जाने ने की वजह से इस पैगाम में तब्दीली आने लगी जब तब्दीली आए तो भगवान ने दूसरे पैगंबर को भेजा फिर तब्दील लिया है फिर पैगंबर भेजा इस तरीके से 124000 पैगंबर इस धरती पे आए और जितने भी पैगंबर आए वो सिर्फ अपने लोग को सही रास्ता दिखाने के लिए आए और आखिरी पैगंबर से मोहम्मद सल्ला वसल्लम तो मैं ये कहता हूं आपसे अगर इख्तिलाफ है तो मैं यह कहता हूं कि जो यक्षा है सारे मजहब की किताबों में कम से कम उस परे तो अमल करो मैं आपसे पूछना चाहता हूं आप बोलते सब धर्म के बराबर तो आपकी किताब में लिखा है मोहम्मद सला सलम के बारे में आप क्या मोहम्मद सलाम को मानते हैं मैं आपसे पूछना चाहता हूं भाई साहब मैं ईश्वरा ला मानतो बिल्कुल सही आपके किताब में भविष्य पुराना पर्व थ खंड थ अध्याय थ श्लोका पाच से आठ भविष्य पुराणा पर्व थ्री खंड थी अध्याय थ श्लोका 10 से 27 यजुर्वेद चैप्टर 21 यह सब रेफरेंस दे रहा हूं मैं यजुर्वेद के अंदर लिखा है सर्वेद में लिखा है ऋग्वेद में लिखा है सब में लिखा है आप पढ म ले त्या पु सांगतो मला सांगा मैं आपसे पहले य सवाल पूछता हूं भाई साब एक ईश्वर में मानते आप एक ईश्वर मान बस मैं भी मानता हूं आप मानते उस ईश्वर में पति मा नहीं है नहीं है नहीं है कोई बुत नहीं है कोई तस्वीर नहीं है बस बिल्कुल सही तो पले पास है आप पहले स्टेज में आप पास है मान पहले स्टेज में पास है आप तो यह बात आप जो हिंदू स्क्रिप्चर की मानते हैं उसके आगे आपके धर्म की किताब में लिखा है के कलकी अवतार आने वाले उस कलकी अवतार के मां का नाम है सुमति उसके वालिद का नाम है विष्णु लेर ट रहा दूसरा उत्तर आप सु ल ते कलकी मला नका सांगू मी काय विचार हिंसा मान्य है का तुम्हाला आप हिंदी में बात करेंगे जरा ये मराठी में लेक्चर नहीं हो रहा हिंसा मान है क्या भाई साहब यह तकरीर हिंदी में हो रही है उर्दू में हो रही है आप मुझे सवाल पूछ रहे आपने यह पूछा कि हिंसा में आप मानते क्या नहीं वायलेंस इस्लाम के मानी है अमन इस्लाम आता है लफ सलाम से जिसके मानी है अमन इस्लाम धर्म में अमन का हिंसा मान्य है क्या आपको अगर उनको कुछ समझ में नहीं आता भाई साहब साहब आपको तो आप बाद में पूछ सकते हैं अगर दूसरा कोई गैर मुस्लिम है जो हिंदी में सवालात करना चाहता है ही मोस्ट वेलकम जी बानों की तरफ से कोई सवाल हो तो कर सकती हैं हेलो सर आई एम डॉक्टर भाग्यश्री आई वांट टू आस्क यू क्वेश्चन अबाउट द ऑर्गन ट्रांसप्लांटेशन बिकॉज जनरली इन मेडिकल फील्ड वी एंकरेज द ब्लड डोनेशन फॉर द पेशेंट्स हु आर सफरिंग इन अ वेरी क्रिटिकल कंडीशन बट आफ्टर द ब्रेन डेथ मेडिकल फील्ड एंकरेजेस द ऑर्गन डोनेशन लाइक आई डोनेशन और लिवर डोनेशन किडनी डोनेशन व्ट इज द इस्लाम सेज अबाउट द ऑर्गन डोनेशन बन ने सवाल पूछा है कि इस्लाम की राय क्या है ऑर्गन डोनेशन के बारे में जिस तरीके से ब्लड ट्रांसफ्यूजन करते हैं ऑर्गन डोनेशन कर सकते हैं इंसान जिंदा है या इंसान मरने