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Transcript of Shab e Jumma Bayan Karachi | Molana Farooq Makki sahib | Darsequran Live

Video Transcript:

[संगीत] नबी सला अ वसल्लम म लायाला जनबी सला वलम कमा सम सला वसल्लम नबी सला अ वसल्लम ब आया नबी सला अ वसल्लम अला सला वसल्लम मतरम भायो दोस्तो बुजुर्ग इस काम की बुनियाद मौलाना मोहमद यूसुफ साहब रहमतुल्ला ने बहुत मुख्तसर लफ्जों में फरमाया पहली बात इस काम का मकसद अल्लाह के अ कामात को जनाबे रसूलल्लाह सला सलम के तरीके पर जिंदगी के शोभे में जिंदा करना अल्लाह के अकामा हुजूर के तरीके पर जिंदगी का शोभे में कैसे जिंदा होगा जब हुजूर मेहनत हुजूर की नज पर हो हुजूर की मेहनत हुजूर की नज पर क्या है खुद इन चार अलो पर आना दावत तालीम जिक्र इबादत खिदमत और पूरी उम्मत को इस पर लाना यह मैंने मन सा सुना इन आ मालों की बरकत से अल्लाह ताला सिफात पैदा करेंगे इधर देखिए उन्होंने तो फरमाया सिफात कैसे पैदा हो यकीन इखलास एहसान अल्लाह के वादों वद का यकीन उम्मत का दर्द दीन के मिटने गम ये मौना यस साब अब अल्लाह के तमाम अह कामात जनाबे रसूलल्लाह सलाम के तरीके पर जिंदगी कर शोभे में के अल्लाह पाक के तमाम अह कामात जनाबे रसूलल्लाह सलाम के तरीके पर जिंदगी के शोब में जिंदा हो सिफात के साथ चार अमन करते हुए पूरा दिन पूरी दुनिया में हुजूर की नज पर जिंदा हो य खुलासा है पूरी तबली य हुजूर की जिंदगी है दूसरी जगह फरमाया जनाबे रसूलल्लाह सलाम की जिंदगी महबूब है जरिया हिदायत है अगर हम हुजर की इबा करेंगे जाहिर और बातिन में अल्लाह हमें भी हिदायत देगा पूरी उम्मत को हिदायत देगा हुजूर का जाहिर दावत तालीम जिक्र इबादत खिदमत है हुजूर पाक सला सलम का बातिन सिफात है ईमान इखलास एहसान यकीन अल्लाह के वादों वहीद का यकीन उम्मत का दर्द दीन के बिट्टे ये मौलाना यूसुफ साहब फरमाते [संगीत] हैं अब मौलाना सहीद खान साहब रहमतुल्ला फरमाते हैं ये चार आमाल कुरान के उतरने की तरतीब है इकरा से नबूवत दी या मुद्दर से दावत का काम दिया तकलीफ आई मक्की सूरतें उतरी इसमें ईमा निया अंबिया कि बयान की और अल्लाह ने अपनी सुन्नत को समझाया हम कमों को हलाक नहीं करेंगे जब तक वक्त मुकर्रर ना आ जाए यह तालीम का अरखा था दारम की तालीम फजल नमाज फजल रोजे की नहीं थी दावत की राह में तकलीफ आती उसके फजल थे दावत और फजल की तालीम से दिलों में मानने की ताकत पैदा हुई रबत से फिर अल्लाह ने बदनी सरतो को उतारा यहां मौलाना सद खान साहब नला मरक फरमाते थे अल्लाह कायनात के माबूद है जबरदस्ती हुकम नहीं कर रहे पहले इस्ते दद पैदा की मानने की रबत से फिर अल्लाह ने अकामा उतारे यह मैं एक अमानत अर्ज करना चाहता हूं मेहरबानी करके जो मौलाना इलियास साहब ने उम्मत को बताया जहन में लीजिए ह हजरत मौलाना इलियास साब की बातें हमने छोड़ दी दोस्तों मेहरबानी करके इसको हिम्मत से लेना होगा हजरत मौलाना इलियास साहब फरमाते थे रतुला इस्ते से पहले अकाम बयान करना ऐसे है जिसे बीच फेंकना चन [संगीत] पर यहां भाई अमीन साहब रला फरमाते इस मबर पर फरमाया पहले दावत है फिर ईमान आएगा लमन इसको ध्यान से लीजिएगा फजर से तमाम मुकरा से बचने की इस्ते दद पैदा होती हजरत मौलाना तर्जुमा इसका करते थे दिलों को खौफ जदा कीजिए अल्लाह के अजाब से शफकत के साथ डाकू का डराना और है अंबिया का डराना शफकत के साथ होता बुरे नताइएपीजीईटी [संगीत] तमाम मुरा र अपने रब की बड़ाई बयान कीजिए फरमाया अल्ला बड़े हैं सब कहिए बड़ा सब कुछ करता है ब सब कुछ बड़े की मानने में कामयाबी हैय मलाना यस साब ने फरमाया यह जो आप कहते अल्ला बड़े हदीस में आता है जमीन और आसमान नूर से भर जाता है यह नूर दिल में आता है और यकीन ब करने वाले अल्लाह अल्लाह उनकी कबर को नूर से भरे रतुला आज मेरा दिल चाहता है जो बयान मौलाना यूसुफ साहब ने पुराणों के जोड़ में किया वो दरखास्त करू आपकी इस्ते दद है अल्लाह ने आपको काम ले रहे है अल्लाह और बरकत अता फरमाए मोहब्बत अता फरमाए एक दूसरे की कदर अता फरमाए अल्लाह काम ले रहा है अ अल्लाह राजी हो जाए अब गौर से सुनना र से तमाम मारूफ पर चलने की तो य भा फते कबर र से फरमाया दावत देंगे तो ईमान आएगा ना उसके बाद यार मार पहले दावत है फिर ईमान है फिर अ म नहीं जो लोग नहीं मुकर को पहले कर देते टक कर देते हैं तेरा कुर्ता कैसा है तेरे बाल कैसे है तू पता नहीं क्या क्या बोल देते पर्दा क्यों नहीं करती ये जो टोक हैं ये पहले कर रहे हैं दावत से तो वो ऑपरेशन कर रहे हैं बगैर बेहोशी के य जुमला फरमा जो हमसे गलती हुई है लोगों के औलाद तो तबलीग में लग रहे हमारे क्यों नहीं लग रहे फरमाया लोगों के जो नौजवान जमात में आता है उसका इकराम करते हैं और जो अपने बेटे से कहते गधे नमाज नहीं पढ़ते बेटी से कहते पढ़ नहीं करती गी इस उनके दिल को फड़ दिया जो काम नबत की नज पर होगा सिर्फ दावत देने से दयत नहीं आती हुजूर के तरीके पर हो न नबत से हो ससने लक के साथ हो अल्लाह को राजी करने के ज से हो हमसे य होता नहीं कुरान पढ़ के दिल हिल गया य पर फरमा काफिर से भी नरम बात करो हम तो मुसलमानों से स कर रहे कहने वाले को अल्ला ने फरमा मेरे सामने सारे सुभान रला वाले इनको कैसे ट रहे हमें दावत देने नहीं आती अभी रावन के जोड़ में एक आदमी ने कहा मैं खाना बद क्या बोला मैं इस काबिल था मैं य के कारगुजारी सुना सारा मजमा रोने लगा हम लोग भी इस जग पर जनाब रसूला ने बैठ के दावत दी खुलफा राशिन ने दी मुहसीन बड़े बड़े उलमा ने दी हमारे अकाबर ने हम कहां से यहां बैठ ग हम इस काबिल [संगीत] नहीं मेरे दोस्तों बुजुर्गों फरमाया आय हाय गौर से सुनना इकरा से नबूवत दी या मुद से दावत तक काम दिया तकलीफ आई तो मक्की सूरत उतरी इसमें ई मानिया अंबिया किस्से बयान किए और अल्लाह ने अपनी सुन्नत को समझाया हम कमों को हलाक नहीं करेंगे जब वक्त मुकर्रर ना आ जाए ये तालीम का हलका था दार रकम में दार अकमल फजले नमाज फजल रोजे की नहीं थी दावत की राह में तकलीफ आती उसके फजल मैंने हाजी साहब रहमतुल्ला सुना फरमाया हम तो तालीम करते हैं ना अलो की रबत आ जाए उस जमाने में