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Transcript of Research Paradigms | Research Philosophies | Positivism | Post Positivism | Interpretivism

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अस्सलाम वालेकुम आज हम बात करने जा रहे हैं बहुत इंपोर्टेंट टॉपिक के बारे में जो है रिसर्च पैराडाइम या रिसर्च फिलोसोफी के हवाले से हम बात करेंगे ऑटोलॉजी पिस्ट मोलगी मेथड जीी देन पॉजिटिविज्म एंड देन पोस्ट पॉजिटिविज्म यह सारे पैराडाइम जो है व जिस तर हम इनको डील करते हैं क्वालिटेटिव एंड क्वांट रिसर्च में सो इसकी डिटेल हम देखेंगे के इन सबके यानी स्टार्टिंग फ्रॉम पॉजिटिविज्म टू प्रैगमेट इनके ऑटोलॉजिकल एपिस्टम जिकल मेथोड प्रिंसिपल्स क्याक है सो फर्स्ट ऑफ ल वी नीड टू नो व्ट अ रिसर्च पैराडाइम इज य एक ब्रॉडर फ्रेमवर्क है जो हमें गाइड करता है कि रिसर्च को कैसे कंडक्ट करना यानी बेसिकली वट व्हाई डू वी वांट टू कंडक्ट द रिसर्च सो वो जिस फ्रेमवर्क के तहत हम कार्य होते हैं जिन जिस पॉइंट ऑफ व्यू के तहत कार्य होते हैं वह हमारा रिसर्च पैराडाइम इसमें रिसर्चर के बिलीफ और जो उसकी असम है अबाउट द नेचर ऑफ रियलिटी ऑफ समथिंग नेचर ऑफ एक्जिस्टेंस ऑफ समथिंग च इ लजी या हाउ नॉलेज ज क्रिएटेडटेड यूज टू स्टडी द रियलिटी च इ मेथड जीी सो इन सारी चीजों को इसमें देखा जाता है सो टा कंप्रिहेंसिव वर्ल्ड व्यू है जो रिसर्च के प्रोसेस के हर एस्पेक्ट को शेप करता है उसे तस्बी देता है उसे उसके एक प्रॉपर उसको अपने अमल में लेकर आता है उसकी य बिल्डिंग ब्लॉक्स को इकट्ठा जोड़ता है इसमें रिसर्च क्वेश्चन भी उनकी फॉर्मूलेशन होती है डाटा कलेक्शन के मेथड सर्टेन होते हैं और रिजल्ट्स के इंटरप्रिटेशन वो सारी की सारी आपकी सब चीज यानी पूरा रिसर्च प्रोसेस किसी ना किसी रिसर्च पैराडाइम की मरने मेहनत होता है उसकी वजह से होता है उसके पीछे बैक बोन जो होती है वो एक पैराडाइम होती है आपकी पैराडाइम है कि फॉर एग्जांपल आप क्वालिटेटिव रिसर्च पर जा रहे हो क्वांटिस पर जा रहे हो क्या चीज आप फाइंड आउट करने जा रहे हो क्या चीज आप जानना चाहते हो अपनी रिसर्च के जरिए सो व सारा कुछ एक पैराडाइम पर बेस करता है सो इसमें हम बात करेंगे बेसिकली जो मेजर टर्मिनोलॉजी है जिसमें हमारे पास ओंटोलॉजी है एपिस्टम है मेथड जीी है जिसे हम मेथड लेकर चलते हैं अपनी रिसर्च का इन सब चीजों के बारे में ओंटोलॉजी क्या होता है ओंटोलॉजी नेचर ऑफ रियलिटी और बीइंग एक्जिस्टेंस यानी उसकी स्टडी का नाम है सो ये इस तरह के क्वेश्चन को एड्रेस करती है दैट व्हाट एक्सिस्ट और व्हाट इज द नेचर ऑफ एक्जिस्टेंस और व्ट एंटिटीज मेक अप द वर्ड