के बाद हम किडनी या आंख या कुछ दे सकते हैं क्या नहीं ऑर्गन डोनेशन के मुतालिक इस्लाम में कहा गया है कि डायरेक्ट कोई वर्स कुरान में नहीं है आयत नहीं है कोई हदीस नहीं जिसमें लिखा है क्या ऑर्गन डोनेशन कर सकता है नहीं कर सकते लेकिन जब हम तहकीक करते हैं कुरान की आयतों की और हदीस की और बहुत से मीटिंग और कॉन्फ्रेंस हो चुके इसके अंदर तीन शर्त अगर पूरे होते हैं तो ऑर्गन डोनेशन जायज है पहली शर्त अगर जो शख्स अगर जिंदा है और कोई ऑर्गन डोनेट करता है उसको मेजर लॉस नहीं होना चाहिए मिसाल के तौर पर अगर मैं दिल डोनेट करूंगा तो मर जाऊंगा तो मैं जीते जी दिल को डोनेट नहीं कर सकता हूं लेकिन आज की साइंस कहती है कि इंसान के पास दो किडनी है अगर वो एक किडनी किसी को डोनेट करता है फिर भी वह एक किडनी के जरिए जी सकता है तो अगर मेरी वालिदा की किडनी फेल हो चुकी है और मैं एक किडनी मेरी वालिदा को देता हूं तो यह जायज है दूसरा पॉइंट जो शख्स ऑर्गन को रिसीव करता है उसको मेजर बेनिफिट होना चाहिए उसके लाइफ में और थर्ड कोई भी ऑर्गन डोनेट करता है तो पैसा उसे नहीं मिलना चाहिए नॉट फॉर एनी इकोनॉमिकल गेस अगर ये तीनों शराय पूरे होते हैं कि जो शख्स न दे रहा है उसको मेजर लॉस नहीं होना चाहिए अगर वह मर जाता है उसके बाद कोई ऑर्गन डोनेट करना चाहता है तो यह जायज है उसके बाद जो ऑर्गन रिसीव कर रहा है उसे मेजर बेनिफिट होना चाहिए उसके हेल्थ के अंदर और थर्ड चीज पैसे के लिए कोई भी ऑर्गन डोनेट नहीं करना चाहिए अगर यह तीनों शराय उतरते हैं तो ऑर्गन ट्रांसप्लांटेशन ऑर्गन डोनेशन जायज है मैक नंबर दो से गुड इवनिंग सर मेरा नाम महेश चौहान है रहने को घोरपड़ी गांव में आईटीसी में जॉब करता हूं मैं तो आपने जो भी इंफॉर्मेशन दिया वह यहां पर बहुत अच्छा था लेकिन एक सवाल करता हूं हिंदू इजम में दो क्लास है अपर क्लास और लोअर क्लास तो लोअर क्लास को पहले जमाने में ट्रीटमेंट बहुत बुरा मिलता था तो मैं यह करना चाहता हूं कि डॉक्टर बाबासाहेब आंबेडकर उन्होंने बुद्धिस्म क्यों चुना लोअर क्लास के लिए भाई साहब ने बहुत अच्छा सवाल पूछा कि हिंदू इजम में दो क्लास से लो क्लास हाय क्लास एक्चुअल हिंदुइज्म में चार क्लास है अपने टॉप और बॉटम को गिना और ही पकड़ता हूं मैं बस हां चार में बहुत कंफ्यूजन है हां लेकिन मैं क्योंकि तालिब इल्म हू दीगर मजब का मैं दो कहूंगा तो लोग बोलेंगे मैं हिंदू इजम नहीं जानता हूं आप क तो प्रॉब्लम नहीं है अपर एंड लोअर मैं जानता हूं कि ब्राह्मण है क्षत्रिय है वैश्या और शूद्र है चार क्लास है लर्नेट क्लास ब्राह्मण जैसा आता है हिंदू मजहब किताब में कि भगवान से सिर से बने ब्राह्मण चेस से बने त्रिया वरियर क्लास और पेट या थाइज से बने वेशिया जो है बिजनेस क्लास और फीट से शूद्र तो बाबा साहेब अंबेडकर ने शूद्र क्लास के लिए बुधम क्यों चुना बहुत अच्छा सवाल है पहली चीज में यह कहना चाहता हूं के इस्लाम