जो तालीम होती थी दावत के रा में उनको तकलीफ आती थे तो हुजूर अंबिया सुनाते थे फिर हिम्मत बनती थी फिर दावत देते थे यहां भी ऐसे ही है जो हम में सुस्ती तबीयत में दावत करने देना और मेरे दोस्तों बोझ होना ये सब फजा इल की कमी की वजह से दावत देंगे हम अभी थोड़ा सा अर्ज करता हूं पहले ये हो जाए दावत और फजल से मानने की ताकत पैदा हुई फिर अल्लाह ने मदनी सरतो को उतारा अह कामात पे चले सिफात के साथ अल्लाह से लेना सीखा हम आधी आधी बात करते अलो से मसला हते नहीं ल सिफात से हो उससे अल्ला से लेने का दरवाजा खुलेगा जो आमाल बगैर सिफात के व गाड़ी बगर इंजन के कोई मसला नहीं अबब अल्लाह से लेने का दरवाजा खुला व आमाल सिफात के साथ है फिर मखलूक को देगा र फरमाना उम और लगाए पुराने हजरात और जोर लगाए अल्लाह से लिया फिर मखलूक को देगा मौलाना यस साब फरमाते हैं जिसका दरवाजा अल्लाह से लेने का ना खुला यह मादा सवाल बोड़ेगा मखलूक की तरफ फिर मखलूक से लेगा और मुब दुआ होना खत्म हो जाएगा हमारा हर साथी शिकायत कर रहा है यह मसले है यह मसले फला ने पैसे खा लिए फला हो गया फला हो क्या दुआए नहीं कबूल हो रही नहीं दुआ यकीनी क कबूल है और इस काम का मकसद कुवत दुआ का बढ़ाना है मौलाना इलियास साब फरमाते वहां भी तरब थी जोड़ में इबादत के एहतमाम को भी कहा और दुआ की ताकत को भी कहा कहते अजान दावत तामा है लेकिन नमाज कायम करने के लिए अजान इसलिए थोड़ी है कि नमाज ना पढ़ो इसलिए भाई देखो दावत का काम खूब करना है जिससे ईमान में कुवत आएगी फिर इबादत में कुवत आएगी फिर दुआ में जान आएगी फिर अल्लाह ताला मसले हल करें हम कहीं अटके हुए हैं हमारे मसले हल नहीं होते जब तक हर मा सिव अल्लाह से यकीन कटेगा और हर माव अल्लाह से मायूस होंगे कि इनसे कुछ नहीं होता ए अल्लाह करने वाली जात आपकी है आप अकेले माबूद है आपने किसी को किसी मसले में किसी को सुपड़ नहीं किया अकेले आप करेंगे इस यकीन के साथ जब मांगेगा अल्लाह की कसम अल्लाह उसके मसले को हल कर दगा जब तक हमारे जिन में फला फला फला से मसला जाएगा मेरे दोस्तो धोखा है और खूब ठोक खाएंगे कोई मसला नहीं [संगीत] हो यह जब परेशानी आती ना हजरत याकूब सलाम कितनी तकलीफ में ह यूसुफ सलाम कितनी तकलीफ में उनकी दुआ या य द मांगी मस उनको [संगीत] य सलाम बाहर [संगीत] आ दोस्तों अपने साथियो को दुआ नहीं बताते हर एक का मसला अटका हुआ है अ एक साथी मुझे मक्के में कहने मैं इतना कमाता हूं चारों तरफ से दुकानों से पैसे आते हैं कोई बरकत नहीं सब पैसे गाड़ी के खराब होने में फला होने नजर नहीं आता पैसा मैंने कहा भाई वो गुना याद करो जिसकी वजह से बरकत उठी है हजरत अली रला की दुआ है बड़ी जबरदस्त दुआ है कया सान या नूर यादू या या रहमान तीन मर्तबा कहा और दुआ मांगी अल्लाह मेरे वो गुनाह माफ कर दे जिससे दुआए रद हो जाती है वो दुआए माफ कर दीजिए जिससे नेकी की तौफीक छनती है वो दुआए माफ कर द फौरन मसला दरूद शरीफ [संगीत] पढो मेरे दोस्तो ऐसी ऐसी द हजरत रसने सिखाई उमत को यतीम छोड़ के नहीं [संगीत] गए खंदक में साबा परेशान कलेजा मु को आ [प्रशंसा] गया क्या दुआ करे अला क्या मांगी या या जिब य दुआ करते जिबल आसमान से उतरे सन सा साबा का इन हु ईमान का व मुनाफिक हुजूर ने खबर दी के जब मारा है चट्टान से रोशनी निकली पहली मर्ता फरमाया क्या है फरमा खबर दी गई कैसर किसरा को तुम फत करो उ मंजिलो को देखा मुनाफिकन ने कहा हम भूखे हैं आप ऐसी खबर दे रहे हैं साबा ने कहा आपस वहा गैब की खबर की तस्दीक की वही मदद गैब से आ गई हजरत जिबल आसमान से उतरे तेज हवा मेरे दोस्तो अबू सुफियान के उने लगे अल्ला अ और अल्ला ने फता फमा ईमान में जितनी कुत होगी उसकी दुआ में जान होगी फिर मद अला लाएंगे सि ईमेल भेजने का काम नहीं द कर माफ कर यह कर वो कर क्या करम कर मेरे दोस्तो बुजुर्गो अला अन कुरान में अब अल्लाह से गा वो मखलूक को देगा जिसका लेने का दरवाजा म फते ला अल्ला से फिर मा सवाल मखलूक की तरफ बड़ेगा फिर मखलूक से ले इस काम में जो जान निकल जाती है मखलूक से इफा की व से और खुदान स्ता इखलास कम हुआ और रियाकारी आई इस काम की जान निकल जाएगी मते इस काम में इस्लाम का जो और सादगी है अगर इसको इयार करेंगे इस्लाम को जोर है जो इससे निकलेगा सादगी निकल जाएगी और मुकत निकल जाएगी इस्लाम की इस काम की जान निकल जाएगी हज में भी फरमाया अल्ला अकबर हज में भी फरमाया मुलि में अरफात में एक कतरा पानी का नहीं था इतना सा पानी लेकर मिना से हुजूर गए पांच गुसल फरमाया इतने से पानी में उस हज में जान थी एक हज से आदमी वली बन जाता था फमा पूरा मजमा मते अरफात में सहाबा का सब मुत और ये कहा बन के बैला आते थे हम बने बगर जा रहे और बिगड़ के आते मेरे दोस्तो इसको वा तौर पर समझना जरूरी है यह चार आमाल य जो आप मस्जिद में रोजाना करते हैं यह चार आमाल कुरान के उतरने की तरतीब हैबा में दन के आने की तरतीब है इसको यकीन करना होगा और हजरत मोहम्मद के जान माल वक्त खर्च की तरतीब है मुझे बहुत अहम बात आपसे अर्ज करनी है हुजूर की जिंदगी ख्वाहिश में नहीं थी जैसे कुरान उतरा में से हुजूर इस्तेमाल हुए सल्लल्लाहु अल वसल्लम कुरान हिदायत किताब हुजूर की जिंदगी कुरान के मुताबिक जरिया हिदायत अगर हम हुजूर की इतबा करेंगे जाहिर और बातिन में अल्लाह हमें भी हिदायत देगा पूरी उम्मत को य मैं बहुत अदब से आप हजरात से दरखास्त करूंगा इसमें हमारे सारे बुजुर्ग है सारी जिंदगिया देने वाले लेकिन अमानत पहुंचाने का दिल चाहता है अमानत पहुंच जाए मौत से पहले हमारा से रोजा हुजूर की तरतीब पर गुजरता है सुबह से शाम तक और 27 दिन ख्वाहिश पर चिल्ला गुजरा हुजूर की तरतीब पर सुबह दावत दी फर तालीम की जैसे हुजूर की तरतीब थी और घर में आकर ख्वाहिश पर यह सात महीने साल लगवा इसलिए तीन चिल्ले कि हमारी जिंदगी में हुजूर के तरतीब आ जाए जैसे हुजूर ने जान माल वक्त लगाया तीन चिल्ले ह हा साहब फरमाते थे आदी बनकर घर आके भी इस तरह व गुजारो जैसे अल्लाह के रास्ते में गुजार रहे ये अमानत है हजरत ये हमारे जनों में नहीं है मस्तूरा की जमात भी जब निकले लंबे वक्त हो कम घर में आके ऐसे व गुजारो