यानी ट डील्स विद द नेचर ऑफ एक्जिस्टेंस कोई चीज जो है वो ऐसी है तो क्यों है ठीक है कैसे है क्यों है सो व्हाट इज द नेचर ऑफ रियलिटी रियलिटी कैन बी एनी फिनोमिना ट यू आर रिसर्चिंग अबाउट कोई भी फिनोमिना जिसको आप ढूंढ रहे हो जिसको डिस्कस कर रहे हो जिसको जिसके बारे में प्रोब कर रहे हो वो रियलिटी है बेसिकली वो एक साइंटिफिक रियलिटी हो सकती है सोशल टी हो सकती है सो उसकी नेचर क्या है व लजी में है और व्ट एंटिटीज और फिनोमिना कैन बी सेड टू एसिस्ट इस तरह के क्वेश्चन जो है वह ऑटोलॉजी में आते हैं जिसमें आप बात करते हो कि कौन क्या एंटिटीज है क्या फिनोमिना है जिसके बारे में कह सकते हैं कि य एक्जिस्टेंस में है यह वजूद रखता है यह टेंबल हैस्ट मलजी में देखें तो ट स्टडी ऑफ नॉलेज सो इसमें लाइक फोकस ऑन द नेचर सोर्सेस एंड लिमिट्स ऑफ नॉलेज और इट एजामिन हाउ वी नो व्ट वी नो एंड द रिलेशनशिप बिटवीन द नोर एंड व्ट कैन बी नोन सो जो हम रियलिटी तलाश कर रहे उसका और हमारा एस रिसर्च जो रिलेशन है वो भी इसके अंदर शामिल होता है हाउ कैन वी नो अबाउट द रियलिटी इसमें यानी व जो भी कांसेप्ट जिस हम रिसर्च कर रहे हम उसके बारे में कैसे जान सकते हैं वड नॉलेज कैसे कंटूटन नॉलेज की लिमिट्स क्या है यह सब चीजें जो है वह एपिस्टम जीी में आती है मेथड जीी जो है व एक सिस्टमिक अप्रोच है रिसर्च कंडक्ट करने की इसमें मेथड्स है टेक्निक्स है प्रोसीजर्स हैं जिसके जरिए हम डाटा कलेक्ट करते हैं डाटा का एनालिसिस करते हैं सो इसमें की क्वेश्चन क्या हो सकते हैं कि रिसर्च कैसे कंडक्ट की जाएगी कौन से मेथड प्रोप है रिसर्च डाटा को गैदर करने के लिए एनालाइज करने के लिए यह हमें रिसर्च प्रॉब्लम या क्वेश्चन से पता चलता है कि हम किस तरह की रिसर्च कर रहे हैं हमें किस तरह उसके हवाले से डाटा लेना है इंटरव्यूज करने हैं क्वेश्चनर लेने हैं या एनी सच सॉर्ट ऑफ थिंग चलते हैं रिसर्च पैराडाइम की तरफ सो गवर्निंग पैराडाइम जो हमारे पास दो है पॉजिटिविज्म एंड पोस्ट पॉजिटिविज्म सो पॉजिटिविज्म जो है उसमें हम देखते हैं कि जो ऑब्जेक्टिव रियलिटी है अ इट असूस कि ऑब्जेक्टिव रियलिटी कैन बी डिस्कवर्ड थ्रू एमपिर कल ऑब्जर्वेशन एंड मेजरमेंट उसमें क्वांटिटेशन मेथड्स यूज होते हैं याय कहते जो रियलिटी है उसे डिस्कवर किया जा सकता है ऑब्जर्वेशंस के जरिए मेजरमेंट के जरिए तो एक तो हो गया पॉजिटिविज्म फिर है पोस्ट पॉजिटिविज्म जिसमें हमारे पास पहली चीज है इंटरप्रेटिविज्म साइ अंडरस्टैंडिंग द सब्जेक्ट मीनिंग सब्जेक्टिव मीनिंग ऑफ द सोशल फिनोमेना सो ये जो जिस तरह पॉजिटिविज्म जो है वो ऑब्जेक्टिव है उसके मुकाबले में पोस्ट पॉजिटिविज्म जिसम इंटरप्रेट