में कोई भी क्लास नहीं है हाई क्लास और लो क्लास नहीं है उसका जवाब बाद में दूंगा पहले मैं यह कहना चाहता हूं कि बाबा साहेब अंबेड ने अगर आप उनकी किताब पढ़ेंगे उन्हें सबसे अच्छा मजहब पसंद आया वह इस्लाम उने तकी की दर मजहब की सबसे अच्छा मजहब पसंद आया इस्लाम लेकिन हम मुसलमानों ने उन्हें अच्छे तौर से स्वागत नहीं किया क्योंकि कई मुसलमान गांव खेड़ में जाएंगे उनको हिंदू जम का इफस हुआ वह भी जात पात में मानते ऊपर जात नीचे जात अफसोस की बात है इस्लाम में कोई भी जात पात नहीं है लेकिन कुछ मुसलमान हिंदू के साथ रह रह के वह भी कासम में मानने लगे आज की तारीख में भी आप अगर गांव खड़े में जाएंगे तो कई मुसलमान जो समझते ची क्लास का और यह मुसलमान नीचे क्लास का है कई जगह जाएंगे मैं शेखू मैं सयद ऊंची क्लास इस्लाम में ऐसा कुछ है नहीं इस्लाम मेंला फरमाते सर हुजरात में सरा नंबर 49 आयत नंबर 13 में जिके मानिए के इंसानों हमने तुम्हें एक जोड़े से पैदा किया है मर्द और औरत के और आपको ग्रहो में बांटे हैं ताकि आप एक दूसरों को पहचान सको ना कि आप एक दूसरों से नफरत करे और आप में से सबसे बेहतरीन इंसान व है जिसके पास तकवा है तो इंसान एक कया से या नीचा हो सकता है जो आदमी के पास तकवा है राइच असनेस पारटी गॉड कॉन्शसनेस खुदा कि अच्छी इबादत करता है खुदा के पैगाम पे अमल करता है वही इंसान ऊंचा है पैसे के मामले से कोई आदमी ऊंचा नीचा नहीं हो सकता है जींस के मामले से मर्द या औरत ऊंचा नहीं हो सकता है या कलर से सफेद या काला रंग से कोई आदमी ऊंचा या नीचा नहीं हो सकता है ऊंचा आदमी एक ही क्राइटेरिया से हो सकता है अगर व खुदा की इबादत करे खुदा के पैगा मात पर अमल करे व इंसान ऊंचा हो सकता है लेकिन जब बाबा साहेब अंबेडकर ने तहकीक की हमारे मुसलमान ने सही स्वागत नहीं किया तो फिर वह सेकंड बेस्ट रिलीजन पर गए जो था बुम और आज जो दलित है उन्हें कहते हैं नियो बुद्धिस्ट तो आप बाबा साहेब अंबेडकर की किताब की तहकीक करेंगे और मैं पढ़ चुका हूं बाबा साहेब अंबेडकर किताबें कई बार लिखा गया है उन किताबों में कि किस तरीके से हिंदू को सही रास्ते दिखाए और हिंदुइज्म के बारे में मैं कहना नहीं चाहता हूं और यह सही मौका नहीं कहने के बारे में बाबा साहेब अंबेडकर ने क्या लिखा हिंदू किताब के बारे में कि वोह मेरा मकसद नहीं है लेकिन मैंने उनकी किताब पढ़ चुकी है तो गलती थी मुसलमानों की इसीलिए मैं कहता हूं यह तकरीर का मौजू वही था दावत या हलाक अगर आप गैर मुसलमान को इस्लाम का पैगाम नहीं पहुंचाएंगे अल्लाह ताला आपको नश कर देगा अल्लाह ताला आपको हलाक करेगा तो इस तकरीर का मौजू वही था क्योंकि हम मुसलमानों ने सही तरीके से गैर मुसलमान को इस्लाम नहीं पेश किया और जब बाबा साहेब अंबेडकर इस्लाम कबूल करना चाहते थे हम मुसलमानों ने उनको सही तरीके से वेलकम नहीं किया सही तरीके से स्वागत नहीं किया इसीलिए बाबा साहेब अंबेडकर गए नेक्स्ट