जैसे अल्लाह के रास्ते में गुजारा तो आपका अल्लाह का रास्ता भी हुजूर की तरतीब प और घर की जिंदगी भी हुजूर की तरतीब है वरना याद रखना निकलने का जमाना तो हिदायत का होगा घर का जमाना ख्वाहिश का होगा हिदायत बहुत मैं दिल के दर्द के साथ कह रहा हूं य मलाना यूसुफ साहब ने जाद के माने है ने जादू के माने कि अपनी मनचाही तरतीब जिंदगी छोड़कर खुदा की बताई हुई तरतीब को जिसको हजरत मोहम्मद लेकर आए उस तरतीब पर जिंदगी गुजारने का नाम मुजाहिद है हम में से हर एक आदमी को याद होना चाहिए जोड़ का मकसद क्या था जो हम पहले जमाने में सुनते थे सारी दुनिया के सबकी नज एक हो सबके बोली एक हो हम उस जमाने में लिखते थे हजरात का बयान ये मैंने जो बात की ये मैंने आ सबब से पुरान के जोड़ में सुना है पहले दावत प जान लगी फिर तालीम प जान लगी फिर जिक्र इबादत प जान लगी फिर खिदमत प जान मौलाना यूसुफ साहब ने अजीब बात फरमा दी इधर देखना भाई हिदायत के दर्जे ये पोरे है ना बकरे मेहनत की हिदायत का नूर आएगा हिदायत नूर है जो अल्ला दिल में डालते हैं जिससे ह और बातिल का फर्क मालूम होता है अगर खुदा यत का नूर ना हो तो गलत को सही देखता है सही को गलत देखनी कयामत चलेगी नहीं बहुत डरने का वक्त है बक मेहनत के हिदायत का नर बक हिदायत के दर्जा आएगा पहला दर्जा ईमान आए से सुनना फिर मेहनत बड़ी हिदायत का नर बड़ ठीक हो फिर मेहनत बी नर ब फिर बनेगे य यने पुरान के जोड़ में कहा है अ अ अल्ला अकबर फत के दरख पर अखलाक के फल लगते हैं अना के दर अला के फल नहीं लगते यला जबानी जमा र् मुस्कुराने का नाम नहीं है ब बहुत गौर से सुनना भाई मेहनत बड़ी हिदायत की हिदायत बड़ी अब क्या होगा मामलात ठीक होंगे जो हदीस पा सच्चाई अमानत से जो कारोबार करेगा उसका हशर सिन के साथ अंबिया के साथ होगा और मलाना सद खान साब मैंने बयान सुना मैं डर किया फरमाया हदीस ार तार ही फजिर होते है जिस तिजारत में झूठ गबन रिश्वत और सूद होगा वो मेरे दोस्तों वो फजिर की तिजारत है जिसमें सूद ना हो झूठ ना हो धोखा ना हो गबन ना हो वो हज वो तिजारत सालन की है उससे आला तिजारत अबरार की है 70 का 70 का माल लिया हुआ 63 में तीन ज्यादा क्या होता है 7 3 लूंगा मौलाना फरमाते हैं अब उसका भाव 80 हो गया लोगों ने कहा भाई साहब आपका माल का भाव बढ़या बो मैं नहीं जानता मैंने सिर्फ इसमें ₹ का फ उस जमाने के न रपए बड़े अजीब थे नर लूंगा बाकी तुम फायदा उठाओ फरमाया ये अबरार की तिजारत है हमारे भाई फारूक बंगलर वालों का मशवरे में तय हुआ ये मामलात और अखलाक को बयान करें ये मौलाना यूसुफ साहब और मेहनत पड़ी और हिदायत करूंगा फिर मुशरा रहन सहन सुन्नत के मुताबिक होगा जो बच्चों को लिबास पहनाते हैं ये माबाप का जज्बे का तर्जुमा है अगर अंदर यहूद और न सारा जबान से य और नरा को लानत भेज रहे हैं और अंदर से उनकी मोहब्बत है तो अपने बच्चों को यहूद और नरा का लिबास पहनाए और अगर उसको हुजूर की मोहब्बत तो कर रहा हुजूर के तरीको में इज्जत नजर नहीं आ रही तो बच्चों को यहूद नरा का लिबास पहनाकर समझेगा ये मेरे बेटा कितना खूबसूरत नर आ ये बातों का नाम दन नहीं है दोस्तों यह फैसला करना होगा कि हम चाहते क्या है हम हुजूर को चाहते हैं हुजूर के तरीको को यहूद सारा के तरीको को चाहते हैं प्यार मोहब्बत से उनको वक्त लगवाना होगा दनी जन दन दारी का जन बयान बड़ा अजीब दीनदार का जन बनाना होगा दीनदार बनाना होगा आगे चले पूरा मेरे दोस्तो मुझे डन रते बोलते हु जोड़ में 40 साल एक तरफ कर दो तबलीग का य चंद दिन एक तरफ इतना फायदा होता मैं सच कहता सारी गलतियों की ला होती है इंसान की सोच की गलती बोल की गलती सब अल्ला और अल्लाह देखो इतनी रूहानियत थी अल्लाह बस अल्ला हमारे गुमान को ठीक करे सारे चार महीने वाले मुल्कों में गए हुए जिम्मेदार हजरात मशवरे वाले और उलमा साल लगाए हुए सारी रूहानी जमाती बताओ उस मजमे में कितने मजे होंगे और जब दुआ में सबकी मगफिरत का लान हुआ बताओ क्या होगा इसी रूहानियत और ये घबराओ मत सबके लिए दुआ हुई है और ये बहुत जोर से मांगा अल्लाह उमत की इदात को बर्बाद होने से बचा ले हमारी जिंदगी बर्बाद हो रही है और यह भी जुमला का जो किसी अल्लाह वाले पर तराज करता है व उसकी रुसवाई का अल्लाह फैसला करता और यह भी मैंने पढ़ा जो अल्लाह वालों से अपने से जो हमसे पहले तबलीग मिले ग एक दिन भी हमारे मोहसिन है अगर उनसे मोहब्बत करोगे य अल्लाह की मोहब्बत की अलामत है कुरान से मोहब्बत करोगे तो अल्लाह की मोहब्बत की अलामत है मलाना स खान साहब फरमाते जो जान माल दिया है उसको खुदा के लिए लगा दोगे तो अल्लाह की मोहब्बत दिल में आ जाएगी अल्लाह के जात आली का यकीन आएगा और अल्लाह अकबर जो माल बचाकर दूसरों के पैसों को खर्च करेगा उसके दिल में कितने भी वो कलमे को बयान करे उसके अंदर माल की मोहब्बत और माल का यकीन निकलेगा नहीं मस्तूरा को भी जब निकाले उनके अपने पैसों से निकाल हजरत खदीजा ने खर्च किया है ये वो लगाए नहीं अपने पैसों को जो अल्लाह ने दिया है तो माल की मोहब्बत और माल के यकीन निकल के अल्लाह अपनी मोहब्बत और अपना यकीन दे दे और अगर उसको बचा लिया उसकी उसके बारे में चीज खरीद ली तो चीजों की मोहब्बत मौलाना स खान साब ने मौलाना मुनीर साहब को नसीहत की थी उन्होने कहा हद बहुत आ रहे है फ मौलाना आगे बढ़ा दो माल की मोहब्बत और माल केकी निकल जाए मौलाना इब्राहिम साब फरमाते हैं हद के पैसों से मालदार बनना कहीं जाते पैसे नहीं लेते खर्च करो तो किसी ने कहा था हिंदुस्तान में फकीर बो बो यहां ज्यादा हम यहा से ले नहीं हमारे मसर के बाद नहीं सुब के बाद बात बड़ी अजीब कने लगे मलाना मजूर अल्ला के फ से मैंने मलाना मजूर ननी कीरत की उन्होने उनका नाम लिया मलाना उनको भी देखा ह मला के साथी थे तो वो एक दिन ह ग तो हैरान हो गए पहले तो पूछ के आते थे हजरत कैसे आए क मैं जमात में आया हूं एकदम हजरत बोले भाई ये क्या करते हैं अब मौलाना अल्ला अकबर बड़े आदमी थे मलाना वो भी बहुत बड़े बुजुर्ग थे हमारे अक्सर बुजुर्ग उनसे तालुक है हत बा साब और अकाप से बड़े इमाम थे इस लाइन के तो कहने लगे क्या कहते क ये चंद