भी ये सब सब्जेक्टिव सो सब्जेक्टिव मीनिंग ऑफ सोशल फिनोमेना वी क्रिएट मीनिंग हम मीनिंग खुद बनाते हैं ज कि मीनिंग को हम किसी डाटा की सूरत में ऑब्जेक्टिव मेयर्स मिले और उसमें क्वालिटेटिव मेथड यूज हो क्रिटिकल थरी इसमें जो चेंजिंग सोसाइटी है उसके ऊपर क्रिटिक है और जो पावर और इन इक्वलिटी के इश्यूज उनको हाईलाइट किया जाता है और इसमें क्वालिटेटिव और क्वांटिस इवॉल्व हो सकते हैं एंड देन प्रैगमेट जो फोकस करता है प्रैक्टिकल एप्लीकेशन ऑफ रिसर्च वी यूज मेथड्स दैट बेस्ट एड्रेस द रिसर्च प्रॉब्लम वेदर क्वालिटेटिव क्वांटिटेशन म जो है ये क्वालिटेटिव भी हो सकता है क्वांटिटेशन भी हो सकता है सो इसमें बेसिकली हम प्रैक्टिकल जो रिसर्च की एप्लीकेशन है उस परे फोकस करते हैं प्रैक्टिकली वो रिसर्च करते हैं उसमें जो प्रॉब्लम के हिसाब से बेस्ट मेथड्स हो सकते हैं अप्लाई हो सकते हैं जो उनको लेके हम आगे चलते हैं ओके फर्स्ट ऑ ल पॉजिटिविज्म एमपिर कल एविडेंस की बात करती है साइंटिफिक मेथड की बात करती है सो हार्ड जो साइंस है जिसमें हमारे पास बायोलॉजी है केमिस्ट्री है फिजिक्स है मैथमेटिक्स है यह उन के ऊपर प्रॉपर्ली बेस करता है जो के ऊपर है जो प्रैक्टिलिटी पर है जो ऑब्जेक्टिव डाटा के ऊपर चलते हैं एंड ट ग्राउंडेड इन द बिलीफ ट रियलिटी ऑब्जेक्टिव एंड ट कैन बी मेड अंडरस्टूड ्र द यूज ऑफ सिमेटिक ऑब्जर्वेशन एक्सपेरिमेंटेशन एंड लॉजिकल एनालिसिस सो इनकम बेजर बिलीफ क्या है जो रियलिटी है व्ट एवर फिनोमेना व आर स्टडिंग ट इज ऑब्जेक्टिव इसको हम मेजर कर सकते हैं अंडरस्टैंड कर सकते टिक ऑब्जर्वेशन से एक्सपेरिमेंटेशन से लॉजिकल एनालिसिस से अगस्ट गोम जो इस का एक तरह से बानी था उसने पॉजिटिविज्म तो इसको नेचरल साइंसेस के साथ भी कई दफा लेकर जाते हैं नेचरल साइंसेस वही है जि हार्ट साइंसेस की मैंने बात की ज इसको जनरल लॉज ऑफ थरी को यूज करने के लिए एस्टेब्लिश करने के लिए इस्तेमाल किया गया पॉजिटिविज्म पल फिजिकल वर्ल्ड के हवाले से लेकिन सोशल साइंसेस के ऊपर भी कहीं ना कहीं इसे अप्लाई कर सकते हैं स पॉजिटिविज्म बताया जाता है कि ओंटोलॉजी इसकी रियलिज्म में रूटेड है यानी वो ग्राउंडेड है रियलिज्म इसका मतलब कि जो पॉजिटिविस्ट है वो बिलीव करते हैं कि जो ऑब्जेक्टिव रियलिटी जो एसिस्ट करती है ह्यूमन बीइंग्स की थॉट से इंडिपेंडेंट उनकी बिलीफ से इंडिपेंडेंट और परसेप्शन से इंडिपेंडेंट यानी रियलिटी वो नहीं है जो ह्यूमन थॉट्स है बिलीफ है परसेप्शन है रियलिटी समथिंग एल्स दैट इज ऑब्जेक्टिव उसे अगर ह्यूमन थॉट्स बिलीफ और परसेप्शन प लाएंगे तो तो सब्जेक्टिव हो जाएगी सो रियलिटी एसिस्ट जो कि टेंज बल है जिसको