बेस्ट रिलीजन व है बुद्धिज्म और मैंने इस पर तकरीर भी की है औरन बुद्धिज्म प मैंने ये भी कहा गया है कि बुद्धिज्म और इस्लाम में यख सानियमिर्जा है कि एक आखरी मैत्री आने वाले वो आखिरी मैत्री है महम्मद सल्ला वसल्लम तो अब बुद्धिज्म मान लो कबूल भी किए वो इन बिटवीन फेज है हिंदुइज्म और इस्लाम का आपको मानने पड़ेगा बुद्धि स्क्रिप्चर में लिखा हुआ है कि एक मैत्री आने वाले है और वो मैत्री कोई नहीं है लेकिन महद तो मान लो जो नीचे क्लास के लोग ने बुद्धम एक्सेप्ट किया अगर बुद्धम के स्क्रिप्चर आप पढ़ेंगे तो आपको मानने पड़ेगा आखरी पैगंबर मोहम्मद स क्वे माइक नंबर टू और कोई सवाल हो तो कर सकते हैं भाई लोग मेरा नाम दुर्गेश सोलंकी है और मैं नॉन मुसलमान से हू मेरा सरनेम सोलंकी और रूखी समाज जो समाज कहते हैं वही समाझ से हो और मेरे छोटे दो भाई मुसलमान बन गए हैं और मैं सबसे बड़ा हूं घर में तो मैं अब मुसलमान बनना चाहता हूं उन लोगों ने उन लोगों ने मुझे समझाया है कि किस तरह से मुस्लिम है और क्या है मुसलमान बोले तो दहशतवादी मुसलमान नहीं है मेरा सवाल यही है कि आप मुझे कल कमा पढ़ने से मैं मुसलमान पक्का किस तरह से बन जाऊ भाई साहब आपने कहा कि आपके दो छोटे भाई ने इस्लाम कबूल किया अल्हम्दुलिल्लाह हमको कजुट करते हैं आप कहते कि आप मुसलमान बनना चाहते और किस तरीके से मुसलमान बन सकते हैं पहले मैं ये जानना चाहता हूं आप पे किसी ने जबरदस्ती तो नहीं की नहीं नहीं सर नहीं नहीं जबरदस्ती की माशाल्लाह और अगर आप कहते दहशत गर्द मुसलमान दहशत गर्द मुसलमान जैसी चीज है ही नहीं है हॉट कोल्ड सही ह को समझे हॉट कोल्ड है ही नहीं तो हॉट होता है कोल्ड होता है तो दहशत गर्द मुसलमान चीज ही नहीं है अगर वो दहशत गर्द तो मुसलमान हो ही नहीं सकता है अगर मुसलमान है तो दहशत गर्द नहीं हो सकता है दोनों साथ में मुमकिन ही नहीं है यस सर यस आई लाइक तो आप मुझे बोलेंगे दहशत गर्द मुसलमान बनाओ तो मैं बोलूंगा मैं तो नहीं बना सकता हूं मैं पका मुसलमान बनना चाहता हूं हा माशाल्लाह मुसलमान बनना आपको मैं कह सकता हूं और दहशतगर्दी के बारे में परसों मेरी तकरीर है क्या आतंकवाद मुसलमान की विरासत वो परसु तकरीर करता हूं लेकिन मुसलमान बनना बहुत आसान है आपको कोई बाकी मजहब में कोई डुबकी लेने की जरूरत नहीं ना कोई धाका बांधने की जरूरत है सिर्फ आप अपने जबान से ये कबूल करेंगे कि भगवान एक है खुदा एक है और उसके सिवा कोई नहीं है और आखरी पैगंबर मोहम्मद सलाम में आप मुस्लिम बन सकते हैं और अगर आप इस बात को मानते हैं तो मैं अरबी में दोहरा हंगा और आप भी दोहराए आप भाई साहब मानते हैं क्या भगवान के हां हां आप मानते खुदा एक है हां हां माशाल्लाह आप मानते हैं कि आखरी पैगंबर मोहम्मद सल्ला सल्लम है हां सर बस ये दो चीज जरूरी है आपने टोपी पहना अच्छी बात है टोपी पहनना फर्ज है मैं भी पहना हं माशाल्लाह पहनी अच्छी बात है लेकिन मुसलमान को