बातें करते हैं जो बताते यह लोग जाके अमल करते हैं अच्छा फरमाया सुनाओ हमको ने पर्चा निकाला लिखा हुआ था तो 25 नहीं 30 35 बातें थी लेकिन सिर्फ 15 या 16 पर पहुंचेगा बस कर दीजिए बस फरमा अगर ये जो बात कर रहे हो आप यह लोग अगर अमल करते हैं इनकी विलायत में कोई शक नहीं य बहुत बड़े वली की ये जो है ना खुशखबरी आसान बात नहीं उनके पास जाता था उनके जो कपड़े धोने वाले उसकी वहां से भी आवाज अल्ला अल्लाह की आती थी मेरे दोस्तो य कैसे बनने का रास्ता है यह जितना मजमा है य पूरी दुनिया में जितने ईमान वाले इस वक्त यह अचानक तबलीग में नहीं आए किसी के हाथ में फस गया आ गए ना हजरत गोई फरमाते रला इनकी इनको इनायत अली है अल्लाह ने अजल से इनको खैर उमत में बनाया आपकी रूह की तरफ अल्लाह की रहमत अजल से मुत है क्या अल्ला का इंतखाब गलत है तुम इनकी गलतिया निकाल रहे मेरे दोस्तो सबसे आंखें बंद कर दो अपनी े की फिक्र करो जिस दिन सकरात होगी कोई साथ देने वाला नहीं होगा हशर में कोई साथ देने वाला नहीं होगा अल्ला की रहमत केया लगे रहो या तो यह कह दो अला मैंने चुना य छोटे बच्चों को भाई नहीं नहीं नहीं नहीं चलते रहो और एक अजीब खुशखबरी सुनाओ यह म इब्राम साब से मैंने सुना फरमाने लगे म ने य अंसार नौजवान तो बहुत काम करने लग य इनके लिए दुआ कर दो इनकी तारीफ करो तुम अजर मिलेगा तो मैंने मुफती साहब से पूछा मैंने सबके लिए दुआ मांगने कुरान पढ़ा रहे हदीस पढ़ा रहे हैं जितने मोन अजान दे रहे हैं ये मोजिन का पता है कौन है ये हुजूर ने कहा बैतुल्लाह में अजान हो रही है ना सबकी नमाज एक लाख की है मोजिन अजान दे रहा है सबकी नमाज का अजर ले रहा है तो कहा या रसूलल्लाह ये जो मोजिन अजान दे रहा है इसके तो मज हो फरमाया तुम इनको जवाब दे दो अजान का जवाब दे दो तुम्ह भी तमाम नमाजियों का अर मिलेगा हमें बुरा लगना शुरू हो हमारा दिमाग खराब हो रहा भाई मन के अन का जवाब दीजिए अभी मैं रा में था मैं सोच रहा ला य तो मजमा सब अल्लाह के रास्ते का है हर एक करोड़ की नमाज काजर है अगर हम जवाब दे दे मन के अजन का जवाब दे दो तुम्ह करोड़ खरबों नमाज [संगीत] का जबान को रोकिए वरना खतरे में आएंगे हमें किसी की म फरमाते हम किसी की इला के मुक नहीं अया इरा कर सकते हम नहीं कर सकते और अजीब बात बता आजकल बुग क इस काम का मकसद सबसे बड़ा फायदा मेरी जिंदगी पर क्या इ सा कास और दली य सबसे ज्यादा तकवा सब लेकिन सि अ के मुता मुराद अबकर स र में भी उनसे भी सुना याद रहेगा अल्लाह हमें तकवा नसीब फरमा बहुत गौर से सुनना अल्लाह तू माफ कर दे मैंने तो इधर देखा ना सब जहन से निकल गया मुझे पता नहीं क्या हो जाता है अपनी जिंदगी पर क्या फायदा हुआ इसको गौर से सुनना य म लिया बो बा ना समझने वालो को इ क्या बात कर र है अपनी फिक्र करो हम तो सु उम की फिक करो इसको जरा वा होना जरूरी है य मुझे रा में साथी आया और मुझसे सवाल किया मैंने उनसे दर की देखो दोस्तो मलाना इयास की बात पहले जन में ले दाई का वादा है हियत देने का और जिसको जिस पर मेहनत कर रहे उसका वादा नहीं कुरान में बड़े हजरत जी फरमाते फरमाया जिसका वादा है उसकी नियत ना की जिसका वादा नहीं उसकी नियत करें तो दोनों गए सारी मेहनत का खुलासा मैं कितना बना इस य भा सब से यहां सुना मैंने मबर पर मलाना जन बनाते थे हत मलाना इनाम साब हिंदुस्तान के तमाम अकाबर बात सुने अपनी फिक्र पहले करो कहते य मैं बहुत गर से सुनता हूं मेरे दोस्तों अगली बात को भी समझना है अपनी इला किसे कहते हैं कहते मेरी इला हो जाए ये मतलब नहीं है एक मत भाई यामीन साब रला कहने लगे अगर अपनी इला का मूम तंग हो जाएगा ना तो फिर दूसरे की इला करेगा य भी कहा उने ऊपर से सुना हुआ था तो मैं अपनी मैंने भाई फ साहब से सुना चीज का अपने मकसद में इस्तेमाल होना उसकी गाड़ी का रंग ठीक कर दिया सीट ठीक कर दी हरकत नहीं कर रही गाड़ी नहीं तो खटा है चलने चलती के नाम येज सुलेमान ने मुझे कहा ख्याल करो चलती का नाम गाड़ी है जो बीमार हो जाए फिर खटड़ी है सुलेमान र गौर से सुनना पहली उम्मत की इला और है कि अल्लाह के हुकम को नबी के तरीके पूरा करे और रजल से साफ हो और सिफात हमीदा आ जाए इस उम्मत की अपनी इला का बहुत बड़ा खुद हुजूर वाले काम को अपना काम बनाए हुजूर वाले आमाल को खुद भी करे और पूरी उम्मत को हुजूर वाले काम पर लाने की कोशिश करे और सारी उम्मत को हुजूर वाले जिंदगी पर लाने की कोशिश करे यह मेरी अपनी इस्लाम दाखिल है जो मैं आपको बात कर रहा हूं यह मेरी अपनी इला है कि मैं अपनी जिम्मेदारी अदा कर रहा हूं अगर यह मूम इतना बड़ा मौलाना इलियास साब के जहन में था कि करने अवल में अपनी का माफूम क्या था क्या नाम है सामने बैठा आपको अल्लाह ने पैदा क्यों किया सबसे पूछ रहा हूं जी किसने पला गया माशाल्लाह आप फरमाओ ये किसने शक है अल्लाह ने पैदा किया ये पूछ र किसने पैदा किया जी मैं अभी राइट में अल्लाह ने तौफीक दी इला का मौका मिला जिससे पूछू इबादत के लिए जोड़ खत्म हो गया और छठा नंबर वाजे नहीं इतनी तकलीफ हुई कि मैं आपको बता नहीं सकता इसके माने हम सबको जरूर है मेहनत करने की वो ये बयान करेंगे आप उनके तान में और अगला कर द पूरी बात भाई अच्छी तरह सुनना भाई बड़ी मेहरबानी होगी इंसानों जिनको अल्लाह ने अपनी मफत और अपनी इबादत ही के लिए पैदा कि गौर से सुनना लेकिन अंबिया कराम को तीन आयत हैनी अब्दुल्लाह इबादत के लिए ह मुफती वली फमा इंसान होते ई मानवा व भी इबादत के नबी नको दावत काम [प्रशंसा] दिया दावत काम दिया किस बात किसके लिए दिया और को इबादत उठाओ इबादत बोलो सब बोले दावत और को इबादत पला सुनना य गलत बोलेगा फ लिए कितनी आ है उनकी ससस क्या थी फरमा इबादत सुन की इबादत दावत और को ूर इबादत दावत पर लाए स सब कहे हुजूर दाई थे दाई बनाया इबादत की इबादत लायरा है किसी कल नहीं है हमारे और म हो गया कुरान हस को दिल कबूल नहीं करता और कबल कर य म है हम क्यों पैदा हुए जी हमारे दोसत जुर सामा इंसान होने के नाते हमारे जिमे इबादत है उमती होने के नाते हमारे जिमे दावत है काते से सुनना हम इंसान है इबादत करेंगे हम उमती है दावत देंगे और दूसरों