एक्सपेरिमेंटल लेवल पर जाके हमें सर्च आउट करना है तो एजिस्ट करती है वो लेकिन वो थॉट्स बिलीफ और परसेप्शन में नहीं है वह इनसे बाला तर है इसका पिस्ट मलज कल जो बिलीफ है वह ये कहता कि या एसिम और ऑब्जेक्टिविज्म सो पॉजिटिविस्ट बिलीव करते हैं कि जो नॉलेज है बेसिकली क्योंकि एपिस्टम इ अबाउट नॉलेज सो नॉलेज तमाम तर सेंसरी एक्सपीरियंस से हम लेते हैं सेंसरी एक्सपीरियंस अपनी फाइव सेंसेस को यूज करके वो नॉलेज लेते हैं जिसमें ऑब्जर्वेशन या लॉजिकल रीजनिंग शामिल होती है तो हम इसमें ऑब्जेक्टिव रहते हैं थ्रू आउट और जो नॉलेज हमें मिल रहा है वो हम उसे फर्स्ट हैंड एक्सपीरियंस से अपने फाइव सेंसेस को यूज करके हासिल करें और मेथड जो है इसमें वो क्वांटिटेशन मेथड के ऊपर है यानी एक साइंटिफिक मेथड के ऊपर है इसमें सिस्टेट कंट्रोल्ड और स्ट्रक्चर्ड होती है ताकि ऑब्जेक्टिविटी जो है और रेप्ट जो है वो इसमें इंश्योर हो सके इसको हम रिप्लिकेट कर सके जनरलाइज कर सके इंटरप्रेटिविज्म जो है यह रिसर्च पैराडाइम यह पोस्ट पॉजिटिविज्म में है और यह सब्जेक्टिव मीनिंग की बात करती है कि वी मेक आवर ओन मीनिंग और यह इंडिविजुअल के एक्सपीरियंस के बारे में बताती है जो सोशल कांटेक्ट में सो इंडिविजुअल सोशल कांटेक्ट में मीनिंग्स बनाते हैं सो यह डिफरेंट है एक तरह से उल्ट है पॉजिटिविज्म का में ऑब्जेक्टिव या मेरेबल ट्रथ की बात होती है इंटरप्रेटिविज्म यह कहता है कि जो रियलिटी है दैट इ सोशली कंस्ट्रक्टेड यानी सोसाइटी में जो यह है रियलिटी कंस्ट्रक्ट होती है इसलिए जो नॉलेज है यह इंडिविजुअल की परसेप्शन कल्चर और इंटरेक्शन से इंडिपेंडेंट नहीं है यह डिपेंडेंट है उसके ऊपर क्योंकि ये सब्जेक्टिव है ये उनकी थॉट्स फीलिंग इमोशन और उनकी एक्सपीरियंस के ऊपर बेस करता है सो ये सोशल साइंसेस पर अप्लाई किया जाता है ज ह्यूमन बिहेवियर इमोशन और इंटरेक्शन को यानी कॉम्प्लेक्टेड डिपेंडेंट समझा जाता है इसका ऑटोलॉजिकल पर्सपेक्टिव देखें सो वो रिलेटिविज्म प है जिसका मतलब है कि जो इंटर इंटरप्रेटिविस्ट है वो बिलीव करते हैं मल्टीपल रियलिटीज सो च आर शेयर्ड बाय इंडिविजुअल पर्सपेक्टिव एक्सपीरियंस एंड सोशल इंटरेक्शन सो दे बिलीव इन मल्टीपल रियलिटी मल्टीपल रियलिटीज का मतलब क्या है कि एक चीज के मल्टीपल उसके बारे में हमारे एक्सपीरियंस हो स सकते हैं वी कैन हैव मल्टीपल आंसर्स टू वन क्वेश्चन वी कैन हैव मल्टीपल ऑपिनियंस अबाउट समथिंग सो इट इज नॉट समथिंग यूनिवर्सल जो कि ऑब्जेक्टिविटी की सूरत में आए दिस इज रिलेटिविज्म के ऊपर बेस करती है और इसके जो एपिस्टम ॉजी अप्रोच है वो फोकस करती है सब्जेक्टिविज्म पे और कंस्ट्रक्टिविज्म पे सो