टोपी पहनना फर्ज नहीं लेकिन अगर आप दिखाना चाहते हैं मुसलमान है जैसा मैं दिखाना चाहता हूं तो अच्छी बात है माशाल्लाह लेकिन ता इस्लाम का मैं अरबी में कहूंगा और आप दोहराए यस सर अशद अल्ला इलाहा अशद अल्ला इलाहा इल्लल्लाह इल्लल्लाह अशद अशद अन्ना अन्ना मोहम्मद मोहम्मद अब्द अबद रस मैं शहादत देता हूं मैं शहादत देता हूं मैं गवाही देता हूं मैं गवाही देता हूं के एक ही अल्लाह है एक ही अल्लाह है और अल्लाह के अलावा कोई माबूद नहीं है अल्लाह के अलावा कोई माबूद नहीं है और और मोहम्मद मोहम्मद सल्लल्लाहु अल वसल्लम सल्लल्लाहु अल वसल्लम उसके आखिरी पैगंबर है उसके आखरी पैगंबर माशाल्लाह आप मुसलमान हो गए माशाल्लाह मुबारक वेलकम वेलकम वेलकम वेलकम मैं आपको मुबारकबाद देता हूं और यह कहना चाहता हूं कि हमारे मुसलमान में कोई भी ऊंची नीची जाति नहीं है पैसे से आप ऊंचा नीचा नहीं हो सकते धन से नहीं हो सकते रंग से नहीं हो सकते खाली ऊंचा नीचा वो इंसान है जो भगवान को ज्यादा मानता है जो खुदा को ज्यादा मानता है जितना आप खुदा के पैगाम पर अमल करेंगे उतने अच्छे मुसलमान आप शुक्रिया सर शुक्रिया मैं आपको मुबारकबाद देता हूं और मैं आपको वेलकम करता हूं इस्लाम पर जो अमन का धर्म है यस सर मुबारकबाद देता हूं अल्ला अकबर अल्लाह अकबर बहनों की तरफ से प्लीज बन कलमा पढ़ना चाहती है डॉक्टर साहब के हाथ से मेरे साथ में सलाम वालेकुम सर वालेकुम अलाम लाका माय नेम इ पुष्पा शिंदे दो आईम बोन हिंदू आई बिलीव इन इस्लाम एंड आई वांट टू रीड कलमा अलुला रल आलमीन अरमान रहीम मालि [प्रशंसा] आमीन अला सम ल मा क सोन य आप सिस्टर मैं पूछना चाहता हूं क्या आप इस्लाम कबूल करना चाहती है यस सर पहले यह कहना चाहता हूं के जब से पीस टीवी शुरू हुआ है अल्हम्दुलिल्लाह और काफी करोड़ों लोग पीस टीवी को देख रहे हैं और अक्सर तकरीर के बाद कई गैर मुसलमान जब जानने लगे इस्लाम क्या चीज है इस्लाम की सही तामा क्या है तो अल्हम्दुलिल्लाह अल्हम्दुलिल्लाह कई लोग इस्लाम कबूल कर रहे और जब लास्ट टाइम कान्फ्रेंस हुआ था बंबे में अल्हम्दुलिल्लाह आखिरी दिन लाखों का मजमा था और आखिरी दिन अल्हम्दुलिल्लाह सुम्मा अल्हम्दुलिल्लाह अल्लाह सुभाना ताला ने क गैर मुसलमान को हिदायत दी मैं यह नहीं कहता हूं कि मेरी तकरीर से कोई गैर मुस्लिम मुस्लिम बनता है अल्लाह हिदायत देता है और हम देखते हैं कि एवरीथिंग इज लाइफ एवरीथिंग इज ओपन हम किसी को जबरदस्ती नहीं करते हम पैगाम पहुंचाते आपको पसंद आता है तो कबूल करो नहीं पसंद आता है तो भी हमें कोई हर्ज नहीं है लेकिन इंटेलिजेंस मुझसे पूछती है कि कोई शख्स थे जो लोग ने कबूल किए मैं यह भाई साहब को कभी पहले देखा ही नहीं नाय बहन जी को कभी देखा हूं शायद उन्होने मुझे टीवी पर देखा है और हम किसी को जबरदस्ती नहीं करते लेकिन अल्हम्दुलिल्लाह जब लोग को सच्चाई मालूम पड़ती है इस्लाम का जो पैगाम मिलता है अमन का तो उनमें जो