को भी इबादत दावत प लाना है हुजूर की में हुजूर हज में दाई थे और सारे मजमे से कहा अरफ नहीं में मली फरमाते हैं कि तुम्हारे जिम्मे पहुंचाना खुद दाई थे औरों को दाई बनाया खुद इबादत की औरों को इबादत प मैं आपके इस सवाल का जवाब देना चाहता हूं हर आदमी मस्जिद में फिक्र करता है यार काम कमजोर है जमात कम नहीं की उसका जवाब देना है वजह क्या है हुजूर दाई थे दाई बनाया इबादत की इबादत पे लाए हम इंसान है इबादत करेंगे हम उम्मती है दावत देंगे सिर्फ दावत नहीं देंगे औरों को भी इबादत दावत पलाई ताकि कयामत तक दिन जिंदा हो देखो गौर करना हजरत मौलाना सद खान साहब का बयान मिना में हुआ अंबिया ने दावत दी लोगों में इबादत कायम हुई उनके इंतकाल के बाद लोगों से दीन निकला नबी भेजकर फिर दावत दी इबादत कायम हुई हमारे आका सदल कोनैन ताजदारे मदीना जनाबे रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अल वसल्लम खुद दाई थे औरों को पहले दिन से दाई बनाया अबू बकर सिद्दीक हजरत खदीजा ला को फिर वो उ जमील फिर आगे चलते चले गए कयामत तक दन बाकी रहेगा देखो याद रखना एक तो हम दावत नहीं दे रहे हमसे गलती हो रही है दावत दे रहे तो उसको दाई नहीं बना रहे फिर कह काम कमजोर है काम कमजोर नहीं है उसी पर आ जाए अब मुझे एक और अमानत आपको अर्ज करना है जो मौलाना उबैदुल्ला साहब से मैंने सुना बहुत बोझ है हम पहुंचा नहीं सके आपको मलाना उला साहब ने फरमाया हजरत मौलाना इयास सा उलमा को जमा फरमाया और पूछा क्या बेदनी की क्या वजह है गुना क्यों हो र है लड़ाई क्यों हो रही फ तो सबने जवाब दिया बड़े बड़े उलमा इराम थे जहालत हजरत फरमा इल्म के साथ भी और ज ह आपके जहन में क्या हत हजरत मौलाना इयास फरमाने लगे सारे गुनाहों की वजह सारी बीमारियों की वजह सिर्फ एक है ईमान की कमजोरी ये डायग्नोज अल्ला ने कराया तस को बोल फौरन पूछा इलाज क्या है दावत ला और अल्लाह के रा में निकलना गौर से सुनना इसको कुरान से हने जब बयान किया सारे उमाम तसली फरमा ताब साबा को ईमान वालो को दोबारा क्यों कला तुम बेहतरीन उमत हो सारी उम्मत निकाली गई सारी इंसानियत के नफे के लिए तुम्हारा काम नेकी को फैलाना बुरा से रोकना तुम्ह क्या फायदा होगा यानी मुझे ला इन कानों से मैंने मना सुना तुम्हारे ईमान में सारे उमाम को शर लेकिन हमसे ह जो गलती हुई वो सुन लो हमने इस बात को रट के बयान किया से ईमान आएगा ईमान से जिंदगी में इधर उर देख सामने बैठात से ईमान आएगा ईमान इस रट मरवा दिया माफी चाहता हूं मुझे कहना नहीं चाहि लेकिन बहुत दिल पर बो है इसको ह मन खोला वो अमानत सुन लीजिए बस ज्यादा बात करने का वक्त नहीं है हजरत मौलाना बयान में फरमाने लगे ईमान क्या है पहले तो सवाल कर दिया रमजान आ रहा है रोजा रख रहे हैं तकवा नहीं आ रहा हज कर रहे हैं तकवा नहीं आ रहा ये हजरत की आदत रोजा दिया है तक के लिए तो तकवा नहीं आ रहा हम चौक [संगीत] गए तो ईमान क्या है ईमान क्या है आंखों देखी को झुठला सब कहो भाई आख देखी को लाना दिल से और गैब की खबर की तस्दीक करना दिल सेब की खबर की तस्दीक करना चाहे समझ में ना आए ये भान साब फरमाते चाहे नजर ना आए चाहे समझ में ना आए दिल से मानने का नाम ईमान है हजरत कारी देव साब फरमाते जानना ईमान नहीं पहचानना ईमान नहीं मानना ईमान दोस्तों मैं के मजे के लिए बात नहीं कर र मेहरबानी करके बड़ी जिम्मेदारी है य कोई जरूरत नहीं इधर की बात करने की इसम रहिए खुद ही मासू खुद हमको मासू में तकवा नहीं है मसाइल आ रहे है अच्छे अच्छे लोगों से धोखे लग रहे हैं पैसे लोग खा रहे आदमी का दिमाग टूटा हु इसको समझेंगे तो काबू आएगा म उस न पर दोबारा आना है इस पर छोड़ के गको नजर नहीं आ रहा अल्लाह के रसूल फरमा रहे हम दिल से माने आपके में र आपने पा सका दिया कितना बाकी हुजूर फरमा रहे अल्लाह की कसम सदके से घटता नहीं आपने कहा घट गया झूठ है हुजूर सच मुझे पूछे बोलूंगा री मेरा देखना गलत हुजूर का फरमान ह यह कहते दिल में नूर उतरता ध्यान से सुनिए खुदा के लिए ध्यान से सुनिए की तस्दीक बड़ी ईमान का नूर दिल में आया दो मिसाले देते थे य न सारा की और एक सूद से बढ़ता नजर आ रहा और अल्ला क घटता है जड़ से उखाड़ देते देखो कैसे कंगला कर दिया लोग बड़े बड़े मुल्क वाले बड़े बड़े जो सू प चलने वाले कले हो गए सबसे ज्यादा कले होको अपनी आखों से दिखा दि हमारी नलो को ु दिखा अच्छे अच्छ को फसा दिया लोगों गर से सुनना नजर आ रहा है सूद से बढ़ता है सदके से घटता है हदीस में आता है फरमाया जो सदका देता है तो पहले रहमान के हाथ में जाता है फिर फकीर के हाथ में जो फकीर को समझेगा कारोबारी है तो फिर वो उसकी जगह पहुंचेगा इसकी जगह पर आ जाएगा य ज्यादा चर्बे लिसानी जहन्नम में ले जाएगी हमें दोस्तों हमारी होशियारी पता नहीं ले जाएग मैं दिल से मोहब्बत से कह रहा हूं खुदा के लिए अपने आप को संभालिए अब गौर से सुनना हुजूर तो यह फरमा रहे हैं और नजर आ रहा है नहीं हमारी आंखे गलत है हुजूर का फरमाना तो जो जेब में रहेगा नहीं मा जो कुछ तुम्हारे पास है सब खत्म जो अल्लाह के पास सब बाकी र गौर से सुनना यहां मौलाना सद खान साब बोले यह ईमान मौजूदा हमें गुनाहो नहीं रोक य रमजान के मसले काल य जो हजरात जोड़ का है उसको मुझे अ करना गर से सुनना शुरू होता है चलना फिरना क्या चीज होती है फिरते फिर रहे यह मकसद नहीं है यह इसका मतलब लोग गलत समझे ना इसको वा करना है या इमिक पर इतना जोर दिया और हमारे एक साथी को बो हो गया बो उनको ईमान पर जोर देना चाहिए अब इसको मुझे अर करना है थोड़ा गर सुन सब एक बात है सिफ गौर से सुनना पड़ेगा गौर से सुनो गर से सुन मौलाना सद खान साहब फरमाते य ईमान है दिल में अल्लाह अल्लाह एक है अल्लाह के इलावा कोई माबूद नहीं जन्नत हक है जहन्नम हक है कुरान ह सब य ईमान इसको बोलते अका इस थानवी भी फरमाते हैं और मना ने भी फरमाया ये ईमान गुनाहो से नहीं रोक रहा बला तवाफ कर रहे हैं बैतुल्लाह अर्श के नीचे है औरतों को देख रहा फरमाया अगर इसने गुनाह करके हाथ उठाया मुतमइन मुल्को प अजाब आएगा ये मौलाना फरमाते कौम आद आई दुआ करने के लिए गुनाह कर लिया दुआ मांगी पूरी कौम तबाह