कंस्ट्रक्टिविज्म और इंटरप्रेटिविज्म एक जैसे हैं इंटरप्रेटिविस्ट जो है वो बिलीव करते हैं कि नॉलेज जो है वो इंडिविजुअल थॉट्स से कंस्ट्रक्ट होता है और कहां से मिलता है उनके लिड एक्सपीरियंस से उनके इंटरेक्शन से और उनकी इंटरप्रिटेशन से जो व दुनिया के बारे में रखते हैं सो मेथड क्या है क्वालिटेटिव मेथड इसमें यूज किए जाते हैं और इसमें यानी वो रियलिटी जो है उसको यानी उसमें क्वांटिफाई बल थिंग्स लेकर नहीं आते सो ये फ्लेक्सिबल है कांटेक्ट स्पेसिफिक है एक्सटरी हो सक एक्सप्लोरेट्री हो सकते हैं और डीप इनसाइट हम इससे हासिल करते हैं ह्यूमन एक्सपीरियंस की क्रिटिकल थरी यह एक रिसर्च पैराडाइम है जो इस आइडिया के ऊपर बेस करती है कि सोशल रिलिटी शेप बाय पावर डायनेमिक्स इन क्वालिटी एंड ऑपरेशन के यह जो तीनों चीजें हैं यह सोशल रियलिटी को कंस्ट्रक्ट करती है और यह इस चीज पर फोकस करती है के वो जरूरत है यानी यानी जो सोसाइटल स्ट्रक्चर है और जो परचल डोमिनेंस एक मौजूद है इंजस्टिस मौजूद है उसके अंदर तब्दीली लाने के बारे में सो ये फ्रैंकफर्ट स्कूल ऑफ थॉट ने अर्ली 20 सेंचुरी में यह एक तरह से इस चीज पर बात शुरू की सो क्रिटिकल थेरी जो है वो ट्रेडिशनल पॉजिटिविस्ट अप्रोच को चैलेंज करती है क्योंकि यह फोकस करती है सोसाइटल कॉन्टेक्स्ट प आइडियो जीी के रोल प और मसपेट फ्री नॉलेज के ऊपर सो बेसिकली जो इसके ऊपर बहुत सारा काम हुआ जो कि एक पावर डायनेमिक्स का इन क्वालिटी का ऑपरेशन का इसमें रेस रेसिजम फेमिनिज्म बहुत सारे सकते हैं जो इसके साथ अटैच हो सकती है सो ये सब जो है यह सोसाइटी के साथ टच्ड है सोसाइटी है तो यह सब चीजें हैं क्योंकि डायनेमिक्स जो है पावर डायनामिक्स इन क्वालिटी ऑपरेशन ये सब कुछ सोसाइटी की वजह से तो जब हम सोसाइटी और इंडिविजुअल एक्सपीरियंस को लेके आएंगे तो बात डेफिनेटली सब्जेक्टिविटी की तरफ जाएगी इसलिए इसे पोस्ट पॉजिटिविज्म में लाया जाता है सो क्रिटिकल थरी के ऑटोलॉजिकल बेसिस क्या है हिस्टोरिकल रियलिज्म सो ये बिलीव करते हैं कि जो सोशल रियलिटी है यह हिस्टोरिक शेप होती है कल्चरल कांटेक्ट में शेप होती है और इसको पावर और डोमिनेशन जो है वह बहुत ज्यादा इसको इन्फ्लुएंस करते हैं इसको स्ट्रक्चर करते हैं इसको बनाते हैं या जो भी सोशल रिलिटी है वो जो भी फिनोमिना अंडर स्टडी है फर एपल फेमिनिज्म को स्टडी कर रहे हम रेसिजम को स्टडी कर रहे हैं तो लाजमी तौर पर उस पर पावर और डोमिनेशन जो है उसका इफेक्ट सामने आएगा क्योंकि वह इस चीज को इन्फ्लुएंस करते हैं एपिस्टम जिकल इसकी अप्रोच यह है के सब्जेक्टिविज्म और मसपेट नॉलेज स क्रिटिकल रिस्ट यकीन करते हैं इस बात पर कि जो नॉलेज है वह पावर के