जज्बात बाहर आते हैं अल्हम्दुलिल्लाह और वह कबूल करते हैं तो मुझे इंटेलिजेंस ने य पुना में आने के पहले कहा था कि देखि आप मुसलमान बनाओ लेकिन पब्लिक में मत बनाओ तो मैंने उससे कहा कि मैं किसी को मुसलमान बनाता नहीं व भगवान बनाता है व भगवान हिदायत देता है खुदा हिदायत देता है और अगर कोई शख्स बनना चाहता है तो मेरी गवर्नमेंट रोकती मेरी कंट्री रोती तो रो सकता हिंदुस्तान वन ऑफ द फ्यू कंट्रीज बहुत कम मुलक जिसम इतने राइट से और हिंदुस्तान में हर सिटीजन को राइट टू प्रीच प्रैक्टिस एंड प्रोगेट रिजन उसको हक है अप दीन के बारे में प्रचार करें उसके ऊपर अमल करे और उसको प्रोपेट करे कोई रोक नहीं सकता है और कोई भी अगर इंसान कोई भी धर्म कबूल करना चाहता है उसको बिल्कुल इजाजत है लेकिन जबरदस्ती कोई किसी को कोई भी मजहब में दाखिल नहीं कर सकता है तो भीन जी मैं यह जानना चाहता हूं कि आप अपने दिल से इस्लाम कबूल करना चाहती है जी मैं दिल से इस्लाम क माशाल्ला बहुत अच्छी बात है आप मानते हैं कि खुदा एक है जी हां के आखिरी पैगंबर इस खुदा के मोहम्मद सल्ला वसल्लम है जी हां तो इंशाल्लाह मैं अरबी में कहूंगा जो कलमा और आप दोराया और फिर में तर्जुमा करूंगा अशद अल्ला इलाहा अशद अल्ला इलाहा इल्लल्लाह इल्लल्लाह व अशद व अशद अन्ना अन्ना मोहम्मद मोहम्मद रसूलल्लाह रसूलल्लाह मैं गवाही देती हूं मैं गवाही देती हूं कि अल्लाह के अलावा कि अल्लाह के अलावा कोई भी माबूद नहीं है कोई भी माबूद नहीं है और और मोहम्मद मोहम्मद सला सल्लम सला सलम उसके आखिरी पैगंबर है उसके आखिरी पैगंबर है माशाल्लाह आप मुसलमान है मैं अल्लाह सुनता से दुआ करता हूं कि इस बहन को और इस भाई को अल्हम्दुलिल्लाह जन्नत नसीब फरमाए और मैं दरखास्त करता हूं कि जो भी यहां गैर मुस्लिम है आप इंशा अल्लाह इस्लाम का पैगाम सुनिए यह पैगाम अमन का है अक्सर मीडिया कहती है क्या ये दहशत गर्द मजहब है अक्सर मीडिया कहती है कि इस रिलीजन में वायलेंस है जिसको इंशाल्लाह मैं टच करूंगा आखिरी दिन पे आतंकवाद क्या मुसलमानों की विरासत है और इंशा अल्लाह इंशा अल्लाह इस्लाम में कोई भी किसी को जबरदस्ती तलवार के जौर पे या बंदूक के बल पे किसी को कबूल नहीं करा सकते यह इस्लाम में हराम है कुरान में लिखा गया है लाइक फि दीन के कोई भी दीन में जबरदस्ती नहीं कर सकता और मैं कांग्रेचुलेशन करता हूं मुबारकबाद देता हूं इस बहन जी को और भाई साहब को और अल्लाह से दुआ करता हूं कि इनको इंशाल्लाह कबूल करे और इनके आमाल में इंशाल्लाह तरक्की हो और यह अपने खानदान में इस अमन को फैला सके मैं इस्लाम में कही गई काफी बातें फॉलो करती हूं नमाज पढ़ती हूं रोजे रखती हूं लेकिन ट्रबल कम्स व्हेन इट कम्स टू लिसनिंग टू म्यूजिक और वाचिंग मूवीज इज इट अ गुना टू लिसन टू म्यूजिक मैंने सवाल किया कि मैं कुरान पढ़ती हूं मैं नमाज पढ़ती हूं लेकिन प्रॉब्लम है जब म्यूजिक सुनती हूं क्या जायज है क्या