हो गई इसलिए पिछले सालों में रमजान के महीने में सरद के अंदर जलजले आए और क्या बोलते हैं बारिश हुई तूफान आया सोचते नहीं रहमत कार गौर से सुनना की तस्दीक अगर बढ़ [संगीत] गई फरमाते इस ईमान में तकवा आया इसकी दो मिसाल सहाबी कहते अ को देख र या मुझे जन्नत खुशबू आ ही की तस्क बड़ी इस ईमान में तकवा आया य ईमान जिसम तवा आया की तस्दीक बड़ी है ये हुक्म में भी चलाएगा क्योंकि सारे अवाम गैब से आए हैं नमाज रोजा हज जकात शराब हराम सूद हराम गीबत हराम ये सब गैब में बयान हुआ कुरान और हदीस में तो जितनी ईमान बिल गैब बढ़ेगी वो तो हुकम पे लाएगा गुनाहों से रोकेगा ये जो मौजूदा ईमान है हमें गुनाहों से नहीं रोकना ये अमानत थी इसको पहुंचाने थी गौर से सुनना ये ईमान बिल गैब बढ़ेगा कैसे तो मौलाना फरमाते हैं दावत से दावत तो हम सारा दिन देते रहते हैं ईमान नहीं बढ़ रहा तो मौलाना सद खान सा फरमाते रहमतुल्ला अल दावत क्या है निजाम गैबी से मुतासिर करने का नाम दावत है ये हजरत की इबारत है मौजूद है खत में भाई कासिम को लिखा मुंबई हजरत सुनिए सिर्फ बात करने का नाम दावत नहीं है दावत में गैब को इतना बयान करें मौलाना यूसुफ साहब फरमाते हैं कि दिल की तस्दीक से बयान करें यहां तक के गैब का यकीन गालिब आ जाए मुशाहिद के यकीन पर ये ईमान की मेहनत गौर से सुनना दावत में गैब को बयान किया गैब की तस्दीक बड़ी फ ईमान बढ़ा इस ईमान में तकवा आया उन हुकम प चलाया जो गैब से आया ये ताल्लुक है फिर रोजा भी गुनाहों से रोकेगा नमाज भी गुनाहों से रोकेगी पहले 50 साल पहले एक किस्सा नहीं मिलता था फलाना ने फलाना के पैसे खा लिए अब लाखों किस्से मिलते हैं हर आदमी मार खाया हुआ है हालांकि ऐसी दुआ मौजूद है अगर आप पढ़ लो वो घर लाके देगा उसकी जान निकल जाएगी दो दुआ बड़ी जबरदस्त अना काना का मिस्कीन का भी फना का सा का फना का फकीर का भीना का हजरत अली के औलाद में पड़ा फरमाया उसने पड़ा ुद में तीन मर्तबा घर लाके दिया उसने हमारे साथी मक्का म में कने लगे मैंने दुआ पढ़ी 20 साल उसने पैसे खाए थे जब मैंने दुआ पढ़ी 15 मिनट उसका फ आया खुदा के लिए अपना पैसा लो मेरी जान निकल गई क्या उम्मत हुजूर को यतीम छोड़ के गए इनके पास कोई मसले का हल नहीं है हुजूर ने सब दुआए बताई कौन करे उसको घबराने का नहीं है अल्लाह के रास्ते में आप निकले दावत इतनी दी कि तकवा आया तक के बाद इखलास आया इखलास के बाद सिफत एहसान आया जो दुआ मांगो कबूल है तो हमारे मैंने मौलाना इब्राहिम साहब से खुद बयान सुना उलमा को बयान में कहा हुजूर को दावत दी तो हुजूर ने बे तलब में तलब पैदा किया आप काफिर को मुसल साराम ने दावत दी की बे तलब को भी और फिर साराम ने तलब वालो को भी सिखाया गौर से सुनना और नकल हरकत दावत में रखी यह मैंने हजरत से खुद सुना इसलिए इस्लाम फैलाया फरमाया सहाबा को भेजा है म साहब का जो मुजा हुआ मैं सामने बैठा था अजीब बात की कि बाद सहाबा जमात बनाकर मुल्कों में गए बाद अकेले मुल्कों में चले गए ये खुद सुना मैंने सामने इस मर्तबा हजरत हैरान हो गया हजरत की बात बार-बार नमाज को कह रहे हैं मैं जब मिलने गया मुझे कहा मक्के में सारे साथी सारे मुसलमान 100 फी नमाजी हो गए बहुत बोझ है जो नमाज कजा कर दे दो करोड़ 88 लाख बरस तक जहन्नम में जल ये हमारे जो मसले अटके हुए हैं हजरत फजर की नमाज जमात से मिल नहीं रही है बड़े से बड़ा वली भी आपकी दुआ मांगेगा नहीं पहुंचेगा फजर की नमाज जमात से मिलना जरूरी है और हराम काम से बचना जरूरी है वो शुरू जो दुआ की कबूलियत के लिए है और यकीन में पूरी कुवत हो खालिस अल्लाह के भरोसे पर हाथ उठाए के अल्लाह एक दुआ मिली हमको अल्लाह सातो जमीन और आसमान में कोई माबूद नहीं सिवाय आपके आप हीने मसले को हल करना है अल्ला कर दीजिए अल्लाह की कसम उसका म हत याकूब अ सलाम की दुआ य ह मुफती शफी साब तर्जुमा किया मुसीबत के बाद राहत उसम सारी दुआ गर से सुनना इल्म जिक्र को क्यों जोर लगा रहे मैंने जो मौलाना इनाम साहब लाने जो बयान किया हाजी साहब के पूछने पर वो मैं छ नंबर मुख अ करना चाहता हूं कलमे का मकसद क्या है हजरत ने फरमाया यकीन की तब्दीली नमाज का मकसद क्या है फमा तामील अकाम क समझे नहीं फरमाया पूरे दन पर चलने की इस्ते दद पैदा य मौलाना यूसुफ साहब बोले नमाज में छोड़ने की ताकत पैदा की पांच मर्तबा फजर में राहत को छोड़ा जोर असर में दुकान को छोड़ा अब हज में भी जा सकते जो 15 मिनट की दुकान नहीं छोड़ हज में कैसे कैसी जबरदस्त बात है नमाज में सबसे कट गया फिर भी खुदा का ध्यान नहीं रोजे में खुदा का ध्यान कैसा जब दुकान प बैठा ह इल्म का मकसद फजल के इम मुराद है दनना कर कहेंगे हम फजल के मुराद है वाद का यकीन जिससे नेकी की रबत और गुनाहो की नफरत आ जाए फिर कहा दन को सीख सीख के पूछ पूछ के करने वाले ब य मना इसको अच्छी तरह समझना मौलाना इयास साब की बात बड़ी अजीब है मलाना इयास फरमाया वाद पर ईमान लाना ई मानिया में से है और ई मानिया मुकदम काम पर फजल को मामूली मानिया में से अका में से है फिर हमसे जो गलती हुई फजल सुनके हमने पूछा नहीं तो जोर लगा रहे इल्म जिक्र को जिंदा करो इ इम तो हुकूक के जानने का नाम है जिक्र उस पर अमल करने का नाम तो भाई सुनो एक मर्तबा मेरे से मेरे सामने एक साथी आया कय मिस्वाक में एक्सपोर्ट कर रहा हूं मेरी त में गुस्सा जल्दी आता है मैंने कहा तुमने सुन्नत को जबा किया छोटे छोटे मिस्वाक फिर मेरे मुह से गुस्से में निकल गया मैंने कहा मुफ्ती साहब से पूछ तो लो हमारे मुफती अब्दुल सलाम साब जिंदा थे र उनसे पूछा उने क भाई मिस्वाक करना सुन्नत है मदार तो मुस्ताहब है उस दिन से मैंने तबा कर ली मसला बताने से मुफती से पूछे बगर बोले चले जा र बड़ी चीज कारोबार में हलाल हो सकती है आराम से उसको पूछा नहीं हराम तरीके पर कर इसलिए बहुत तरब दे रहे हैं पूछ पूछ के चलो अभी रमजान आना रमजान के मसाइल पूछे साथी ने पूछा मुझे शुगर है मैं रोजा नहीं रख सकता मैंने कहा मुफ्ती साहब से पूछ पूछा बेहतरीन जवाब दिया उन्होने बेहतरीन जवाब ऐ पूछना इसलिए मेरे दोस्तों बुजुर्गों ने तरब जो दी है इसका एमाम अलुला मैंने साथियों