साथ लिंक है और सोसाइटल इंटरेस्ट उसको शेप देते हैं सो नॉलेज इ नॉट इंडिपेंडेंट ऑफ पावर देर बोथ इंटरलिंक पावर अफेक्ट नॉलेज एंड नॉलेज इ लिंक विद द पावर सो पावर कांड सोशल पावर इकोनॉमिकल पावर विदन सोसाइटी और इसकी जो मेथी है वह भी क्वालिटेटिव है सो प्रैगमेट जो है यह रिसर्च पैराडाइम है और यह जो आइडियाज की प्रैक्टिकल एप्लीकेशन के ऊपर फोकस करती है और इसका मेजर फोकस इस चीज पर भी होता है जो कंसीक्वेंसेस ऑफ एक्शन एंड प्रॉब्लम सॉल्विंग प्रोसेसेस के इनके ऊपर ज्यादा हाईलाइट किया सो ये इट नॉट लाइक कमिटेड टू एनी सिंगल सिस्टम ऑफ फिलॉसफी ऑ रियलिटी बल्कि इंस्टेड यह है कि इट इ कंसर्न विद वट वर्क्स द बेस्ट इन गिवन कांटेक्ट के यह कोई एक खास सिंगल सिस्टम ऑफ फिलॉसफी या रिलिटी से डील नहीं करता प्रैगमेट म है तो इट मींस के इट डील्स विद व्ट इ नेसेसरी व्ट इ रिक्वायर्ड जो सबसे बेहतरीन है उसकी बात करेगा य फ्लेक्सिबल है प्लर है अप्रोच और इसमें डिफरेंट पैराडाइम को हम कंबाइन भी कर सकते हैं जि पॉजिटिविटी थरी है और यह सब कुछ डिपेंड करता है रिसर्च क्वेश्चन पर कि हम वो रिसर्च क्वेश्चन क्या बनाते हैं सो उसकी बेस पर हम डिसीजन लेते हैं लॉजिकल पर्सपेक्टिव इसका यह है कि जो प्रैगमेट म है यह प्रैक्टिकल रियलिज्म रेशनल लजी प रिलेशनल लजी प है यह नेचर ऑफ रियलिटी से कोई ज्यादा कंसर्न नहीं होते सो लाइक मोर फोकस ऑन हाउ रियलिटी एक्सपीरियंस एंड इंटरेक्ट विदन प्रैक्टिस यानी रियलिटी को किस तरह एक्सपीरियंस किया जाता है किस तरह इंटरेक्शन में देखा जाता है किस प्रैक्टिस में देखा जाता सो दे बेसिकली बिलीव इन प्रैक्टिस ऑफ समथिंग सिस्टम लॉजिकल अप्रोच य है कि जो बेसिकली जो प्रैगमेट जम है एक्सपीरियंशियल है प्रैक्टिकल नॉलेज है और दे बिलीव इन प्रैक्टिकल नॉलेज जो कि एक्शन एक्सपेरिमेंटेशन से होता है प्रॉब्लम सॉल्विंग से होता है और मेथोड जो है वो इसकी वो प्लूरलिस्टिक भी हो सकती है कंटेक्सुअल भी हो सकती है ये लाइक कोई भी मेथड स्ट्रेटेजी जो इफेक्टिव है वो यूज कर सकते हैं प्रॉब्लम को सॉल्व करने के लिए जो रिक्वायर्ड है सो हम क्वालिटेटिव भी बन जा सकते हैं क्वांटिस यह सारी वो रिसर्च पैराडाइम हैं जिनको सामने रख के हम कहीं ना कहीं कुछ डिसीजंस लेते हैं कुछ वर्क वर्क आउट करते हैं अपनी रिसर्च को अपनी रिसर्च को डिजाइन करते हैं तो वो इन पैराडाइम में कहीं ना कहीं हम स्टैंड करते हैं वी नो और वी मे नॉट नो लेकिन ये वो पैराडाइम है जिनको हम एज अ रिसर्चर फॉलो कर रहे होते हैं आई होप आपको यह समझ आ गया होगा चैनल को सब्सक्राइब कीजिएगा और सबसे शेयर कीजिएगा

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