नहीं क्या पिक्चर देखना जायज है क्या नहीं कुरान में लिखा है क्या आप मोटे मोटे हराम काम से दूर रहो इंशा अल्लाह अल्लाह ताला आपके साथ है क्योंकि आप अभी नौ मुस्लिम है आस्ते आस्ते आप अगर सला पढ़ती है अल्हम्दुलिल्लाह सबसे अहम बात है कि मानना चाहिए खुदा में उसके बाद जो आप पढ़ते माशाल्लाह उसके बाद है जकात आपको चाटी देना है उसके बाद रोजा है बाकी चीज कई चीज इस्लाम में आप इंशाल्लाह जो अहम चीजों को पहले फॉलो कीजिए उसके बाद आप बाकी चीज पर भी आ सकते लेकिन क्योंकि आपने मुझसे सवाल किया के म्यूजिक सुनना अलाउड है क्या नहीं अल्लाह के रसूल की हदीस है कि म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट जो है एक्सेप्ट फॉर डफ डफ के अलावा बाकी सब म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट हराम है और यह आपको अल्लाह से दूर लेकर जाते हैं तो इस पस मंजर के हदीस के पस मंजर में म्यूजिक सुनना सही बात नहीं है लेकिन आप क्योंकि अभी नौ मुस्लिम है जो चीज अहम बातें है उसके ऊपर पहले आप अमल कीजिए अगर आप चाहते हैं कि आप में इतना तकवा है कि मैं छोटी छोटी बात पर भी अमल करूं तो बेशक अबार आप जानना चाहते हैं कि म्यूजिक पर से डफ के अलावा बाकी म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट्स हराम है और मूवी वह मूवी जो हराम मूवी है वह देखना नाजायज है टीवी देखना नाजायज नहीं है लेकिन टीवी पर गलत चीज देखना रियान कीी ऑबसीनिटी यह देखना हराम है लेकिन अगर आप अच्छा टीवी पर लेक्चर देखते अच्छा इस्लामिक लेक्चर देखते तो वो गलत नहीं है तो गलत चीज देखना हराम है अच्छी चीज पिक्चर पर देखना जायज है जो चीज शरीयत के खिलाफ नहीं है वो चीज देखना जा है जो शरीयत के खिलाफ है व हराम है क् मेरा नाम अरुण पवार है मेरा सवाल यह है कि भगवान बुद्ध ने सब में अहम बात यह कही है के आपको भगवान की या स्वर्ग नरक जन्नत जो भी है उस चीज की चिंता करने की जरूरत नहीं है आपके हाथ में आपका जीवन है वह जीवन आप कैसा उच्चतम महानतम बनाएंगे इसी बा आप जोर दे दो उच्चतम और महानतम जीवन कैसा होता है एक उन्होंने उदाहरण दिया है कि आप खाना भी खाएंगे तो पके हुए फल का भोजन करो जो फल झाड़ ने छोड़ दिया है तो आपके ऊपर कोई जंजीर नहीं आएंगी जो फल जो है व झाड़ कभी वापस नहीं लेता उन्होने तो छोड़ दिया है वही फल का भोजन करो यहां तक भगवान बुद्ध ने कहा है कि आपको इस चीज की चिंता क्या है कि आप मरने के बाद स्वर्ग में जाएंगे नरक में जाएंगे भगवान के पास जाएंगे भगवान यहां आएंगे इसकी कोई चिंता ही नहीं आपको आपको आपका जीवन उच्चतम महानतम बनाने की यही चिंता होनी चाहिए तो आप इस परे गौर करो भाई साहब ने सवाल किया है कि भगवान बुद्ध ने यह कहा है भगवान बुद्ध ने यह कहा है भाई साहब कोई भी बुध की किताब में मैंने भगवान बुध का नाम ही नहीं सुना है बुध को जानता हूं मैं बुद्धा को जानता हूं भगवान बुद्धा को नहीं जानता हूं मैं कता