सुना एमाम शुरू कर दिया है अब देखो एक इलाके में मुल्को में जा रहे हैं बहन की विरासत दे नहीं बहन अगर बोल मेरा विसा तो तो बोलते हमारे खानदान से निकल जाए उन्होने कहा पैसे को डालो जहन्नम में भाई बहन तो रख अपना कमाल है तुम्हारी कुर्बानी या मौ इलियास सब विरासत का बड़ा एहतमाम करते थे तबलीग इसका नाम है तो ये बात कह रहे हैं जो हमारे बड़े अल्लाह ने जिनको सारी जिंदगी देने की इस्माई जिंदगी गुजारी है उन पर अल्लाह खोलते हैं कि इस वक्त का हाल का इलाज क्या है तो हमारे लिए फायदे की बात है जो पूछ लेगा उसके मजे हो जाएंगे माफ करना वजू और नमाज रोजा हज सबको अब मस हज का सुनलो एक मर्तबा एक साथी आ गया के जी आप बहुत थके हुए मालूम होते हैं मैं बल चेयर पे आपको करा दूं साई मैंने कहा बड़ी मेहरबानी यार मदद आ गई अला और बल चेयर प कराया मैंने मुफ्ती साहब से कहा फरमा आप पर बकरा आ गया अरे मैंने कहा हुजूर ने सवारी पे की फरमाया सवारी पे तालीम के लिए की है आपको इजाजत नहीं बीमार होते तो अलग मसला था थकान उजर नहीं है तवाफ बाद में कर लेते साई फ बाद में करते हैं क्यों किया आपने बकरा दीजिए हालांकि सारा पढ़ने के बावजूद ही पूछने की जरूरत है मुफ्ती से हम कहते हैं क्या पूछना और ये क्या इल्म जिक्र पर जोर लगा रहे हैं नहीं भाई मैंने जोड़ की बात गलत समझ में ना आ जाए सब चीज की अपनी जगह अहमियत है सबसे ज्यादा अहमियत ईमान को बढ़ाने की उम्मत को हुजूर ने इस पर उठाया फिर जब ईमान में कुवत आई अल्लाह ने अकाम उतारे आकाम साहब ये मैंने मौलाना इब्राहिम साहब से खुद सुना मौलाना यूसुफ साहब का कल नकल किया फाइल मसाइल को अल्लाह ने इकट्ठे उतारा है हा बस खत्म हो गई बात कौन कौन पूछ पूछ के करेगा बेटी देनी है किसी को तो पूछिए मुफती साहब से क्या देखना चाहिए दामाद में पूछ के दो या खानदान को पूछ रहे व औरत कुछ कह रही खाला कुछ कह रही उसको क्या देख रहे फिर रोते फिरते हैं सारी जिंदगी उसके पैसे को देखा उसका दिमाग खराब हो अब एक बचा आ किसी बदत को दे दिया दुनिया दार उसने सब भुला दिया उस्ताद भी रो र मां बाप भी रो हमने इतना पढ़ाया कुरान पढ़ाया य देखो क्या हो पहले दिन से पढ़ाई के जमाने में इसको दाई बना दो बच्चों को भी बच्ची को भी इला जिस खानदान में जाए पूरा खानदान प जोड़ में मेरे दोस्तो बड़ा हसला रख बड़ी बहुत हर अब हमारे म जुबैर सा बांगलादेश के शुरू से आखर तक सर्त को ब दावत है कुरान बयान कर रहा है आखरत को पूरा मैंने गौर से सुना बिस्मिल्लाह से लेकर अर तक सारा आखरत खोला और दूसरे सबने छ नंबर कि किसी ने किस पर जोर लगाया किस मैं सच कहता हूं हजरत 40 साल तबलीग में लगा लो ये चंद दिन जो जोड़ के आते हैं इसको नागा ना हो इसको एहतमाम से करो एकदम आगे तर इस जोड़ के बाद कबूलियत के अलामत कि जिंदगी पलट जाए पूरी दुनिया की दीनी सत बढ़ जाए दावत प हम आगे अब हा वो बात मौलाना ने मुझसे पूछा कि अबू बकर सिद्दीक ने ये नहीं पूछा मेरा क्या काम है तुम्हारा वो काम मेरा काम है तो फिर दावत देने कैसे गए अब सुनना हमें तो जवाब आता नहीं था हजरत मौलाना सद खान सा फरमाते हैं जब उन्होंने कलमा पढ़ा कलमा अपनी हकीकत के साथ दिल में उतरा कलमे ने दाई बनाया हमारी गैब की तस्दीक बढ़ेगी तो एक दावत देने को दिल चाहेगा गौर से सुनना जो अपने लिए पसंद करो और दूसरा दीन के मिटने गम होगा उस जमाने में एक हुकम टूट रहा था सिद्दीक अकबर बर्दाश्त नहीं कर सके आज फराइज टूट रहे हैं और मेरे दोस्तों अकाद बिगड़ रहे हैं पता नहीं क्या क्या हराम जिंदा पूरी सूद में सब कुछ मौजूद है किसका तस्करा करें मौलाना भाई अपनी गैब की तस्दीक को बढ़ाओ एक हुकम के मिटने पर आप बेचैन हो जाओ यह सबकी तमन्ना है मैं इलाज अरज कर रहा हूं तकवा कैसे आवे तक के लिए तो पांच चीज इसमें एक चीज बता दी कि गैब की दूसरा मौलाना स खान फरमाते हैं मक्के में मुकत उठाई दावत की रा में सहाबा में सिफात ई मानी तकवा तवल हम राहतो के साथ चलते खाते पीते इससे सिफात नहीं आ रही जो चीज है वो है और एक अगली जो भाई अमीन साहब से यहां सुना और हाजी साहब का मैंने अभी इस परता सुना वो कहते हैं मेरी तबलीग का खुलासा मैं कुछ नहीं मेरा कुछ नहीं पुराने साथी ने बताया मैं हैरान हो गया तो मौलाना इलियास साहब रहमतुल्ला ये अपने करने की नफी करते थे अपने करने का यकीन निकल जाए अपनी ख्वाहिश से निकले तो कलमे का मफू बताते थे जी चाई जिंदगी नहीं गुजार रब चाही गुजार यही ईमान है यही तकवा है यही खलास है यही तौबा है इधर उधर जाने की जरूरत नहीं चंद चीजों को कर दे गैब को बयान करे जम कर हर वक्त और थोड़ा मुशक्कल मुजाहिद कोई हरज नहीं कहीं भेज दे म त शकील वाले ये हमारे दुश्मन थोड़ी ये तो अल्लाह के य से तय होता है ये बिचारे फिक्र करते भेज देते और मेरे दोस्तों रमजान का ब भाई रमजान के महीने में मेहनत के बढ़ाने का वक्त है बदर रमजान में हुआ फते मक्का रमजान में हुआ कभी सोचे तो सही हुजूर का रमजान क्या था हुजूर का रमजान वही था जो पूरा साल था दावत तालीम जिक्र इबादत खिदमत अल्लाह के रास्ते में बदर गए फत मक्का गए महीना हिदायत का है दावत से हिदायत आती है वो निकला हुआ है मेरे दोस्तों सारे हिदायत के असबाब मौजूद है थोड़ी मेहनत करोगे दाई बन जाएगा म रमजान के महीने में जिस अमल के आदी बनेंगे मौत तक उसको तौफीक होती बैतुल्लाह में एक नमाज लाख का नहीं है रमजान में 70 लाख का य अल्लाह के रास्ते में आप निकलते हैं एक नमाज पूरे यकीन के साथ 49 करोड़ नमाज का सवाब है 4 करोड़ रोजों का सवाब है म जोर में सुना तमन्ना थ मलाना यफ साहब की रमजान शव्वाल चार महीने लगा हमारे साथ इशा के बाद भी सुबह भी बात करेंगे पूरी बा चंद बातें दिल तो चाहता है लेकिन भाई बड़ी बुनियादी बात है आज के बाद चार अलों को इस तरह करना जैसे मौलाना यफ साब ने गैब का यकीन गालिब आ जाए तालीम में गैब का इल्म गालिब आ जाए जिक्र में गैब का ध्यान इन तीनों चीजों के बाद नमाज ठीक हो गई यह नमाज गैबी खजानो के दरवाजे खुलवाए फिर मखलूक को देगा चार अलों को इस तरह करने को कह रहे हैं सिर्फ बातें करने का नाम नहीं अब देखो ये चीज आपने अगर कर लिया तो