हूं वो आप कहते तो आप अगर गलत कहते तो मैं क्यों मानू क्योंकि आप अगर बुद्धा की टीचिंग पढ़ेंगे बुद्धा की तालीमाबाद ने कभी भी ईश्वर और भगवान का जिक्र नहीं किया क्यों तो बुद्धिस्ट स्कॉलर यह कहते हैं कि इस हिंदुस्तान में इस धरती पे इतनी बुत परस्ती थी कि वह भगवान के बारे में खामोश थे उन्होने यह भी नहीं कहा कि भगवान है और यह भी नहीं कहा कि भगवान नहीं है तो आप अगर बुद्धा को भगवान बना दिए तो प्रॉब्लम है भाई साहब अने आप बुद्धा की टीचिंग्स को पढ़े ही नहीं जिस तरीके से बुद्धा ने भगवान के बारे में जिक्र नहीं किया आपने बुद्धा को भगवान बना दिया उसी तरीके से धर्म में कई धर्मों में तब्दीली आई चाहे वह ईसाई धर्म हो बुध धर्म हो चाहे वो जुडा इजम हो जिस तरीके से आप कहने लगे लोग ने अपने मन से कहने लगे और सही तालीमाबाद दी उसकी तकी करो आपने बुध को भगवान बना दिया बिल्कुल गलत है और आप देखते हैं कि दलित लोग और बुद्धिस्ट लोग बुद्धा का बुद्ध बनाया बुद्धा ने कभी भी नहीं कहा का मेरा बुद्ध बनाओ बुद्धा ने कभी भी नहीं कहा ये क्या हो रहा है ये इन्फ्लुएंस और बाकी मजहब का इन्फ्लुएंस बाकी धर्म का इन्फ्लुएंस आपके ऊपर है तो बुद्धा की अगर टीचिंग्स पढ़ेंगे बुद्धा ने कहा कि देर आर फोर ग्रेट थ्स चार हक बातें हैं सबसे पहली वक्त का में सिर्फ दो-तीन मिनट है 10 बजने को पहला हक है के इस धरती पे देयर इज लॉट ऑफ सोरोज ऑन दिस वर्ल्ड ये धरती पे कई चीज है जो अफसोस करने के लायक है सोरोज है मुश्किलात है नंबर टू इस धरती पर डिजायर है ख्वाहिश है नंबर थ्री यह धरती से सरोस को निकाला जा सकता है जब आप ख्वाहिशों को निकालते हैं और नंबर चार अगर ख्वाहिश को निकालना है तो एथ फोल्ड पाथ के ऊपर अमल करो वक्त कम होने की वजह से पहले त को मैं मानता हूं इस धरती पर सौरव है दूसरे ुत को भी मानता हूं कि लोगों में ख्वाहिश है तीसरा सूत है के अगर आपको सौरो निकालना है तो ख्वाहिशों को निकालिए चौथा है कि अगर आपको ख्वाहिश को निकालने का है तो एथ फोल्ड पार्ट फॉलो करो तीसरा और चौथा थूत कांट्रडिक्ट हो रहा है तीसरे थूत में कहा गया है कि आप ख्वाहिशों को निकालो और चौथा थूत में कहा गया है कि एथ फोल्ड पाथ पे अमल करो अगर आप ख्वाहिश को निकाल देंगे तो एथ फोल्ड पाथ पे अमल करने की ख्वाहिश रहेंगी नहीं तो देयर इज अ फैले ऑफ लॉजिक वक्त कम होने की वजह से आप मेरी तकरीर सुन सकते हैं मोहम्मद सला वेरी स्क्रिप्चर जिसमें बुद्धिस्म का जिक्र किया है इसीलिए बुद्धा ने भगवान के बारे में जिक्र नहीं किया क्योंकि उसे डर था कि लोग अब तक तैयार नहीं हुए मानने के लिए कि खुदा एक है क्वेन दावा अलमीन आज की नशत यहीं पर खत्म होती है जजाकल्लाह खैर
Dawah Ya Halakat by Dr. Zakir Naik | Pune, India (Urdu)
Channel: Matrivashai
Share transcript:
Want to generate another YouTube transcript?
Enter a YouTube URL below to generate a new transcript.