आप जरूर महसूस करेंगे रोजाना वक्त अब तो मूड में देते हैं मूड में देने का काम नहीं है कभी मगरिब में आ गए कभी इशा में कभी टेलीफोन से कहते मेरी तरतीब है भाई रोजाना अगर हुजूर की तरतीब प गुजारना है सुबह से शाम तक इस गम में रहे और ये ढाई घंटे आठ घंटे निकाल कर इसको अमल इसको लाए और इस तरह करेंगे और हर एक में ये चीज पैदा करने की कोशिश करेंगे तब तो आपका दिल चाहेगा रोजना वक्त देने को फिर तो कल बोलोगे नमाज पढ़ना क्या जरूरी है नहीं नहीं नहीं चार अमल को किया तो आपकी जिंदगी मेल खा गई हुजूर की जिंदगी से और यह हिदायत के जरिया सिद्दीक अकबर को हिदायत मिली दावत से तालीम से उमर फारूक को जिक्र इबादत से हिंदा को हिदायत मिली हुजूर के अखलाक से जैना वलीद अबू सुफियान र मि चारों अमल आमाल हिदायत है जल्दबाजी ना कीजिए हिदायत के उतरने का वक्त होता है इतनी बात राज समझ ले सिद्दीक अकबर को मारा है रला को चेहरा गरम व समझ गए अब हियत आने वाली हैरी अमानत है त आने वाली है हमको नहीं है मां को लेकर आए यारी वादा अल्ला उनके लिए दुआ भी कर द उनको दावत वादा मुसलमान सारा अबने दावत माने गाली बकी व रोने लगे यारी वादा गाली दे दावत रसूलल्लाह मैं दुआ सुन के गया वालिदा नहा रही थी अंदर से कहा मकान है ठहर जा और निकलते ही कहने लगी अशद अल्ला इला इला राज समझिए कुर्बानी वुजूद में आएगी उससे हिदायत का निजाम चलता है आज असर का बयान सुन रहा था मैं हत उमर फारूक को तालीम से हिदायत नहीं मिली तालीम के अंदर बहन ने थप्पड़ जो खाए वो कुर्बानी सुनना गौर से वो कुर्बानी की सता अल्लाह को वहां पहुंच गई जहां अल्लाह चाहते हैं तो हत उमर का दिल नरम हुआ और हिदायत उतरी और कुरान सुनते ही कलमा पढ़ तो भाई तालीम जो घर में जाकर भाई किताब लाओ भाई सालन लाओ इसके दरमियान तालीम का नाम तालीम लोगों को सुना दिया हमारे तालीम भाई ये नबूवत का काम है ये हजरत मोहम्मद काम है मोहमद सर रला फरमाते हैं क्या तमाम अंबिया ने हुजूर तमाम सहाबा ने किसी बेकार काम के लिए कुर्बानिया द शुगर करो अल्ला ने इसम लगा दिया हां फिरते रते रो च अब इसकी कदर इसम हैराना थ अंबिया की शया शुकर मेहनत को बढ़ना जब उनसे कहा आपको तो अल्ला ने माफ कर दिया आप क्या कर रहेम फरमा क्या शुक्र गुजार बंदा ना बन मैं पूरे जोड़ का खुलासा ईमान में कुत कैसे आया हम मत का एहतमाम करें तस्त का एहतमाम करें दुआए करें जो हुजूर की जिंदगी थी और मेरे दोस्तों अपने अखलाक को बुलंद करें नरम बात करें हां बाकायदा डॉक्टर सलीम का मैंने जुमला सुना वो नरम बात करते हैं क्या करते हैं व जो ऐसी कारगुजारी आई दिल ठंडा हो गया बेशक लोग तो कहते काम कमजोर है लेकिन हमें भाई बहुत ईमान ताजा हुआ तलबा में बेहतरीन काम मदरसों में अजीब काम ईमान और ऐसी समझ एक ने कह दिया या एक बुजुर्ग ने मेंबर में कहा भाई तलबा असर से श स्कूल वाले कॉलेज वाले असर से नहीं देंगे असर से मगरिब या मगरिब से श पढ़ाई में भी एक नंबर हो और और दावत में भी एक नंबर हो क्या बात है एक अगर हम और मौलाना की दुआ में पहुंच जाते तो चीख निकल जाती रो रो कर सबके लिए दुआ मांग आपसे भी दरखास्त है पहले आदाब बताए अल्लाह की तारीफ हुजूर पर दरूद उसके बाद दरूद अपने लिए सबके लिए भाई उम्मत की माफी करा दो आप लोगों की दुआएं कबूल होती है अल्लाह के रास्ते में हर वक्त अंबिया कराम की मेरे तर मेरे दोस्तों उम्मत के लिए माफ अल्लाह उम्मत को माफ कर अल्लाह रहम फरमा दे अच्छा अजीब बात सुनी हुजूर उठ के गए तशरीफ ले गए सलम अबू हुरैरा पीछे वो सजदे में गए व समझेगा इंतकाल हो गया तो रोने लगे क्या बात है कहा मैं समझा कि आपका कहने लगे मैं शुक्र अदा कर रहा था कि मेरी उम्मत पर अल्लाह ने एक बहुत बड़ा फजल किया है एक मर्तबा दरूद शरीफ पढ़ने पर 10 रहमत उतर हुजूर शुकराने के तौर पर सजदा कर रहे हैं और हमको मेरे दोस्तों दरूद शरीफ की तौफीक नहीं बस इसलिए मेरे दोस्तों अगर तो आप चाहते हैं दीन हमारे अंदर बच्चों में नस्लों में मोहल्लों में पूरा आलम में हो तो सबको दाई बनाने वाला बनाना होगा और अपनी जात से मेहरबानी करके आपके तीन चेले अपने पास रखिए साल अपने यह बताओ रोजाना रोजाना दावत देने के लिए कौन तैयार है और अपनी मस्जिद में खुदा के लिए तौबा करें रोजाना वक्त देंगे हिम्मत के साथ तय करो अभी इस मजलिस में कि अल्लाह ये हमसे सबसे बड़ी गलती दावत भी देंगे तालीम भी जिक्र इबादत भी खिदमत जान चली जाए कुछ हो जाए मैं अल्लाह इन अलो को नहीं छोडूंगा इसके लिए आदत बनाने के लिए खुदा के रास्ते में आप लगाते हैं हाजी साहब फरमाया इतना अमल करो कि तुम आदी बन जाओ तुम्हें इसके बगैर चैन ना आए और तुम अपने मकाम प भी करो इसके लिए अगर तो बात समझ में आई देखो मरना है कुछ पता नहीं देखो पिछली मर्तबा मैं आया था कुछ चारपाई वो बुजुर्ग बैठे थे आज मैंने देखा वो चारपाई खाली कल हमारा नंबर है सबके नंबर सिरे लगे हु इसलिए मेरे दोस्तों आखरत बनाना असल है कोई काम हमें नहीं आएगा ये आमाल कर लेंगे कयामत तक नेकी पहुंचेगी अब बताओ कौन-कौन तैयार है अगर तो दिल में आया कि काम हक है तो हिम्मत करके खड़ा होना अल्लाह के भरोसे पर कि मैं नगद चार महीने जाने के लिए तैयार हूं जो तैयार अपनी जगह पे अल्लाह को दिखाने के लिए सिर्फ खड़े हो सब पहले खड़े हो बाद में नाम लिखना भाई खड़े हो जाए अपनी जगह खड़े हो जाए जो तैयार है दिल चाहता है कि मेरी आखिरत बन जाए मेरी समझ में अल्लाह ने डाला है ऐ अल्लाह तू मुझे कबूल कर ले देखना है नगद जाने वालों से मौलाना यूसुफ साहब फरमाते थे यकीन इनका बनेगा अमल प इकामत मिलेगी जो उधार जाएंगे उनके अमल बनेंगे वापस अमल छूट जाए ये भी फरमाया म तुम्हारे इंतजा जिलों से बादल के नक्शे नहीं टूटेंगे तुम अपनी तरतीब में जि की तर बना लो अल्ला ती आलम को बदले अल्ला की कसम इस काम से तालुक पूरा आलम की तीब बदलेगी तुम किसी की फिक ना करो य जितने खड़े है एमाम के साथ और अल्ला का शुक्र अदा करते हु तकी की जग पर चले ला कोने क h

Shab e Jumma Bayan Karachi | Molana Farooq Makki sahib | Darsequran Live

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